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चींटी की दूरदर्शिता

चींटी की दूरदर्शिता

कनखजूरे ने  चींटी को भारी-भारी सामान उठाकर ले जाते हुए देखा तो व्यंग करते हुए कहा “अरे चींटी बहन ! तुम्हें पता नहीं संग्रह करने वाले लोग पापी होते हैं और मैं स्वभाव से ही संत हूँ |” चींटी ने कहा – “कनखजूरे भाई | भोग के लिए और दूसरों को दुःख देने के लिए संग्रह करना गलत हैं, पर भविष्य की सोचकर उचित तैयारी करना, दूरदर्शिता |” यह सुनकर कनखजूरा मुंह बनाकर चींटी की बात को एक कान से सुनकर दुसरे कान से निकाल दिया और वहां से चला गया |

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थोड़े दिनों बाद बरसात के दिन शुरु हो गए | खाने की चीजों की कमी हो गई सभी परेशान थे | कनखजूरे को बहुत दिन से कुछ खाने नहीं मिला था और वह भटकता हुआ चीटियों के पास पहुंचा और भोजन की याचना करने लगा | चीटियों ने ख़ुशी से एकत्र की हुई सामग्री उनके आगे रख दी | तब जाकर कनखजूरे की आँख में आंसू आ गए और उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने चींटी से क्षमा मांगी |

Moral Of The Story:

व्यक्ति में दूरदर्शिता होना चाहिए | समय के लिए थोडा संग्रह करना गलत नहीं होता |

इसी तरह आज के समय को देखते हुए पैसे की जरुरत व्यक्ति की first and important जरुरत हैं इसलिए बचत करते हुए जीवन जीना चाहिए |  

“To be Prudent is the necessity  of the better life”

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Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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