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पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच क्या था मतभेद

1947 में देश को मिली थी आजादी जिसके परिणाम स्वरुप भारत के दो टुकड़े हुए और जन्म हुआ पकिस्तान का | उन दिनों पूर्वी एवं पश्चिमी पकिस्तान के बीच मतभेद बढ़ता ही चला जा रहा था| संख्या में पूर्वी पाकिस्तानी अधिक थे लेकिन इसके बावजूद पश्चिमी पाकिस्तानियों से लड़ने की क्षमता उनमें कम थी | यह वक्त था 1971 का जब भारत की प्रधानमंत्री थी श्री मती इंदिरा गाँधी | उस वक्त हमारे देश के सैन्य बल ने पूर्वी पाकिस्तानियों का सहयोग किया और उन्हें स्वतन्त्रता दिलाई यह दिन था 16 दिसम्बर 1971 | पूर्वी पाकिस्तान ने अलग होकर अपने राष्ट्र को बंगलादेश बनाया | भारत ने बांग्लादेश का भरपूर सहयोग दिया जिसके फलस्वरूप 1 लाख पाकिस्तानी सैनिको ने अपने घुटने टेक दिये |

पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच क्या था मतभेद :

1947 में पकिस्तान का जन्म हुआ लेकिन शांति का अभी भी कोई नमो निशान ना था | पूर्वी पाकिस्तानियों की संख्या अधिक होते हुए भी उन पर पश्चिमी पाकिस्तानियो का आतंक था वो खुद को उच्च वर्ग का मानते थे यह मतभेद सभी राष्ट्रों को दिखाई दे रहा था जिसका पूर्वी पाकिस्तान से विरोध किया 1952 में यह विरोध साफ़ दिखाई देने लगा | 1960 में शेख मुजीबुर्रहमान के नेतृत्व में पूर्वी पाकिस्तान ने अपनी आवाज़ बुलंद की | 1966 में पाकिस्तानी राष्ट्रपति यह्मा खान ने शेख मुजीबुर्रहमान को जेल भेज दिया | लेकिन लड़ाई चलती रही 1970 में पूर्वी पाकिस्तान में चक्रवात का कहर बरपा जिसमे लाखों की मौत हो गई लेकिन केंद्र ने इन्हें सहोयग नहीं दिया जिसका परिणाम यह था कि आम चुनाव के नतीजे ने शेख मुजीबुर्रहमान को जिताया लेकिन राष्ट्रपति यह्मा खान इस सरकार को बनने  नहीं दिया जिससे विद्रोह और बढ़ गया |

आखिरकार कई पूर्वी पाकिस्तानियों को भारत की क्षरण लेनी पड़ी |1971 में भारत ने भरपूर सहायता दी जिससे पश्चिमी पाकिस्तान को गुस्सा आया और उसने 3 दिसम्बर 1971 को भारत पर हमला कर दिया जिसका डटकर मुकाबला किया गया और 16 दिसम्बर 1971 को पाकिस्तानी लेफ्टिनेंट ए. ए. के. नियाजी ने भारत के सामने सरेंडर किया | 11 जनवरी 1971 को बंगलादेश के स्वतंत्रता के कागजो पर हस्ताक्षर हुए और बांग्लादेश पाकिस्तान से अलग हुआ |

क्यूँ दिया था भारत ने बांग्लादेश का साथ ?

इस सहयोग के पीछे थे 4 अहम मुद्दे |

  1. राष्ट्रवाद
  2. समाजवाद
  3. धर्मनिरपेक्षता
  4. लोक तंत्र

पूर्वी पाकिस्तान इन चार मुद्दों के लिए लड़ रहा था और यही चार मुद्दे भारत का आधार हैं इसलिए भारत ने इनका सहयोग दिया | यह युध्द इंदिरा गाँधी के समय में जनरल मानेकशो के नेतृत्व में लड़ा गया जिसने पाकिस्तानी सैन्यबल को तोड़ दिया |ऐसा नहीं था कि पाकिस्तान कमजोर था उसके पास हर तरह के हथियार मौजूद थे | यह युद्ध जल-थल-वायु तीनो तरफ से जारी था जिसमे भारत के पास था नौ जवानो से भरा सैन्य दल, जिसने पाकिस्तान को तीनो तरफ से दबोच रखा था | उस वक्त भारत को एक ही भय था कि कहीं पाक को अमिरीकी मदद ना मिल जाए लेकिन अमेरिका चुप रहा क्यूंकि भारत के पास था सोवियत रूस का सहयोग | इस तरह देश के जवानो के आगे 1 लाख पाकिस्तानी सैनिको ने 16 दिसम्बर 1971 को समर्पण किया जिसे बंगलादेश विजयी दिवस (Victory Day) के रूप में मनाता हैं |इस तरह भारत का एक ही शत्रु देश बचा जो था पाकिस्तान |हमे अपने सैन्य दल पर पूरा विश्वास हैं हम आतंकवाद को ख़त्म कर देंगे |

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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