भीम और हनुमान की कहानी | Bheem And Hanuman Story In Hindi

Bheem And Hanuman Story In Hindi भीम, हिन्दू पौराणिक कथा महाभारत के एक अहम पात्र थे, एवं हनुमान जी, हिन्दू पौराणिक कथा रामायण के एक अहम पात्र थे. वैसे इन दोनों कथाओ में युगों का अंतर है, किन्तु महाभारत की कथा में हनुमान जी का भी एक प्रसंग आता है, जिसमे हनुमान जी भीम का महाभारत के युद्ध के लिए मार्गदर्शन करने के लिए और उन्हें आशीर्वाद देने के लिए आते है. हनुमान जी एक वानर थे एवं भीम एक इंसान थे, किन्तु फिर भी भीम और हनुमान दोनों भाई कहे जाते हैं, क्यूकि वे दोनों ही भगवान पवन के पुत्र थे. भीम और हनुमान दोनों ही अत्यंत बलशाली थे, एवं दोनों का शस्त्र गदा था.  

आज इस आर्टिकल में हम आपको उस प्रसंग के बारे में बताएँगे, जब भीम की मुलाकात अपने बड़े भाई यानि हनुमान जी से होती है.

भीम जी का परिचय

भीम का परिचय निम्न सूची के आधार पर किया गया है-

क्र.. परिचय बिंदु परिचय
1. पूरा नाम भीमसेन
2. जन्म भूमि हस्तानापुर
3. पिता पांडू
4. माता कुंती
5. धर्म पिता भगवान पवन
6. भाई युधिष्ठिर, अर्जुन, नकुल, सहदेव
7. पत्नी हिडिंबा, द्रौपदी
8. पुत्र घटोत्कच, सुतासोमा
9. शस्त्र गदा
10. हिन्दू पौराणिक कथा महाभारत

भीम का पूरा नाम भीमसेन था. उनके पिता पांडू थे, किन्तु उनकी माता कुंती को एक बार वरदान में एक मंत्र दिया गया था, जब भी वे किसी भी देवता का हृदय से स्मरण कर उस मंत्र का उच्चारण करेंगी, तो उन्हें उन देवता से एक पुत्र की प्राप्ति होगी. कुंती ने भगवान पवन का स्मरण किया था, जिससे उन्हें भीम की प्राप्ति हुई, इसलिए भीम के धर्म पिता भगवान पवन थे. माता कुंती ने इसके अलावा 4 और पुत्रों को जन्म दिया. इनके पिता पांडू थे इसलिए इन्हें पांडव कहा जाता है.

भीम की 2 पत्नियाँ थी, पहली पत्नी हिडिंबा थी जोकि राक्षस हिडिम्ब की बहन थी. उसके द्वारा भीम का एक पुत्र घटोत्कच हुआ. भीम और हिडिम्बा के विवाह की कथा यहाँ पढ़ें. इसके बाद जब राजा द्रुपद की पुत्री द्रौपदी का स्वयंवर हुआ, तब उस स्वयंवर को अर्जुन ने जीता किन्तु माता कुंती के आदेश से रानी द्रौपदी अर्जुन के साथ – साथ पांचों पांडवों की पत्नी कहलाई. इनके द्वारा भीम का एक और पुत्र सुतासोमा हुआ. महाभारत के युद्ध के दौरान भीम के दोनों पुत्रों की मृत्यु हो गई थी.

हनुमान जी का परिचय

हनुमान जी का परिचय निम्न सूची में दर्शाया गया है-

क्र.. परिचय बिंदु परिचय
1. पूरा नाम हनुमान
2. पिता केसरी
3. माता अंजना
4. धर्म पिता भगवान पवन
5. संबंधन(affiliation) राम के भक्त एवं भगवान शिव के अवतार
6. निवास कदली वन
7. पत्नी हनुमान जी बाल ब्रम्हचारी थे
8. शस्त्र गदा
9. हिन्दू पौराणिक कथा रामायण

हनुमान जी का जन्म वानर रूप में हुआ था. उनकी माता अंजना एक अप्सरा थी, जिन्होंने एक अभिश्राप के कारण पृथ्वी पर जन्म लिया. उन्होंने एक बेटे को जन्म दिया, जिससे वे अभिश्राप से मुक्त हो गईं. वाल्मीकि जी द्वारा लिखी गई रामायण के अनुसार हनुमान जी के पिता केसरी है जोकि राहू के पुत्र थे. वे सुमेरु के राजा थे. अंजना ने 12 साल तक शिव जी की आराधना की ताकि उन्हें एक पुत्र की प्राप्ति हो. तब भगवान शिव ने अपने 11वें अवतार हनुमान जी के रूप में अंजना के गर्भ से जन्म लिया एवं अंजना केसरी की पत्नी थीं. हनुमान जी के धर्म पिता भगवान पवन भी है क्यूकि जिस समय अंजना अपने पुत्र की प्राप्ति के लिए तपस्या कर रही थी. उसी वक्त अयोध्या में राजा दशरथ पुत्र कामना यज्ञ का अनुष्ठान कर रहे थे.

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इस दौरान राजा दशरथ की तीनों पत्नियों को एक – एक फल दिया गया, जिससे उन्हें पुत्र की प्राप्ति हो सके, किन्तु उनमें से एक फल वायु के द्वारा अंजना के हाथों में जा गिरा. जिसे खा कर अंजना को पुत्र की प्राप्ति हुई इसलिए हनुमान जी पवन पुत्र कहे जाते है. हनुमान जी बचपन से ही बहुत बलशाली थे, इसलिए उन्हें बजरंगबली भी कहा जाता है. हनुमान जी पूर्ण रूप से ब्रम्हचारी भी थे. वे भगवान राम के बहुत बड़े भक्त थे, और उन्होंने माता सीता की भी खोज की, साथ ही रावण के साथ युद्ध में अपनी सेना के सबसे आगे रहे. इन्होंने भगवान राम की सुग्रीव के साथ मित्रता कराई, राम सुग्रीव मित्रता की कहानी यहाँ पढ़ें.  जिससे उन्होंने माता सीता की खोज करने में तथा रावण के साथ युद्ध में भगवान राम का साथ दिया. हनुमान जी ने माता सीता की खोज करने के लिए सौ योजन चौड़ा समुद्र लांघा, और लंका पहुँच कर लंका का दहन भी किया. लंका दहन की कहानी यहाँ पढ़ें.

भीम और हनुमान की कहानी

Bheem And Hanuman Story In Hindi

भीम और हनुमान जी की मुलाकात की कहानी इस प्रकार है-

हिन्दू पौराणिक कथा महाभारत में जब पांडवों को 12 वर्ष का वनवास और 1 वर्ष का अज्ञातवास मिला था, तब वे सभी वन में वास करने लगे. अर्जुन देवराज इंद्र से दिव्य शस्त्र पाने के लिए हिमालय में तपस्या करने चला गया. ताकि वह भीष्म, द्रोणाचार्य, कृपाचार्य, कर्ण एवं अश्वथामा जैसे और भी वीर योद्धाओं को युद्ध में परास्त कर सके. यह उसके लिए जरुरी भी था. दुसरे 4 पांडव और द्रौपदी की उस समय की जिन्दगी अर्जुन के बिना खुशियों से रहित हो गई थी. उस समय के  बदलाव की इच्छा से वे सभी एक और शांतिपूर्ण स्थान की तलाश में चले गये, और चलते – चलते वे नारायण आश्रम पहुँचे. उन्होंने यह निश्चय किया कि कुछ समय वे यहीं विश्राम करेंगे.

फिर एक दिन उत्तर – पूर्व दिशा से एक कमल का पुष्प द्रौपदी के पास उड़ कर आया. वह पुष्प बहुत ही सुगन्धित था. उसकी सुगंध से द्रौपदी उस कमल पुष्प पर मोहित हो गई. उसने भीम से इस तरह के और पुष्प लाने के लिए कहा. भीम, द्रौपदी की इच्छा को पूरा करने के लिए उस कमल पुष्प की खोज में उस ओर चल दिये, जिस ओर से उस कमल पुष्प की सुगंध आ रही थी. पुष्प की खोज करते – करते वे एक वन में पहुंचे. वन के द्वार में एक वानर लेटा हुआ था जोकि भीम का रास्ता रोके हुए था.

भीम ने उस वानर से कहा –“हे वानर ! रास्ते से हटो और मेरा रास्ता साफ करो”. उस वानर का रास्ते से उठने का कोई मूड नहीं था.

उस वानर ने भीम से कहा –“ मैं बहुत बुढ़ा और कमजोर हो चूका हूँ, यदि तुम्हें जाना है तो मुझे लाँघ कर चले जाओ”.

भीम ने नाराज होकर बत्तमीजी से फिर उस वानर को हटने के लिए कहा, फिर भी वानर वहाँ से नहीं हटा. तब भीम ने कहा कि –“बूढ़े वानर, तुम नहीं जानते कि तुम किससे बात कर रहे हो. मैं कुरु दौड़ से एक क्षत्रिय हूँ. मैं माता कुंती का पुत्र हूँ और भगवान पवन मेरे पिता हैं. मैं भीम हूँ, प्रसिद्ध हनुमान का भाई. तो, यदि तुम मेरा अपमान करते हो तो तुम्हें मेरा प्रकोप झेलना होगा. इसलिए तुम्हारे लिए बेहतर है कि तुम मेरा समय बर्बाद किये बिना यहाँ से उठो और दूसरे स्थान पर चले जाओ”.

तब वानर ने भीम से कहा –“यदि तुम्हें इतनी जल्दी है तो तुम मेरी पूँछ को हटाकर निकल जाओ”.

भीम ने पूँछ हटाना शुरू किया किन्तु वानर को कोई असर नहीं हुआ.

वानर ने भीम से पूछा कि –“हनुमान कौन है? मुझे उसके बारे में बताओ कि वह इतना महान क्यों है, उसने ऐसा क्या किया है?”

भीम ने कहा –“तुम इतने मूर्ख और अज्ञानी कैसे हो सकते हो? तुमने शक्तिशाली हनुमान के बारे में नहीं सुना? जिसने श्रीराम की पत्नी सीता की खोज में सौ योजन चौड़ा समुद्र लाँघा और लंका पहुंचे. दरअसल तुम अनभिज्ञ हो”.

वह वानर सिर्फ मुस्कुरा रहा था और भीम वानर की पूँछ हटाने की कोशिश कर रहे  थे. उसने बहुत बल लगाया उसकी पूँछ हटाने में किन्तु उस वानर की पूँछ टस से मस नहीं हुई.

भीम को कुछ अलग सा महसूस हुआ और उसने उस वानर से कहा –“आप कोई साधारण वानर नहीं हैं. कृपा करके मुझे बताये की आप कौन हैं?”

तब वानर ने कहा –“भीम ! मैं वहीँ हनुमान हूँ जिसके बारे में अभी तुम बता रहे थे. मैं ही तुम्हारा बड़ा भाई हूँ. तुम्हारा रास्ता आगे खतरनाक है. यह रास्ता देवताओं का है और यह मनुष्यों के लिए सुरक्षित नहीं है. इसलिए मैं तुम्हारी रक्षा के लिए आया था. मैं जानता हूँ कि तुम यहाँ सुगन्धित कमल पुष्प लेने आये हो. मैं तुम्हें वह तालाब दिखाऊंगा जहाँ वह पुष्प उगते हैं. तुम वहाँ से जितने चाहे पुष्प ले कर यहाँ से जा सकते हो”.

भीम बहुत खुश हुये, और वे हनुमान जी के सामने झुक कर उनसे अनुरोध करने लगे कि –“मैं आपका वह विशाल रूप देखना चाहता हूँ जिससे आप सौ योजन चौड़ा समुद्र लाँघ कर लंका की भूमि पर पहुंचे थे”.

हनुमान जी ने अपने उस विशाल रूप को धारण कर भीम को दर्शन दिया. भीम उनके विशाल रूप को देख कर दंग रह गये और अपनी आँखें बंद कर ली. फिर हनुमान जी ने अपने सधारण रूप में आकर भीम को गले लगा लिया, और भीम उनसे धन्य हो गए.

हनुमान जी ने भीम को आश्वासन दिया कि –“जब तुम युद्ध के मैदान में शेर की तरह आह्वान करोगे तो मेरी आवाज तुम्हारी आवाज से जुड़ जाएगी, जिससे शत्रुओं की छाती में आतंक छा जायेगा. मैं अर्जुन के रथ के झंडे पर विराजमान रहूँगा. तुम्हारी ही विजयी होगी”.

हनुमान जी के गले लगाने से भीम की ताकत और बढ़ गई. हनुमान जी ने अपने भाई भीम को उसके अहंकार से मुक्त कर दिया, एवं भीम को दुश्मनों से लड़ने के लिए अधिक से अधिक शक्ति प्रदान की. हनुमान जी ने भीम को आशीर्वाद दिया और वहाँ से चले गए. हनुमान जी की सलाह के बाद, भीम ने द्रौपदी के लिए तालाब से बहुत से पुष्प अर्जित किये और वापस चले गए. वहाँ द्रौपदी भीम के लौटने का बेसबरी से इंतजार कर रही थी.

इस प्रकार हनुमान जी की भीम से मुलाकात हुई और उन्होंने अपने भाई भीम को महाभारत के युद्ध में लड़ने के लिए ताकत दी.

Surbhi

सुरभिदीपावली वेबसाइट की लेखिका है| जिनको जीवनी व हिंदी के अन्य सभी विषयों मे लिखने का शोक है|

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