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Golden Memory With Hindi Poem

बचपन सुहाना
कितनी ही ऊंचाईयों को पा ले पर बचपन की यादों को भूलापाना आसान नहीं, नन्ही यांदे हमेशा ही आँखे नम कर जाती हैं और एक भीनी सी मुस्कान छोड़ जाती हैं | पुराना वक्त तकलीफ में बिता हो या खुशियों में उसका अहसास हमेशा हमारे पास होता |

memory

बचपन सुहाना

आई रे, आई याद चली आई ,
वो खेलना कूदना, वो छुपम छुपाई|
वो छुट्टी के दिन, वो आलस भरी अंगड़ाई,
रंग बिरंगी पतंगे हमने खूब उड़ाई |
गिल्ली डंडे की  आवाज भी लगाई,
कागज की कश्ती पानी में चलाई |
बारिश के गड्ढो में छलांग भी लगाई,
वो किताबों की दुनियां, वो परीक्षा की घड़ियाँ |
वो पढना पढाना, वो आंसू बहाना,
वो दोस्तों से लड़ना, वो रूठना मनाना|
मुझे याद आता है, वो बचपन सुहाना,
यादों से भरा ,मेरा बचपन सुहाना ||

                        By: कर्णिका पाठक

 

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Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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