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साहित्यिक मधुशाला

Harivansh Rai Bachchan Kis Kar main yah Veena dhar dun?

किस कर में यह वीणा धर दूँ? देवों ने था जिसे बनाया, देवों ने था जिसे बजाया, मानव के हाथों में कैसे इसको आज समर्पित कर दूँ? किस कर में यह वीणा धर दूँ? इसने स्वर्ग रिझाना सीखा, स्वर्गिक तान सुनाना सीखा, जगती को खुश करनेवाले स्वर से कैसे इसको …

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Harivansh Rai Bachchan ki Kavi Ki Vasana

कवि की वासना कह रहा जग वासनामय हो रहा उद्गार मेरा! सृष्टि के प्रारम्भ में मैने उषा के गाल चूमे, बाल रवि के भाग्य वाले दीप्त भाल विशाल चूमे, प्रथम संध्या के अरुण दृग चूम कर मैने सुलाए, तारिका-कलि से सुसज्जित नव निशा के बाल चूमे, वायु के रसमय अधर …

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Harivansh Rai Bachchan ki Jivan ki Aapadhapi Main

जीवन की आपाधापी में जीवन की आपाधापी में कब वक़्त मिला कुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूँ जो किया, कहा, माना उसमें क्या बुरा भला। जिस दिन मेरी चेतना जगी मैंने देखा मैं खड़ा हुआ हूँ इस दुनिया के मेले में, हर एक यहाँ पर एक भुलाने …

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Harivansh Rai Bachchan Hai Andheri Raat Par Deewa Jalana Kab Mana Hain

है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था भावना के हाथ ने जिसमें वितानों को तना था स्वप्न ने अपने करों से था जिसे रुचि से सँवारा स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से, रसों से जो सना था ढह गया वह …

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Harivansh Rai Bachchan ki Andhere Ka Deepak

अँधेरे का दीपक है अँधेरी रात पर दीवा जलाना कब मना है? कल्पना के हाथ से कमनीय जो मंदिर बना था , भावना के हाथ से जिसमें वितानों को तना था, स्वप्न ने अपने करों से था जिसे रुचि से सँवारा, स्वर्ग के दुष्प्राप्य रंगों से, रसों से जो सना …

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