खंडवा के कांग्रेस नेता पर रियाज़ हुसेन पर जानलेवा हमला

खंडवा के कांग्रेसी नेता रियाज़ हुसैन को अज्ञात बदमाश ने गोली मारी लेकिन रियाज़ की हालत खतरे से बहार हैं उन्हें उचित देखभाल के लिए इंदौर भेज दिया गया हैं | पुलिस के अनुसार यह आपसी रंजीश का केस हो सकता हैं | यह घटना 20 दिसम्बर 14 की हैं रियाज़ अपने घर जा रहे थे तभी अचानक लाल चौकी स्थित रेलवे गेट के पास अज्ञात व्यक्ति ने इन पर गोली चलाई | शूटर ने इनके सिर को निशाना बनाया था लेकिन गोली सिर को छू कर निकल गई | घटना के बाद हुसैन को जिला अस्पताल ले जाया गया जहाँ से उन्हें इंदौर रवाना किया गया |

riyaz hussain khandwa

घटना के बाद शहर में भगदड़ मच गई| मार्केट बंद करके व्यापारियों ने घर वापसी की | साथ ही स्कूल, कॉलेजों की भी छुट्टी घोषित कर दी गई |घटना के तुरंत बाद कांग्रेस नेता दिग्गविजय सिंह का फ़ोन आया और उन्होंने हालात का जायजा लिया |

यह पहली घटना नहीं हैं पिछले एक साल में यह तीसरी बड़ी घटना हैं जब खंडवा में गोलियाँ और चाकू चले | आये दिन इस तरह की घटना का सामने आना इस शहर में बसे खुफियाँ आतंक की ओर ईशारा कर रहा हैं |लेकिन इस और आला अफसरों का पता नहीं कितना ध्यान हैं जो इस तरह की घटनाएँ कम होने का नाम नहीं ले रही |

कई सालो से खंडवा में हिन्दू-मुस्लिम सांप्रदायिक लड़ाई होती आ रही हैं जिसके कारण शहर में कई बार कर्फ्यू लगाया जाता हैं और आये दिन 144 धारा लगी होती हैं |  जिसमे 3 से 4 लोगो का एक साथ मार्केट में घुमने, समूह में खड़े रहने  पर प्रतिबन्ध होता है|

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कुछ समय पहले भी यहाँ कर्फ्यू लगाया गया था जिसका असर राखी एवम दीपावली के व्यापार पर भी देखा गया | इन झगड़ों के कारण समाज के लोगो पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता हैं खाने पीने तक के सामना का कोई ठिकाना नहीं रह जाता | छोटे लोगो का जीवन अस्त व्यस्त हो जाता हैं रोज की मेहनत कर कमाने वाले ये मजदुर वर्ग के लिए खाने पीने तक की कोई व्यवस्था नहीं रह जाती हैं |

लेकिन अब तक ज़ारी इस तरह की वारदातों से यही लगता हैं कि इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा | कई बार बड़े बड़े आतंकी हमलो के पीछे के कुछ लोग खंडवा जैसे इन शहरों में मिलते हैं | जरुरी हैं इस शरह पर ठीक से ध्यान केन्द्रित कर इन वारदातों की तह तक पहुँचाना | वैसे तो खंडवा बहुत ही छोटा शहर हैं पर इन मामलों में इस शहर का नाम लिस्ट में बहुत उपर दिखाई देता हैं |

जब से देश में भाजपा की सरकार हैं यह दंगे बढ़ गए हैं क्या यह सब सियासी लड़ाई हैं या आपसी रंजिश या वही पुरानी हिन्दू मुस्लिम की लड़ाई इसके बारे में कुछ कह पाना मुश्किल हैं पर इन मामलों में अब पुलिस को अहम कदम उठाना जरुरी हैं इसका असर जनता पर पड़ता हैं |

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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