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कैप्चा क्या है और क्यों इस्तिमाल होता है। What is Captcha and why is it used in hindi

कैप्चा क्या है और क्यों इस्तिमाल होता है। What is Captcha and why is it used in hindi | कैप्चा का इतिहास

मानव जीवन में इन्टरनेट आज की आवश्यकता हो गई है. इसकी सहायता से कई कार्य बैठे बैठे आसानी से किये जाने लगे हैं. इसकी सहायता से बैंकिंग, ऑनलाइन परीक्षा फॉर्म जमा करना, किसी शिक्षण संस्थान में प्रवेश लेना आदि किया जाता रहा है. किन्तु इसी के साथ एक प्रश्न सुरक्षा का भी खड़ा हुआ है. कई लोग विभिन्न तरह के ऑनलाइन धोखेधड़ी का शिकार हुए. कैप्चा का प्रयोग भी इंटरनेट सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए किया जाने लगा है. यहाँ पर इससे सम्बंधित विशिष्ट और महत्वपूर्ण जानकारियों का वर्णन किया जा रहा है.

कैप्चा क्या है

कैप्चा क्या है  (What is Captcha in hindi)

कैप्चा का पूरा नाम ‘कम्प्लीटली ऑटोमेटेड पब्लिक टर्निंग टेस्ट टू टेल ह्युमन अपार्ट’ है, जो एक चुनौती है. इसकी सहयता से कंप्यूटर पर इस बात की पुष्टि होती है कि यूजर कोई मनुष्य है या नहीं. इस तरह के कैप्चा में ‘अल्फाबेट और नंबर’ आदि होते हैं, जिसे विकृत कर दिया जाता है, क्योंकि यह जांच प्रक्रिया कंप्यूटर की सहायता से पूरी की जाती है, अतः इसे ‘रिवर्स टर्निंग टेस्ट’ भी कहा जाता है. इस यूजर आइडेंटिफिकेशन टेस्ट की हालांकि बहुत आलोचना भी हुई क्योंकि दृष्टि दोष वालों को इस टेस्ट को पार करने में बहुत परेशानी होती है. एक आम आदमी को किसी कैप्चा को हल करने में कम से कम 10 सेकंड का समय लगता है.

कैप्चा का इतिहास (Captcha History)

इंटरनेट के शुरूआती दिनों में कई यूजर विभिन्न इंटरनेट फोरम के पेज के टेक्स्ट को अस्पष्ट बनाने की कोशिश किया करते थे, ताकि इसमें लिखी गयी चीज़े सिर्फ ‘keywords’ की सहायता से संचालित हो सके. कालांतर में इसे ‘लीट स्पीक’ कहा जाने लगा. लीटस्पीक एक तकनीकी शब्द है, जिसके अंतर्गत विभिन्न भाषाओं के अल्फाबेट एक साथ लिखे हुए रहते हैं. कैप्चा का पहला वाणिज्यिक प्रयोग वर्ष 2000 में ‘गौसबेक लेवचिन टेस्ट’ के अंतर्गत idrive.com के साइन अप पेज को सुरक्षित रखने के लिए किया गया. इसके बाद वर्ष 2001 में पेपल ने भी इसका प्रयोग अपने वेबसाइट के यूजर को धोखाधड़ी से बचाने के लिए किया.

कैप्चा के आविष्कार सम्बंधित दावे (Captcha Inventor)                          

इसका अविर्भाव 2003 में लुइस वों अहन, मनुएल ब्लूम, निकोलस जे हॉपर और जॉन लंग्फोर्ड ने किया था. कैप्चा का सबसे सरल और आम प्रारूप सन 1997 में हुआ था. इस समय इसका निर्माण दो अलग समूह ने एक साथ किया था. अतः ये दोनों समूह के लोग ही ख़ुद को इसका पहला आविष्कारक मानते हैं. पहले समूह में मुख्य नाम मार्क डी लिलिब्रिज, मार्टिन आबादी, कृष्णा भारत और अंद्रेई जे बॉर्डर तथा दूसरे समूह में मुख्य नाम इरान रेशेफ़, गिल्ली रानन और एइलों सोलन है.

यह एक तरह का सॉफ्टवेयर है, जो किसी वेब टास्क को दोहराने के अंतर्गत करता है. इसका प्रयोग वेब स्पाइडरिंग के लिए सबसे अधिक हुआ है. अपने द्वारा बनाए गये इमेजेस को ओसीआर हमले से बचाने के लिए पहली टीम यानि पहले समूह ने अपने ‘ब्रदर स्कैनर’ मैन्युअल पर दृष्टि डाली, जिसके प्रयोग से ओसीआर परिणामों को बेहतर बनाया जा सका. दूसरी लुइस वोहन की टीम ने पहली बार वर्ष 2003 के संस्करण में इसे परिभाषित किया. इस वर्णन के बाद मीडिया का ध्यान इनकी तरफ़ आकर्षित हुआ और इस टीम को खूब ख्याति प्राप्त हुई. इनके अनुसार कैप्चा के अंतर्गत वैसे सभी प्रोग्राम आ सकते हैं, जो किसी रोबोट और मनुष्य के बीच फ़र्क कर सकता है. मीडिया चैनल के सकारात्मक व नकारात्मक प्रभाव यहाँ पढ़ें.

आविष्कार के दावा से सम्बंधित इस समस्या को वर्ष 1997 के पेटेंट एप्लीकेशन की सहायता से हल किया गया. यह एप्लीकेशन इरान रेशेफ़, गिल्ली रनान और एइलों सोलन के नाम से थी, जो पहले स्कैन्टम के ‘एप्लीकेशन सिक्यूरिटी फ़ायरवॉल’ के अंतर्गत काम कर चुके थे. इनके पेटेंट एप्लीकेशन में लिखा गया है कि ‘यह आविष्कार कंप्यूटर सॉफ्टवेयर के साधारण समस्याओं को संज्ञानात्मक और सेंसरी तौर पर हल करने के लिए बनाया गया है.’ वर्ष 1998 में लिलिब्रिज, अबादी, भारत और बॉर्डर ने भी एक ऐसा पेटेंट कराया. हालाँकि इन्होने कैप्चा शब्द का वर्णन नहीं किया था, किन्तु इससे सम्बंधित उनकी अवधारणाओ का विस्तृत वर्णन किया था.

कैप्चा की विशेषताएं (Captcha Features)

आधुनिक तौर पर कैप्चा इस तरह से बनाए जा रहे हैं, कि इसके प्रयोग के समय तीन अलग मानव सक्षमताओं (competencies) का प्रयोग हो सके. ये तीन सक्षमतायें है : अपरिवर्तनीय मान्यता (invariant recognition), विभाजन (segmentation) और पद विच्छेदन (parsing). इन तीनों स्तरों को एक साथ पार कर लेने पर ही आगे की इंटरनेट सम्बंधित प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी. इन तीनों गुणों का वर्णन नीचे दिया जा रहा है.

  • इनवेरिएंट रेकोग्निशन के अंतर्गत कैप्चा में प्रयोग किये जा रहे अक्षरों को आकार में बड़ा बनाया जाता है. मनुष्य का मस्तिष्क एक शब्द के असंख्य इमेज को देख कर भी उस अक्षर की पुष्टि कर सकता है, किन्तु एक कंप्यूटर के लिए यह संभव नहीं है अतः इस विशिष्टता का प्रयोग कैप्चा के निर्माण में किया जाता है.
  • सेगमेंटेशन के अंतर्गत एक अक्षर को दुसरे अक्षर से अलग रखा जाता है, किन्तु कैप्चा में इसे परखना कठिन बनाया जाता है. आम तौर पर किसी कैप्चा में सभी अक्षर एक दुसरे से चिपके हुए नज़र आते हैं.
  • कांटेक्स या parsing भी कैप्चा में इस तरह से बनाया हुआ रहता है कि इसे समझने के लिए किसी कैप्चा को समग्र रूप से देखने की आवश्यकता होती है. उदाहरण के तौर पर कैप्चा के किसी एक सेगमेंट में कोई अक्षर ‘m’ की तरह दिख रहा है, तो पूरे कैप्चा इमेज को समग्र रूप से देखने पर वह u और n का सम्म्लेलन भी हो सकता है.

यह तीनों गुण किसी कैप्चा को वेब रोबोट के लिए मुश्किल बनाती है तथा कोई वेबसाईट तथा उसमें मौजूद चीज़ें सुरक्षित रहती हैं. और व्यक्ति अपने मस्तिष्क से इसे आसानी से हल कर सकता है.

कैप्चा के साधारण उपयोग (Captcha Code Uses)

इसका उपयोग निम्न के लिए किया जाता है :

  1. एआई (आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस) से सम्बन्ध : सुरक्षा के रूप से अधिकतर इस्तेमाल होने पर कैप्चा का इस्तेमाल आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के बेंचमार्क टास्क के लिए किया जाता है. कैप्चा के निर्माताओं में अपना नाम दर्ज कराने वाले अहन, ब्लम और लंग्फोर्ड के अनुसार कोई भी ऐसा प्रोग्राम जो कैप्चा के टेस्ट को पास कर सकता है, उसे मुश्किल तथा अनसुलझे एआई समस्याओं को समाधान करने के लिए प्रयोग किया जा सकता है. इनके तर्क के अनुसार मुश्किल एआई समस्याओं को हल करने के लिए इसका प्रयोग दो रूप से लाभ दे सकता है. इसके अंतर्गत या तो समस्या अनसुलझी रहेगी तथा कंप्यूटर और मनुष्य के बीच फ़र्क करने का यह तरीक़ा ज़ारी रहेगा अथवा एआई सम्बंधित एक मुश्किल समस्या का समाधान हो जाएगा.
  2. सरल उपयोग : कैप्चा एक ‘टेक्स्ट रीडिंग’ जैसा टास्क है, जिसमे वर्ण अक्षर, संख्याएँ आदि हो सकती हैं. किन्तु यह टास्क किसी ऐसे व्यक्ति द्वारा नहीं पूरा किया जा सकता है, जिसे किसी तरह की दृष्टि दोष हो. हालाँकि दृष्टि दोष सम्बंधित व्यक्तियों के लिए विशेष ऑडियो कैप्चा का भी निर्माण हुआ है. जहाँ पर ऑडियो के माध्यम से कन्फर्मेशन पूरी हो सकती है. कैप्चा का प्रयोग इसके आविष्कार के बाद इंटरनेट सम्बंधित लगभग हर क्षेत्र में हुआ है. पीपल, जीमेल, ऑरकुट, याहू आदि में इसका प्रयोग बहुत ही अधिक हुआ है. यहाँ पर इसके प्रयोग क्षेत्र का वर्णन दिया जा रहा है.
  3. ई-टिकटिंग की सुरक्षा के लिए : इसके अंतर्गत सभी तरह के ऑनलाइन टिकट बुकिंग के लिए कैप्चा का प्रयोग होता है. चाहे रेस्टोरेंट टेबल बुक करना हो, कंसर्ट टिकट बुक करना हो, सफ़र से सम्बंधित हवाई जहाज़ अथवा रेल टिकट बुक करना हो, सभी में कैप्चा का प्रयोग होता है. इस क्षेत्र में कैप्चा का प्रयोग इन कंपनियों को बड़ी हानियों से बचाता है. यदि हैकर वेब रोबोट की सहायता से टिकट बुकिंग की प्रक्रिया को अंजाम देता है, तो इससे इन कंपनियों को बहुत बड़ी आर्थिक हानि होती है.
  4. वेब पंजीकरण की सुरक्षा : तात्कालिक समय में कई ऐसी ऑनलाइन सुविधाएं आयीं है, जहाँ पर लोग मुफ्त में सेवा का आनंद उठा सकते हैं. यदि इनके लिए कैप्चा सॉफ्टवेयर का प्रयोग न किया जाए तो हो सकता है कि वेब रोबोट असंख्य अकाउंट बना डालें और नेटवर्किंग में परेशानी होने लगे. इसी के साथ ईमेल स्पैम आदि की परेशानी हो सकती है और कई लोगों के निजी जानकारियाँ खतरे में पड़ सकती हैं. इस वजह से यह ऑनलाइन साइट्स के लिए भी प्रयोग होता है.
  5. ऑनलाइन पोल की सुरक्षा के लिए : ऑनलाइन वोटिंग को प्रभावित करने के लिए वेब रोबोट का सर्वाधिक प्रयोग किया जाता है. कोई हैकर इसका प्रयोग किसी प्रत्याशी को जीताने के लिए कर सकता है. अतः ऑनलाइन पोल को इस प्रभाव से बचाने के लिए ऑनलाइन पोलिंग में कैप्चा का प्रयोग किया जाता है.
  6. ब्लॉग को स्पैम से बचाने के लिए: किसी ब्लॉग के कमेंट सेक्शन को कोई भी व्यक्ति एक्सेस कर सकता है. अतः इस क्षेत्र को यदि सुरक्षित न रखा जाए, तो अनावश्यक विभिन्न तरह के प्रचार आदि भी आने लगते हैं. इस वजह से ब्लॉग की सत्यता और प्रतिष्ठा पर असर होने लगता है. इस कुप्रभाव से ब्लॉग को बचाने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है.

कैप्चा को तोड़ने की तरकीब (Captcha Tricks)

कैप्चा को प्रभावित करने के कई तरकीब भी आ चुके हैं, जो इसे ग़ैर क़ानूनी रूप से तोड़ने के लिए विभिन्न हैकरों द्वारा ग़लत कामों के लिए इस्तेमाल किया जाता है. कैप्चा पर विभिन्न तरह के अटैक का वर्णन नीचे किया जा रहा है.

  • mori et al द्वारा आई.ई.ई.ई के तहत एक पेपर संपादित किया गया था, जिसमे कैप्चा को तोड़ने का वर्णन किया गया था. इस पेपर के अंतर्गत ये पता लगा कि किसी कैप्चा को 92% तक तोडे जाने की संभावना होती है. इसी पेपर के तहत ये पता चला कि गिप्पी प्रोग्राम को केवल 33% तक ही तोड़ा जाता है.
  • PWNtcha ने कैप्चा को हराने में एक बेहतर भूमिका निभायी है. इस वजह से अब अधिक उत्तम प्रकार के कैप्चा का निर्माण किया जा सकता है.
  • कैस्पेर्सकाई नामक एक सिक्यूरिटी कंपनी ने पोडक नाम का ट्रोजन बनाया था. यह ट्रोजन कैप्चा को एक ‘ऑनलाइन ह्यूमन सर्विस’ तक पहुंचा देता है. यहाँ पर किसी भी कैप्चा इमेज को टेक्स्ट में बदला जाता है और इस तरह से कैप्चा को धोखा देना आसान हो जाता है.

वैकल्पिक कैप्चा स्कीम (Optional Captcha Scheme)

टेक्स्ट डिस्टोर्शन प्रकार के कैप्चा को मशीन लर्निंग आधारित हमलों से तोडना बहुत सहज है. कई रिसर्च में एक वैकल्पिक कैप्चा बनाने का प्रस्ताव सामने आया, ताकि इसे और अधिक सुरक्षित किया जा सके. कुछ वैकल्पिक कैप्चा का वर्णन नीचे किया जा रहा है.

  • Chew et al सातवें अंतर्राष्ट्रीय इनफार्मेशन सिक्यूरिटी के समय एक अलग इमेज रिकग्निशन (recognition) कैप्चा बनाने का निर्णय लिया. इसी समय एक प्रास्ताव में ये सामने आया कि एक अनोमली कैप्चा शत प्रतिशत मानव के प्रयोग के लिए बेहतर है.
  • Datta et al ने एसीएम मल्टीमीडिया के कांफ्रेंस के अंतर्गत अपने पेपर के ज़रिये ‘इमेजिनेशन’ नामक कैप्चा के विषय में बताया. इमेजिनेशन शब्द का फुल फॉर्म “इमेज जनरेशन ऑफ़ इंटरनेट ऑथेंटिकेशन” है. इस तरह के कैप्चा में इमेज का इस्तेमाल होता है तथा इन इमेजेस को इस तरह से विकृत किया जाता है कि स्टेट ऑफ़ द आर्ट इमेज रिकग्निशन भी इसके जांच में फ़ैल हो जाते हैं.
  • माइक्रोसॉफ्ट ने भी अपनी कंपनी की तरफ़ से कैप्चा का निर्माण किया है. इनके कैप्चा का नाम है ‘एनिमल स्पिसस रिकग्निशन फॉर रेस्ट्रिक्टिंग अस्केस’ है. इस कैप्चा के इमेजेस में अक्सर कुत्ते और बिल्ली के बीच में फ़र्क करने को कहा जाता है. माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार असिर्रा (एनिमल स्पिसस रिकग्निशन फॉर रेस्ट्रिक्टिंग अस्केस) को कोई यूजर बहुत आसानी से इस्तेमाल कर सकता है. यह लगभग 99.6% मनुष्यों द्वारा हल किया जा सकता है, जिसके लिए सिर्फ 30 सेकंड के समय की आवश्यकता होती है. इस तरह के कैप्चा का भी प्रयोग इंटरनेट की दुनिया में खूब किया जा रहा है.

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Surbhi

सुरभिदीपावली वेबसाइट की लेखिका है| जिनको जीवनी व हिंदी के अन्य सभी विषयों मे लिखने का शोक है|

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