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भारत भूटान और चीन के बीच डोकलाम विवाद | Doklam Issue between India Bhutan and China in hindi

भारत, भूटान और चीन के बीच डोकलाम विवाद | Doklam Issue (Vivad) between India, Bhutan and China in hindi

डोकलाम नामक स्थान भारतीय राज्य के सिक्किम सीमा से सटा हुआ है, जो चीन और भूटान के पठारी सीमा को भी छूता है. यह स्थान हमेशा से विवादास्पद रहा है क्योंकि यह भारत, चीन और भूटान तीनों ही देशों का एक तिहरी जंकशन क्षेत्र है. हालंकि डोकलाम भूटान के क्षेत्र में आता है लेकिन इसके ऊपर चीन अपना प्रभाव बनाये हुए है, जिस वजह से यह क्षेत्र पहले से ही इन दोनों देशों के विवाद का कारण रहा है. भारत और चीन के बीच सिक्किम विवाद यहाँ पढ़ें.   

डोकलाम का इतिहास (Doklam History)

एंग्लो चीनी संधि, सन 1890 में ब्रिटिश आयुक्त ए डब्ल्यू और चीनी आयुक्त हो चांग जंग के बीच व्यापारिक संबंधो और चुम्बी घाटी की सीमा हदबंदी को लेकर हुई थी, जिसको चीन और भूटान ने 1988 और 1998 में हुए भूमि बिल समझौते के माध्यम से यथास्थिति रखते हुए डोकलाम क्षेत्र में शांति बहाली पर अपनी सहमती जतायी थी. सन 1949 में भारत और भूटान के बीच एक संधि हुई थी और इस संधि के तहत दोनों देशों के बीच ऐसी सहमती बनी थी कि भूटान की किसी भी रक्षा मामलों की नीति भारत की राय या सलाह से लागू की जाएगी, लेकिन फिर उसके बाद 2007 में भारत और भूटान के बीच हुई दूसरी संधि के अनुसार भूटान अब भारत से अपने रक्षा मामले में निर्देश लेने के लिए बाध्य नहीं है, वह इस मामलें में स्वतंत्र रूप से अपना निर्णय ले सकता है.

ऐतिहासिक रूप में डोकलाम तिब्बत के यातुंग बाजार का हिस्सा था, यह भूटान और चीन के द्वारा दावा किया जाने वाला एक विवादित क्षेत्र है. डोकलाम चुम्बी घाटी का हिस्सा तिब्बत में निहित है, डोकलाम भारतीय क्षेत्र के नाथुला दर्रे से 15 किलोमीटर की दूरी पर दक्षिण पूर्व में अवस्थित है. यह भारत और चीन को 30 किलोमीटर तक अलग करता है. हालाँकि चीन का कहना है कि डोकलाम नाम का उपयोग तिब्बत के चारागाह करते थे. सन 1960 से पहले तक भूटान के चरवाहे उनसे अनुमति लेकर ही इस क्षेत्र में जाते थे, लेकिन चीन के इस दावे का कोई ऐतिहासिक प्रमाण नहीं मिला है. 

वर्तमान डोकलाम विवाद (Todays’s Doklam Issues)  

वर्तमान में यह विवाद इसलिए उभरा है, क्योंकि चीन वन बेल्ट वन रोड (ओबीओआर) के तहत सड़क का निर्माण तिब्बत से जुड़ने के लिए कर रहा है. चीन रोड का निर्माण भारत, भूटान और चीन का जो तिराहा बिंदु है, उसके एक क्षेत्र से करना चाहता है जो कि भूटान और भारत दोनों ही देशों की सुरक्षा के लिए ख़तरनाक साबित हो सकता है. 29 जून को पहले भूटान ने इस सड़क के निर्माण के ख़िलाफ़ चीन का विरोध किया, साथ ही भूटान ने अपनी सेना को हाई अलर्ट पर रख कर अपनी सीमा सुरक्षा को बढ़ा दिया. भारत ने भी इस सड़क निर्माण कार्य पर अपनी असहमति जताते हुए इसका विरोध किया है. भूटान के साथ चीन का कोई राजनायिक सम्बन्ध नहीं है, लेकिन भारत के साथ भूटान की आपसी सहमती के साथ ही मैत्रियी सम्बन्ध भी है. भूटान ने इस चीनी आक्रमण के खिलाफ़ भारत से मदद की मांग भी की है. भारत की असहमति चीन को अच्छी नहीं  लगी है, जिस वजह से यह विवाद उत्पन्न हुआ है.

Doklam Issue

भारत और चीन में विवाद का मुख्य कारण यह है कि भारत को पूर्वोतर से जोड़ने वाला चिकेन नेग का हिस्सा सिलीगुड़ी कोरिडोर चुम्बी वैली से मात्र 100 किलोमीटर की दूरी पर है. साथ ही चाइना ने रोड निर्माण करते हुए चुम्बी वैली से डोकलाम तक अपनी पहुँच बनाई है, उससे चीन के पड़ोसी, देश के प्रति आक्रमक होते है, उससे भारत की सुरक्षा को खतरा हो सकता है. भारत अब सन 1962 में हुये भारत चीन युद्ध की हार के इतिहास को नहीं दोहराना चाहता है, इसलिए अपनी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इस निर्माण कार्य का कड़ा विरोध किया है.     

डोकलाम बॉर्डर विवाद पर भारत और चीन की सेना लगभग 2 महीने से आमने सामने है. इस समय यह विवाद विश्वस्तर का होता जा रहा है. यहाँ पर इस विवाद से सम्बंधित उस पहलु को जानने की कोशिश करेंगे कि यह आखिर भारत के लिये अच्छा है या बुरा.

भारत के लिए डोकलाम आवश्यक क्यों हैं (Why Doklam is Important for India)

दरअसल डोकलाम विवाद भारत के लिए सुरक्षा सम्बंधित समस्या है. यदि भारत इस विवाद में नहीं पड़ता है, तो चीनी सेना भूटान को पछाड़ कर इस स्थान पर अपना क़ब्ज़ा जमा लेगी. यहाँ पर चीनी सेना आ जाने से वह चीन से यहाँ तक के लिए सड़क तैयार कर लेगी, जिसकी सहयता से उसकी सेनाएं किसी भी समय यहाँ सड़क मार्ग से आ सकेगी. इससे भारत को सबसे बड़ा खतरा ये है कि यहाँ पर चीनी सेना आ जाने से भारत के सिलीगुड़ी क्षेत्र जिसे चिकन नैक भी कहा जाता है, खतरे में आ जायेगा. सिलीगुड़ी कॉरिडोर 27 किलोमीटर में फैला वह स्थान है, जो कि उत्तर पूर्वी भारत के कई हिस्सों को भारत से जोड़ता है. यहाँ पर चीन की घुसपैठ हो जाने से चीन न सिर्फ उत्तरी पूर्वी के ‘7 सिस्टर स्टेट’ को भारत से अलग कर देगा बल्कि उन राज्यों पर भी अपने कब्जे भी जमा सकता है. इसलिए यह भारत के लिए बहुत आवश्यक है.

डोकलाम विवाद पर भूटान ने भारत से लिखित में मदद माँगी. विश्वस्तरीय क़ानून के आधार पर यदि कोई देश अपने संकटकालीन स्थिति में अपने पडोसी देश से मदद मांगता है, तो पडोसी देश बिना किसी हिचक के अपने पडोसी देश की सहायता कर सकता है.

डोकलाम विवाद भारत के लिए अच्छा या बुरा (Doklam Issue Good or Bad for India)

तात्कालिक समय में भारतीय अर्थव्यवस्था में दो बड़े फैसले लिए गये हैं. इसमें पहला फैसला था नोट बंदी का और दूसरा सारे देश में जीएसटी लागू करने का. इन दोनों फैसले से भारतीय अर्थव्यवस्था थोड़ी धीमी चल रही है, जो कि एक आम बात है, क्योंकि किसी भी देश में ऐसे बड़े फैसले लिए जाने पर वहाँ की अर्थव्यवस्था थोड़ी धीमी हो ही जाती है. इस समय भारत की अर्थव्यवस्था रिफार्म हो रही है, और युद्ध किसी भी देश के अर्थव्यवस्था पर नकारात्मक प्रभाव डालता है. चीन इस बात को बेहद अच्छे से समझता है. वह जानता है कि भारतीय सेना इस समय इस युद्ध को हर तरह से टालने की कोशिश करेगी. अतः उनके अनुसार यही वह सही समय है, जब इस स्थान पर क़ब्ज़ा किया जा सकता है. हालाँकि भारतीय सेना इस समय पूरी तरह से डोकलाम में तैनात है.   

इस तरह से यदि भारत डोकलाम से पीछे हट जाता है तो यह भारत के लिए बहुत बुरा साबित हो सकता है, क्योकि इससे भारत को अपने कुछ राज्य खोने की भी नौबत आ सकती है, किन्तु भारत किसी भी कीमत पर डोकलाम से नहीं हट सकता. साथ ही इसमें अमेरिकी सेना भी भारत का साथ दे सकती है जोकि चीन के लिए बहुत बुरा साबित हो सकता है. 

डोकलाम विवाद से मुक्ति (Doklam Issue Resolved)

डोकलाम विवाद पर 28 अगस्त 2017 को भारत और चीन में आपसी सहमति से एक महत्वपूर्ण फैसला ले लिया है. इस विवाद के कारण दोनों सेनाएं डोकलाम की सीमा पर ढाई महीने के लम्बे समय से तैनात थी और दोनों ही सेना वहाँ से हटने का नाम नहीं ले रही थी. किंतु इस पर अब दोनों देशों की सरकार द्वारा एक अहम फैसला लिया गया है कि दोनों देशों की सेना अब डोकलाम से वापस बुला ली जायें. इस फ़ैसले के बाद सेनाओं के वापस आने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है. और इस तरह इस विवाद से मुक्ति पाने के लिए यह महत्वपूर्ण फैसला दोनों देशों की सरकार द्वारा लिया गया है. इस विवाद पर भारत की शुरू से ही यह प्रतिक्रिया रही है कि यह विवाद युद्ध से नहीं बल्कि व्यवहार कौशल से सुलझाया जाये और अंत में यही हुआ. दोंनों देशों ने आपसी सहमति से यह विवाद सुलझा लिया है और दोनों सेनाओं को वहाँ से हटने का आदेश दिया है.

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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