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विश्व पर्यावरण दिवस संरक्षण कविता निबंध | Paryavaran diwas essay kavita in hindi

Environment (paryavaran) diwas sanrakshan essay (nibandh) kavita in hindi मानव और पर्यावरण एक दूसरे पर पूरी तरह से निर्भर करते है । जैसे अगर हमारी जलवायु मे थोड़ा सा भी बदलाव आता है, तो इसका असर तुरंत हमारे शरीर मे देखने को मिलता है । अगर ठंड ज्यादा पड़ती है तो हमे सर्दी हो जाती है, अगर गर्मी ज्यादा होती है तो वह भी हम सहन नहीं कर पाते। यह तो हुई सिर्फ एक इंसान की बात|

Environment paryavaran diwas sanrakshan essay nibandh kavita in hindi

विश्व पर्यावरण दिवस  संरक्षण कविता निबंध

Environment paryavaran diwas sanrakshan essay nibandh kavita in hindi

यदि हम यही चीज पूरी मानव जाती से जोडकर देखे तो नुकसान भी बड़ा होगा। हाल ही मे हुई त्रासदी जैसे केदार नाथ मे हुई अथाह वर्षा, आसाम की बाड़, आदि इसके उदाहरण है।

पर्यावरण की परिभाषा / पर्यावरण क्या है ? ( Environment Definition)

साधारण तौर पर सोचे तो पर्यावरण से तात्पर्य हमारे चारो ओर के वातावरण और उसमे निहित तत्वो और उसमे रहने वाले प्राणियों से है। हम अपने चारो ओर उपस्थित वायु, भूमि, जल, पशु पक्षी, पेड़ पौधे आदि को अपने पर्यावरण मे शामिल करते है ।

जिस तरह हम अपने पर्यावरण से प्रभावित होते हैं, उसी प्रकार हमारा पर्यावरण भी हमारे द्वारा किए गए कृत्यो से प्रभावित होता है। जैसे लकड़ी के लिए काटे गए पेड़ो से जंगल समाप्त हो रहे है। और जंगलो के समाप्त होने से इसमे रहने वाले जीवो के जीवन पर भी असर पड रहा है। जीवो की कुछ जातीय तो विलुप्त हो गयी और कुछ विलुप्त होने की कगार पर है।

आज कल गावों मे शेर और चीते के घुसने और वहा रहने वाले मनुष्यो को हानी पहुचाने की खबरे अखबारो मे आम बात है। परंतु यह गौर करने योग्य बात है कि ऐसा क्यू हो रहा है । जहा तक मेरा ख्याल है यह इसलिए हो रहा है, क्योकि हमने इन प्राणियों से इनका घर छीन लिया है और अब ये प्राणी मजबूर है, गावों और शहरो की ओर जाने के लिए और अपने जीवन यापन के लिए मनुष्यो को हानी पहुचाने के लिए।

ध्यान रखने योग्य बात यह है कि पर्यावरण (Environment) से तात्पर्य केवल हमारे आस पास के भौतिक पर्यावरण से नहीं है, बल्कि हमारा सामाजिक (social) और व्यवहारिक (cultural) वातावरण भी इसमे शामिल है। मानव के आस पास उपस्थित सोश्ल, कल्चरल, एकोनोमिकल, बायोलॉजिकल, और फ़िज़िकल आदि सभी तत्व जो मानव को प्रभावित करते है, उसके पर्यावरण मे शामिल होते है।

पर्यावरण प्रदुषण के प्रकार
  • जल प्रदुषण
  • थल प्रदुषण
  • वायु प्रदुषण
  • ध्वनी प्रदुषण
पर्यावरण प्रदुषण के कारण
  • कारखानों से निकलने वाला धुँआ
  • नदी-तालाब में गन्दा पानी डालना
  • घर-उद्योग की गन्दगी को खुले में फेंकना
  • तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाना
पर्यावरण रोकने के उपाय
  • जनसँख्या नियंत्रण
  • कारखानों का शहर से door होना व चिमनी की ऊंचाई बढ़ाना
  • दो पहिया वाहनों में अच्छा आयल डालें, जिससे वे काला धुँआ न छोड़े
  • वृक्षारोपण अधिक करें
  • कचरा को उसके डब्बे में ही डालें

पर्यावरण प्रदूषण के कारण ( Environment Pollution Cause)

देखा जाए तो पर्यावरण प्रदूषण (Paryavaran Pradushan) के कई कारण है| हमारे द्वारा की गयी छोटी छोटी बिना सोचे समझे की जाने वाली हरकते पर्यावरण प्रदूषण का कारण हो सकती है। हम यहाँ कुछ मुख्य गतिविधियो पर प्रकाश डाल रहे है।

  • इंडस्ट्रियल एक्टिविटी : इंडस्ट्रियल एक्टिविटी मतलब मानव द्वारा निर्मित इंडस्ट्रीज़ (फैक्ट्री) से निकलने वाले अवशेष हमारे पर्यावरण को प्रदूषित करते है। परंतु यह भी संभव नहीं है कि इस विकास की दौड़ मे हम अपने पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए अपने विकास को नजर अंदाज कर दे। पर हम कुछ बातो का ध्यान रखकर अपने पर्यावरण को ज्यादा हानी से बचा सकते है। कारखानो की चिमनिया ऊची लगवाकर हम वायु प्रदूषण से भी बच कर सकते है और भी कई मानक है जो की कारखानो के लिए तय किए गए है, उन्हे फॉलो करके पर्यावरण प्रदूषण को काफी हद तक काबू किया जा सकता है। परंतु अगर कोई भी लापरवाही यदि किसी कारखाने द्वारा की जाती है तो इसके भयावह परिणाम सामने आते है, भोपाल गैस त्रासदी इसका ही उदाहरण है।
  • वाहनो के धुए से होने वाला प्रदूषण : आज कल घर मे जीतने सदस्य होते है उससे ज्यादा वाहन घर मे उपस्थित रहते है। घर का छोटा बच्चा भी साइकल के अलावा गाड़ी चलना पसंद करता है। आज कल के जमाने मे अगर कोई पैदल चलता हुआ सड़क पर दिख जाए तो लोग आश्चर्य की दृष्टि से उसे देखते है। सेहत को सही रखने के डर से मॉर्निंग वॉक पर तो लोग जाते है परंतु अगर उन्ही लोगो को यदि पैदल ऑफिस जाने का कहे तो वे कभी तैयार नहीं होंगे । ऐसे लोगो को मे कहना चहुंगी की अपनी सेहत के साथ साथ पर्यावरण की सेहत का ध्यान रखना भी आपका ही कर्तव्य है। अगर आप पैदल नहीं चल सकते तो कम से कम इस बात का तो ध्यान रखे ही की अपने वाहनो मे क्लीन ईंधन का इस्तेमाल करे ताकि कम धुआ निकले और पर्यावरण कम प्रदूषित हो।
  • शहरी कारण और आधुनिकरण : शहरीकरण और आधुनिकरण पर्यावरण प्रदूषण के मुख्य कारण है। मनुष्य का अपनी सुख सुविधाओ की होड मे पर्यावरण को नजर अंदाज करना आम हो गया है। मनुष्य बिना सोचे समझे ही पेड़ो की कटाई कर रहा है। इसका एक उदाहरण मेरे ही शहर मे देखने को मिला जब यहा उपस्थित अधिकारियों ने शहर को सुंदर बनाने के लिए हरे भरे बगीचे उजाड़ दिये और शहर की पहचान बन चुके पेड़ो को बिना सोचे समझे काट दिया। परंतु वे शायद ये भूल जाते है की हमारा जीवन जीने के लिए आवश्यक वायु इन्ही पेड़ो से मिलती है। छोटे छोटे पेड़ो के साथ साथ बड़े बड़े जंगलो का कटना भी आज कल आम बात है परंतु जंगलो को काटने वाले भूल जाते ही की जंगलो की कटाई के साथ साथ वे कई जीवो का आवास छिन लेते है।
  • जनसंख्या घनत्व : बढती हुई आबादी भी पर्यावरण प्रदूषण का मुख्य कारण है। जिस देश मे जनसंख्या लगातार बढ रही है वह रहने खाने की की समस्या भी लगातार बढ़ रही है । और अपनी सुख सुविधाओ के लिए मानव पर्यावरण को कोई तुल नहीं देता परंतु वह यह भूल जाता है की बिना पर्यावरण के उसकी सुख सुविधाए कुछ समय के लिए ही है।

पर्यावरण  संरक्षण उपाय (Paryavaran sanrakshan Upay) 

वैसे तो ऐसी कोई तेज़ तकनीक नहीं है, जिससे की पर्यावरण प्रदूषण पर तुरंत काबू पाया जा सके । परंतु मनुष्य अपने छोटे छोटे प्रयासो से इस समस्या को कम जरूर कर सकता है। यहा हम कुछ बाते बताना चाहेंगे जिंका खयाल रखकर शायद पर्यावरण प्रदूषण पर काबू पाया जा सकता है।

  • आज तक जो कारखाने स्थापित हो चुके है उन्हे उठाकर कही और शिफ्ट करना तो संभव नहीं है परंतु अब सरकार को यह ध्यान रखना जरूरी है की जो नये कारखाने खुले वो शहर से दूर हो। उनके द्वारा किया गया प्रदूषण शहर की जनता को प्रभावित न करे।
  • मनुष्य को जितना हो सके अपने द्वारा किए गए प्रदूषण पर काबू पाना चाहिए जैसे जहा संभव हो वाहनो का उपयोग कम करे पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल करके भी इस समस्या को कम करने मे कुछ योगदान किया जा सकता है। हमारे वैज्ञानिको को भी इस हानिकारक धुए पर कैसे काबू पाया जाए इस दिशा मे विचार करना चाहिए।
  • जंगलो की कटाई पर कड़ी सजा दी जानी चाहिए तथा नये पेड़ो को लगाए जाने वाले व्यक्ति को रिवार्ड देना चाहिए।
  • कारखानो के हानिकारक पदार्थ को रिफ्रेश करके उसे किया जा सकता है तो ईएसए करना चाहिए।

विश्व पर्यावरण दिवस (World Environment Day) कब मनाया जाता है ?

हर साल 5 जून से 16 जून (5th June TO 16th June) के बीच यह मनाया जाता है| इन दिनों हर जगह पेड़ पोधे लगाये जाते हैं, और पर्यावरण से सम्बंधित बहुत से कार्य किये जाते हैं|

सबसे जरूरी बात यह है कि आज हर मनुष्य को अपने स्तर पर पर्यावरण को संतुलित रखने के प्रयास करना चाहिए। क्योकि पर्यावरण प्रदूषण जैसी गंभीर समस्या से मुक्त होना किसी एक समूह के बस की बात नहीं है। इस समस्या पर काबू किसी नियम या कनून को लागू करके नहीं पाया जा सकता। अगर हर कोई इसके दुषपरिणाम के बारे मे सोचे और अपनी आगे वाली पीढ़ी के बारे मे सोचे तो ही इससे निजात संभव है।

पर्यावरण पर कविता  (Paryavaran Kavita)

पेड़ काटने वाले काट गए
क्या सोचा था एक पल को
वो किसी ,परिंदे का घर उजाड़ गये
क्या सोचा था एक पल को
वो धरती की मजबूत पकड़ उखाड़ गये
कितने ही एकड़ को, वो बंजर बना गए
मौसम का मंजर, एक पल में हिला गये
न करो पर्यावरण का निरादर,
ये धरती का अपमान हैं
हर एक पेड़ पौधा और जिव जंतु,
इस धरती का सम्मान हैं
अगर करोगे खिलवाड़ संतुलन से,
तो भविष्य में सिर्फ गहरा अंधकार हैं

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Sneha

Sneha

स्नेहा दीपावली वेबसाइट की लेखिका है| जिनकी रूचि हिंदी भाषा मे है| यह दीपावली के लिए कई विषयों मे लिखती है|
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3 comments

  1. भ्रष्टाचार में डूब रहा माना घर हमार
    घाटों पर डूबा नहीं कोई भी लाचार |
    त्रिवेणी में ही दिखा भक्ति -भाव अपार
    हर-हर गंगे का उद्घोष जाये न बेकार|

  2. “पर्यावरण प्रदूषण से मुक्ति मिले”
    सभी दिवस पृथ्वी दिवस मनाएंगे
    वायुमंडल पौद्योगिकी के बारे में बताएँगे |
    समुद्र विज्ञान का इतिहास सिखाएंगे
    संगोष्ठी-काव्यगोष्ठी की कार्यशाला चलाएंगे |
    पौद्योगिकी परिषद में प्रशिक्षण हो
    भारत के इतिहास औ उपलब्धियों को दर्शाएंगे |
    जागरूकता गांव तालुका मुख्यालय पर
    भू- विज्ञान के बारे में ज्ञान और सूचना दिखलायेंगे |
    वायुमंडल शुद्ध हो अनुसंधान और विकास
    पर्यावरण प्रदूषण से मुक्ति मिले ‘मंगल ‘कह जाएंगे ||

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