बहुला चौथ व्रत पूजा विधि कथा | Bahula Chauth Vrat Katha Puja Vidhi in hindi

Bahula Chauth (Bol Chauth) Vrat Katha Puja Vidhi in hindi सावन महीने में अनेकों त्यौहार आते है, जिनका पुजन हिन्दू समाज विधि विधान से करता है. सावन में ही एक त्यौहार आता है, बहुला चौथ या चतुर्थी. इसे गुजरात में बोल चौथ के नाम से जानते है, जबकि मध्यप्रदेश में इसे बहुला चौथ कहते है. चतुर्थी तिथि को वैसे गणेश जी का दिन माना जाता है, लेकिन ये चतुर्थी कृष्ण चतुर्थी के नाम से व्यख्यात है. यह त्यौहार मुख्यतः किसान लोगों के द्वारा किया जाता है, इस दिन वे अपने पशु, मुख्यरूप से गाय, बैल की पूजा करते है. किसानों के जीवन में इन पशुओं का भी मुख्य स्थान होता है, उनकी वजह से वे सफल खेती कर पाते है, तो गायों और बछड़ों के कल्याण के लिए ये दिन मनाया जाता है.

बहुला चौथ व्रत पूजा विधि कथा 

Bahula Chauth Vrat Katha Puja Vidhi in hindi

Bahula Chauth

कब मनाया जाता है बहुला चौथ/ बोल चौथ (Bahula Chauth 2016 Date)

बहुला चौथ सावन माह के कृष्ण पक्ष के चौथे दिन मनाया जाता है, यह नागपंचमी के एक दिन पहले आती है. इस साल 2016 में बहुला चतुर्थी 21 अगस्त 2016 रविवार के दिन है. नागपंचमी भैया पंचमी महत्व, कथा व्रत पूजा विधी के बारे में यहाँ पढ़ें.

बहुला चतुर्थी मुहूर्त (Bahula Chaturthi Muhurat) –

चतुर्थी शुरू 21 अगस्त 8:17 am
चतुर्थी ख़त्म 22 अगस्त 5:43 am
बहुला चौथ पूजा का समय शाम को 6:37 से 7:03

बहुला चौथ का महत्त्व (Bahula Chauth/ Bol Chauth Vrat) –

बहुला चौथ मुख्य रूप से गुजरात राज्य में कृषक समुदाय द्वारा मनाया जाता है। बहुला चौथ का त्यौहार भगवान कृष्ण के अनुयायी मुख्य रूप से मनाते है. इस दिन गाय, बछड़े की पूजा की जाती है, और कृष्ण जी के जीवन में गायों का बहुत महत्व था, वे खुद एक गाय चराने वाले थे, जो गौ की माता की तरह पूजते थे.

बहुला चौथ मनाने का तरीका (Bahula Chauth Celebration)

गुजरात में बोल चौथ के दिन व्रत रखा जाता है, किसान समुदाय में घर का हर एक सदस्य इस व्रत को रखता है, और पशुओं की सुरक्षा के लिए प्रार्थना करता है.  मध्यप्रदेश में बहुला चौथ थोडा अलग तरीके से मनाते है. इस दिन घर की औरतें ही व्रत रखती है, और संतान प्राप्ति और संकट से निदान के लिए प्रार्थना करती है. औरतें अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए भी ये व्रत रखती है, साथ ही पुरे परिवार की समृद्धि के लिए प्रार्थना करती है.

किसान समुदाय के लोग इस दिन जल्दी उठ कर अपने पशुओं और उनके रहने के स्थान को अच्छे से साफ करते है. चावल का कुछ बनाकर पशुओं को खिलाया जाता है, और उनकी पूजा की जाती है, उस दिन पशुओं द्वारा कोई भी काम नहीं होता है.

बहुला चौथ पूजा विधि (Bahula Chauth puja vidhi) –

  • इस दिन पूरा दिन का व्रत होता है, जो शाम को पूजा के बाद खोला जाता है.
  • इस दिन मिट्टी से गाय एवं बछड़ा बनाया जाता है, कुछ लोग सोने एवं चांदी के बनवाकर उसकी पूजा करते है.
  • शाम को सूर्यास्त के पश्चात् इन गाय, बछड़े की पूजा की जाती है, साथ ही गणेश एवं कृष्ण जी की पूजा की जाती है.
  • कुछ लोग ज्वार एवं बाजरा से बनी वस्तु भोग में चढ़ाते और बाद में उसे ही ग्रहण करते है.
  • पूजा के बाद बहुला चौथ की कथा को शांति से सुनना चाहिए.
  • गुजरात में इस दिन खाना, खुले आसमान के नीचे तैयार किया जाता है, और वही बैठकर सब खाते है.
  • मध्यप्रदेश में इस दिन उड़द दाल से बनने वाले बड़ा का सेवन किया जाता है, वहां उस दिन उड़द दाल से बना भोग ही औरतें ग्रहण करती है.
  • इस दिन दूध और उससे बनी चीजें जैसे चाय, काफी, दही, मिठाइयाँ खाना बिलकुल माना होता है.
  • कहते है जो यह व्रत रखता है, उसे संकट से आजादी मिलती है, साथ ही उसे संतान की प्राप्ति होती है. इस व्रत से धन ऐश्वर्या मिलता है.
  • पूजा अर्चना के बाद, मिट्टी से बने गाय बछड़े के जोड़े को किसी नदी या तालाब में सिरा दिया जाता है.

बहुला चौथ की कथा (Bahula Chauth Vrat Katha ) –

विष्णु जी जब कृष्ण रूप में धरती में आये थे, तब उनकी बाल लीलाएं सभी देवी देवता को भाती थी. गोपियों के साथ उनकी रास लीला हो या माखन चोरी कर खाना, इन सभी बातों से वे सबका मन मोह लेते थे. कृष्ण जी लीलाओं को देखने के लिए कामधेनु जाति की गाय ने बहुला के रूप में नन्द की गोशाला में प्रवेश किया. कृष्ण जी को यह गाय बहुत पसंद आई, वे हमेशा उसके साथ समय बिताते थे. बहुला का एक बछड़ा भी था, जब बहुला चरने के लिए जाती तब वो उसको बहुत याद करता था.

एक बार जब बहुला चरने के लिए जंगल गई, चरते चरते वो बहुत आगे निकल गई, और एक शेर के पास जा पहुंची. शेर उसे देख खुश हो गया और अपना शिकार बनाने की सोचने लगा. बहुला डर गई, और उसे अपने बछड़े का ही ख्याल आ रहा था. जैसे ही शेर उसकी ओर आगे बढ़ा, बहुला ने उससे बोला कि वो उसे अभी न खाए, घर में उसका बछड़ा भूखा है, उसे दूध पिलाकर वो वापस आ जाएगी, तब वो उसे अपना शिकार बना ले. शेर ये सुन हंसने लगा, और कहने लगा मैं कैसे तुम्हारी इस बात पर विश्वास कर लूँ. तब बहुला ने उसे विश्वास दिलाया और कसम खाई कि वो जरुर आएगी.

बहुला वापस गौशाला जाकर बछड़े को दूध पिलाती है, और बहुत प्यार कर, उसे वहां छोड़, वापस जंगल में शेर के पास आ जाती है. शेर उसे देख हैरान हो जाता है. दरअसल ये शेर के रूप में कृष्ण होते है, जो बहुला की परीक्षा लेने आते है. कृष्ण अपने वास्तविक रूप में आ जाते है, और बहुला को कहते है कि मैं तुमसे बहुत प्रसन्न हुआ, तुम परीक्षा में सफल रही. समस्त मानव जाति द्वारा सावन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी के दिन तुम्हारी पूजा अर्चना की जाएगी और समस्त जाति तुम्हे गौमाता कहकर संबोधित करेगी. कृष्ण जी ने कहा कि जो भी ये व्रत रखेगा उसे सुख, समृद्धि, धन, ऐश्वर्या व संतान की प्राप्ति होगी. सावन माह के महत्व के बारे में यहाँ पढ़ें.

बहुला चौथ का व्रत सावन महीने में आता है, इस समय मानसून रहता है, और हर जगह बहुत अधिक बारिश होती है. इस त्यौहार के द्वारा सभी पशुओं की सुरक्षा की प्राथना की जाती है, ताकि वे अधिक बारिश, बाढ़ में सुरक्षित रह सकें. कृषिप्रधान देश में अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मवेशियों का भी महत्वपूर्ण स्थान होता है.

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विभूति दीपावली वेबसाइट की एक अच्छी लेखिका है| जिनकी विशेष रूचि मनोरंजन, सेहत और सुन्दरता के बारे मे लिखने मे है| परन्तु साईट के लिए वे सभी विषयों मे लिखती है|
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