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Hindi Poem Guru

गुरु हिंदी कविता |
गुरु ज्ञान का पर्याय हैं| उसकी महिमा का क्या बखान करे ? जिसके जीवन में गुरु का आशीष नहीं उसका जीवन एक कड़वे फल की तरह हैं |

गुरु का ज्ञान ही इंसान को इंसान बनाता हैं | सच्चा गुरु अपने शिष्य को व्यवहारिक जीवन से रूबरू कराता हैं | उसे हर मुश्किल का सामना कर जीवन को ख़ुशी से जीने का पाठ सिखाता हैं | गुरु का ज्ञान सदा ही शिष्य के साथ होता हैं उनकी ताकत ज्ञान स्वरूप शिष्य के साथ प्रतिपल छाया के रूप में रहती हैं | जो सच्चा गुरु हैं उसे आदर पाने की लालसा नहीं होती उनके सामने स्वतः ही शीष झुक जाता हैं |

Guru Hindi Kavita1

गुरु की महिमा क्या कहे, निर्मल गुरु से ही होए |
बिन गुरुवर, जीवन कटु फल सा होए ||

 

गुरु

जानवर इंसान में जो भेद बताये
वही सच्चा गुरु कहलाये  

जीवन-पथ पर जो चलाना सिखाये
वही सच्चा गुरु कहलाये

जो धेर्यता का पाठ पढ़ाये
वही सच्चा गुरु कहलाये

संकट में जो हँसना सिखाये
वही सच्चा गुरु कहलाये

पग-पग पर परछाई सा साथ निभाये
वही सच्चा गुरु कहलाये  

जिसे देख आदर से सिर झुकजाये
वही सच्चा गुरु कहलाये  

कर्णिका पाठक

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Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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