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पृथ्वी सतह की संरचना, उत्पत्ति का इतिहास की जानकारी | Earth surface structure, History information In Hindi

पृथ्वी सतह की संरचना, उत्पत्ति का इतिहास की जानकारी | Earth surface structure Facts, History information In Hindi

सौरमण्डल में जीवन की सम्भावना पृथ्वी के आलावा अन्य किसी ग्रह पर नजर नहीं आती हैं. एकमात्र पृथ्वी ग्रह पर जल, वायु आदि मौजूद हैं. सौरमण्डल का तीसरे नंबर का ग्रह अर्थ हैं, अर्थ एक जर्मन भाषा का शब्द है, इस शब्द का साधारण मतलब ग्राउंड है. अगर वैज्ञानिकों द्वारा की गयी रिसर्च माने तो पृथ्वी लगभग 4 बिलियन वर्ष पहले का है. लगभग इसी समय ही पूरे सौर मंडल की उत्पत्ति हुई. वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी का निर्माण एक गुरुत्वाकर्षण बल द्वारा सूर्य के आस पास घूर्णन करते हुए गैस तथा डस्ट के सम्मिश्रण से हुआ है. पृथ्वी में सेंट्रल कोर, रॉकी मेटल तथा एक सॉलिड क्रस्ट है.

पृथ्वी की त्रिज्या और सूर्य से दूरी (Earth radius and distance from the sun)

पृथ्वी का अर्धव्यास लगभग 6,371 किलोमीटर और आकार के आधार पर सौरमंडल में पाँचवा बड़ा पिण्ड है. पृथ्वी सूर्य से करीबन 150 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. इस दूरी को एस्ट्रोनॉमिकल यूनिट नाम दिया गया है. सूर्य के प्रकाश को पृथ्वी तक पहुँचने में लगभग 8.3 मिनट का समय अंतराल लग जाता है.

Earth पृथ्वी

पृथ्वी की संरचना (Earth structure Facts in hindi)

पृथ्वी की मुख्य चार ही परत है. इसके सबसे अन्दर इसका केंद्र है, जिसे क्रस्ट तथा मेटल घेरे हुए रहती है. सबसे बाहर में भूपटल होता है. पृथ्वी के इनर कोर का अर्धव्यास 1221 किलोमीटर का है. यह लोहा और निकेल से बना हुआ है. यहाँ का तापमान 10,830 °F यानि लगभग 6,000 °C होता है. इसके ऊपर 2210 किलोमीटर मोटी परत होती है, जिसका निर्माण भी लोहा निकेल तथा विभिन्न तरह के रसायनों से हुआ है. आउटर कोर और क्रस्ट के बीच में मेटल वाली सबसे मोटी परत होती है. पृथ्वी का सबसे बाहरी हिस्सा (आउटर लेयर) लगभग 30 किलोमीटर मोटा होता है.

देश में हर साल पृथ्वी को बचाने एवं अधिक खूबसूरत बनाने के लिए 22 अप्रैल को प्रथ्वी दिवस भी मनाया जाता है.

पृथ्वी की सतह (Earth surface)

मंगल और बृहस्पति ग्रहों की तरह ही पृथ्वी के पास भी ज्वालामुखी, पहाड, घाटियाँ आदि हैं. पृथ्वी का लिथोस्फेरे जिसमे क्रस्ट और ऊपरी मेटल है, यह विभिन्न बड़ी प्लेट्स में बटी होने के साथ लगातार चलायमान होती हैं. उदाहरण के तौर पर उत्तरी अमेरिका प्लेट प्रशांत महासागर बेसिन के ऊपर से गुज़रता है. इस समय इस प्लेट की गति लगभग उतनी ही होती है, जितनी किसी व्यक्ति के नाखून बढ़ने की. जब एक प्लेट किसी दूसरी प्लेट के मार्ग में आती है. और दोनों प्लेट्स में घर्षण भूकंप की उत्पत्ति करता है. कई बार तो प्लेट के एक दूसरे पर चढ़ जाने से पहाड़ों का भी निर्माण होता है.

पृथ्वी का लगभग 71% हिस्सा महासागरों से जुड़ा हुआ है. पृथ्वी पर करीबन 97 % पानी महासागरों में मौजूद है. लगभग सभी ज्वालामुखी इन्हीं महासागरों के अन्दर मौजूद हैं. हवाई का मौना केआ वोल्कानो माउंट एवेरेस्ट से भी अधिक बड़ा है. किन्तु इसका अधिकाँश हिस्सा जलमग्न है. इसी तरह से विश्व की सबसे बड़ी पर्वत श्रृंखला भी जल के अन्दर ही मौजूद है. यह आर्कटिक महासागर से अंटार्कटिक महासागर की सीमा में बिछा हुआ है. यदि एंडीज, रोकिस तथा हिमालय पर्वत श्रृंखला को मिला दिया जाए, तो भी आर्कटिक और अंटार्कटिक महासागर के बीच फैली पर्वत श्रृंखला इनसे 4 गुनी बड़ी होगी. ज्वालामुखी की अधिक जानकारी के लिए पढ़े.

पृथ्वी की कक्षा और घूर्णन समय (earth’s orbit and rotation time)

सौरमंडल के अन्य ग्रहों की ही तरह पृथ्वी का भी ऑर्बिट सूर्य है. धरती खुद की धुरी पर भी गोल गोल घूर्णन करती है. अपने अक्ष पर घूमते हुए पृथ्वी को एक चक्कर पूरा करने में 23 घंटे 56 मिनट 4.0989 सेकण्ड का समय खर्च होता है. हमारी धरती को सूरज के चारों तरफ घूमते हुए 1 चक्कर समाप्त करने हेतु 365.26 दिन लग जाते हैं. अतिरिक्त 6 घंटे कैलेंडर सिस्टम के हिसाब में नहीं आ पाता. हालाँकि प्रत्येक 4 वर्ष में ये 6 घंटे कुल 24 घंटे में बदल जाता है. इस 24 घंटे को चौथे वर्ष के समय के साथ जोड़ दिया जाता है. इस कारण से ही हर 4 वर्ष में 1 वर्ष 366 का होता है, जिसे लीप वर्ष (लीप इयर) कहा जाता है.

पृथ्वी स्वयं की ही धुरी पर 23.5 डिग्री झुकी हुई है. सूरज के चारो तरफ चक्कर लगाते हुए भी धरती का इसी तरह अपनी अक्ष पर झुकाव रहता है. पृथ्वी के इसी झुकाव के रहते ही मौसम में बदलाव आते है. साल भर में एक समय धरती का उत्तरी गोलार्ध सूरज की ओर झुका हुआ रहता है. और दक्षिणी गोलार्ध की दूरी भी सूर्य से काफी होती है. इस समय उत्तरी गोलार्ध में सूर्य प्रकाश बहुत अधिक पहुँचने पर यहाँ पर ग्रीष्म काल होता है. दक्षिणी गोलार्ध में सूर्य की किरणे तिरछी पड़ने की वजह से यहाँ पर तापमान कम रहता है. शीत ऋतु भी इस वजह से इस समय दक्षिणी गोलार्ध में पड़ने लगती है. ठीक 6 महीने के बाद यह स्थिति पूरी उल्टी हो जाती है. वसंत ऋतु के समय दोनों गोलार्द्धों में लगभग समान सूर्यप्रकाश पाता है.

वायुमंडल में गैसों का प्रतिशत (Earth atmosphere gas composition)

पृथ्वी के भूतल के आस पास एक बहुत सघन वायुमंडल है. इसमें लगभग 78.09% नाइट्रोजन, 20.95% ऑक्सीजन एवं 1% बाकी अन्य गैस हैं. इन अन्य गैसों में आर्गन, कार्बन डाइऑक्साइड और नीयन आदि हैं. यह वायुमंडल पृथ्वी के जलवायु, मौसम आदि को खूब प्रभावित करता है. यह वायुमंडल आम लोगों को सूर्य की कई तरह की घातक किरणों से बचाता है. इसी के साथ यह वायुमंडल पृथ्वी को मेटेरोइड्स आदि से भी बचाता है. दरअसल पृथ्वी की तरफ आते हुए मेटोर्स अक्सर वायुमंडल से घर्षित होते हुए रास्ते में ही जल के समाप्त हो जाते हैं.

पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति और इतिहास (how did life start on earth or history)

पृथ्वी पर तापमान अन्य ग्रहों की तुलना में संतुलित है, साथ यहाँ पर विभिन्न तरह के जैवरासायनिक पदार्थ पाए जाते हैं. इस वजह से यहाँ पर जीवन के संभावनाएं बनी और विभिन्न जीव जंतुओं का जन्म हो पाया. इस ग्रह की सबसे खास बात यही है कि इसके अधिकाँश हिस्से में पानी भरा हुआ है. पृथ्वी पर पानी होने की वजह से ही यहाँ पर जीवन आज से करीब 3.8 बिलियन वर्ष पूर्व संभव हुआ था. यहाँ पर समय समय पर मौसम परिवर्तन आदि होता है, जो विभिन्न स्थानों के जलवायु को संतुलित रखता है. पृथ्वी का वायुमंडल भी यहाँ पर जीवन के संभव होने में एक बहुत बड़ा योगदान होता है. ऑक्सीजन गैस पाए जाने की वजह से यहाँ के जीव जंतुओं की श्वास प्रक्रिया पूरी होती है, और जंतु भी जिन्दा रहने में सफल रहते है.

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One comment

  1. yashdeep vitthalani

    bahut badhiya blog hai aapka

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