ताज़ा खबर
Home / कहानिया / अन्नपूर्णा जयंती कथा महत्व एवम पूजा विधि

अन्नपूर्णा जयंती कथा महत्व एवम पूजा विधि

Annapurna Jayanti Date Katha Mahatva Puja Vidhi In Hindi अन्नपूर्णा जयंती कथा महत्व एवम पूजा विधि को विस्तार से पढ़े एवम जाने कि क्यूँ मनाई जाती हैं Annapurna Jayanti ?

अन्नपूर्णा जयंती (annapurna jayanti) इस दिन माता पार्वती के अन्नपूर्णा रूप की पूजा की जाती हैं | अन्नपूर्णा माता भोजन एवम रसौई की देवी कही जाती हैं | जीवन में अन्न का महत्व भगवान के तुल्य माना जाता हैं | यह अन्न ही जीवन देता हैं हम सभी को इसका आदर करना चाहिये | कहते हैं जिनके घर में अन्न का सम्मान किया जाता हैं, रसौई घर में साफ़ सफाई रखी जाती हैं उनके घर में अन्नपूर्णा देवी का आशीर्वाद रहता हैं | जिन घरो पर अन्नपूर्णा देवी का आशीर्वाद रहता हैं वे घर धन एवम धान्य से परिपूर्ण रहते हैं | विपत्ति के समय भी उनके घर कभी रसौई घर रिक्त नहीं रहता अर्थात ऐसे घर के सदस्य धन की कमी के कारण कभी भूखे नहीं सोते |

Annapurna Jayanti Date Mahatva Katha Puja Vidhi In Hindi

  • Annapurna Jayanti Date 2015

कब मनाई जाती हैं अन्नपूर्णा जयंती ?

माता अन्नपूर्णा का जन्म दिवस को अन्नपूर्णा जयंती के रूप में मनाया जाता हैं | यह दिन मार्गशीर्ष हिंदी मासिक की पूर्णिमा के दिन मनाया जाता हैं | इस दिन दान का महत्व होता हैं |

वर्ष 2015 में यह दिवस 24 दिसम्बर को मनाया जायेगा |

  • Annapurna Jayanti Puja Vidhi

अन्नपूर्णा जयंती पूजा विधि:

मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन अन्नपूर्णा माता की पूजा की जाती हैं इस दिन घर में रसौई घर को धो कर स्वच्छ किया जाता हैं | घर के चूल्हे को धोकर उसकी पूजा की जाती हैं |

घर के रसौई घर को गुलाब जल, गंगा जल से शुद्ध किया जाता हैं |

इस दिन माता गौरी, पार्वती मैया एवम शिव जी की पूजा की जाती हैं |

  • Annapurna Jayanti Mahatva

अन्नपूर्णा देवी पूजा का महत्व एवम उद्देश्य

  • अन्नपूर्णा देवी की पूजा में रसौई घर को साफ़ रखा जाता हैं इससे सभी को यह सन्देश पहुँचता हैं कि भोज्य पदार्थों वाले स्थानों को स्वच्छ रखना चाहिये |
  • इसके कारण लोगो में यह संदेश भी पहुँचता हैं कि अन्न का अपमान अर्थात उसे व्यर्थ फेकना नहीं चाहिये |
  • इस दिन के कारण मनुष्य को अन्न के महत्व का ज्ञान होता हैं जिससे उनमे आदर का भाव आता हैं इसी कारण मनुष्य में अभिमान नहीं आता |

Annapurna Jayanti Katha

अन्नपूर्णा जयंती पौराणिक कथा

पुराणों के अनुसार जब पृथ्वी पर पानी एवम अन्न खत्म होने लगा तब लोगो में हाहाकार मच गया इस त्रासदी के कारण सभी ने ब्रह्मा एवम विष्णु भगवान की आराधना की और अपनी समस्या कही | तब दोनों भगवानो ने शिव जी को योग निन्द्रा से जगाया और सम्पूर्ण समस्या से अवगत कराया | समस्या की गंभीरता को जान इसके निवारण के लिए स्वयं शिव ने पृथ्वी का निरक्षण किया | उस समय माता पार्वती ने अन्नपूर्णा देवी का रूप लिया | इस प्रकार शिव जी ने अन्नपूर्णा देवी से चावल भिक्षा में मांगे और उन्हें भूखे पीढित लोगो के मध्य वितरित किया | इस प्रकार उस दिन से पृथ्वी पर अन्नपूर्णा जयंती का पर्व मनाया जाता हैं |इससे मनुष्य में अन्न के प्रति आदर का भाव जागृत होता हैं और वे अन्न का संरक्षण करने के लिए प्रेरित होते हैं |

इसी प्रकार एक और कथा कही जाती हैं जब भगवान राम माता सीता की खोज में अपनी वानर सेना के लिए घूम रहे थे तब स्वयं माता अन्नपूर्णा ने उन्हें भोजन कराया था और लम्बे समय तक सभी का साथ दिया था |

कहते हैं जब शिव भगवान काशी में मनुष्य को मोक्ष दे रहे थे तब माता पार्वती, अन्नपूर्णा के रूप में जीवित जनों के भोजन की व्यवस्था स्वयम देखती थी |

इस प्रकार कई कारणों ने अन्नपूर्णा जयंती का महत्व मनुष्य के जीवन में बहुत अधिक हैं इससे संरक्षण एवम सम्मान का भाव जागता हैं और मनुष्य अन्न को फ़िज़ूल नहीं फेंकता |

Annapurna Jayanti Date Katha Mahatva Puja Vidhi यह पूजा विधि एवम महत्व आपको कैसा लगा जरुर लिखे |

अन्य पढ़े :

  1. नव दुर्गा पूजा महत्व
  2. गौरी पूजा विधि एवम उद्यापन
  3. लक्ष्मी पूजा विधि
  4. सरस्वती पूजा विधि एवम महत्व
Karnika

Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
Karnika

यह भी देखे

story-sugriva-vali-rama-ramayana2

वानर राज बाली की कहानी | Vanar Raja Bali Story In Hindi

Vanar Raja Bali Vadh Story Hisory In Hindi महाबली बाली, हिन्दू पौराणिक कथा रामायण के एक …

One comment

  1. sanjay chattra bhatnagar

    nice kahani and knowledgeable matterial

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *