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असहिष्णुता पर निबंध | Asahishnuta Nibandh in hindi

Intolerance (Asahishnuta) essay / nibandh in hindi प्रत्येक भारतीय के लिए भारत सिर्फ उसके रहने के लिए देश नहीं अपितु उसकी भारतमाता है. भारत के सभी लोग भारतमाता की संतान हैं. सभी एक परिवार में निहित है, सभी नागरिक भारतमाता की जय – जयकार करने में  गौरवान्वित महसूस करते हैं. अपनी इस माँ का पूरे विश्व में सम्मान हो, उसकी गरिमा पर कोई आंच न आए इस बात का वे हमेशा खयाल रखते हैं. भारतमाता की रक्षा को अपना कर्तव्य समझते हैं.

असहिष्णुता पर निबंध

Intolerance / Asahishnuta essay (nibandh) in hindi

भारत शुरू से ही धार्मिक प्रवृत्ति का रहा है. यहाँ कई दैवीय जन्म होने की मान्यता है, कई ऋषि मुनि हुए जो सभी की धर्म के प्रति आस्था बढ़ाते हैं. भारत के इतिहास में युगों से ऋषि, मुनि, राजा-महाराजा संयम को अपनाते हुए निरंतर आगे बढ़ते रहे हैं. धर्म के वेद –पुराणों में पूरी पृथ्वी को एक परिवार माना गया है. यहाँ “वसुधेव कुटुंबकम” की मान्यता है, अर्थात पूरा विश्व एक ही परिवार है. हम पृथ्वी को माता के रूप में देखते हैं और माता के सहनशीलता तथा निरंतरता के गुण को आत्मसात करना अपना कर्तव्य समझते हैं. लेकिन इस इक्कीसवीं सदी में भारत के लोगों को अचानक क्या हो गया? क्यूँ हम सहसा ही संयम के बिना, अधीर हो रहे हैं?

असहिष्णुता क्या है? ( Intolerance / Asahishnuta Definition)

सहिष्णुता का विपरीत होता है “असहिष्णुता”. असहिष्णुता (Asahishnuta) अर्थात सहने की शक्ति नहीं होना. भारत को संयमित, सहनशील राष्ट्र के रूप में देखा जाता है. परंतु आजकल यह देखने एवं सुनने में आ रहा है, भारत के लोग असहिष्णु होते जा रहे हैं. भारत की जनता किसी भी घटना पर तुरंत ही अपनी प्रतिक्रिया देने लग गयी है. देश में होने वाली छोटी सी भी घटना पर देश की जनता आक्रोशित होने लगी है एवं अपना संयम तथा सहनशीलता खोने लगी है. अपने विचारों को प्रकट करने में लोग छोटी छोटी बातों को तूल देते हुए बड़ा करने में लगे हैं. कई बार छोटी छोटी घटना से विवाद इतना बढ़ जाता है, कि लोगों की जान पर बन आती है. देश की जनता आक्रोश तथा गुस्से में दंगे, झगड़े, मारपीट आदि करने पर उतारू हो जाती है. फिर लड़ने वाले दोनों वर्ग मे लोग जुडते जाते हैं तथा विवाद बढ़ता चले जाता है. कोई भी वर्ग संयम एवं सहनशीलता नहीं अपनाना चाहता, जिससे देश में अराजकता तथा अशांति बढ़ रही है. इसी से ही देश असहिष्णु हो रहा है.

धर्म के आधार पर विरोध :

भारत में अहिंसा, असहिष्णुता (Asahishnuta), आतंकवाद, और असाम्प्रदायिकता खूब बढ़ रहे हैं. आजकल कई बार जहन में सवाल बरबस ही आ जाता है कि हम इतने असहिष्णु कैसे हो गए? पूरे विश्व में भारत संयम, सहनशीलता की मिसाल माना जाता रहा है, पर अचानक यह भारत इतना असहिष्णु कैसे हो गया? कहते हैं कि भारत विविधताओं का देश है, लेकिन इसकी इस विविधता में भी एकता है. प्रत्येक नागरिक भारत के संविधान का आदर करता है तथा उसे मानता है. भारत के संविधान के अनुच्छेद 25 में भारत को “धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र” कहा गया है अर्थात यहाँ सभी धर्म समान है. सभी धर्म को सभी नागरिक समभाव से देखते हैं. सभी धर्म के प्रति समान दृष्टिकोण भारत के सभी नागरिकों को समानता का अधिकार देता है. भारत में सभी नागरिक अपने धर्म का पालन करने में स्वतंत्र है. अलग अलग धर्म होते हुए भी यहाँ एकता, अखंडता, समानता है. परंतु अचानक इस एकता, अखंडता, समानता को ना जाने किसकी नजर लग गयी? लोग धर्म, राष्ट्र के नाम पर, एक दूसरे के धर्म पर टिप्पणी करने लगे. एक धर्म को मानने वाला दूसरे के धर्म के प्रति असहिष्णु हो रहा है.

intolerance

भारत पर धर्म के आधार पर छोटे छोटे हमले होते ही रहे हैं. इन हमलों का शिकार कई बार कई किताबों तथा फिल्मों को होना पड़ा है. सलमान रश्दी को अपनी किताब पर प्रतिबंध लगने के बाद कई समय तक भारत के बाहर रहना पड़ा था. इस पर अमेरिका के राष्ट्रपति ने गणतन्त्र दिवस पर मुख्य अतिथि के रूप में भारत को सतर्क करते हुए, भारत के धर्म के अधिकार को याद दिलाते हुए कहा था कि भारत को सभी धर्म के प्रति समानभाव रखना चाहिए एवं उसके संविधान का पालन करना चाहिए, जिससे कि भारत विश्व में धर्म निरपेक्ष राष्ट्र के रूप अपनी मिसाल बनाए रखे.

सोशल मीडिया हुआ अभिव्यक्ति का जरिया :

आजकल सोशल मीडिया अभिव्यक्ति का बहूत ही शक्तिशाली जरिया हो गया है. किसी भी प्रकार की घटना पर सभी अपने विचार तुरंत ही प्रकट कर सकते हैं. ट्विटर, फेसबूक, इन्स्टाग्राम, यू-ट्यूब आदि के द्वारा तुरंत ही विचारों, विडियो, आडिओ को सार्वजनिक रूप से लोगों तक पहुंचाया जा सकता है. फिर इन पोस्ट्स पर अलग अलग व्यक्ति द्वारा अलग अलग प्रतिक्रियाएँ दी जाती है और बात–बे–बात बहस, आरोप – प्रत्यारोप बढ़ते चले जाते हैं. इस अभिव्यक्ति को प्रकट करने के चक्कर में लोगों ने एक दूसरे की भावनाओं की चिंता करना छोड़ दिया है. कोई भी किसी भी प्रकार से संयम नहीं रखना चाहता या आज के दौर में यह कहना ज्यादा उचित होगा, कि कोई भी किसी भी तरीके से पीछे नहीं रहना चाहता. प्रत्येक व्यक्ति किसी दूसरे के विचार एवं भावनाओं की परवाह किए बिना ही आचरण करते जा रहे हैं. भारत के संविधान में अभिव्यक्ति का अधिकार है, जिसे आज की जनता बिना सोचे ही उपयोग कर रही है. अभिव्यक्ति के अधिकार के तहत प्रत्येक भारतीय अपने विचार प्रकट करने के लिए स्वतंत्र है. परंतु आज इस अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का अधिकार रखते हुए लोग एक दूसरे की भावनाएँ आहत कर रहें हैं.

असहिष्णुता का विरोध (Asahishnuta Virodh ):

आजकल कई बार यह सुनने में आया कि कई महान हस्तियों द्वारा अपने पुरस्कार लौटा दिये गए, कुछ अभिनेता भारत में रहने में असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. यह सब असहिष्णुता के कारण ही हो रहा है. दादरी में कुछ लोगों ने मिल कर एक युवक को सिर्फ इसलिए मार डाला क्यूंकि उन्हें शक था की वो व्यक्ति गोमांस का उपयोग करता है. पूरी बात जाने बिना ही लोग अपना रोष प्रकट करने में लगे हैं. इसके बाद दादरी की इस घटना का विरोध करते हुए नयनतारा सहगल (भारतीय अँग्रेजी लेखिका) ने साहित्य अकादेमी पुरस्कार लौटा दिया. इस कड़ी में कई महानविभूतियों ने भी भारत में बढ़ रही असहिष्णुता के विरोध में अपने पुरस्कार लौटा दिये.

असहिष्णुता पर आमिर खान की टिप्पणी (Aamir Khan intolerance issue in india):

भारत में बढ़ रहे असहिष्णुता के दौर में आमिर खान ने उनकी पत्नी किरण राव के विचार बताते हुए कहा, कि कई बार वे भारत में रहने में असुरक्षित महसूस करते हैं और इसलिए क्या उन्हे भारत छोड़ देना चाहिए? उनके इस कथन ने पूरे भारत को आहत किया. लोग यह सोचने पर मजबूर हो गए कि क्या वाकई भारत एक “असुरक्षित राष्ट्र” हो गया है, जहाँ लोगों की सुरक्षा का हमेशा डर रहता है.

कुछ तबके के लोग इसके बिल्कुल विपरीत सोचते हैं और इन सबकी कड़ी आलोचना करते हैं. कई फिल्मी दुनिया की हस्तियाँ अनुपम खेर, परेश रावल, रवीना टंडन, करीना कपूर जैसे दिग्गज सितारे भारत को सहिष्णु मानते हुए, यह कहते नजर आए की आमिर खान जैसे चर्चित व्यक्ति को एसा कहना शोभा नहीं देता. आज आमिर जिस मुक़ाम पर हैं, वो सिर्फ भारत के लोगों के प्यार एवं समर्थन के कारण ही हैं. आमिर खान “सत्यमेव जयते” नामक शो का हिस्सा थे, जहाँ वे भारत में फैली कुरीति, कुप्रथा, से लड़ते हुए जीवन में आगे आशा के साथ जीने की प्रेरणा देते हुए नजर आए, लेकिन अचानक उनकी एवं उनकी पत्नी की एसी प्रतिक्रिया पर लोग चौंक से गए, कि आखिर किस वजह से वे एसा बोलने पर मजबूर हो गए. इस पर लोगों की असहिष्णुता का एसा प्रभाव हुआ, कि उन्हे भारत के गुजरात राज्य के दूत (Ambassador) बनाने से हटा दिया गया. साथ ही साथ स्नेप्डील से भी उनका करार खत्म कर दिया गया.

भारत की नींव डगमगा रही है :

सांप्रदायिकता, एकता, अखंडता, सहनशीलता, और समता को भारत की नींव माना जाता है, लेकिन इस तरह के कदम भारत की नींव को हिला रहे हैं. आज का युवा वर्ग सोचे समझे बिना ही अपनी प्रतिक्रिया देने में अपने आप को गौरवान्वित महसूस करता है, परंतु वह यह नहीं सोच रहा कि इससे हमारे देश की धार्मिकता तथा सांप्रदायिकता नष्ट हो रही है. जरूरी नहीं कि कोई बड़ी घटना ही मानवीय संयम एवं भावनाओं को आहत करे, भारत में एसे कई राज्य जहाँ छोटे –छोटे कस्बों, शहरों में लोग एक दूसरे के धर्म के प्रति, मान्यता के प्रति उत्तेजित हो रहे हैं. राजस्थान, बिहार, उत्तर प्रदेश, झारखंड भी इन सब घटनाओं से अछूते नहीं हैं. यह धर्म के प्रति उत्तेजना सिर्फ किसी विशेष धर्म तक ही सीमित नहीं है वरन हिन्दू – हिन्दू के धार्मिक परम्पराओं में अंतर पर भी अपनी दखल अंदाजी करते हुए प्रतिक्रियाएँ देने में अपना अधिकार समझ रहे हैं. आज के भारतीय व युवा वर्ग सिर्फ मुस्लिम या अल्पसंख्यक पर ही नहीं उत्तेजित हो रहे वरन एसे हिन्दू या वह धर्म जो मांसाहार, मुख्यरूप से गोमांस (बीफ) आदि का सेवन व उपयोग करते हैं, उन पर अपना गुस्सा एवं रोष प्रकट करते हुए सारी सीमा तोड़ते जा रहे हैं. कुछ भारत विरोधी तबके सक्रिय होने लगे हैं, जो भारत की एकता को खंडित करना चाहते हैं. यही लोग असहिष्णुता को अधिक बढ़ावा दे रहे हैं. आज भारत के लोग अपना संयम खोते नजर आ रहें हैं.

आवश्यकता है एकजूट होने की :

भारत का विकास धर्म, जाति, भाषा के आगे पीछे ही सिमट कर ना रह जाये, इसलिए भारत को असहिष्णुता के प्रभाव से जल्द ही मुक्त होने की आवश्यकता है. भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है तथा उसे अपने इस धर्मनिरपेक्षता को बनाए रखना होगा. इसके लिए प्रत्येक धर्म के लोगों को अपना राष्ट्रधर्म समझते हुए एकजूट होने की आवश्यकता है. सिर्फ भारतमाता की जय के नारे लगाने से कुछ नही होगा। हमें एक साथ हो कर भारत को फिर से विश्वविजयी बनाना होगा। हमें यह साबित करना होगा कि हम सब भारतमाता की ही संतान हैं और एक ही परिवार के हैं. हमे सभी धर्म के प्रति संभाव रखते हुए, एक दूसरे की चिंता करते हुए अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का सही उपयोग करते हुए देश में अराजकता, अशांति फैलाने वाले तत्वों को कमजोर करना होगा. हमें फिर से संयमित तथा सहनशील हो कर देश के विकास में भागीदार बनने की आवश्यकता है.

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Prerna

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प्रेरणा दीपावली वेबसाइट की लेखिका है, जिनको लिखने का शौक है, इसलिए वे दीपावली साईट के लिए कभी कभी कुछ विषयोंपर लिखती है|
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