बगलामुखी मंत्र कवच एवम जयंती पूजा

Baglamukhi mantra kavach jayanti puja in hindi वैशाख माह मे शुक्ल पक्ष मे अष्टमी तिथी के देवी बगलामुखी का अवतरण हुआ था, इसलिए हर वर्ष इसी दिन इसे बगलामुखी जयंती के रूप मे मनाया जाता है . इस दिन देवी की पूजा अर्चना की जाती है बगलामुखी जयंती पूरे भारत मे मनाई जाती है . इस दिन भजन संध्या और भगवती जागरण का महत्व है और साथ ही साथ विश्व कल्याण महायज्ञ का अनुष्ठान भी किया जाता है.

बगलामुखी मंत्र कवच एवम जयंती पूजा

Baglamukhi mantra kavach jayanti puja in hindi

Baglamukhi

देवी बगलामुखी कौन है :

दसमहाविधाओ मे से आठवी महाविधा है देवी बगलामुखी| इनकी उपासना इनके भक्त शत्रु नाश, वाकसिद्धधी और वाद विवाद मे विजय के लिए करते है. माता बगलामुखी स्तंभन की देवी है और कहा  जाता है कि इनमे सारे ब्राह्मण की शक्ति का समावेश है, इनकी उपासना से भक्त के जीवन की हर बाधा दूर होती है और शत्रुओ का नाश के साथ साथ बुरी शक्तियों का भी नाश करती है.

देवी का नाम बगलामुखी क्यू पड़ा: 

बगला एक संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ एक दुल्हन अर्थात दुल्हन  की तरह आलौकिक सौन्दर्य और अपार शक्ति की स्वामिनी होने के कारण देवी का नाम बगलामुखी पड़ा.

देवी बगलामुखी का सिहासन रत्नो से जड़ा हुआ है और इसी रत्नो से जड़े रथ पर सवार होकर देवी शत्रुओ का नाश करती है और कहा जाता है की देवी के सच्चे भक्त को तीनों लोक मे कोई शक्ति पराजित करने योग्य नहीं है.

माता बगलामुखी के पूजन विधी  (Baglamukhi puja):

माता बगलामुखी का पूजन प्रातः काल के समय किया जाता है| इस पूजन के लिए या तो मंदिर मे अकेले रहकर पूजन करना चाहिए या किसी सिध्द पुरुष की मौजूदगी मे भी यह पूजन किया जा सकता है. पूजन के समय पीले वस्त्र धारण करने चाहिए तथा पूर्व दिशा की ओर देवी को भी पीले आसन पर विराजमान करना चाहिए. इसके बाद आप अपने नियमानुसार पूजन कर सकते है परंतु ध्यान रहे इस पूजन के समय आपको ब्रम्हचर्य का पालन करना चाहिए. अपनी पूजा को सिध्द करने के लिए आपको माता बगलामुखी का पूजन यंत्र चने की दाल का बनाना चाहिए और इसे चाँदी या तांबे के पात्र पर स्थापित करना चाहिए.

देवी बगलामुखी को क्या अर्पित किया जाता है :

शत्रुओ का नाश करने वाली देवी बगलामुखी की पूजा हर कोई करना चाहता है. देवी बगलामुखी का एक नाम पीतांबरा भी है, माता को पीला रंग अतिप्रिय है, इसलिए जब भी आप देवी का पूजन करते है, तो उन्हे पीले फूल अवश्य चढ़ाये और उनका पूजन भी पीले वस्त्र पहनकर करे. देवी को दीप दान भी पीली हल्दी के ढ़ेर पर किया जाता है, क्यूकी माता को यह प्रिय है . कहा जाता है कि माता को पीला वस्त्र चढ़ाने से जीवन की बढ़ी से बढ़ी बाधा दूर होती है. माता को भोग स्वरूप नारियल चढ़ाया जाता है . परंतु आप जब भी यह सब माता को अर्पित करे, तो माता के मंत्रो का जाप अवश्य करे.

देवी बगलामुखी का मंत्र  (Baglamukhi Mantra):

ॐ हीं बगलामुखी सर्व्दुष्टानां

वाचं मुख पदं स्तंभय जीहवां कीलय

बुद्धि विनाशय हीं ओम स्वाहा .

अगर इस मंत्र का जप पूरी श्रद्धधा से किया जाये तो सफलता अवश्य मिलती है.

बगलामुखी का कवच  (Baglamukhi Kavach):

Bagulamukhi kavach

बगलामुखी कथा (Baglamukhi Katha) : 

देवी बगलामुखी के लिए जो कथा प्रचलित है, उसके अनुसार सतयुग के समय एक महाविनाश करने वाला तूफान उत्पन्न हुआ, जिसके फलस्वरूप सारा विश्व महाविनाश की ओर बढने लगा. इससे विंष्णु जी विचलित हो उठे और अपनी समस्या के समाधान के लिए भगवान शिव के पास पहुचे. तब भगवान शिव ने उन्हे शक्ति की उपासना करने की सलाह दी, उनकी सलाह पर भगवान विष्णु ने हरिद्रा सरोवर के तट पर कठोर तप किया . भगवान विष्णु के तप से देवी महात्रिपुरा सुंदरी बहुत प्रसन्न हुई और तालाब मे जलक्रीड़ा करती हुई देवी के हृदय से दिव्य तेज उत्पन्न हुआ. उसी समय चतुर्दशी की रात्री को देवी बगलामुखी प्रकट हुई और उन्होने मनवांछित वरदान दिया और इस प्रकार सृष्टि का विनाश रुका. देवी बगलामुखी को वीर रति भी कहा जाता है तांत्रिक इन्हे स्तंभन की देवी मानते है. गृहस्त लोगो के लिए देवी हर संशय का शमन करती है और अपने भक्तो की रक्षा समस्त शत्रुओ से करती है.

साल 2016 मे बगलामुखी जयंती  (Baglamukhi Jayanti 2016):

जैसा कि आप सभी लोग जानते है कि यह जयंती वैशाख शुक्ल की अष्टमी तिथी को पढ़ती है, तो इस वर्ष यह तिथी 14 मई को पढ़ रही है तो इस साल 14 मई 2016 को बगलामुखी जयंती मनाई जायेगी .

अगर आपको देवी बगलामुखी और बगलामुखी जयंती के बारे मे और कोई जानकारी उपलब्ध हो, तो हमे कमेंट बॉक्स मे अवश्य लिखे.

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Sneha

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स्नेहा दीपावली वेबसाइट की लेखिका है| जिनकी रूचि हिंदी भाषा मे है| यह दीपावली के लिए कई विषयों मे लिखती है|
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