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हिंदी कविता : बेटी की पुकार

बेटी की पुकार हिंदी कविता | हमारे देश में एक बड़ी बुरी प्रथा हैं यहाँ शादी को जीवन का आधार माना जाता हैं | खास कर बेटियों को बचपन से शादी के लिए तैयार किया जाता हैं | उसे हर बात पर कहा जाता हैं ऐसा मत कर वैसा मत कर तूझे दुसरे घर जाना हैं | अगर किसी भी कारण से किसी की शादी ना हुई हो तो उसे बैचारा माना जाता हैं उसके लिए दया का भाव रखा जाता हैं | लड़कियों के लिए तो जीवन का मायना ही शादी बना दिया गया हैं जहाँ एक ओर एक सफल परवरिश दी जाती हैं वहीँ उस परवरिश के पीछे एक अच्छे रिश्ते की कल्पना की जाती हैं | इस तरह की सोच से निकलना मुश्किल हैं क्यूंकि 10 में से 9 का यही मानना हैं भले वो पढ़ा लिखा हो या अनपढ़ |

Daughter Poem In Hindi1

बेटी की पुकार

तेरी ही बगिया में खिली हूँ,

तितली बन आसमां में उड़ी हूँ |

मेरी उड़ान को यूँ शर्मिंदा ना कर,

मुझे शादी के लिए बड़ा न कर ||

कर्णिका पाठक

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Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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