हौसलों की उड़ान कभी नाकामियाब नहीं होती | Hausle Ki Udaan Buland Story In Hindi

Hausle (Hauslay) Ki Udaan Buland Story In Hindi हौसलों की उड़ान कभी नाकामियाब नहीं होती, यह एक बहुत ही अच्छा प्रेरनादायी वाक्य है, इसका अर्थ होता है कि जो लोग अपने हौसलों को कभी कम नहीं होने देते और हमेशा कोशिश करते रहते है, वे कभी भी नाकामियाब नहीं होते उन्हें सफलता जरुर हासिल होती है. दोस्तों, कुछ लोग ऐसे भी होते है जो दूसरों के हौसलों को बढ़ाने की वजाय उनके हौसलें कम करने की कोशिश करते है, ऐसे में सबसे पहले बात आती है लडकियों की. लोग सोचते है कि यह लडकियों के बस की बात नहीं है वे कुछ नहीं कर सकतीं. लेकिन ऐसा कहकर वे लडकियों का हौसला कम नहीं करते बल्कि इससे लड़कियों का कुछ कर दिखाने का हौसला और भी ज्यादा बढ़ जाता है. आज मैं आपके सामने एक ऐसी ही अपने हौसलों की उड़ान भरती लड़की की कहानी आपके सामने प्रस्तुत कर रही हूँ.

हौसलों की उड़ान कभी नाकामियाब नहीं होती 

Hausle Ki Udaan Buland Story In Hindi

एक बार की बात है एक लड़की थी जिसका नाम सोनम था. वह बचपन से ही पढ़ाई में बहुत ही होशियार थी और इसके लिए उसे कई मेडल भी मिले. किन्तु उसकी पढ़ाई से ज्यादा रूचि क्रिकेट में थी और वह बड़ी हो कर क्रिकेटर बनना चाहती थी. सोनम के पिता डॉक्टर थे और माँ गृहणी थीं. सोनम के पिता चाहते थे कि सोनम बड़ी हो कर डॉक्टर बने किन्तु सोनम यह नहीं चाहती थी. वह हमेशा अपने पापा से जिद्द किया करती थी कि वे उसे क्रिकेट खेलने की आज्ञा दे दें, लेकिन उसके पिता यह जानते थे कि यदि उन्होंने उसे क्रिकेट खेलने की अनुमति दे दी तो वह पढ़ाई नहीं करेगी. वे हमेशा सोनम से यह कहते रहते कि – “यह लडकियों का खेल नहीं है इसलिए तुम यह नहीं खेल सकती”. इस वजह से सोनम अपने पिता से हमेशा नाराज रहती थीं, किन्तु सोनम की माँ सोनम को हमेशा सपोर्ट किया करती थी. वे अक्सर सोनम को छुप कर खेलने जाने के लिए अनुमति दे दिया करती थीं और सोनम के पिता से झूठ बोल देती थीं कि वह पढ़ाई कर रही है. ऐसा ही चलता रहा और वह कुछ समय बाद क्रिकेट के खेल में माहिर हो गई और पढ़ाई में होशियार होने की वजह से उसने स्कूल की पढ़ाई भी अच्छे अंकों से पूरी कर ली, जिससे उसके पिता को भी उसके क्रिकेट खेलने के बारे में कुछ नहीं पता चला.

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स्कूल की पढ़ाई पूरी करने के बाद उसके पिता ने उसे डॉक्टरी की पढ़ाई के लिए बाहर पढने भेज दिया. सोनम कॉलेज की पढ़ाई के लिए बाहर चली तो गई थी किन्तु उसका इसमें मन नहीं लगता था, क्यूकि उसे चारों ओर क्रिकेट ही क्रिकेट दिखाई देता था. फिर एक बार उसकी माँ ने उससे कहा कि वह यह सब छोड़ दे और क्रिकेट खेलना शुरू कर दे और उसने अपने पिता को बिना बताये अपनी माँ की बात मानते हुए क्रिकेट खेलना शुरू कर दिया, इसके लिए उसकी माँ ने उसका पूरा सपोर्ट भी किया. क्रिकेट खेलते – खेलते सोनम ने एक के बाद एक कई ट्रोफी जीती.

फिर एक बार एक खेल में वह बहुत ही गंभीर तरह से घायल हो गई, और उसे हॉस्पिटल में एडमिट किया गया. सोनम की माँ को सोनम के पिता से सब कुछ बताना पड़ा और सोनम के पिता यह सब जान कर बहुत ही ज्यादा गुस्सा हुए और सोनम के पास जा कर उससे कहने लगे – “तुमने ये ठीक नहीं किया मैंने कहा था यह लड़कियों का खेल नहीं है और तुम मुझे बिना बताये क्रिकेट खेलने लगी”. ऐसा कहकर वे सोनम से बहुत नाराज होकर वहाँ से चले गए. डॉक्टर ने भी यह कह दिया कि सोनम अब कभी भी क्रिकेट नहीं खेल पायेगी. सोनम यह सब सुनकर बहुत ही ज्यादा दुखी हो गई और उसने सोचा की उसने ऐसा करके अपने पिता का दिल दुखाया है, वह बहुत से महत्वपूर्ण क्रिकेट मैच का हिस्सा भी नहीं बन सकी, जोकि उसका सपना था. किन्तु उसके दिमाग में अपने पिता की एक बात बार – बार घूम रही थी कि क्रिकेट लडकियों का खेल नहीं है, और वह किसी भी हालत में अपने पिता की इस बात को गलत साबित करना चाहती थी.

सोनम कुछ दिनों तक ऐसे ही पड़ी रहीं तब उसकी माँ ने उससे कहा कि – “यदि तुम्हे अपने पिता को गलत साबित करना है तो तुम्हें उठना होगा और कुछ कर दिखाना होगा”. तब उसने हिम्मत करते हुए अपने शरीर में लगी सारी पट्टियाँ हटा दी और उठ खड़ी हुई और रोज प्रयास करते हुए कुछ महीनों बाद वह चलने भी लगी. इस तरह प्रयास करते – करते वह बिलकुल ठीक हो गई. ठीक होने के बाद उसने फिर से क्रिकेट खेलना शुरु कर दिया, शुरुआत में सोनम खेल में हर बार हारती रही, किन्तु उसने अपने हौसलों को कभी कम नहीं होने दिया और वह कोशिश करती रही.

कोशिश करते – करते उसने धीरे – धीरे सफलता की ओर कदम बढ़ा लिया और वह देखते ही देखते एक बहुत बड़ी क्रिकेटर बन गई और उसने अपने पिता की यह बात गलत साबित कर दी कि लडकियाँ कुछ नहीं कर सकती. अपनी बेटी की यह कमियाबी देखकर उसके पिता को अपनी गलती का एहसास हुआ और उसने अपने बेटी से माफ़ी मांगी और साथ ही सोनम के क्रिकेटर बनने के बाद उन्होंने सोनम को लडकियों की क्रिकेट टीम का कोच बनने के लिए प्रोत्साहित किया और कुछ समय बाद सोनम लडकियों की क्रिकेट टीम की कोच बन गई. इस तरह सोनम ने अपने हौसलों की उड़ान को कभी नाकामियाब नहीं होने दिया और साथ ही इस वाक्य को सही साबित कर दिया.

कहानी से प्राप्त शिक्षा (Moral of the Story)-

इस कहानी की शिक्षा यह है कि जिस तरह सोनम ने अपने हौसलों को कभी कम नहीं होने दिया एवं कोशिश करते हुए हर मुश्किलों का सामना कर आगे बढ़ती रही और कमियाबी की उड़ान भरी. उसी तरह हमें भी कभी हार नहीं माननी चाहिए हमेशा कोशिश करते रहना चाहिए, क्यूकि हौसलों की उड़ान कभी नाकामियाब नहीं होती. कोशिश करते रहने से एक ना एक दिन हमें कमियाबी जरुर हासिल होती है. इस कहानी से उन लोगों को भी शिक्षा मिलती है जो सोनम के पिता कि तरह यह सोचते है कि लडकियाँ कुछ नहीं कर सकती और ऐसे खेल लड़कियों के लिए नहीं बने हैं.

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Surbhi

सुरभिदीपावली वेबसाइट की लेखिका है| जिनको जीवनी व हिंदी के अन्य सभी विषयों मे लिखने का शोक है|

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