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अन्ना हजारे का जीवन परिचय | Anna Hazare biography in hindi

अन्ना हजारे का जीवन परिचय | Anna Hazare biography in hindi

अन्ना हजारे एक भारतीय सामाजिक कार्यकर्त्ता है, जो ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के साथ ही सरकारी कार्यों को पारदर्शी बनाने और जनता की सेवा करने, भ्रष्टाचार की जाँच करने तथा सजा देने के लिए आन्दोलन के नेतृत्व कर्ता के रूप में जाने जाते है. जमीनी स्तर पर आंदोलन को व्यवस्थित करने और प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने गाँधी जी की अहिंसात्मक नीति का अनुपालन करते हुए कई बार भूख हड़ताल भी की है. उन्होंने अहमद नगर जिले के रालेगण सिद्धि नामक गांव की संरचना और विकास में योगदान देते हुए इस गांव को दूसरों के लिए एक मॉडल के रूप में स्थापित करने का प्रयास किया है. अन्ना हजारे को 1992 में भारत सरकार द्वारा भारत के राष्ट्रीय पुरस्कार पद्मविभूषण से सम्मानित किया गया था. इसके ऐसे ही चरित्र का व्याख्यान इनकी जीवनी के जरिये यहाँ दर्शाया गया है.      

अन्ना हजारे का जन्म और व्यक्तिगत जीवन का परिचय (Anna Hazare biography in hindi)

किसान बाबुराव हजारे का जन्म 15 जून 1937 को महाराष्ट्र के अहमद नगर जिले के निकट भिंगार में एक मराठी किसान परिवार में हुआ था. व्यक्तिगत जीवन में अन्ना हजारे अविवाहित है, वे सन 1975 से रालेगण सिद्धि के संत यादवबाबा मंदिर के एक छोटे से कमरे में रहते है. 16 अप्रैल 2011 में उन्होंने अपनी सम्पति का ब्यौरा देते हुए बताया कि उनके पास बैंक में जमा राशी 67,183 रुपये है, और साथ ही रालेगण सिद्धि में उनकी पुस्तैनी जमीन 0.07 हेक्टेयर है जिसका उपयोग उनके भाइयों के द्वारा किया जाता है. उन्होंने गांव के लिए जमीन के दो टुकड़ों का भी दान दिया.

Anna Hazare

अन्ना हजारे का पारिवारिक जीवन (Anna Hazare Family)

अन्ना हजारे के परिवार में उनके माता- पिता के अलावा उनके छह भाई बहन भी थे, अन्ना उनमे सबसे बड़े है. अन्ना के पिता का नाम बाबुराव हजारे था वो एक आयुर्वेद आश्रम फार्मेसी में मजदूर का काम करते थे. उनकी माता जी का नाम लक्ष्मीबाई हजारे था वो एक गृहणी थी. अन्ना हजारे की दो बहन और 4 भाई थे.

अन्ना हजारे की शिक्षा (Anna Hazare Education)

ग़रीबी की वजह से उनके भाई बहन कभी स्कूल पढने के लिए नहीं जा पाए. आर्थिक संघर्ष के दौरान उनका परिवार अपने पैतृक गांव रालेगण सिद्धि में एक छोटी सी कृषि भूमि पर खेती कर अपना जीवन व्यतीत करने लगा. एक रिश्तेदार ने मदद के लिए आगे बढ़ते हुए उनकी शिक्षा का बोझ उठाया और वह पढने के लिए मुंबई आ गए, लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने अपनी आर्थिक असमर्थता जतायी. जिस वजह से अन्ना की पढाई 7 वीं कक्षा तक ही हो पाई. बाद में अन्ना ने मुम्बई के दादर रेलवे स्टेशन पर फूलों की बिक्री का काम करना शुरू कर दिया और अंतत: वो शहर में दो फूलों की दूकान खोलने में कामयाब हो गए. वह एक ऐसे सतर्कता समूह में शामिल हो गए जिनका काम जमींदारों द्वारा गरीबों को डराने से रोकना उन्हें ठगने से बचना इत्यादि था.           

अन्ना हजारे का करियर (Anna Hazare Career)

अन्ना के करियर और उनके द्वारा किये गए सामाजिक कार्य का वर्णन निम्नलिखित रूप में किया गया है –

  • सैन्य सेवा :

अन्ना हजारे ने अपने करियर की शुरुआत 1960 में सेना के एक ट्रक ड्राइवर में रूप में काम कर की थी. बाद में एक सैनिक के रूप में इसे प्रमाणित किया गया था. सेना में अपने 15 वर्ष के करियर (1960-1975) के दौरान अन्ना हजारे को पंजाब में 1965 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के दौरान खेमकरण सेक्टर में सीमा पर तैनात किया गया था, 1971 में नागालैंड, मुम्बई और 1974 में जम्मू सहित कई स्थानों पर तैनात किया गया था. इंडो पाक युद्ध के दौरान गाड़ी चलाते हुए एक सड़क दुर्घटना में हजारे बाल – बाल बच गए थे, जिसको वह एक भगवान के चमत्कार के रूप में बताते है और कहते है कि यह मेरे लिए जन सेवा करने का एक संकेत था.

  • रालेगण सिद्धि के विकास में योगदान :

सेना से अवकाश प्राप्त होने के बाद अन्ना अपने गांव रालेगण सिद्धि वापस आये जहां उन्होंने देखा कि गरीबी, आभाव व्याप्त था, पर्यावर्णीनीय गिरावट और चट्टानी जमीन के कारण खेती करनी बेहद कठिन थी. गांव की अर्थव्यवस्था अवैध उत्पादन और शराब की बिक्री पर निर्भर हो गयी थी, शिक्षा और रोजगार के अवसर नहीं थे. अन्ना ने गांव को पुनर्स्थापित करने के लिए सबसे श्रमदान की अपील की बाद में युवाओं ने मिलकर तरुण मंडल नामक संगठन बनाया और सामाजिक कार्यों में जुट गए. गांव के युवा समूह के संगठन ने गांव में सिगरेट, तम्बाकू, शराब और बीडी की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया और इसका कड़ाई से पालन किया गया अब रालेगण में ये सब नहीं बेचीं जाती है. इसके अलावा रालेगण गांव में इनके द्वारा किये गये कार्य इस प्रकार है :

  • अनाज बैंक : 1980 में हजारे ने सूखे या फ़सल बर्बाद होने की स्थिति में किसानों को खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के उदेश्य से मंदिर में अनाज बैंक की शुरुआत की. जिस वजह से अनाज के संकट से निपटा जा सकता था.
  • वाटरशेड विकास कार्यक्रम : रालेगण तलहटी में स्थित है इसलिए अन्ना ने पानी को रोकने के लिए वाटरशेड तटबंध का निर्माण कार्य ग्रामीणों को समझा कर उनके साथ मिलकर सिंचाई में सुधार करने के लिए किया, जिस वजह से पानी की समस्या ख़त्म हो गयी साथ ही जिन फसलों जैसे की गन्ने की खेती में पानी की जरुरत ज्यादा होती है ऐसी फसलों की खेती को प्रतिबंधित कर दिया गया, और दालों, तिलहन इत्यादि जिसमे कम पानी की आवश्यकता होती वैसी फसलों की खेती को प्रोत्साहित किया गया. किसानों को इसका खूब फ़ायदा हुआ उनकी आमदनी बढ़ गयी. जब अन्ना 1975 में रालेगण आये थे, तब केवल 70 एकड़ जमीन पर ही सिंचाई कार्य होते थे, लेकिन अब यह कार्य 2500 एकड़ तक बढ़ गया है.
  • शिक्षा : रालेगण में एक प्राथमिक स्कूल था. उच्च शिक्षा हासिल करने के लिए लड़कों को शिरूर और पारनेर के पास के शहरों में ले जाया जाता था, लेकिन लड़कियों की शिक्षा प्राथमिक स्कूल तक ही सीमित कर दी जाती थी. अन्ना ने शिक्षा के स्तर को बढ़ाने के लिए 1979 में एक प्री- स्कूल और हाई स्कूल की शुरुआत की.
  • अस्पर्श्यता को दूर करना : अन्ना के नैतिक नेतृत्त्व से प्रेरित होकर रालेगण के ग्रामीणों ने जाति के भेदभाव को दूर करने का प्रयास करते हुए, उच्च जाति के ग्रामीणों ने दलित जाति के घरों के निर्माण कार्य में श्रम योगदान देकर उनके कर्ज को चुकाने में मदद की.
  • ग्राम सभा : ग्रामीण विकास में गाँधीवादी विचार ग्राम सभा भारत के गांवों में सामूहिक निर्णय लेने के लिए एक महत्वपूर्ण लोकतांत्रिक संस्थान के रूप में जाना जाता है. अन्ना ने ग्राम सभा में संशोधन के लिए 1998 और 2006 के बीच अभियान चलाया जिसे राज्य सरकार को दबाव की वजह से मानना पड़ा, जिसके तहत गांव में विकास कार्यों पर व्यय के लिए ग्राम सभा की स्वीकृति प्राप्त करना अनिवार्य हो गया.

अन्ना हजारे के अन्य सामाजिक कार्य (Anna Hazare Other Social Work)

अन्ना के सामाजिक कार्यों में सक्रियतावाद को निम्नवत वर्णित किया जा सकता है –

  • महाराष्ट्र में भ्रष्टाचार विरोधी विरोध प्रदर्शन :

1991 में हजारे ने भ्रष्टाचार के विरुद्ध जन आंदोलन की शुरुआत की. उन्होंने इसी वर्ष 40 वन अधिकारियों और लकड़ी के व्यापारियों के बीच मिलीभगत के खिलाफ़ विरोध किया, जिसके परिणाम स्वरुप इन अधिकारियों का स्थान्तरण और निलंबन हुआ. 4 नवम्बर 1997 को घोलप ने भ्रष्टाचार के आरोपों के लिए अन्ना के खिलाफ़ मानहानि का मुकदमा दायर किया. उन्हें अप्रैल 1998 में गिरफ्तार कर लिया गया. बचाव के लिए साक्ष्य न होने की स्थिति में मुम्बई के मेट्रोपोलिटन कोर्ट द्वारा तीन महीने की सजा दी गयी, जिसके फलस्वरूप उन्हें यरवदा जेल में कैद रहना पड़ा. बाद में सार्वजनिक विरोध के कारण सरकार को रिहाई का आदेश देना पड़ा था. उसके बाद घोलप ने 1999 में मंत्रीमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया था. मई 1999 में हजारे ने बिजली घर की खरीद में भ्रष्टाचार का विरोध किया. 2003 में कांग्रेस-एनसीपी सरकार के चार रांकपा के मंत्रियों के खिलाफ़ अन्ना ने आरोप लगाये. उसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे ने एक उप आयोग का गठन किया, जिसमे न्यायमूर्ति पी बी सावंत की अध्यक्षता में उनके आरोपों की जाँच हुई, जिसकी रिपोर्ट में नवाब मलिक, सुरदेदा जैन और पद्म सिंह पाटिल को दोषी पाया गया, इसके बाद जैन और मलिक ने मंत्रीमंडल से इस्तीफ़ा दे दिया. इस तरह अन्ना भ्रष्टाचार के विरोध में हमेशा लड़ते रहे.

  • सूचना का अधिकार आंदोलन :

2000 के दशक में अन्ना ने महाराष्ट्र राज्य में एक आन्दोलन का नेतृत्व किया जिस वजह से राज्य सरकार ने एक संशोधित अधिनियम सूचना का अधिकार लागू किया. 2005 में भारत के राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद केंद्र सरकार द्वारा अधिनियमित सूचना के अधिकार अधिनियम को दस्तावेज के रूप में मान लिया गया. इस अधिनियम में संशोधन के खिलाफ़ अन्ना ने अनशन भी किया जिसको सरकार को मानना पड़ा.

  • लोकपाल बिल आंदोलन :

2011 में हजारे ने भारतीय संसद में पारित भ्रष्टाचार विरोधी लोकपाल विधेयक के लिए सत्याग्रह आन्दोलन में भाग लिया. जन लोकपाल विधेयक को सर्वोच्च न्यायलय के पूर्व न्यायमूर्ति एन संतोष हेगड़े और कर्नाटक के लोकायुक्त प्रशांत भूषण और एक सामाजिक कार्यकर्त्ता अरविन्द केजरीवाल द्वारा तैयार किया गया था. 5 अप्रैल 2011 को अन्ना ने सरकार से इस बिल को जारी करने की मांग के साथ दिल्ली के जंतर मंतर पर अनिश्चित भूख हड़ताल को शुरू कर दिया. तत्कालिक प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उनकी मांग को ख़ारिज कर दिया था.

इस आन्दोलन को कई लोगों ने समर्थन दिया जैसे मेघा पाटेकर, अरविंद केजरीवाल, किरण बेदी, जयप्रकाश नारायण, कपिल देव, श्री श्री रवि शंकर, स्वामी रामदेव सहित मीडिया का भी काफ़ी समर्थन मिला. यह आन्दोलन बैंगलोर, मुम्बई, चेन्नई, अहमदाबाद, गुवाहाटी, शिलांग के साथ ही अन्य शहरों में भी फ़ैल गया, जिसके फलस्वरूप 8 अप्रैल 2011 को सरकार ने आन्दोलन की मांग स्वीकार कर ली. और 9 अप्रैल को उन्होंने एक अधिसूचना जारी की जिसमे कहा गया कि ‘संयुक्त मसौदा समिति में भारत सरकार के पांच नामांकित मंत्री प्रणव मुख़र्जी- केन्द्रीय वित्त मंत्री, पी चिदम्बरम -केन्द्रीय गृह मंत्री, एम वीरप्पा मोइली- केन्द्रीय कानून मंत्री और न्यायमूर्ति, कपिल सिब्बल- केन्द्रीय मानव संसाधन और विकास मंत्री और सलमान खुर्शीद- केन्द्रीय जल संसाधन मंत्री और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री ये सभी उम्मीदवार होंगे और पांच सिविल सोसाइटी अर्थात गैर राजनीतिक नाम जिनमे अन्ना हजारे, एन संतोष हेंगडे, वरिष्ठ वकील शांति भूषण और अरविंद केजरीवाल शामिल थे.

उसके बाद 9 अप्रैल को अन्ना ने 98 घंटे की भूख हड़ताल को समाप्त कर दिया उसके बाद बिल पास करने के लिए 15 अगस्त 2011 की समय सीमा तय की गयी. अन्ना ने कहा कि अगर बिल पास नहीं होता है तो वो जन राष्ट्रव्यापी आन्दोलन की मांग करेंगे. उन्होंने अपने आन्दोलन को स्वतंत्रता के लिए दूसरा संघर्ष कहा और लडाई जारी रखने की बात कही और फिर से आन्दोलन करने की धमकी दी.

28 जुलाई 2011 को केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने लोकपाल विधेयक का मसौदा अनुमोदित किया जिसमे प्रधानमंत्री, न्यायपालिका और निचले नौकरशाही को लोकपाल के दायरे से बाहर रखा, जिसका विरोध करते हुए अन्ना ने 16 अगस्त 2011 को जंतर मंतर पर एक अनिश्चित उपवास शुरू करने के अपने फ़ैसले की घोषणा करते हुए कहा कि हमे सरकार पर कोई भरोसा नहीं है. अगर यह सरकार भ्रष्टाचार से सचमुच लड़ने के लिए गंभीर है तो यह लोकपाल के तहत प्रधानमंत्री, सरकारी कर्मचारी और सीबीआई को क्यों नहीं ला रही है. अन्ना को अनशन से रोकने के लिए पहले ही दिल्ली पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया जिसके बाद पुरे देश में उनके समर्थकों द्वारा विरोध प्रदर्शन की खबरे आई, इसके बाद दिल्ली पुलिस को उन्हें बिना किसी शर्त के छोड़ना पड़ा.

फ़रवरी वर्ष 2015 में अन्ना ने भूमि अधिग्रहण पुनर्वास अधिनियम 2013 पर अध्यादेश के खिलाफ़ दिल्ली में जंतर मंतर पर दो दिनों का विरोध किया.

  • चुनावी सुधार आन्दोलन :

अन्ना हजारे ने भारतीय चुनाव के दौरान इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन में नोटा के विकल्प की मांग की, जिसका समर्थन भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त शहाबुद्दीन याकूब कुरैशी ने चुनाव में सुधार के लिए किया.

इस तरह अन्ना ने समाज में व्याप्त भ्रष्टाचार को मिटाने के लिए कई तरह के सामाजिक आन्दोलन किये जिसमें उन्हें कुछ सफ़लता भी प्राप्त हुई.                                                                                                 

अन्ना हजारे की पुस्तकें और उन पर बनी फिल्म (Anna Hazare Books and Films)

अन्ना हजारे ने कई किताबे भी लिखी है जिनके नाम है- मेरा गांव – मेरा पवित्र देश, रालेगांव सिद्धि: एक वैध परिवर्तन, वाट ही संघर्षची यह पुस्तक मराठी भाषा में लिखी गयी है. इसके अलावा आदर्श गांव योजना: एक पीपुल्स कार्यक्रम में सरकारी भागीदारी : महाराष्ट्र सरकार की आदर्श ग्राम परियोजना आदि. अन्ना हजारे के जीवन संघर्षों पर आधारित फ़िल्म भी बनी है जिसका नाम है ‘मै अन्ना बनना चाहता हूँ’ इस फ़िल्म में अरुण नलावडे ने अन्ना हजारे की भूमिका निभाई है. यह फ़िल्म मराठी भाषा में अन्ना हजारे के काम पर आधारित बनी है. 2016 में अन्ना के जीवन पर आधारित फ़िल्म हिंदी भाषा में लेखक और निर्देशक शशांक उदापुरकर द्वारा बनाई गयी जो अन्ना हजारे की उपलब्धियों को दर्शाती है.

अन्ना हजारे के अवार्ड (Anna Hazare Award)

अन्ना हजारे ने कई राष्ट्रीय पुरस्कार, सम्मान और अंतराष्ट्रीय मान्यता भी प्राप्त की है जिनका वर्णन निम्नवत है –

साल अवार्ड
1986 इस वर्ष अन्ना को भारत सरकार द्वारा इंदिरा प्रियदर्शिनी वृक्षमित्र अवार्ड से सम्मानित किया गया था.

 

1989 महाराष्ट्र सरकार द्वारा कृषि भूषण अवार्ड
1990 भारत सरकार के द्वारा पदम् श्री अवार्ड से सम्मानित किया गया.
1996 शिरोमणि अवार्ड
1997 महावीर अवार्ड
1998  केयर राहत एजेंसी द्वारा केयर अंतराष्ट्रीय अवार्ड
1999 भारत सरकार के द्वारा सामाजिक योगदानकर्ता अवार्ड
2003  अंतराष्ट्रीय पारदर्शिता अवार्ड
2005 गांधीग्राम ग्रामीण यूनिवर्सिटी द्वारा डॉक्टरेट की उपाधि
2008 वर्ल्ड बैंक द्वारा जीत गिल मेमोरियल अवार्ड
2011  एनडीटीवी द्वारा अरविन्द केजरीवाल के साथ एनडीटीवी साल का भारतीय अवार्ड से सम्मानित किया गया.
2013  ब्रिटिश कोलंबिया यूनिवर्सिटी के क़ानून संकाय द्वारा अल्लार्ड प्राइज फॉर इंटरनेशनल इंटीग्रिटी अवार्ड

अन्ना हजारे का विवाद (Anna Hazare Controversy)

अन्ना हजारे को भी कई विवादों का सामना करना पड़ा है जिनमे से कुछ का वर्णन निम्नलिखित है-

  • राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के साथ उनके नाम का जुड़ना : भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने अन्ना पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के एजेट होने का आरोप लगाते हुए कहा था, कि 2011 में जो भ्रष्टाचार विरोधी आन्दोलन  अभियान भारत में उन्होंने चलाये उस पुरे अभियान की योजना आरएसएस द्वारा की गयी थी, जिसमे योजना के अ बाबा रामदेव थे और ब अन्ना हजारे थे इस तरह के आंदोलन को करने का उनका मूल उदेश्य राष्ट्रीय सुरक्षा को परेशान करना था. इसके अलावा सिंह ने अन्ना पर आरएसएस नेता निनाजी देशमुख के साथ लिंक होने का आरोप भी लगाया, साथ ही भारत के ओपन मैगजीन ने भी अन्ना के लिए अपने सम्पादकीय में राजनितिक दलों के लिए एक प्रॉक्सी के रूप में कार्य करने का आरोप लगाया. हालाँकि इस तरह के किसी भी संगठन या नेता से लिंक होने के आरोप को अन्ना ने इनकार किया है. 
  • नरेन्द्र मोदी और नीतीश कुमार पर विचार : अप्रैल 2011 के एक संवाददाता सम्मेलन में अन्ना ने गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की तारीफ़ करते हुए कहा था कि ग्रामीण विकास पर अन्य राज्य के मुख्यमंत्रीयों को भी इनसे शिक्षा लेनी चाहिए और उनका अनुकरण करना चाहिए. लेकिन मई में अपने गुजरात दौरे के दौरान अन्ना ने अपने विचार बदल दिए और बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार के लिए मोदी की आलोचना की. उन्होंने मोदी से लोकायुक्त की नियुक्ति करने का आग्रह किया साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मीडिया ने वाइब्रेंट अर्थात व्यावसायिक गुजरात की गलत छवि पेश की थी. इसके बाद उन्होंने यह घोषणा की कि मोदी प्रधानमंत्री पद के लिए उपयुक्त उम्मीदवार नहीं है.
  • भ्रष्टाचार के आरोप : सितम्बर 2003 में न्यायमूर्ति पी.बी. सावंत के तहत महाराष्ट्र राज्य की सरकार ने एक जाँच आयोग की स्थापना की, जिसमे कई मंत्रियों सहित अन्ना हजारे की अध्यक्षता वाली ‘हिन्द स्वराज ट्रस्ट’ पर भी भ्रष्टाचार के आरोप लगे थे. आयोग ने 22 फ़रवरी, 2005 को अपनी जाँच रिपोर्ट सौंपी जिसमे ट्रस्ट पर भ्रष्ट रूप से अन्ना के जन्मदिन समारोह के लिए पैसे लेने के आरोप लगे थे.
  • दलित विरोधी और लोकतंत्र विरोधी होने का आरोप : रामचंद्र गुहा द्वारा कोलकाता टेलीग्राफ में लिखे एक लेख में कहा गया कि पर्यावरण पत्रकार मुकुल शर्मा ने दावा किया है कि अन्ना ने शाकाहारी आहार अपनाने के लिए रालेगण सिद्धि के दलित परिवारों को मजबूर किया. साथ ही यह भी पाया गया है कि पिछले दो दशकों से गांव में कोई पंचायत चुनाव नहीं हुआ है और हजारे के निर्देशों पर राज्य और राष्ट्रीय चुनाव के दौरान भी कोई चुनाव प्रचार नहीं किया गया था.
  • मुस्लिम विरोधी होने का आरोप : 22 अगस्त 2011 को लेखक-अभिनेता अरुंधती रॉय ने अन्ना हजारे को गैर सेक्युलर होने का आरोप एक समाचार पत्र में लगाया था, हजारे पर जामा मस्जिद के मुसलमान बुखारी द्वारा भी मुसलमानों के खिलाफ़ काम करने का आरोप लगाया गया था.
  • हजारे की हत्या की साजिश ; अन्ना ने महाराष्ट्र के सहकारी कारखाने में भ्रष्टाचार का पर्दाफाश किया था, जिसमे संसद सदस्य डॉ. पद्म सिंह बाजीराव पाटिल के साथ ही कई बड़े नेता भी शामिल थे. उसके बाद इनके द्वारा अन्ना को मारने के लिए सुपारी दी गयी थी हालाँकि बाद में कातिल पकड़ा गया था और उसने ही नेताओं के नाम का खुलासा किया था. इसके बाद अन्ना ने पाटिल के खिलाफ अलग से प्राथमिकी दर्ज कराई थी इस पर फ़ैसला अभी भी कोर्ट में लंबित है. उसके बाद से अन्ना को जेड प्लस सुरक्षा प्रदान की गयी.

इस तरह अन्ना पर भी आरोप प्रत्यारोप का दौर चलता रहा है और वो हमेशा विवादों के घेरे में आते रहे है, लेकिन अपने ऊपर लगे आरोपों को उन्होंने इनकार करते हुए इसे हमेशा निराधार बताया है.                              

अन्ना हजारे के चर्चित अनमोल वचन (Anna Hazare Quotes)

  1. सरकार का पैसा जनता का पैसा है इस पैसे का इस्तेमाल जनता के लिए होना चाहिए सरकार लोगों के लिए प्रभावी नीतियाँ बनाये और उन्हें लाभ पहुँचाने की कोशिश करे.
  2. लाखों लोगों ने देश की आज़ादी के लिए अपने जीवन का बलिदान दिया लेकिन कुछ लोगों ने इस बलिदान की गरिमा का मान नहीं रखा है कुछ स्वार्थी लोगों की वजह से हमें सही स्वतंत्रता नहीं मिल पाई है.
  3. सरकार के पास लोकपाल को स्थापित करने की एक प्रभावी इच्छा नहीं है.
  4. लोकपाल बिल की जो मेरी मांग है वो कभी भी नहीं बदलेगी भले ही आप मेरा सिर काट सकते है लेकिन मुझे झुकने के लिए किसी भी तरह से बाध्य नहीं कर सकते है.
  5. जो लोग सिर्फ़ स्वार्थ भाव से स्वयं के लिए जीवित रहते है सिर्फ़ खुद के बारे में सोचते है वो लोग समाज के लिए मृत समान है.
  6. जो लुट पहले मौजूद थी आज़ादी के बाद भी वही लुट, उपद्रव और भ्रष्टाचार समाज में मौजूद है.
  7. मै अपने देश के लोगों से भ्रष्टाचार के विरुद्ध इस क्रांति को जारी रखने की अपील करता हूँ चाहे मै वहाँ रहूँ या ना रहूँ फिर भी इस लडाई को आप जारी रखेंगें और अन्याय का विरोध करेंगें.

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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