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मेरी दीपावली हिंदी कविता : व्यस्त जीवन की भावना

मेरी दीपावली हिंदी कविता | आज के व्यस्त समय में और रुपये पैसों के इस दौर में घर के बच्चे अपनों से दूर जाकर जीवन का संघर्ष करते हैं और घर में बूढ़े माँ बाप उनकी आस लगाये दरवाजे पर टकटकी लगाये बैठे रहते हैं ऐसे में क्या दीपावली के फटाके क्या पकवान की महक वो सभी तो बस कुछ पल साथ बिताना चाहते हैं | आधुनिक दौर में त्योहारों की परिभाषा बदल गई हैं धार्मिक रीति रिवाज़ तो बहाना हैं बस किसी तरह अपनों के करीब आना हैं |

diwali hindi kavita 1

मेरी दीपावली

(व्यस्त जीवन की भावना )

ना फुलजड़ी फटाके बुलाते मुझे
ना गुलाब जामुन की खुशबू ललचाती मुझे

ना नए कपड़ों की चाहत खीचें मुझे
ना गहनों चमक लुभाए आये मुझे

मुझे तो चाहिए कुछ अनमोल घड़ी
जब फिर से जुड़ती अपनों से कड़ी

दिवाली की रंगत ना भाती मुझे
बस माँ की गोद ही याद आती मुझे

नहीं वो बचपन की दिवाली सजे
बस मुझे मेरे अपनों का साथ मिले
बस साथ मिले ||

कर्णिका पाठक

Meri Deepawali Hindi Kavita आज के युवाओं के लिए हैं जो बहुत मुश्किल से घर आ पाते हैं | Kavita or Poem In Hindi आपको हमारा यह ब्लाग कैसा लगा अवश्य लिखे | साथ ही इसे शेयर भी करें | धन्यवाद

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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