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पत्रकार गौरी लंकेश हत्या केस | Journalist Gauri Lankesh Murder Case in hindi

पत्रकार गौरी लंकेश हत्या केस | Journalist Gauri Lankesh Murder Case in hindi

गौरी लंकेश हत्या ने एक बार फिर से देश के लोकतंत्र पर और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर दिए हैं. ये एक बहुत विख्यात महिला पत्रकार थी. इनकी हत्या के बाद विभिन्न छोटे बड़े शहरों में हत्या का विरोध हो रहा है. इन्होंने हमेशा सांप्रदायिक शक्तियों के विरुद्ध अपनी आवाज बुलंद की है. इस हत्या के बाद देश के कई सजग पत्रकार एक जुट हुए और प्रशासन के खिलाफ अपनी नाराजगी व्यक्त की.

गौरी लंकेश कौन हैं (Who is Gauri Lankesh)

ये देश की एक बहुत ही महत्वपूर्ण पत्रकार थीं. इन्हें इनकी निडरता और मुखरता के लिए बहुत अधिक जाना जाता था. ये एक कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका ‘गौरी लंकेश पत्रिके’ की संपादिका थीं, और इसके अलावा भी कई और तरह के प्रकाशन कार्यों में सदैव लगी रहती थीं. ये अपनी पत्रिका ‘गौरी लंकेश पत्रिके’ को चलाने के लिए कहीं से प्रचार आदि नहीं लेती थी. ये पत्रिका इनके और इनके 50 साथियों के सहयोग से चलाई जाती थी. अपने संपादनों में इन्होने अक्सर सांप्रदायिक राजनीति की आलोचना की और राजनेताओं को कटघरे में खड़ा किया. इन्होने अक्सर अपने आलेखों में हिंदुत्व की राजनीति और दक्षिण पंथियों की काफ़ी आलोचना की.

नवम्बर 2016 में इनके एक लेख की वजह से इन पर मानहानि का मुकदमा भी चला था. यह मुक़दमा इनके द्वारा सन 2008 में लिखे गये एक आर्टिकल की वजह से चला, जिसके विरुद्ध भारतीय जनता पार्टी और उमेश धुसी ने इस लेख के विरुद्ध सवाल खड़े किये थे. इस मुकदमा में इन्हें 6 वर्ष का जेल और जुर्माना लगा था. हालाँकि सुनवाई के दिन ही इन्हें ज़मानत मिल गयी. गौरी लंकेश का कहना था कि वे देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी पर कोई खतरा नहीं चाहती और साथ ही उन्होंने ये भी कहा था कि देश भर में कैसे लोगों को उनकी विचारधारा की वजह से निशाना बनाया जाता है. मीडिया चैनल के सकारात्मक और नकारात्मक प्रभाव यहाँ पढ़ें.

इन दिनों इनके कई ऐसे ट्वीट वायरल हो रहे हैं, जिनमें वे देश की मौजूदा सरकार की काफ़ी आलोचना करती हुई नज़र आई हैं. इन्होने अपना करियर भी यहाँ पर रहते हुए ‘द टाइम्स ऑफ़ इंडिया’ के साथ किया था. इसके उपरान्त ये दिल्ली चली आयीं. इन्होने पत्रकारिता में अपने करियर के 16 वर्ष गुज़ारे.    

gauri lankesh murder

गौरी लंकेश की हत्या कैसे की गयी (How Gauri Lankesh was Assassinated)

ये बैंगलोर की रहने वाली थीं. यहाँ पर हत्या वाले दिन इनके घर में घुस कर गोलियाँ इनके सर और सीने पर मारी गयी. इसके बाद उनकी मृत्यु मौके पर ही हो गयी. इनकी हत्या के बाद कुछ लोग जहाँ इसका विरोध कर रहे हैं, तो वहीँ दूसरी तरफ कुछ लोगों द्वारा इनके विरुद्ध इनकी हत्या के बाद भी गालियाँ लिखी जा रही है, जिसे संवेदनहीनता की हद माना जा रहा है.

गौरी लंकेश की हत्या का जिम्मेवार कौन (Who is The Murderer of Gauri Lankesh in hindi)

इनकी हत्या के पीछे का राज सही रूप से सामने नहीं आ पा रहा है. देश के विभिन्न हिस्सों में लोग इसका विरोध करते हुए अधिकतर दक्षिण पंथियों पर ही निशाना साध रहे हैं. ध्यान देने वाली बात ये है कि कर्णाटक में सिद्धारमैया की सरकार है. अतः सबसे पहले सवाल इनके प्रशासन पर उठ रहा है. इसके बाद एक बहुत बड़ी संख्या में लोग हिंदुत्व की राजनीति को इस हत्या के लिए कटघरे में ला रहे हैं. अभी तक यह भी तय नहीं हो पाया, कि इन पर गोली किसने चलाई.

इस समय एक प्रश्न ये भी आ रहा है कि गौरी का उनके भाई के साथ एक लम्बे समय तक झगड़ा रहा है. उनके और उनके भाई के बीच का मतभेद पुलिस थाणे तक भी जा चूका है. कुछ लोग इस मर्डर के पीछे इसे भी एक कारण बता रहे है. इनकी हत्या की शक का एक काँटा माओवादियों पर भी है.  

क्या गौरी को इन्साफ मिल सकेगा (Will Gauri Get Justice)

यह एक बहुत बड़ा प्रश्न है कि क्या इनके हत्यारों की पहचान हो पाएगी. इससे पहले भी गोविन्द पानसरे, प्रोफेसर कलबुर्गी, नरेन्द्र दाभोलकर की भी हत्याएं इसी तरह से हुईं हैं. किन्तु किसी भी कोर्ट अथवा सरकार की जांच द्वारा हत्यारो का नाम तक सामने नहीं आ पाया. इस वजह से लोगों में एक बार पुनः वही ग़ुस्सा दिखाई दे जो इससे पहले हुईं हत्याओं पर उन्होंने ज़ाहिर किया था. सरकार पर इन सभी हत्याओं की जांच का भार है.

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विभूति दीपावली वेबसाइट की एक अच्छी लेखिका है| जिनकी विशेष रूचि मनोरंजन, सेहत और सुन्दरता के बारे मे लिखने मे है| परन्तु साईट के लिए वे सभी विषयों मे लिखती है|
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