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डेब्ट म्यूच्यूअल फंड्स के प्रकार व लाभ की जानकारी | Debt Mutual Funds Basics Type benefits In India in hindi

Basics Of Mutual Funds In India in hindi म्यूच्यूअल फंड्स एक निवेश हैं जो कि निवेशक के  पैसों को अलग-अलग सुरक्षा जैसे स्टॉक, बांड्स, पैसा बाजार आदि इसी तरह की जगहों में लगाया जाता हैं. यह निवेश डेब्ट सुरक्षा, पैसा बाजार सुरक्षा या इनके ही मेल से किया जाता है. म्यूच्यूअल फण्ड के निवेशक की ओर से पैसों का मेनेजर द्वारा प्रबंधन किया जाता हैं. जब भी सुरक्षा को सैल किया जाता हैं तब उसमे होने वाले लाभ पर निवेशक का हक़ होता हैं लेकिन होने वाली हानि में निवेशक के पैसों को कोई नुकसान नहीं होता है. सबसे जरुरी बात यह हैं कि निवेशक पूरी तरह से जांचने के बाद ही कौन सी स्कीम सबसे अच्छी हैं और अदा की जाने वाली शेयरधारक की फीस कितनी हैं. यह सभी जानकारी को समझने तथा जानने के बाद ही निवेश करें.

डेब्ट म्यूच्यूअल फंड्स के प्रकार व लाभ की जानकारी

 Debt Mutual Funds Basics Type  benefits In India in hindi

Mutual_Funds

म्यूच्यूअल फण्ड के प्रकार (Type of Mutual Funds )

  1. ओपन एंडेड
  2. क्लोज्ड एंडेड

1) ओपन एंडेड फण्ड (Open Ended Mutual Fund)

ओपन एंडेड में फण्ड का कोई तय परिपक्वता समय नहीं होता हैं. इसे साल के किसी भी समय में ख़रीदा या बेचा जा सकता हैं. यह पुरे साल उपलब्ध होते हैं. और आम तौर पर बाजार में ओपन एंडेड फंड्स ही होते हैं. इस लचीलेपन के कारण ही यह ओपन एंडेड कहे जाते हैं.

 ओपन एंडेड फंड्स को निम्न भागों में विभाजित किया गया हैं

  • डेब्ट
  • पैसा बाजार
  • इक्विटी
  • बैलेंस्ड

2) क्लोज्ड एंडेड फंड्स (Close Ended Mutual Fund)

क्लोज्ड एंडेड का एक भी एक निश्चित परिपक्वता समय होता हैं, और निवेशक इसके लांच होने पर प्रारंभिक समय में ही इसमें निवेश कर सकता हैं. इस अवधि को “न्यू फण्ड ऑफर” कहा जाता हैं. ऐसे फंड्स सीमित समय के लिए ही ऑपरेट किये जाते हैं. आम तौर पर 3 से 15 साल तक.

क्लोज्ड एंडेड को निम्न भागों में विभाजित किया गया है

  • पूँजी संरक्षण
  • निश्चित परिपक्वता समय

म्यूच्यूअल फंड्स के लाभ (Benefits of Mutual Funds )

  • व्यावसायिक प्रबंधन : म्यूच्यूअल फंड्स व्यावसायिक कंपनी के द्वारा प्रबंध किया जाता हैं. किसी भी फण्ड को बेचने या खरीदने का निश्चय, मेनेजर (म्यूच्यूअल फण्ड मेनेजर) के द्वारा लिया जाता हैं. और यह निश्चय बाजार की शर्त के उतार चढाव को देखकर लिया जाता हैं .
  • जोख़िम में कटौती म्यूच्यूअल फंड्स निवेश एक सुरक्षित निवेश है. यह कं निवेश  में उपलब्ध होता हैं. जब कोई निवेशक अकेले फण्ड में निवेश करता हैं, इसका मतलब वह बहुत सुरक्षित निवेश कर रहा हैं. अर्थात म्यूच्यूअल फण्ड निवेश में बहुत कम जोख़िम होता हैं .
  • सुविधा : सभी जरुरी जानकारी जैसे शेयर्स खरीदना और बेचना, बदलते वितरण  का विकल्प आदि सभी फोन कॉल, मेल या ऑनलाइन उपलब्ध होती हैं. यह आवश्यक हैं कि निवेशक पैसों का निवेश करने से पहले ही सभी नियमों और शर्तों को ठीक से जान ले उसके बाद ही निवेश करे.
  • तरलता : म्यूच्यूअल फण्ड स्कीम में निवेश कभी भी अपने पैसे वापस ले सकता है. पर मूल्य शुद्ध संपत्तियां म्यूच्यूअल फंड्स के अनुसार तय की जाएगी, और फंड्स से फीस एवम कमीशन काट लिया जाता हैं.
  • न्यूनतम प्रारंभिक निवेश म्यूच्यूअल फंड्स में निवेश राशि कम होती हैं. कोई भी व्यक्ति इसमें आसानी से  निवेश कर सकता हैं.
  • पारदर्शिता : म्यूच्यूअल फंड्स निवेश में निवेशक कभी भी इसकी सभी जानकारी प्राप्त कर सकता हैं, जोकि उसे फोन कॉल, ई मेल और ऑनलाइन वेबसाइट्स के द्वारा मिल सकती हैं.

म्यूच्यूअल फंड्स से हानि (Disadvantages of Mutual Funds )

  • इसमें कोई गारंटी नहीं होती है.
  • इसमें कर अक्षमता होती हैं.
  • खराब व्यापार का निष्पादन (execution) होता है.
  • प्रबंधन का दुर्व्यवहार होता है.
  • उच्च व्यय अनुपात और बिक्री शुल्क लगता है.

डेब्ट म्यूच्यूअल फंड (Debt mutual funds )

डेब्ट फण्ड उस तरह के म्यूच्यूअल फण्ड हैं, जिनमे एक सीमित आय के मद्देनज़र निवेश किया जाता है, जैसे सिक्यूरिटी बांड, ट्रेज़री बांड. डेब्ट फण्ड के अंतर्गत गिल्ट फण्ड, मंथली इनकम प्लान, अल्प समय प्लान, लिक्विड फण्ड, फिक्स्ड मच्योरिटी प्लान आदि आते हैं. इन सबके अतिरिक्त डेब्ट फण्ड के अंतर्गत अल्प सामायिक से दीर्घ सामयिक तक हर तरह की योजना उपलब्ध रहती है. ये मुख्यतः उन लोगों के लिए होता है, जो परिवर्तनशील इक्विटी मार्किट में निवेश नहीं करना चाहते हैं. ये एक कम लाभ किन्तु लगातार लाभ देने वाली योजना है. साथ ही ये स्टोक्क मार्किट से बहुत आसान पद्दति में काम करता है.

विभिन्न प्रकार के डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड (Debt mutual funds types)

अलग अलग तरह से अलग अलग समय काल के निवेश को ध्यान में रखते हुए कई तरह के डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड उपलब्ध हैं. नीचे मुख्य डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड के नाम और उनके संक्षिप वर्णन दिए जा रहे हैं.

  • लिक्विड या मनी मार्किट फण्ड : इस नीति के अंतर्गत निवेशक का धन बहुत कम समय के मार्केट इन्वेस्टमेंट जैसे ट्रेज़री बिल, सरकारी सुरक्षा आदि में निवेश किया जाता है, जिसमे जोखिम बहुत कम होता है. ये 91 दिन के लिए भी बाज़ार में लगाया जाता है. ऐसे निवेश परिवर्तनशील नहीं होते.

      लिक्विड फण्ड के फायदे :

  1. ऐसे म्यूच्यूअल फण्ड का कोई लॉक इन पीरियड नहीं होता है. साथ ही इस तरह के निवेश से पैसे उठाने का क्रम किसी व्यापार के दिन के 24 घंटे के अन्दर शुरू हो जाता हैं.
  2. लिक्विड फण्ड में अन्य तरह के म्यूच्यूअल डेब्ट से ब्याज दर का जोखिम बहुत कम होता है, क्योंकि इससे कम समय के लिए निवेश किया जाता है.
  • अल्ट्रा शोर्ट टर्म फण्ड : ये भी एक अल्प सामायिक निवेश है किन्तु कई तरह से ये लिक्विड फण्ड निवेश से भिन्न है. जैसे :
  1. इसमें मच्योरीटी पीरियड 91 दिन से अधिक का होता है.
  2. एक ब्याज दर से निवेशक के धन की सुरक्षा तो करता है किन्तु बाज़ार की अस्थिरता को संभाल नहीं पाता.
  3. इसके लिए एक तरह का ‘एग्जिट लोड’ चार्ज देना पड़ता है, जो इसे अधिक स्थिर बनाती है, किन्तु लिक्विड फण्ड में ऐसा चार्ज नहीं लगता.
  4. ये लिक्विड फण्ड से अच्छा रिटर्न देता है.
  • मंथली इनकम प्लान : मंथली इनकम प्लान के तहत निवेशक को एक नियमित भुगतान की प्राप्ति होती है. कोई निवेशक इस लाभ को प्रति महीने, प्रति तीन महीने पर, अर्धवार्षिक अथवा वार्षिक रूप में प्राप्त कर सकता है. मंथली इनकम प्लान मुख्यतः निवेश के बहुत बड़े हिस्से से जुड़ा होता है. इस निवेश में इस बात का ध्यान रखना अति आवश्यक है कि ये निवेश किये गये धन की वृद्धि पर निर्भर करता है. इसमें सभी भुगतान अनिवार्य नहीं हैं.
  • गिल्ट फण्ड : गिल्ट फण्ड में निवेशक का धन एक लम्बे समय के लिए सरकारी सुरक्षाओं के अधीन रहता है. ये कदाचित सबसे अधिक सुरक्षित निवेश हो सकता है किन्तु इस बात का ध्यान रखना अति आवश्यक है कि गिल्ट फण्ड के रिटर्न में कई तरह की विविधता देखी जाती है. आम तौर पर एक नियमित गिल्ट फण्ड प्रत्येक छः महीने में 5 प्रतिशत वार्षिक तौर पर 16 प्रतिशत और प्रति पांच वर्षों में 9 प्रतिशत के दर से घटता बढ़ता है.
  • शोर्ट टर्म प्लान : ये फण्ड उन लोगों के लिए हैं जो 3-6 मिहिने के निवेश के क्षितिज के साथ है. ये फण्ड मुख्य रूप से शोर्ट टर्म पेपर जैसे सर्टिफिकेट और डिपाजिट (CDs) और कोमेर्सिअल पेपर (CP) में निवेश करते हैं.कॉर्पस के कुछ हिस्से को भी कॉर्पोरेट में निवेश किया जाता है.

डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड के लाभ (Debt mutual funds benefits)

  • डेब्ट फण्ड फिक्स्ड डिपाजिट से अधिक लाभकारी है क्योंकि ये फिक्स्ड डिपाजिट से अधिक टैक्स फ्रेंडली है.
  • यदि निवेशक कम समय का अपरक्राम्य लाभ पाना चाहता है तो डेब्ट फण्ड का विकल्प उसके लिए बहुत अच्छा साबित हो सकता है.

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Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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