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आसाराम बापू जीवन परिचय, जाति,सत्संग,आश्रम,परिवार, आरोप | Asaram Bapu Biography Age Caste [Case News] In Hindi

आसाराम बापू जीवन परिचय, जाति,सत्संग,आश्रम,परिवार, संपत्ति,आरोप | Asaram Bapu Biography Age Caste Net Worth [Case Verdict Latest News] In Hindi

वैसे तो देश में आसाराम  का नाम किसी के लिए भी नया नहीं हैं, लेकिन पहले एक संत के रूप में प्रसिद्ध और अब एक बलात्कारी के रूप में सजा काट रहे आसाराम का जीवन रहस्यमयी है. साथ ही उसके एक आम व्यापारी से संत और वहां से एक अपराधी बनने तक के सफर को जानना चौकाने वाला भी हैं. उसे हिन्दू संत जीवन में मिली विभिन्न उपलब्धियों के कारण “संत श्री आसाराम जी बापू” कहा जाने लगा. भारत और बाहर कई देशों में भ्रमण करते हुए उसने अपने सत्संग के माध्यम से वेदांत,आध्यात्म, भक्ति और मुक्ति का प्रचार-प्रसार किया. उसकी आर्गेनाइजेशन पिछले 42 वर्षों से कई समाज सेवा और चेरिटी का काम कर रही थी. संस्था के दुनिया भर में 350 आश्रम हैं जिसका मुख्यालय अहमदाबाद में हैं. योग सेवा समिति इन आश्रमों को सम्भालती हैं. इसे 1200 से भी ज्यादा क्षेत्रीय समिति के साथ संचालित किया जाता रहा हैं. आसाराम  की ट्रस्ट की वार्षिक कमाई लगभग 400 करोड़ हैं. वास्तविक आंकड़ों की संख्या इससे भी ज्यादा होने की सम्भावना हैं. .

आसाराम बापू जीवन परिचय

नाम आसाराम  
वास्तविक नाम आसुमल थाउमल सिरुमलानी हरपलानी
पेशा संत और बहुत सी संस्थाओं का संचालन
माता मेहानगिबा
पिता थाउमल सिरुमलानी
जाति सिंधी
जन्मदिन 17 अप्रैल 1941
जन्मस्थान नवाब-शाह सिंध पाकिस्तान
संपत्ति ट्रस्ट की कमाई लगभग 400 करोड़
लम्बाई 165 सेमी (1.65 मीटर)
वजन 70 किलो
पत्नी लक्ष्मी देवी
पुत्र साईं नारायण
पुत्री भारती देवी
गुरु लीलाधर शाह
विवाद हत्या,जमीन गबन,घी में मिलावट,बलात्कार जैसे कई गम्भीर आरोप
सजा  77 वर्ष की आयु में उम्र कैद

आसाराम  का जन्म और परिवार (Asaram Birth and Family)

आसाराम  का जन्म 17 अप्रैल 1941 को हुआ था. आसाराम  का वास्तविक नाम आसुमल सिरुमलानी हरपलानी हैं. आसाराम  थाउमल सिरुमलानी और मेहानगिबा का पुत्र था. आसाराम  का झुकाव बचपन से ही आध्यात्म की तरफ था. उनकी माँ उसे रामायण,भगवद गीता और अन्य पौराणिक कहानियां सुनाती थी इसी दौरान आसाराम  में आध्यात्म का बीज पड़ा.

आसाराम  का जन्म स्वतंत्रता के पहले के भारत और अभी के पाकिस्तान के नवाब-शाह सिंध में हुआ था. देश के विभाजन के समय आसाराम  का परिवार सिंध छोड़कर गुजरात के मणिनगर में आकर बस गया.यहाँ आसाराम  ने स्कूल जाना शुरू किया.

आसाराम  की शादी 23 वर्ष की उम्र में लक्ष्मी देवी से हुई थी और फिर 2 बच्चे नारायण प्रेम साईं और भारती देवी भी हुए. जिसमे से नारायण प्रेम साईं अभी सुरत की जेल में हैं,उस पर भी आपराधिक मामले चले रहे हैं.

आसाराम  की शिक्षा और प्राम्भिक जीवन (AsaramEducation and Early Life)

आसाराम  बचपन से ही पढ़ाई में होशियार था. रिसेस के समय जब अन्य बच्चे खलते थे, तब वो एक पेड़ के नीचे बैठकर ध्यान का अभ्यास करता था. उनके अध्यापक भी उसे होशियार और साफ़ दिल का मासूम बच्चा समझकर प्रोत्साहित करते थे.

आसाराम  के हँसते चेहरे के कारण उसके अध्यापक उसके हंसमुख भाई कहते थे.स्कूल जाने के लिए थाउमल उनके जेब में काजू,पिस्ता और बादाम भर देते थे ,और आसाराम ये सब कुछ अपने सहपाठियों के साथ शेयर करते थे.आसाराम  रात में अपने पिता के पैर दबाता था और मालिश करता था,इस तरह इनकी छवि बचपन से ही एक अच्छे और नेक इंसान की रही हैं.

जब आसाराम  ध्यान के लिए अपनी आँखे बंद करता था, तब उसकी माँ अपने बेटे के सामने माखन-मिश्री रख देती थी, और उसे कहती कि देखो तुम्हारे ध्यान करने के कारण भगवान ने तुम्हे क्या प्रसाद भेजा हैं.

असुमल कई घंटों तक छोटे से कमरे में गहन ध्यान में मग्न रहता था.जब उसके पडोसी मेहगिबा से मिलने के लिए आये तो उन्होंने मेहगिबा का ध्यान इस तरफ दिलाया कि आसुमल का इतने घंटों तक ध्यान लगाना कोई सामान्य विषय नहीं है और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. मेहिगबा ने भी इसके बाद आसाराम  का ध्यान हटाने के बहुत प्रयास किये लेकिन वो उसके समर्पण को रोक नहीं सकी.

जब आसाराम  को समझ आया कि स्कूली शिक्षा से उसे केवल रोजगार मिल सकता हैं तो उसका ध्यान शिक्षा पर से हटने लगा, हालांकि उसने स्कूल जाना ज़ारी रखा लेकिन इस दौरान उसे जब भी और जहाँ भी समय मिलता तो वो अकेले में ध्यान लगाने का कार्य करता. उसे हमेशा से आध्यामिक जानकारी के लिए उत्सुकता रहती.

आसाराम  की युवावस्था 
आसाराम  के बचपन में ही उसके पिता की मृत्यु हो गयी थी, आसाराम  के पिता की कोयला और लकड़ी का बिजनेस था जिसे उसके पिता की देहांत के थोड़े समय बाद ही उसने काम सम्भाल लिया और इस तरह वास्तव में वो कोयला व्यापारी से एक आध्यात्मिक गुरु बना था.

पिता की मृत्यु के बाद उसने अपने ध्यान का समय और बढ़ा दिया और भगवान की खोज में खुदको समर्पित कर दिया.आसाराम  जब युवास्था तक पहुंचा तब तक उसने अपनी आध्यात्मिक शक्तियां काफी बढ़ा ली थी,जिसका प्रभाव उसके आस-पास के लोगों पर भी होने लगा.

आसाराम  के परिवार को ये चिंता हुयी कि वो कही सन्यासी ना बन जाए,इसलिए उन्होंने उसके लिए लड़की खोजकर उसकी सगाई तय कर दी लेकिन शादी के 8 दिन पहले  आसाराम  अपने घर से भाग गया और उसके परिवार ने उसे भरूच के अशोक आश्रम से खोज निकाला और उसे वापिस घर ले आये,और लौटते ही उसकी शादी लक्ष्मी देवी से कर दी गई.

आसुमल ने अपनी पत्नी को बताया कि उसका लक्ष्य गृहस्थ जीवन को आगे बढ़ाना नहीं हैं. उसने अपनी पत्नी को समझाया कि वो अपना लक्ष्य प्राप्त करने के बाद घर लौट आएगा.

आध्यत्मिक किताबों को समझने के लिए उसने संस्कृत स्कूल में दाखिला ले लिया और फाइनल एग्जाम से 4 दिन पहले उसने एक श्लोक सुना जिसने उसके जीवन को भगवान की खोज की तरफ मोड़ दिया और उसने परिवार छोड़कर इस दिशा में जाने का मन बना लिया.

 आसाराम  की आध्यात्म यात्रा (journey to Spirituality)

अपने परिवार को छोड़ने के बाद आसाराम  यायावर की तरह घुमने लगा. वो घने जंगलों, पहाड़ों और गुफाओं में आध्यात्म का अभ्यास करता था, उसने इस दौरान कई बड़े मंदिरों की यात्रा भी की और केदारनाथ में उसे एक संत ने करोड़पति बनने का आशीर्वाद भी दिया.  

इसके बाद आसाराम  भगवान श्री कृष्ण की नगरी वृन्दावन गया, यहाँ उसे स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज के आश्रम जाने की प्रेरणा मिली,उसे गुरु के दर्शन के लिए आश्रम में 40 दिन तक इंतज़ार करना पड़ा,इसके बाद वहां उसने समर्पित भाव से अपने गुरु की सेवा की.
आश्रम में उसे उबले हुए मूंग खाने को मिलते थे, वहां वो 4.5 फीट के कमरे में रहता था. लीलाशाहजी ने आसुमल की 30 दिन और परिक्षा ली और आखिर में उसे अपना आश्रीवाद दिया. लीलाशाहजी ने उसे वापिस घर लौटने और वहीँ से आध्यत्म का अभ्यास करने को कहा.

घर वापिस लौटने के लिए उसने मोती-कोरल की ट्रेन पकड़ी. लेकिन तब भी उसका दिमाग सिर्फ अंतिम सत्य पर ही केन्द्रित था. उसने नर्मदा के किनारे ध्यान करना शुरू किया. एक लोकल संत श्री लालजी महाराज उसके आध्यात्मिक भाव से प्रभावित हुए और उन्होंने उसके लिए रामनिवास के दत्त कुटीर (लालजी महराज के आश्रम में ही) में रहने की व्यवस्था की. आसाराम  ने यहाँ पर 40 दिन का अनुष्ठान किया.

आसाराम  की माँ और पत्नी को जब ये पता चला कि वो मोती कोरल में हैं,तो उन्होंने वहां जाकर आश्राम से घर लौटने की विनती की, लेकिन उसने कहा कि वो आश्रम में अनुष्ठान पूरा किये बिना नहीं निकलेगा. इसके बाद उसने सफलतापूर्व वो अनुष्ठान पूरा किया और लालजी महाराज के साथ पूरा गाँव उसे अहमदाबाद के लिए छोड़ने को स्टेशन पर आया.

कैसे बना आसाराम  आसुमल से पूजनीय आसाराम  जी बापू  (Asumal to Asharamji Bapu)

मोती कोरल से निकलकर जैसे ही ट्रेन ने मियागांव जंक्शन को पार किया, आसाराम  ट्रेन से कूद गया और उसने मुंबई में स्वामी श्री लीलाशाहजी महाराज से मिलने के लिए ट्रेन पकड़ ली. आसाराम  मुम्बई पहुंचकर स्वामी लीलाशाह जी महाराज से मिले,वो आसुमल की सच जानने की तीव्र जिज्ञासा को देखकर बहुत खुश हुए.

सम्वत 2021 में अश्विनी मॉस के दुसरे दिन की 2.30 बजे आसुमल को लीलाशाह महाराज की कृपा से आसाराम  बना दिया गया. इसके बाद आसाराम  अगले ढाई दिन के लिए समाधी में चला गया.श्री लीलाशाहजी महाराज ने आसाराम  को घर पर रहते हुए ही मानवता की भलाई के लिए काम करने का आदेश दिया. आसाराम  आत्म-खोज में अगले 7 वर्षों तक अकेला रहा.

आश्रम में वो मिलने के लिए आने वालों को अध्यात्म के प्रवचन देता था जिस कारण ही उसे भक्तों ने  बापू कहकर बुलाना शुरू किया.आसाराम  से बापू बने आसुमल ने दिसा,नारेश्वर धाम,हिमालय और माउंट आबू जैसी जगहों पर एकांत में समय बिताया. 

आसाराम  साबरमती किनारे मोटेरा गाँव में एक शांत जगह खोजी जहाँ पर बाद में उसके भक्तों ने एक छोटा सा कमरा बना दिया जिसे मोक्ष कुटीर के नाम से जाना जाने लगा. धीमे-धीमे मोटेरा आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी और ये छोटी सी जगह एक बड़ा आध्यात्मिक स्थान बन गया.

आसाराम  पर आरोप और उनसे जुड़े  विवाद (Asaramand Controversy and Cases)

आसाराम , उसके द्वारा चलने वाली संस्थाओं और उससे जुड़े लोगों पर कई बार कई तरह के आरोप लग चुके है. ऐसे में आसाराम  का विवादों से गहरा नाता रहा हैं. और अब तो वो उम्र कैद की सजा में जेल में बंद हैं. हालांकि आसाराम  के अंध-भक्त ऐसे भी हैं जो उसके अपराधी घोषित होने के बाद भी ये मानने को तैयार नहीं थे,इसलिए जब-जब उसकी सुनवाई चल रही होती तब उसके जेल जाते समय उस सड़क की धूल को भी माथे पर लगाते दीखते थे..या फिर उसके समर्थन में नारे लगते दिखाई देते थे.

  1. गुजरात में 2008 में भी वह एक विवाद में उलझा था, जब 2 वाघेला कजिन भाइयों की मौत की बात सामने आई. वो दोनों बाल केंद्र के थे जो केंद्र से अपने घर भाग गए थे. उनमें से एक के पिता प्रफुल वाघेला ने बताया कि उन्होंने अपने दोनों बच्चों की फीस 15 हजार रूपये जमा करवाए थे लेकिन उन्हें पक्की रसीद नहीं दी गई. और कुछ समय बाद उन्हें उन बच्चों के गायब होने की खबर मिली और जब वो आश्रम में पहुंचे तो गुरुकुल के प्रशासन ने उन्हें पीपल के 11 चक्कर लगाने को कहा लेकिन इससे उन्हें कोई मदद नहीं मिली. उन्होंने पुलिस को सुचना देने की कोशिश भी की लेकिन आश्रम से उन्हें ऐसा करने को मना कर दिया गया और अगले दिन आश्रम के ही व्यक्ति ने जाकर पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और इसके बाद आसाराम के इशारों पर पांखड का खेल चलता रहा,जिसे वाघेला भाई अपने बच्चों को वापिस पाने की आस में पूरी भी करते रहे,लेकिन कुछ दिनों बाद आश्रम के ही बताये पते पर जाने पर उन्हें बच्चे नही बल्कि उनकी लाशें मिली जो कि बुरी तरह से क्षत-विक्षत थी. इस पर भी पुलिस ने भी आसाराम  के खिलाफ उनकी शिकायत नहीं दर्ज की,और आश्रम के लोग हथियार लेकर उनके पीछे लग गए,उन्हें तुरंत वो गाँव छोड़ना पड़ा. वाघेला जस्टिस डीके तिवारी इन्क्वायरी कमिशन के सामने ये भी कहते रहे हैं कि आसाराम  और उसका बेटा काला जादू और तन्त्र विद्या करते हैं. यह कमिशन तत्कालीन गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी ने बनाया था. इस सुनवाई के दौरान भी आसाराम  के समर्थकों ने आश्रम के समर्थन में बहुत से नारे लगाये थे.
  2. इसी दौरान 31 जुलाई 2008 में भी मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा में आश्रम के संस्था के हॉस्टल में 2 और छात्र मृत पाए गए. यहाँ भी क्रोधित निवासियों ने आश्रम को बंद करवाने की मांग की.
  3. इसके बाद ये सभी बात मीडिया में पहुंचने लगी तो उसके आश्रम से और भी कई अपराधिक गतिविधियों के गड़े मुर्दे निकलकर बाहर आने लगे. बहुत सी महिलाओं और बच्चों पर शोषण के आरोप आसाराम  और उसके आश्रम पर लगने लगे.  
  4. आसाराम के आश्रम में बने घी के पर भी विवाद था कि आश्रम का घी और दवाइयाँ प्योर नहीं हैं.
  5. फरवरी 2009 में गुजरात गवर्मेंट ने भी माना की एहमदाबाद में आसाराम के आश्रम के लिए 67,099 स्क्वायर मीटर की जमीन अतिक्रमण मे आती हैं . आसाराम ने मध्य प्रदेश में अपने आश्रम के लिए 700 करोड़ रूपये के लैंड ग्रेब केस में खुदके और अपने परिवार के शामिल होने की बात से भी इंकार किया. 
  6. आसाराम ने गाजियाबाद में अपने सत्संग के दौरान एक विडियो जर्नलिस्ट को थप्पड़ मारा था. रिपोर्ट्स के अनुसार हिंदी न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर ने अपने कैमरामैन के साथ आसाराम  को इंटरव्यू के लिए मिला था.
  7. 2012 में हुए दिल्ली के निर्भया कांड के समय आसाराम ने कहा था “गलती कभी एक तरफ से नहीं होती” उसने ये भी कहा केवल 5-6 लोग ही अपराधी नहीं हैं,विक्टिम भी रेप के लिए जिम्मेदार हैं,उस लड़की को बलात्कारियों को भैया कहकर बुलाना चाहिए था और उनसे ऐसा ना करने की भीख मांगनी चाहिए थी, उसने ये भी कहा की यदि दिल्ली में लड़की ने भगवान का नाम लिया होता तो उसकी जिन्दगी बच सकती थी. कुछ रिपोर्ट में ये भी कहा गया कि वो अपराधियों को कड़ी सजा मिलने के खिलाफ हैं. इससे कानून का गलत इस्तेमाल होगा. उसने ये भी कहा भारत में दहेज़ प्रथा कानून के गलत इस्तेमाल का सबसे बड़ा उदाहरण हैं. आसाराम की सच्चाई के सामने आने की ये तो बस शुरुआत थी, अगले वर्ष 2013 में ही आसाराम  का असली चेहरा दुनिया के सामने आ गया,जब उसे नाबालिग बच्ची के यौन-शोषण के अपराध में जेल में डाला गया.
  8. 4 सितम्बर 2013 को सूरत के कलेक्टर जयप्रकाश शिवहरे ने शहर के जहाँगीरपुरा एरिया में आश्रम के प्रशासन को 18.37 करोड़ का नोटिस भेजा,हालांकि ये मुद्दा 1996 में ही लाइम लाईट में आ चूका था. जब आसाराम  ने जहाँगीरपुरा एग्रीकल्चर लैंड पर अपना आश्रम बना लिया. गुजरात हाई कोर्ट ने राज्य सरकार को आश्रम को कब्जे में लेने के आदेश दिए. आश्रम को  जमीन के 18.57 करोड़ रूपये भरने का भी  आदेश दिया जिसमे से आश्रम ने केवल 30.30 लाख रूपये ही भरे.
  9. यही नहीं आसाराम की किताबों में भी लिखा हैं कि श्रद्धालुओं को अपनी पत्नियाँ गुरु को समर्पित कर देनी चाहिए.  उसकी लिखी “श्री गुरु गीता” के 38 वे पद्य में संस्कृत में ये बात लिखी है कि भक्त को अपना शरीर,जीवन,पैसे,परिवार और पत्नी भी अपने गुरु को समर्पित कर देनी चाहिए.

बापू से एक अपराधी बनने तक का सफर (Asaram from Bapu to a professional Criminal)

15 अगस्त 2013 में आसाराम  पर एक 16 वर्षीय लड़की के बलात्कार के केस में दिल्ली में केस दर्ज हुआ,रिपोर्ट के अनुसार लड़की के बीमार होने पर उसे आसाराम  के आश्रम में ले जाया गया था जहाँ उसे पूजा-अर्चना से ठीक किया जाने वाला था.सत्संग के बाद उस लड़की को जोधपुर से 20 किलोमीटर दूर आश्रम में ले जाया गया और वहीँ आसाराम ने ये कुकर्म किया.

धारायेँ : आसाराम  पर आईपीसी के सेक्शन 376,342,506 और 509 और प्रिवेंशन ऑफ़ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंस एक्ट (पोस्को) के सेक्शन 8 और जुवेनाइल जस्टिस एक्ट के सेक्शन 23 और 26 के तहत केस दर्ज हुए. 

पूरे काण्ड में इसके सहयोगी शिल्पी और केशव का भी हाथ था.इसके पुत्र नारायण सैन ने इस बीच एक और विवादित बयान दिया था कि नाबालिग लड़की मानसिक रूप से अस्वस्थ हैं. उसे जोधपुर की पुलिस से 30 अगस्त से पहले सामने आने का नोटिस मिल चूका था.

आसाराम  की बेबाकी इसके बाद भी खत्म नहीं हुई ,उसने ये घोषणा कि वो उस व्यक्ति को 5 लाख रूपये देगा जो ये साबित करेगा कि उसने बलात्कार किया हैं,और वो ये भी कहता रहा कि वो उस व्यक्ति का गुलाम बनकर रहेगा जो उसके अपराध को सिद्ध कर देगा. और अब लगभग 5 साल जोधपुर जेल में बिताने के बाद आसाराम  को उम्र कैद की सजा मिल चुकी हैं.

रेप केस में मिली आसाराम को उम्र कैद, जानिए क्या था ये मामला (Rape Case Verdict, Asaram Gets Life Imprisonment)

लंबे समय में जेल में बंद आसाराम को अब उम्र भर के लिए जेल ही बंद रहना होगा क्योंकि इन्हें हाल ही में एक अदालत ने रेप केस मामले  में उम्र कैद की सजा सुना दी है. अपने आपको भगवान का दर्जा देने वाल आसाराम को ये सजा एक रेप केस के मामले में दी गई है. वहीं क्या था ये पूरा मामला जिनके कारण आसाराम को ये सजा सुनाई गई है, उसके बारे में आज हम आपको विस्तार से जानकारी हमारे लेख में देने जा  रहे हैं.

क्या था पूरा मामला (All You Need To Know About Asaram Bapu Rape Case)

  • 77 वर्षीय आसाराम पर साल 2013 में एक नाबालिग लड़की के साथ रेप करने का केस दर्ज करवाया गया था. जिसके बाद इस बाबा को गिरफ्तार कर लिया गया था.
  • इस बाबा पर पीड़िता और उसके परिवार वालों ने रेप का आरोप लगाते हुए जो केस दर्ज करवाया था. उसके मुताबिक 16 वर्षीय पीड़िता आसाराम के आश्रम में धार्मिक पढ़ाई करने के मकसद से रहे रही थी. 15 अगस्त साल 2013 को आसाराम ने इस नाबालिग लड़की को अपने आश्रम के कमरे में बुलाया. जिसके बाद आसाराम ने इस नाबालिग के साथ बलात्कार किया.
  • 16 वर्षीय पीड़िता के मुताबिक उसके साथ जोधपुर के पास मणि गांव में स्थित आसाराम के एक आश्रम में ये बलात्कार किया गया था.
  • इस घटना के बाद पीड़िता और उसके परिवार वालों ने दिल्ली के कमला मार्केट पुलिस स्टेशन में आसाराम के खिलाफ शिकायत दर्ज करवाई थी. शिकायत दर्ज करवाने के कुछ दिनों बाद ही आसाराम के भक्तों ने इस पुलिस स्टेशन पर हमला कर दिया था.
  • वहीं ये घटना जोधपुर में हुई थी इसलिए दिल्ली पुलिस ने इस मामले को जोधपुर पुलिस को सौंप दिया था. जिसके बाद इस मामले की आगे की कार्रवाई जोधपुर पुलिस द्वारा की गई थी.
  • आसाराम पर एससी और जनजाति (अत्याचार रोकथाम) अधिनियम और प्रोटेक्शन ऑफ चिल्ड्रन फ्रॉम सेक्सुअल ऑफेंसेज एक्ट के तहत पुलिस ने केस दर्ज किया था.
  • केस दर्ज होने का बाद आसाराम को साल 2013 के सितंबर महीने में गिरफ्तार किया गया था. और इन्हें इंदौर से गिरफ्तार किया गया था. जिसके बाद इन्हें जोधपुर जेल लाया गया था और ये इस जेल में करीब चार साल से बंद हैं. इस दौरान इन्होंने जेल से निकलने के लिए कोर्ट में कई सारी जमानत अर्जी भी दी थी. मगर कोर्ट ने इनकी सभी जमानत अर्जी को खारिज कर दिया.
  • जिसके बाद लंबे समय से इस मामले पर हो रही सुनवाई 7 अप्रैल, 2018 में पूरी कर ली गई थी और 25 अप्रैल को जोधपुर की एक स्थानीय अदालत ने अपना फैसला सुनाते हुए इन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई है. आसाराम के अलावा उनको दो अन्य लोगों को भी इस मामले में सजा सुनाई गई है.

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