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भारत के मशहूर वन के प्रकार व इतिहास | Indian Famous Forest history types in hindi

Forest of India and its history types and famous forests in hindi वन किसी भी देश के लिए एक आवश्यक संसाधन है. भारत इस संसाधन के मामले में बहुत धनी है क्योकि भारत में बहुत से बड़े और घने वन है. अनुमानतः भारतीय क्षेत्र का लगभग 20% भाग वन से घिरा हुआ है जो कि 65 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र के बराबर है. भारत ऐसे 10 देशों की सूची में शामिल है जो सबसे अधिक वन समृद्ध देश है. इन सूचियों में चीन, कांगो लोकतान्त्रिक गणराज्य, ऑस्ट्रेलिया, इंडोनेशिया, सूडान, ब्राजील और रूस भी शामिल है. भारतीय वन में कई तरह के जानवर और पंछी अपना घर बनाये हुए है. भारत में पाए जाने वाले वन्य जीव अभयारण्य और राष्ट्रिय उद्यान भारत के विशाल वन क्षेत्र का प्रमुख सूचक है. बेहतर जन जीवन, फसल, अत्यधिक वर्षा के लिए वन बहुत ही जरुरी है, लेकिन वर्तमान में वन कटाई के कारण बढती ग्लोबल वार्मिंग एक गंभीर मुद्दा बनता जा रहा है, इसलिए इस मुद्दे पर वृक्षा रोपण के लिए लोगों को प्रोत्साहित करना बहुत आवश्यक है. ग्लोबल वार्मिंग के कारण प्रभाव व समाधान पर निबंध यहं पढ़ें. भारत लकड़ी से बने उत्पादों का उत्पादन करता है. भारत के पेपर उद्योग में भी लकड़ी की ज्यादा खपत होती है, इसके अलावा भारत ईंधन लकड़ी का सबसे बड़ा उपभोक्ता है. इस तरह के आवश्यकतों को पूरा करने के लिए जंगलों की कटाई एक बड़े विनाश की तरफ भारत सहित पुरे विश्व को अग्रसर कर रही है.

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भारत में वन संरक्षण का इतिहास (India Forest history in hindi)

गिब्सन ने वन के संरक्षण और उसकी खेती को बचाने के लिए प्रतिबन्ध लगाने के नियमों को लागू करने की कोशिश की. 1865 से 1894 तक शाही जरूरतों की सामग्रियों के लिए वन संरक्षण स्थापित किये गए थे. बाद में वन्य प्रबंधन प्रणाली को अपनाकर वन का उत्पादन करने की योजना बनी, फिर लोगों ने जंगली वन संरक्षण में रूचि लेना शुरू कर दिया, जिसके बाद भारतीय राज्य के शासकों ने वन में पक्षियों और स्तनधारियों के संरक्षण में मदद करने वाले लोगों को संरक्षण देना शुरू कर दिया. 1926 से 1947 के बीच पंजाब और उत्तर प्रदेश में बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण किया गया. भारत में अधिकांश राष्ट्रीय उद्यानों का निर्माण कार्य हुआ. संरक्षण का ये लाभ हुआ की कई प्रजातीय विलुप्त होने से बच गयी. वन महोत्सव कविता, स्लोगन व निबंध यहाँ पढ़ें.

इसके बाद 1952 की वन नीति के तहत भारत के एक तिहाई वन को सुरक्षित रखने का लक्ष्य रखा गया. वनों को नुकसान पहूँचाने वाली कुछ गतिविधियों पर रोक लगा दी गयी, इससे अगले 50 वर्षों में वन को लेकर लोगों की सोच और इसके विकास में बदलाव को देखा गया है. उसके बाद पांच साल की एक योजना के माध्यम से इसको संरक्षित करने के लिए रचनात्मक रवैया को अपनाया गया. 1980 में वन संरक्षण अधिनियम पारित किया गया था, इस अधिनियम में इस बात को निर्धारित किया गया था कि अब से वन क्षेत्र में कृषि या वानिकी और खेती को करने के लिए केंद्रीय अनुमति लेनी पड़ेगी. अगर वो ऐसा नहीं करते तो ये अपराध की श्रेणी में रखा जायेगा. इस कानून का उद्देश्य वनों की कटाई को सीमित करना, जैव विविधता का संरक्षण और वन्य जीवो को संरक्षित करना है, लेकिन इस वर्ष कम निवेश और अनदेखी की वजह से वनों की कटाई में कुछ खास कमी नहीं आई थी, जिसके बाद भारत ने 1988 में अपनी राष्ट्रीय वन नीति का शुभारंभ किया जोकि एक संयुक्त वन प्रबंधन नीति कार्यक्रम के तहत ये प्रस्तावित किया कि वन विभाग के साथ ही अब गावों में एक विशेष वन ब्लॉक् का प्रबंधन होगा और जंगलों की सुरक्षा विशेष रूप से लोगों की जिम्मेदारी होगी. इस तरह की पहल को सकारात्मक माना गया, क्योकि 1992 तक भारत के सत्रह राज्य ने संयुक्त वन प्रबंधन में भाग लिया और लगभग 20 लाख हेक्टेयर वनों को सुरक्षा के तहत लाया गया. जैविक खेती की जानकारी यहाँ पढ़ें.

1990 से 2000 तक एफएओ ने एक अध्ययन में पाया कि भारत दुनिया में वन कवरेज या आवृत क्षेत्र के मामले में पांचवा सबसे बड़ा लाभकारी देश है, जोकि 2000 से 2010 तक में एफएओ के अध्ययन में ही भारत को तीसरा बड़ा लाभकारी बताया गया है. इस तरह यह वन को संरक्षित करने की अपनी नीति में कामयाब है.                                   

भारत में वनों के प्रकार (Types of Indian Forest)

भारत विविधता से भरा हुआ देश है इसकी भूमि क्षेत्र में भी विविधता है कही ज्यादा सुखी भूमि है तो कही अत्यधिक वर्षा युक्त क्षेत्र होने से नमी युक्त भूमि पाई जाती है. इस वजह से जंगली वनस्पतियों में भी विविधता पाई जाती है. भारत विश्व के 17 मेगा जैव विविध क्षेत्रों में से एक है, जिससे वन विविध वनस्पतियों के साथ ही वन जीवों के विभिन्न पारिस्थितिक तंत्र का समर्थन करते है. भारत में वनों के कई प्रकार है उत्तर में लद्दाख के अल्पाइन तराइन, पश्चिम में राजस्थान के रेगिस्तान से, केरल में वर्षा वन से, उत्तर पूर्व में सदाबहार वन तक के सभी वन अपनी जलवायु, मिट्टी के प्रकार, स्थलाकृति इत्यादि के साथ ही इनकी प्रकृति और रचना के आधार पर इनका वर्गीकरण हुआ है. भारतीय वन को कई वर्गों में वर्गीकृत किया गया है जिनमे से कुछ का वर्णन हम करेंगे, जोकि निम्नलिखित है :-

  • उष्णकटिबंधीय वर्षा वन : इस तरह के वन उष्णकटिबंधीय नमी वाले जलवायु और उच्च वर्षा की विशेषताओं से युक्त होते है. ये वन हवा को ठंडा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है, भारत का उत्तर पूर्वी क्षेत्र वर्षा वन के लिए जाना जाता है. इस तरह के वैश्विक जलवायु वाले वन में जानवरों की व्यापकता पाई जाती है. भारतीय वन का सबसे पुराना प्रारूप उष्णकटिबंधीय वर्षा वन है, इस वन से कॉफ़ी, चॉकलेट, केला, आम, पपीता, गन्ना इत्यादि जैसे पौधे ही आये है.    
  • सदाबहार वन : सदाबहार वन भारत के उत्तर पूर्वी क्षेत्रों और अंडमान निकोबार द्वीप के उच्च वर्षा क्षेत्रों में पाए जाते है. जिस भाग में कई महीनों तक मानसून रहते है वहाँ ये वन पाए जाते है. इस तरह के वन में पशु और कीटों की जनसंख्या प्रचुर होती है इस तरह के वन उनके जीवन को समृद्ध बनाते है.  
  • पर्णपाती वन : पर्णपाती वन को दो रूपों में विभाजित किया जा सकता है एक नमी युक्त और दूसरी सुखी हुई पर्णपाती वन. इस तरह का वन वैसे क्षेत्रों में पाया जाता है जहाँ 100 सेंटीमीटर से 200 सेंटीमीटर वार्षिक वर्षा होती है. इस तरह के वन भारत के अधिकांश भागों में पाए जा सकते है. ये पूरब में जम्मू से पश्चिम में पश्चिम बंगाल तक शिवालिक पहाड़ियों तक पाए जाते है. इस तरह के वन में सागौन, आम, बांस, चन्दन और किल जैसे पेड़ पाए जाते है. उत्तर पूर्वी क्षेत्रों को छोड़कर भारत के उत्तरी और दक्षिण भाग में सुखी पर्णपाती वन पाए जाते है. इस वन में कई तरह के जानवर जैसे की कीड़े, स्तनधारी, सरीसृप पाए जाते है. मध्य प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक में इस तरह के वन पाए जाते है.
  • तटीय क्षेत्र के मंगल वृक्ष वन : यह वन नदी डेल्टा तट पर पाए जाते है इस तरह के वनों के पौधे खारे और ताजे पानी के मिश्रण में बढ़ते है ये वन ज्यादातर नमी वाले इलाकों में पाए जाते है.      

भारत के मशहुर वन (Famous Forest in India)  

भारत में दुनिया के बेहतरीन वन मौजूद है जो बाघों से हाथियों तक और भी कई तरह के जीवों के साथ ही हरे भरे तरह तरह के पेड़ों से भरे है. भारत का वन अद्भुत जीवित प्रजातियों का घर है भारत में मौजूद आश्चर्य जनक और मशहुर वनों का नाम निम्न है –

  • सुन्दर वन : यह वन पश्चिम बंगाल के पूर्वी राज्य में स्थित है यह दुनिया का सबसे बड़ा डेल्टा है. यह लगभग 10,000 वर्ग किलो मीटर में फैला हुआ है यह वन सफ़ेद बाघों के घर के रूप में ज्यादा जाना जाता है.
  • गिर वन : गिर वन गुजरात के जूनागढ़ में स्थित है यह 1,412 वर्ग किलोमीटर में फैला हुआ है इस वन में एशियाटिक शेर ज्यादा देखने को मिलते है. इसके अलावा इस वन में जंगली चित्तीदार बिल्ली, भालू, नीलगाय, चिंकारा और जंगली सूअर इत्यादि भी पाए जाते है.
  • कान्हा नेशनल पार्क : यह मध्य प्रदेश में स्थित है यह पार्क बारह सिंघा हिरण के लिए सबसे ज्यादा लोकप्रिय है. कान्हा के वन से ही प्रेरित होकर रुडयार्ड किपलिंग ने द वन बुक लिखा था. यहाँ पंछियों की लगभग 300 प्रजातियाँ पाई जाती है.
  • वन्दलुर रिज़र्व वन : यह वन दक्षिण भारत में स्थित है इस वन में कई तरह के पंछी निवास करते है.

इसी तरह के और भी वन है जैसे के मेघालय का खासी हिल्स, अरुणाचल प्रदेश का नामदफा नेशनल पार्क, उत्तराखंड का जिम कॉर्बेट नेशनल पार्क, कर्नाटक का बन्दीपुर नेशनल पार्क, तमिलनाडू का निलिगिरी बायोस्फियर रिज़र्व ये सभी वन संरक्षित है.

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Surbhi

सुरभिदीपावली वेबसाइट की लेखिका है| जिनको जीवनी व हिंदी के अन्य सभी विषयों मे लिखने का शोक है|

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