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दोस्ती की कविता जाना पहचाना साथी | Hindi Poetry Jana Pahachana Sathi Friendship Day Special

वो खुशियों की डगर , वो राहों में हमसफ़र,
वो साथी था जाना पहचाना, दिल हैं उसकी यादों का दीवाना ||

वो साथ था जाना पहचाना ……….||

गम तो कई उसने भी देखे,
पर राहों में चले खुशियों को लेके|
दिल चाहता हैं हर दम हम साथ चलें,
पर इस राह में कई काले बादल हैं घने|

वो साथ था जाना पहचाना ……….||

मेरे आसुओं को था जिसने थामा,
मुझसे ज्यादा मुझको पहचाना|
चारों तरफ था घनघोर अँधियारा,
बनकर आया था जीवन में उजियारा|

वो साथ था जाना पहचाना ……….||

गिन-गिन कर तारे भी गिन जाऊ,
पर उसकी यादों को भुला ना पाऊ|
कहता था अक्सर हर दिन हैं मस्ताना,
हर राह में खुशियों का तराना|

वो साथ था जाना पहचाना ……….||

कहता हैं मुझे भूल जाना,
अपनी यादों में ना बसाना |
देना चाहूँ हर ख़ुशी उसे,
इसीलिए, मिटाना चाहूँ दिल से |

वो साथ था जाना पहचाना ……….||

दोस्ती की कविता जाना पहचाना साथी

Hindi Poetry Jana Pahachana Sathi Friendship Day Special

friends forever

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Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
Karnika

2 comments

  1. यह शायरी बहुत ही मजेदार व् रोमान्टिंग है
    इसे पढ़ने व सुनने में बहुत मजा आता है

  2. यांदे याद आती हैं, बाते भूल जाती हैं
    🙂

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