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जानिए क्या है ओखी चक्रवात एवं कैसे चुना जाता है चक्रवात का नाम | Cyclone Ockhi information in hindi

जानिए क्या है ओखी चक्रवात, इसका प्रभाव एवं कैसे चुना जाता है चक्रवात का नाम | Cyclone Ockhi information in hindi

भारत के कई तटीय इलाकों से लगने वाले राज्यों पर ‘ओखी’ तूफान का खतरा बना हुआ है. इस तूफान ने श्रीलंका और मालदीव जैसे देशों में काफी कोहराम मचाया हुआ है. वहीं भारत के लक्षद्वीप, केरल, मंबुई, तमिलनाड़ु, गुजरात राज्य में भी इस तूफान के चलते खतरा बना हुआ है. आखिर क्या है ये ओखी तूफान, इसके बारे में आज हम आपको जानकारी देने जा रहे हैं.

क्या है ओखी चक्रवात (What is Cyclone Ockhi)

उत्तर हिंद महासागर के खतरनाक तूफानों में से एक है ओखी तूफान, यह तूफ़ान इस साल नवंबर में श्रीलंका देश में हुई मौसम की खराबी के चलते यहां के दक्षिणी तट से उत्पन्न हुआ था. बहुत गंभीर चक्रवात तूफान की श्रेणी में रखे गए इस तूफान ने सबसे पहले श्रीलंका देश में अपना आतंक मचाया था. जिसके बाद से ये धीरे-धीरे भारत के तटीय राज्यों तक पहुंच गया है. वहीं इस तूफान की गति को देखकर भारत के मौसम विभाग के मुताबिक ये तूफान भारत के गुजरात राज्य तक अपना कहर बरसाने वाला है. वहीं अगर ‘ओखी’ शब्द की बात करें, तो इस शब्द का मतलब आंख होता है और इस तूफान का ये नाम बांग्लादेश द्वारा दिए गए नामों में से है. 

ओखी चक्रवात

ओखी तूफान से हुआ नुकसान (Cyclone Ockhi Impacts in hindi)

इस तूफान ने कई देशों का ना सिर्फ आर्थिक बल्कि जानमाल का भी नुकसान किया है. 4 दिसंबर 2017 तक इस चक्रवात से श्रीलंका में 14 लोगों की मौत हो गई थी, जबकि करीब 77 लोग बहुत बुरी तरह से घायल हो चुके है. इतना ही नहीं इस तूफान की चपेट में आकर करीब 823 घर पूरी तरह से नष्ट हो चुके है. वहीं देश के आपदा प्रबंधन के लोगों ने कई सारे घरों को खाली करवा लिया है और करीब 5,650 व्यक्ति को, 65 आपातकालीन कल्याण केन्द्रों में शरण प्रदान की है. 29 नंवबर को श्रीलंका से शुरू हुए इस चक्रवात ने 2 दिसंबर, 2017 को भारत के पश्चिमी तट की तरफ अपना रूख कर लिया था.

  • मालदीव में भी मचाया कोहराम

ओखी तूफान के मालदीव में दस्तक देते ही, इस देश के 62 द्वीपों पर बनाएं गए मकान पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गए. वहीं  36 द्वीपों में बारिश के कारण बाढ़ जैसे हालात बन गए थे. वहीं मालदीव के राष्ट्रीय रक्षा बल इस चक्रवात में फंसे लोगों को द्वीपों से सुरक्षित निकाले में लगी हुई है. इस तूफान से सरकार को काफी बड़ा नुकासन भी हुआ है.

  • भारत तटीय क्षेत्रों को किया प्रभावित

भारत के केरल और तमिलनाडु के तटीय क्षेत्रों में इस चक्रवात से काफी नुकसान पहुंचा है, जबकि करीब 15 लोगों की जान इस चक्रवात के दौरान चली गई है. 2 दिसंबर 2017 तक इस चक्रवात ने लक्षद्वीप के द्वीपों के भी कई इलाकों में तबाही मचा दी. वहीं ओखी के चलते दक्षिणी रेलवे ने नागरकोइल और कन्याकुमारी के बीच चलनेवाली अपनी ट्रेन सेवाओं को आंशिक रूप से रद्द कर दिया था. तेजी से बढ़ रहे इस तूफान के कारण मुंबई में भी काफी बारिश होने लगी और हालातों को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार ने मुंबई के स्कूल को कुछ दिन के लिए बंद कर दिया.

ऐसे हालातों में क्या करना चाहिए? (Precaution at the time of Cyclone)

वहीं अगर कोई कभी भी ऐसे हालातों में फंस जाए, तो उसे काफी सावधानी के साथ काम करना चाहिए. ऐसे हालात होने पर आप अपने घर से बाहर ना जाएं और घर के सारे बिजली के उपकरणों को बंद कर के रखें. इतना ही नहीं इस दौरान पीने का पानी केवल उबाल कर ही पीएं. वहीं सरकार द्वारा की जा रही घोषणों को वक्त-वक्त पर रेडियो पर सुनते रहे. वहीं अगर ऐसे हालातों के दौरान अगर आप अपने घर से बाहर हैं, तो सबसे पहले आप अपने लिए कोई सुरक्षित जगह देखें और कोशिश करें कि जिस जगह आप रुक रहे हैं उसके आस-पास कोई बिजली का पोल या फिर कोई पेड़ ना हो. क्योंकि मौसम खराब होने के कारण चलने वाली तेज हवाओं से सबसे ज्यादा असर पेड़ों और बिजली के खंबों पर ही पड़ता है.

चक्रवात तूफानों के रखे जाते हैं नाम 

काफी कम लोगों को ये पता होगा कि चक्रवात तूफानों का भी नामकरण किया जाता है. तूफानी चक्रवातों का नामकरण 2000 में विश्व मौसम विज्ञान संगठन और यूनाइट नेशन इकोनॉमिक एंड सोशल कमीशन फॉर एशिया एंड फेस्फिक (ईएससीएपी) द्वारा शुरू किया गया था. और ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि मौसम विभाग की ओर से आम जनता को दी जानेवाली चक्रवात की जानकारी आसानी से जनता को समझ आ सके.

कैसे चुना जाता है चक्रवात का नाम (Regions that name cyclones across the World)

आठ उत्तरी हिंद महासागरीय देश यानी बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्यांमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड चक्रवात के लिए आठ नाम देते हैं.  इसके बाद नामों की एक सूची तैयार की जाती है. फिर चक्रवातों के नाम के लिए प्रत्येक देश से दिए गए आठ नामों में से एक नाम चुना जाता है.

वहीं उत्तरी हिंद महासागर बेसिन में होने वाले चक्रवात का नाम भारतीय मौसम विज्ञान विभाग द्वारा नामित किया जाता है. भारत ने साल 2004 में पहली बार इस सूची का इस्तेमाल करते हुए उष्णकटिबंधीय चक्रवात का नाम चुना था और भारत ने इस चक्रवात का नाम ओएनिल रखा था, जो की बांग्लादेश द्वारा दिया गया था.

इसी तरह दुनिया भर के चक्रवातों का नाम उत्तरी अटलांटिक, पूर्वी उत्तरी प्रशांत, मध्य उत्तर प्रशांत, पश्चिमी उत्तर प्रशांत, उत्तरी हिंद महासागर, दक्षिण पश्चिम हिंद महासागर, ऑस्ट्रेलियाई, दक्षिणी प्रशांत, दक्षिण अटलांटिक क्षेत्रों द्वारा नामित किया जाता है.

इतना ही नहीं जिन तूफानों के कारण ज्यादा जानमाल का नुकसान होता है. उन तूफानों के नामों को उस तूफान में मारे गए लोगों के सम्मान में रिटायर कर दिया जाता है. अभी तक ऐसे 50 से अधिक चक्रवात के नामों को रिटायर किया गया है.

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