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देख भाई देख ओल्ड टीवी सीरियल की कहानी

 Dekh bhai dekh serial history in hindi नब्बे के दशक में जब केबल टी वी ने नया नया सर उठाया ही था, तब दूरदर्शन के राष्ट्रीय चैनल पर भी एक से बढ़कर एक बेहतरीन कार्यक्रमों की शुरुआत हो रही थी, और ऐसे में एक मौलिक और मनोरंजक कार्यक्रम जिसे पूरा परिवार साथ में बैठ कर देख सकता था वो था “देख भाई देख”. दूरदर्शन की गुदगुदाती यादें हम चाह कर भी नहीं भूल पाते है. सयुंक्त परिवार भारत देश की विशेषता हुआ करती थी. एक ही जगह जब दादा-दादी, ताई-ताउजी, चाचा-चाची, बुआ व् ढेर सारे बच्चे हुआ करते थे, तो मकान घर बन जाता था. सब एक दुसरे के सुख दुःख को बांटते थे. हर त्यौहार मिल कर मनाया जाता था. यही विशेषता इस सीरियल के माध्यम से भी दिखाने की कोशिश की गई थी. 90 के दशक में जब ये सीरियल आया था, तब ज्यादातर परिवार सयुंक्त हुआ करते थे, घर में एक टीवी हुआ करता था, जिसे सब साथ मिलकर देखा करते थे. यहाँ तक की मोह्हले में एक टीवी होता था, जिस पर सारे पड़ोसी भी एक साथ बैठ टीवी देखते थे.

देख भाई देख ओल्ड टीवी सीरियल की कहानी

Dekh bhai dekh serial history in hindi

देख भाई देख एक ऐसा टीवी सीरियल था, जिसे हम सबके साथ बैठकर एन्जॉय कर सकते थे. रोजमर्रा से जुड़ी कहानी, जिसे आम आदमी रोज अपने जीवन में देखता सुनता है, इस सीरियल में दिखाई जाती थी. जिसे हम देखकर अपने जीवन से रिलेट कर पाते थे. आज के सीरियल की तरह इसमें कोई वैम्प नहीं, कोई लड़ाई झगड़ा नहीं था. बस था तो एक दुसरे के लिए ढेर सारा प्यार और मस्ती. ये सीरियल हमें जीने के नए ढंग सिखाता था.

देख भाई देख सीरियल के निर्माता-निर्देशक (Dekh bhai dekh serial Director)-

देख भाई देख सीरियल को सरस्वती ऑडियो विज़ुअल्स प्राइवेट लिमिटेड  के बैनर तले निर्मित किया गया. जो आगे चलकर अमिताभ बच्चन कारपोरेशन के साथ मिल गया.  इस हास्य धारावाहिक की निर्मात्री थीं श्रीमती जया बच्चन। जया जी ने अपने फिल्मी जीवन में जिस तरह की हलकी फुल्की फिल्में की थीं, उन्ही सबकी छाप नज़र आई देख भाई देख में, फिर चाहे वो क़िरदार हों या कहानी हर किसी को आज तक याद किया जाता है. निर्देशक आनंद व् जया जी अच्छे मित्र थे, जया जी नया प्रोडक्शन हाउस खोल रही थी, जिसके लिए उन्हें एक कॉमेडी सीरियल चाहिए था. आनंद ने उन्हें इस सीरियल की कहानी सुनाई, जो जया जी को पसंद आई और वे सीरियल की निर्माता बन गई.

dekh bhai dekh serial

सीरियल के निर्देशक आनंद महेन्द्रू थे. जिन्होंने दूरदर्शन पर ‘इधर उधर’ नाम का एक सीरियल और बनाया था. वे कहते है, इस सीरियल की कहानी की प्रेरणा उन्हें अपने खुद के परिवार से मिली थी. उनका परिवार भी इसी तरह का था. फरीदा जलाल का किरदार उन्होंने अपनी माँ के उपर ही लिखा था. उनका परिवार भी इसी तरह हंसी ख़ुशी से एक साथ रहा करता था. देख भाई देख का सीजन 2 लाने के बारे में जब आनंद से पुछा गया तो उन्होंने कहा “पहले टीवी पर सीरियल की क्वालिटी पर ध्यान दिया जाता था, न कि क्वांटिटी पर. पहले डोक्टर, इंजिनियर, वकील, पढ़े लिखे लोग टीवी देखा करते थे, तो निर्माता भी लॉजिकल सीरियल बनाया करते थे, लेकिन अब पैसे कमाने की होड़ में वे कहते है, खड्डे में जाये पढ़े लिखे लोग, हम तो सास बहुत ड्रामा ही बनायेंगें. ऐसे में देख भाई देख जैसे साधारण सा सीरियल कहा चलने वाला है.” 

देख भाई देख सीरियल की कहानी (Dekh bhai dekh serial Story)–

इस धारावाहिक की कहानी की पृष्ठभूमि थी, एक ऐसे परिवार की जहाँ सभी मिलजुल कर रहते हैं, परिवार का हर सदस्य चाहे वो बड़ा हो बच्चा हो या नौकर सभी में एक ख़ास जुड़ाव सा था। मनोरंजक होने के साथ साथ यह धारावाहिक पारिवारिक मूल्यों पर भी आधारित था, परिवार के किसी भी सदस्य के जीवन में कुछ भी चल रहा हो सब उस में पूरी तरह शरीक होंगे।

इस परिवार के मुखिया दुर्गादास दीवान (दादा जी) थे, तो लेकिन असली मुखिया थीं सरला दीवान (दादी). जिनका किरदार काफ़ी कड़क था, लेकिन वो भी ज़िन्दगी को एक मज़ेदार तरीक़े से जीती थीं। जहाँ एक तरफ परिवार के बड़े बेटे पेशे से एक बड़ी कंपनी के ऑफिसर बलराज दीवान और उनकी ब्यूटिशियन पत्नी सुहासिनी दीवान की नोंक झोंक और तालमेल देखते बनता था. वहीँ दूसरी तरफ छोटे बेटे ट्रेवल एजेंसी के मालिक समीर दीवान और उनकी लेखिका पत्नी सुनीता दीवान की सहज बातचीत भी हास्य उत्पन्न कर देती थी। बच्चों में संजू, कीर्ति, विशाल, आभा और सबसे बड़े बच्चे साहिल दीवान जो कि रिश्ते में इनके चाचा लगते थे, बड़ी ही धूम मचाते थे। हालाँकि इस परिवार के बड़े भी कम बच्चे नहीं थे, समीर दीवान (शेखर सुमन), सुनीता दीवान (भावना बलसावर), करीमा (देवें भोजानी) इत्यादि भी अपनी बचकानी हरकतों से गुदगुदा ही देते थे।

संयुक्त परिवार सुखी परिवार  –

हास्य के साथ साथ मानवीय भावनाओं को भी इस धारावाहिक में हलके फुल्के तरीके से परोसा गया था, परिवार में खुलापन होने के बावजूद एक कायदा था. जहाँ संजू और कीर्ति को अपने गर्ल फ्रेंड बॉय फ्रेंड के बारे में बात करने और उनके साथ बाहर आने जाने की छूट थी, वहीँ डैडी जी और मम्मी जी से पूछे बिना घर की दोनों बहुएँ कोई कदम नहीं उठाती थीं. बलराज और समीर दीवान में भाइयों वाला प्रेम और एक दुसरे के बच्चों के लिए लगाव भी देखने लायक था, और यही स्वभाव उनकी पत्नियों का भी था. इस परिवार में आपस में खटास या दुराव वाली भावना किसी में भी नहीं थी, न केवल परिवार के लोग बल्कि नौकर भी इसी स्वाभाव के थे और स्वयं को परिवार का ही सदस्य मानते थे. इस परिवार का “कूल परिवार” होना ही इस धारावाहिक की विशेषता थी.  

संवादों की ख़ासियत –

इस धारावाहिक की एक और ख़ास बात थी और वो थे इसके संवाद जिन में से कुछ ख़ास संवाद तो लोगों ने अपनी आम बोल चाल की भाषा में भी अपना लिए थे, उदाहरण के तौर पर

  • सुहासिनी दीवान (फ़रीदा जलाल) का “हाय हाय क्यूँ” कहना
  • सुनीता चाची का अपने पति को “ए जी ओ जी सुनिए जी” कह कर बुलाना
  • समीर चाचू का “लो कर लो बात”
  • छोटी नानी का “तेरे मुंह में कीड़े – तेरे मुंह में धूल”

उस समय मैंने इंदौर में एक एस टी डी – पी सी ओ की दूकान का नाम “लो कर लो बात” लिखा देखा था, और देखते ही मेरे होंठों पर मुस्कान आ गयी। अब सोचता हूँ कितने अच्छे धारावाहिक थे, कितने जीवंत क़िरदार और कितने सहज संवाद जिन्हें लोगों ने  अपनी ज़िन्दगी में भी अपना लिया था।

देख भाई देख सीरियल प्रमुख क़िरदार और उनके असली नाम (Dekh bhai dekh serial Cast Name) –

क़िरदार अभिनेता/अभिनेत्री
दुर्गादास दीवान एन के शिवपुरी   
सरला दीवान सुषमा सेठ  
बलराज दीवान नवीन निश्चल  
सुहासिनी दीवान फ़रीदा जलाल  
समीर दीवान  शेखर सुमन  
सुनीता दीवान   भावना बलसावर  
संजू विशाल सिंह  
कीर्ति नताशा सिंह  
विशाल सनी  सिंह
आभा करिश्मा आचार्य
साहिल चाचू अमर उपाध्याय
करीमा देवेन भोजानी
छोटी नानी शम्मी आंटी

देख भाई देख सीरियल अन्य क़िरदार (Dekh bhai dekh serial Other Character)–

प्रमुख किरदारों के अलावा भी जो क़िरदार बीच बीच में आते जाते रहते थे, उनका भी इस धारावाहिक की कहानी को आगे बढ़ने और मनोरंजन का स्तर उठाने में काफी महत्व होता था। जैसे कि

  • छोटी नानी जिनके आने मात्र से ही हँसी की गारंटी बढ़ जाती थी, शम्मी आंटी का ये क़िरदार इतना कमाल का था कि लगता ही नहीं था कि वो एक बड़ी उम्र की औरत हैं, वो बच्चों के साथ बच्ची सी हो जाती थीं। एक ख़ास बात और थी कि सब बच्चे उन्हें छोटी नानी ही बुलाते थे, जबकि वो नानी तो केवल आभा और विशाल की ही थीं. यही तो होता है, एक परिवार जहाँ सभी लोग एक दुसरे से इतने जुड़े होते हैं कि कोई किसी को अपने परिवार से अलग नहीं समझता।
  • लिलिपुट जिनका असली नाम एम् एम् फारुखी है. इस सीरियल के कुछ एपिसोड्स में कभी डॉक्टर, कभी भिखारी,  कभी शेयर ब्रोकर तो कभी कुछ और  क़िरदार जीवंत किए और उनका वो नाक से बोलना “देख भाई देख समीर भाई” ही हँसाने के लिए काफी होता था, आपको जानकर आश्चर्य होगा की इस कमाल के धारावाहिक के संवाद भी लिलिपुट ने ही लिखे थे। सीरियल में लिलिपुट ने कई एपिसोड भी लिखे थे, जिन्हें सबने खूब सराहा. सीरियल के डायरेक्टर आनंद सीरियल की लोकप्रियता का श्रेय लिलिपुट को भी देते है.
  • इसके अलावा डेज़ी मौसी, डिंगू, शिल्पा, गरीबा, इत्यादि नए अपने अपने क़िरदार से न सिर्फ टीवी के इस मज़ेदार धारावाहिक में खट्टी मीठी यादें जोड़ी बल्कि लोगों के दिलों में भी बस गए।

आजकल के दौर में इतने सारे चैनलों की भीड़ में एक भी ऐसा धारावाहिक नहीं देखने मिलता, जिसे हम सब साथ में बैठ कर देख सकें या उनका मजमून इतना अच्छा और सहज हो जिसे अपने जीवन में भी हम महसूस कर सकें। कुछ दो बरस पहले किसी वेबसाइट पर पढ़ा था की हो सकता है देख भाई देख का सीक्वल जल्दी ही शुरू हो, परन्तु अब तक तो ऐसा कुछ हुआ नहीं और ऐसा भी नहीं की हमने एक अच्छे पारिवारिक हास्य धारावाहिक की आस ही छोड़ दी है। बहरहाल चाहे ये धारावाहिक टी वी पर दोबारा आये या ना आये हमारी यादों में आज भी है, और इसके क़िरदार, इसकी कहानी, इसके संवाद हमेशा रहेंगे।  

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Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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