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हिंदी कविता: औरत की आवाज़

औरत की आवाज़ हिंदी कविता |
यह एक औरत की आवाज़ हैं:- क्यूँ मैं सहती हूँ? क्यूँ मुझे खुद पर हुए अन्याय के लिए लड़ना चाहिए ? मेरे साथ किये गए जानवर से सुलूक के लिए मैं क्यूँ शर्मिंदा हूँ जबकि गुनाहगार को कोई शरम नहीं | जब उसे डर नहीं, तो मैं क्यूँ समाज के सामने नज़रे झुकाए खड़ी न्याय की आस लगाऊ? वो एक दरिंदा हैं जिसने अपनी हैवानियत बयाँ की, तो क्यूँ उससे इंसानों सा सुलूक किया जाए ? एक हैवान को सजा देने के लिए मैं क्यूँ अदालत का मूंह देखू? क्यूँ लडू? क्यूँ किसी से न्याय मांगू ? मुझे हक़ हैं सजा देने का,  मुझे हक़ हैं, उस दरिन्दे को कुचल देने का |

Angry Woman Poem In Hindi

औरत की आवाज़

गुनाह उसने किया,सजा में क्यूँ काटू

झंझोड़ा उसने मेरी रूह को, भला मैं क्यूँ सहमू

मेरी आज़ादी पर लगाम डालने वाला वो हैं कौन

मुझे खिलौना समझने वाला वो हैं कौन 

जो एक इंसान के भेस में छिपा दरिंदा हैं

वो इंसानियत का सुलूक पाने वाला हैं कौन

क्यूँ करूँ किसी अदालत से  न्याय की पुकार

हक़ हैं मुझे सुनाऊ, सज़ा-ऐ-गुनाह इस बार 

सज़ा-ऐ-गुनाह इस बार ||

कर्णिका पाठक

 

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Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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