ताज़ा खबर
Home / हॉट टॉपिक / Delhi Gang Rape Case 16.12.2012

Delhi Gang Rape Case 16.12.2012

B_Id_378645_Delhi_minor_rape_protest

16 December 2013 आज की एक आम तारीख पर अगर इसी दिन को एक बार 1 year पीछे ले जायेंगे तो एक तडपती आवाज की गुहार सुनाई देगी, जो जीना चाहती थी पर उसे रौंध दिया गया | 16 December 2012, Delhi में हुआ वो एक Gang Rape Case जिसने देश की आवाम को हिला दिया और जिसके लिए,आवाम ने सरकार और police को हिला कर रख दिया |

16 December 2012 को एक 23 वर्षीय युवती अपने दोस्त के साथ Life Of Pie देखकर रात 9 pm के आस-पास वापस लौट रही थी और उन्हें auto नहीं मिल पा रहा था ( उस ठंडी रात को कोई auto चालक दुसरे area में जाना नहीं चाह रहा था जो की rules के विरुध्द है , According to rules कोई auto चालक किसी भी area में जाने के लिए ना नहीं बोल सकता है | ) 9.30 pm के आसपास इन दोनों ने एक private bus ली, जिसमे इनके अलावा 5(मुकेश सिंह,विनय शर्मा,पवन गुप्ता और अक्षय ठाकुर ) अन्य एवम एक driver(राम सिंह) था | यह सभी नशे में थे, इनका behavior उन दोनों के लिए ख़राब था जिस कारण इन्होने bus से उतरने का भी सोचा पर उन्होंने ऐसा करने नहीं दिया गया | इसके बाद इन सब ने युवती के साथ बत्तमीजी की, जिसका विरोध उसके दोस्त ने किया पर उसे बहुत बुरी तरह मारा गया, जिसके बाद वो बेहोश हो गया | bus का driver राम सिंह ने bus को continue चलाया और इस दौरान इन दरिंदों ने उस लड़की को एक जानवर की तरह खाया, जिस कारण उसने 29 December 2012 को इस देश से विदा लेली |

ऐसी हजारो,लाखो घटनाए रोज घटती है लेकिन इन subjects पर बात करने में लोगो को शर्म महसूस होती है| टीवी चेन्नल पर जब ऐसी घटनाओ का खुलासा होता है , आम आदमी चैनल change कर देता या टीवी off कर देता है | क्या इस तरह का behave एक solution हो सकता है? इसी तरह जब उस 16 December की रात को उस युवती के दोस्त को होश आया, उसने आसपास से निकलते सभी व्यक्तियों से help मांगनी चाही पर वहाँ सब उन्हें देख कर डर गये, कोई उनकी help नहीं कर रहा था, जिस हालत में वो थे, उन्हें लोग देख नहीं पा रहे थे पर शायद सोच भी नहीं पा रहे थे कि वो उस हालत से गुज़र रहे है और तडपते हुए आस भरी निगाहों से आपसे मदद चाहते है | खैर उन्हें क्या कहे, जब उस जगह police आई तो उनका रवैया भी संतोषजनक नहीं था |

जब उस लड़की को Safadarganj hospital Delhi ले जाया गया, तब उसकी हालत बहुत ख़राब थी, उसे देखने और check करने के बाद doctors भी काँप रहे थे, यह कहते हुए कि इस युवती के साथ किस तरह का व्यवहार हुआ | इतनी तकलीफों को सहने के बाद भी वो जीना चाहती थी और उन दरिंदो को सजा दिलाना चाहती थी| उसकी इसी हिम्मत ने देश की जनता को जगा दिया और करकराती ठंड में भी government के खिलाफ़ protest किया और उचित न्याय और कड़क नियमो की मांग की गई |

ऐसी हजारों घटनाएँ एक दिन में घटती है और दुनिया की शुरुवात से ही घटती जा रही है लेकिन इस घटना के बाद पता चलता है कि हमारे देश में इस तरह के crime के लिए कोई उचित सजा ही नहीं है | क्या हमारे देश में नारियों को महज एक खिलौना माना गया है | यही है अँधा कानून, वो भी उस देश का जिस देश की भूमि को “भारत माता” कहा जाता है | इन्ही कारणों से इस युवती को शहीद कहा गया क्यूंकि वह आखरी तक लड़ी और देश को जगा कर गई| इसके बाद बहुत से rules बने, woman protection के लिए help line , Fast track court जिसमे pending पड़े cases को सुना गया |

इतना कुछ होने के बाद भी इस तरह का सिलसिला आम बात है रात का अँधेरा तो शायद एक लड़की के लिए जान लेवा ही, मान लिया गया है |

देश के जनता के साथ-साथ उस युवती के दोस्त ने भी जो हिम्मत दिखाई वो आम नहीं है उसने media के सामने आकर कई पहलुओं को सामने रखा, जिसमे यह भी था कि उस शहीद युवती की आखरी इच्छा यही थी कि उन लोगो को सजा मिले, उन्हें जिन्दा जला दिया जाये| आखरी इच्छा तो मुजरिमों,खुनियों की भी पूरी की जाती है पर इसे तो बस एक न्याय ही चाहिए था| जिन्दा जला देना तो आसान नहीं पर बस यह कह कर कि वो अनपड़ थे , नशे में थे या उनमे से एक तो नासमझ(अक्षय ठाकुर जो इस वक्त 17 वर्ष का नाबालिक लड़का था) था, उनकी सज़ा कम करना जायज़ है ? सोच कर ही खून खोलता है जब इस तरह की दलीलें सामने आती है |

इस तरह कि दलीले सही जब है जब बस एक competition में हमे oppose में बोलना है, लेकिन किसी की जिन्दगी को पेरों तले रौंध देने के बाद उन्हें नासमझ कह देना उस मरी हुई आत्मा के लिए एक अभिशाप बनकर रह जायेगा |

वो युवती सभी womans के लिए एक ताकत बनी है जिसने उन्हें लड़ने , आवाज उठाने की हिम्मत दी पर हमारा ढीला और अँधा कानून आज तक इस तरह की वारदातों की गति को भी कम न कर सके |

खैर, उस शहीद युवती के कारण ही इस तरह के कानून बने, तो शायद उसी की हिम्मत के कारण ही आसाराम और साईं जैसे लोगो के खिलाफ़ आवाज उठी और इसी के कारण कम ही पर लोगो ने खुल कर अपने विचारों को रखना और सुनना शुरु किया |
नम आँखों से बस उसे विदा ही कर पाए हम | आज उसकी तकलीफ पूरा देश महसूस कर रहा है उस दिन को याद करके सभी की आँखे नम है |

कुछ पंक्तियाँ, एक नन्ही सी लड़की के दिल से निकलती आवाज जो दुनिया में आने से पहले ही डर रही है और एक सवाल कर रही है :

माँ तेरे आँचल में छिप जाने को मन करता है,
तेरी गौद में सो जाने को मन करता है |
जब तू है साथ मेरे, तो जिन्दगी जीने का मन करता है |
तू ही है जिसके साथ में मै खुश हूँ ,
बस तेरे दामन में ही मह्फुस हूँ,
पर माँ, जब तू भी दुश्मन बन जाती है,
मेरी नन्ही सांसों को, जब तू ही खामोश कर जाती है|
क्या कसूर होता है मेरा, जो तू भी पराया कर जाती है |
मुझे जिन्दगी के बजाय, मौत के आगोश में सुला देती है|
डरती है रूह मेरी न जाने कब क्या होगा ,
जब तू भी साथ ना है माँ ,तो कौन मेरा अपना होगा,कौन मेरा अपना होगा ????

कर्णिका पाठक

Karnika

Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
Karnika

यह भी देखे

sapno ka matlab

सपनों का मतलब और उनका फल | Sapno Ka Matlab and Swapan phal in hindi

Sapno Ka Matlab (arth) or Swapan phal, dream meaning in hindi सपने हर किसी को …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *