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चौमासा या चातुर्मास का महत्त्व | Chaumasa Chaturmas Mahtava In Hindi

Chaumasa Chaturmas Mahtava (Importance) In Hindi चौमासा/ चातुर मास महत्त्व आपके लिए विस्तार से लिखा गया है. जाने कई चौमासा/ चातुर मास  के नियम अवम मान्यतायें .

देश में त्यौहारों की नदियाँ बहती हैं इसलिए हमारा देश भावनाओं का देश हैं . इस नदी में चौमासा का बहुत महत्व हैं . यह हिंदी कैलंडर के हिसाब से अषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन एवं कार्तिक तक रहता हैं . इस प्रकार चौमासा आषाढ़ की एकादशी (देव सोनी एकादशी – शुक्ल पक्ष )से शुरू होकर कार्तिक की एकदशी (देव उठनी एकादशी- शुक्लपक्ष) तक चलता हैं . यह काल चौमासा कहलाता हैं .

Chaumasa Chaturmas Mahtava Importance In Hindi

चौमासा या चातुर्मास का महत्व  (Chaumasa Chaturmas Mahtava In Hindi ):

हिंदी कैलंडर में आये यह चार महीने अर्ध अषाढ़, श्रावण, भाद्रपद, अश्विन एवं अर्ध कार्तिक चातुर मास कहलाते हैं . इन दिनों कोई शुभ कार्य नहीं होते, जैसे विवाह संबंधी कार्य, मुंडन विधी, नाम करण आदि . लेकिन इन दिनों धार्मिक अनुष्ठान बहुत अधिक किये जाते हैं, जैसे भागवत कथा, रामायण, सुंदरकांड पाठ, भजन संध्या अवम सत्यनारायण पूजा आदि . इसके अलावा कई तरह के दानों का भी महत्व हैं, जिसे व्यक्ति अपनी श्रद्धा अवम हेसियत के हिसाब से करता हैं .

जैन धर्म में चौमासे का बहुत अधिक महत्व होता हैं . वे सभी पुरे महीने मंदिर जाकर धार्मिक अनुष्ठान करते हैं एवम सत्संग में भाग लेते हैं . घर के छोटे बड़े लोग जैन मंदिर परिसर में एकत्र होकर ना ना प्रकार के धार्मिक कार्य करते हैं . गुरुवरो एवम आचार्यों द्वारा सत्संग किये जाते हैं एवम मनुष्यों को सद्मार्ग दिखाया जाता हैं .

हिन्दू धर्म के भी सभी बड़े त्यौहार इन्ही चौमासा के भीतर आते हैं . सभी अपनी मान्यतानुसार इन त्यौहारों को मनाते हैं एवं धार्मिक अनुष्ठान करते हैं .

जाने चौमासा को विस्तार से (Chaturmas Details):

आषाढ़ :

सबसे पहला महीना आषाढ़ का होता है, जो शुक्ल पक्ष की देवउठनी एकादशी से शुरू होता हैं . इस प्रकार आषाढ़ के 15 दिन चौमास के अंतर्गत आते हैं . इस माह में गुरु पूर्णिमा मनाई जाती है, जिसमे गुरुओं के स्थान पर धार्मिक अनुष्ठान किये जाते हैं . गुरु एवम व्यास पूर्णिमा का महत्त्व  जानने के लिए पढ़े. कई जगहों पर मेला सजता हैं . गुरु पूर्णिमा खासतौर पर शिरडी वाले साईं बाबा, सत्य साईं बाबा, गजानन महाराज, सिंगाजी, धुनी वाले दादा एवं वे सभी स्थान जो गुरु के माने जाते हैं वहां बहुत बड़े रूप में गुरु पूर्णिमा मनाई जाती हैं .

श्रावण :

दूसरा महीना श्रावण का होता है, यह महीना बहुत ही पावन महीना होता है, इसमें भगवान शिव की पूजा अर्चना की जाती हैं . इस माह में कई बड़े त्यौहार मनाये जाते हैं जिनमे रक्षाबंधन, नाग पंचमी, हरियाली तीज, हरियाली अमावस, श्रावण सोमवार आदि विशेष रूप से मनाये जाते हैं. श्रावण सोमवार महत्व एवम कथा जानने के लिए पढ़े.

भाद्रपद :

तीसरा महीना भादो अर्थात भाद्रपद का होता हैं . इसमें भी कई त्यौहार मनाये जाते हैं जिनमे कजरी तीज, हर छठ, जन्माष्टमी, गोगा नवमी, जाया अजया एकदशी, हरतालिका तीज, गणेश चतुर्थी, ऋषि पंचमी, डोल ग्यारस, अन्नत चतुर्दशी, श्राध्य पक्ष/ पितृ पक्ष आदि आते हैं . इस तरह यह माह भी हिन्दू रीती रिवाजों से भरा पूरा रहता हैं .

आश्विन माह :

चौथा महीना आश्विन का होता हैं . अश्विन माह में पितृ मोक्ष अमावस, नव दुर्गा व्रत, दशहरा एवं शरद पूर्णिमा यह सभी त्यौहार आश्विन मास में आते हैं . इसे कुआँर का महीना भी कहा जाता हैं .

कार्तिक माह :

यह अंतिम महीना होता है, जिसके 15 दिन चौमास में शामिल होते हैं . इस महीने में दीपावली के पांच दिन, गोपा अष्टमी, आंवला नौमी, ग्यारस खोपड़ी/ प्रमोदिनी ग्यारस अथवा देव उठनी ग्यारस आती हैं . इस तरह चौमासा के दिन समाप्त होते हैं . कार्तिक माह महत्व व्रत कथा एवम पूजा विधि जानने के लिए पढ़े.

चौमास के समाप्त होते ही धार्मिक कार्य जैसे शादी, मुंडन इत्यादि का कार्य शुरू हो जाता हैं . देव उठनी ग्यारस से ही विवाह कार्य प्रारंभ हो जाते हैं . इस चौमास के अलावा अधिकमास का भी बहुत महत्व हैं इसे पुरुषोतम मास कहा जाता हैं .

पुरुषोत्तम मास / अधिक मास :

यह मास तीन साल में एक बार आता हैं . इस अधिक मास का भी उतना ही महत्व होता हैं जितना की चौमास का . जब यह अधिक मास भाद्रपद में आता है, जो कि कई वर्षों में होता हैं तब उसका महत्व और अधिक बढ़ जाता हैं . अधिक मास तीन साल में एक बार आता हैं और गणना में अनुसार वह किसी भी महीने में आ जाता हैं . अधिक मास एवम कोकिला व्रत का महत्व विधि एवम कहानी जानने के लिए पढ़े.

चौमासा के कई नियम होते हैं जो सभी अपनी मान्यतानुसार निभाते हैं . सबकी अपनी श्रद्धा होती हैं . आगे कुछ नियम आपके सामने लिखे गये हैं .

चौमासा (चातुर्मास नियम) में अपनाये जाने वाले अन्य नियम (Chaumasa Chaturmas Rule):

क्र नियम विवरण
1 स्नान चौमास के दिनों में महिलायें सूर्योदय के पूर्व उठकर स्नान करती हैं साथ ही पूजा कर मंदिर जाती हैं .खासतौर पर श्रावण कार्तिक का महिना . कार्तिक में कृष्ण एवं तुलसी की पूजा की जाती हैं .
2 उपवास/व्रत कई लोग पुरे  चार महीने एक वक्त भोजन करते हैं .रात्रि में फलहार किया जाता हैं .
3 प्याज,लहसन, बैंगन, मसूर जैसे भोज्य पदार्थ ग्रहण नहीं करते पुरे चार महीने कई लोग ये सभी पदार्थ अपने भोजन में उपयोग नहीं करते .खासतौर पर श्रावण एवं कार्तिक में
4 पैर में चप्पल नहीं पहनते   नव दुर्गा में चप्पल नही पहनते .
5 बाल एवं दाड़ी नही कटवाते श्रावण अवम नव दुर्गा में कई पुरुष अपने बाल एवं दाड़ी नहीं कटवाते .
6 धार्मिक कर्म कांड पुरे चौमासा गीता पाठ, सुंदर कांड, भजन एवम रामायण पाठ सभी अपनी श्रद्धानुसार करते हैं .इसके अलावा कई दान पूण्य अवम तीर्थयात्रा भी की जाती हैं .

हिन्दू पर्व चातुर मास के अंतर्गत मनाये जाते हैं . इनके महत्व को आपके लिए गया हैं .

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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