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फितूर फिल्म समीक्षा

deepawali रेटिंग – 2.5 स्टार

Fitoor movie review hindi वैलेंटाइन का मौका है ऐसे में अपने पार्टनर के साथ लव स्टोरी का मजा लेना सुखद होता है. इसी मौके पर आज अभिषेक कपूर की ‘फितूर’ रिलीज़ हुई है. कटरीना, आदित्य रॉय कपूर की यह फिल्म कश्मीर की प्रेम कहानी है, जिसे कश्मीर की ही खूबसूरत वादी में फिल्माया गया है. फिल्म की कहानी चार्ल्स डिकेन्स के उपन्यास ‘ग्रेट एक्सपेक्टेशन’ पर आधारित है.

फितूर फिल्म समीक्षा

Fitoor Movie Review

फिल्म के हर सीन में काश्मीर की ख़ूबसूरती को देखा जा सकता है. इस प्रेम कहानी को हम बॉलीवुड की टिपिकल प्रेम कहानी से जोड़ सकते है, इसमें भी एक गरीब लड़का होता है, जिसे बचपन में ही अमीर लड़की से प्यार हो जाता है, दोनों में दोस्ती होती है लेकिन लड़की पढने के लिए विदेश चली जाती है. लड़का अपना प्यार नहीं भूल पाता है और जवानी में दोनों फिर मिलते है. दोनों में मिलने की तड़प है, लेकिन बीच में लड़की की माँ आ जाती है. कहानी सुनने में पुरानी है लेकिन अभिषेक कपूर ने इसे नया रूप देने की पूरी कोशिश की है.

फितूर फिल्म से संबंधित अन्य जानकारी

कलाकार कटरीना कैफ, आदित्य रॉय कपूर, तब्बू, राहुल भट्ट, अजय देवगन (cameo role)
निर्माता अभिषेक कपूर, सिद्धार्थ रॉय कपूर
निर्देशक अभिषेक कपूर
लेखक अभिषेक कपूर, सुप्रतीक सेन
संगीत अमित त्रिवेदी
रिलीज़ डेट 12 फ़रवरी 2016

 

फितूर फिल्म निर्देशक समीक्षा

डायरेक्टर अभिषेक कपूर

फितूर का असली नूर अभिषेक कपूर ही है, रॉक ओन, काई पो छे जैसी हिट फिल्म दे चुके अभिषेक इस बार फितूर लेकर आये है. फिल्म को देख कर ऐसा लगता है, जैसे फिल्म एक कैनवास है जिस पर अभिषेक ने सुंदर तरीके से पेंटिंग की है. फिल्म का पहला भाग पुरे तरीके से कश्मीर की सुन्दरता को दिखाता है. अभिषेक ने ‘धरती का स्वर्ग’ कहे जाने वाले काश्मीर को सच में स्वर्ग दिखाया है. फिल्म देखते समय आप उसकी सुन्दरता में ऐसे खो जायेंगे कि उसकी गलती को भी नजरअंदाज कर देंगे. अगर अभिषेक एक दमदार कहानी के साथ इसे बनाते तो ये मास्टरपीस बन सकती थी. उन्होंने अपने कैमरे से प्रेम कहानी को अच्छे से कैप्चर किया है. जवानी के प्यार में जो जुनून होता है, वो फिल्म में साफ नजर आ रहा है. अभिषेक एक अच्छे डायरेक्टर है जो अच्छा काम करने के लिए महशूर है, लेकिन इस बार इनकी कहानी ने उनका साथ नहीं दिया.

फितूर फिल्म कहानी की समीक्षा

फिल्म की कहानी काश्मीर की खूबसूरत वादियों से शुरू होती है, नूर (आदित्य रॉय कपूर) शिकारा में रहने वाला लड़का है, जो अपनी बड़ी बहन और उसके पति के साथ रहता है. नूर बहुत ही मासूम लड़का है जो कलाकार है, व जिसे भगवान ने गिफ्ट दिया है, कि वह बहुत अच्छा स्केच करता है. उसे अपनी स्केच के लिए परफेक्ट चेहरा फिरदौस (कटरीना कैफ) में नजर आता है. फिरदौस बहुत खूबसूरत है जिसे देखते ही नूर उसके प्यार में पड़ जाता है. छोटे से नूर को नहीं पता होता है कि फिरदौस से प्यार करने की उसे कीमत चुकानी पड़ेगी, लेकिन फिरदौस की माँ बेगम हजरत (तब्बू) इस कीमत को बखूबी जानती है. प्यार में धोखा खा चुकी हजरत अपने खो चुके प्यार का बदला नूर और फिरदौस के प्यार से लेती है.

हजरत को जब पता चलता है कि दोनों में प्यार हो रहा है, तब वो अपनी बेटी को आगे पढने के लिए लन्दन भेज देती है. दूसरी ओर नूर का प्यार दिन पर दिन और गहरा होता जाता है. कुछ सालों बाद नूर दिल्ली का एक फेमस कलाकार बन जाता है, यहाँ अपनी पेंटिंग की प्रदर्शनी में दोनों बड़े होने के बाद पहली बार मिलते है. दोनों में एक बार फिर प्यार हो जाता है, लेकिन क्या बेगम दोनों को मिलने देगी? इसके लिए आपको अपने करीबी सिनेमाघर का रुख करना होगा.

फिल्म में काश्मीर के चिनार लाल रंग को फिल्म की मुख्य थीम रखा गया है. काश्मीर में पतझड़ के समय वहां की घटा चिनार लाल रंग सी हो जाती है, फिल्म की कहानी के हिसाब से ये बैकग्राउंड फिट बैठता है. फिल्म को पतझड़ व कोहरे के बीच ही फिल्माया है जिससे फिल्म में एक दुःख झलकता है, हर तरफ उदासी, बेबसी सी दिखती है. चिनार के लाल पत्ते प्यार का प्रतीक के रूप में पहले भी उपयोग हो चुके है, जिसे नया नहीं कह सकते है, लेकिन एक उपन्यास की कहानी को हिंदी रूप में फिल्माने के लिए अभिषेक ने काश्मीर का चुनाव सही किया है. फिल्म में सब अच्छा है, बस कमी है तो गति की. फिल्म में एक रुकावट है जो बिना वजह की है, जिससे बोरियत महसूस होती है. फिल्म बिना गति पकड़े एक दम से अपने अंत में पहुँच जाती है जो अजीब है. फिल्म में कमी सबसे ज्यादा दुसरे भाग में नजर आती है. फिल्म का अंत होने तक कुछ बातों को क्लियर ही नहीं किया गया है.

FITTOR

 

वैसे इस तरह की फिल्म देखने के लिए एक अलग दर्शक वर्ग है, जैसे सोनाक्षी, रणवीर की लूटेरा भी स्लो प्रेम कहानी थी, लेकिन दर्शकों ने इसे पसंद किया था. फितूर में डायलोग अच्छे है, जो गहरी सोच व मतलब रखते है. ध्यान से सुनने पर इनके मतलब को समझा जा सकता है. इसमें से एक डायलोग है ‘खुद से आजादी तो सिर्फ मौत ही दिला सकती है या फिर इश्क’.

फितूर फिल्म कलाकारों की समीक्षा

आदित्य काश्मीरी बॉय नूर के रूप में ठीक ही रहे है. कहा गया था फिल्म के पहले इन्होंने बहुत वर्कशॉप की थी, लेकिन फिल्म में ऐसा नजर नहीं आ रहा है. उनका शहरीकरण फिल्म में भी उनका पीछा नहीं छोड़ता है. तब्बू जैसी सीनियर एक्टर के साथ स्क्रीन शेयर करते हुए उनके चेहरे पर डर, परेशानी साफ़ दिखाई पड़ती है. शराबी वाले सीन में उनकी ही फिल्म आशिकी 2 की याद आ जाती है, पूरी फिल्म में ये सबसे कमजोर सीन लगता है. हाँ लेकिन आदित्य ने नूर के लिए कोशिश बहुत अच्छी कीहै.

फिल्म की नायका कटरीना कैफ देखने में तो बेहद सुन्दर है. कटरीना की हर फिल्म में वे जहाँ होती है ख़ूबसूरती अपने आप आ जाती है, कटरीना फिल्म में नाच गाने दिखने दिखाने के लिए तो फिट बैठती है, लेकिन जब बात डायलोग बोलने व भाव को व्यक्त की आती है, तो वे पीछे रह जाती है. ऐसा पहली बार नहीं हुआ है, कटरीना की पिछली फ़िल्में भी यही कहती है. इतने सालों में कटरीना की हिंदी में अभी तक पकड़ नहीं बन पाई है. इस फिल्म में डायरेक्टर ने उनका भरपूर साथ दिया है, उन्हें ऐसे सीन दिए गए जहाँ बहुत कम डायलोग उनके हिस्से में आये.

तब्बू, इनकी जितनी तारीफ की जाये कम है. तब्बू को अगले साल होने वाले अवार्ड फ्न्शन के लिए अभी से तैयारी शुरू कर देनी चाहिए, क्यूंकि उन्हें इस किरदार के लिए जरुर अवार्ड मिलेगा. पूरी फिल्म को तब्बू ने अपने नाम कर लिया और अपनी एक्टिंग से दर्शकों को अपनी ओर आकर्षित किया. हर डायलोग बोलते समय तब्बू अपना परफेक्ट देते नजर आई है.

राहुल भट्ट फिरदौस के मंगेतर के रूप में सामने आये, छोटे से किरदार में भी उन्होंने अच्छा काम कर दिखाया.

अजय देवगन cameo role में रहे, जिनका होना ना होना एक बराबर था.

अदिति राव हैदरी जवान बेगम के रूप में नजर आई जो बेहद खूबसूरत लग रही है.

फितूर फिल्म संगीत समीक्षा

फितूर के गाने फिल्म की जान है, इसके बिना फिल्म कुछ भी नहीं. गानों की वजह से दर्शक फिल्म की ओर आकर्षित हुए है. फिल्म का गाना ‘पछमिना’ बहुत हिट रहा, जिसके लिरिक्स व डांस दोनों बेहद पसंद किया गया. टाइटल सोंग फितूर भी काफी अच्छा रहा. अमित त्रिवेदी ने बहुत अच्छा काम किया है.

फितूर फिल्म ओवरआल परफॉरमेंस

फिल्म में अदायगी बहुत अच्छी है, लेकिन wow फैक्टर की कमी है. फिल्म का हर फ्रेम बहुत ख़ूबसूरती से फिल्माया गया है, जो फिल्म का चार्म है. जिन्हें प्रेम कहानी से परहेज है वो ये फिल्म ना देखें, लेकिन वैलेंटाइन के मौके पर हर कोई प्यार में डूब जाना चाहता है. ऐसे में ये फिल्म आप अपने पार्टनर के साथ एन्जॉय कर सकते है.

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विभूति दीपावली वेबसाइट की एक अच्छी लेखिका है| जिनकी विशेष रूचि मनोरंजन, सेहत और सुन्दरता के बारे मे लिखने मे है| परन्तु साईट के लिए वे सभी विषयों मे लिखती है|
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