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जयापार्वती व्रत पूजा विधि, कथा | Jaya parvati vrat katha puja vidhi in hindi

जयापार्वती व्रत पूजा विधि, कथा | Jaya parvati or vrat katha puja vidhi in hindi

जयापार्वती व्रत जिसे विजया व्रत भी कहते है, मुख्यतः गुजरात में मनाया जाता है. इस व्रत को विवाहित महिलाएं व नौजवान लड़कियां रहती है. इस व्रत में माता पार्वती व शिव की पूजा की जाती है. यह कठिन व्रत 5 दिनों का होता है. विवाहित महिलाएं अपने सुखमय जीवन के लिए यह व्रत रहती है, व लड़कियां अच्छे वर की चाह में इस व्रत को पूरी श्रद्धा से रहती है.

Jaya parvati vrat

जयापार्वती व्रत 2018 में कब मनाया जाता है? ( Jaya parvati vrat 2018 date)

जयापार्वती व्रत अषाढ़ माह (जुलाई) की शुक्ल पक्ष के 13वें दिन से शुरू होता है,जो कृष्ण पक्ष की तृतीया के दिन समाप्त होता है. यह व्रत 5 दिन का व्रत होता है, जो इस बार 24 जुलाई 2018 मंगलवार को शुरू होगा एवं 31 जुलाई 2018, दिन मंगलवार को समाप्त होगा. इस व्रत को 5, 7, 9, 11 या 20 सालों तक लगातार रखा जाता है. 

जयापार्वती व्रत शुरू 17 जुलाई 2016 रविवार
जयापार्वती व्रत समाप्ति 22 जुलाई 2016 शुक्रवार
पूजा मुहूर्त 19:12 से 21:18

जया पार्वती व्रत कथा (Jaya Parvati vrat story) –

एक ब्राह्मण परिवार था, जिसमें पति पत्नी थे. ये दोनों ही धार्मिक, संस्कारी थे. इनके पास सब कुछ था, बस कमी थी तो एक बच्चे की. ब्राह्मण जोड़ा शिव से लगातार बच्चे के लिए प्राथना करते रहते थे. शिव इनकी भक्ति से खुश हुए और एक दिन इन्हें दर्शन देकर कहा कि “पास के जंगल में मेरी एक मूर्ती है, जिसकी कोई पूजा नहीं करता, तुम वहां जाओ और पूजा अर्चना करो.”

वो ब्राह्मण उस जंगल में जाता है, उसे शिव के बताये अनुसार मूर्ती मिलती है. वह उसे साफ करने व सजाने के लिए पानी व फूल की तलाश में निकल जाता है. रास्ते में उसे सांप काट लेता है, जिससे व वहीँ बेहोश हो जाता है. बहुत समय हो जाने पर ब्राह्मण की पत्नी चिंतित होने लगती है. वह उसकी तलाश में जंगल तक जाती है, और उसी मूर्ती के पास शिव की तपस्या करने लगती है. शिव उसकी भक्ति से खुश होते है, और उसके पति को सही सलामत भेज देते है. इसके कुछ समय बाद दोनों को एक पुत्र रत्न की भी प्राप्ति होती है और वे सुखी सुखी जीवन व्यतीत करने लगते है. इस कथा के अनुसार जो इस व्रत को रखता है, उसे सदा सुहागन का वरदान मिलता है, साथ ही उसके बच्चों का जीवन सुखमय रहता है.

जयापार्वती व्रत का महत्व (Jayaparvati importance in hindi) –

शादीशुदा महिलाएं इस व्रत को अपनी इच्छा अनुसार 5-20 साल तक रहती है. इस दौरान वे दूसरी औरतें को घर बुलाती है, उन्हें खाना खिलाती है. वे एक दुसरे को कुमकुम हल्दी लगाती है, एक दुसरे को सदा सुहागन होने का आशीर्वाद देती है. अविवाहित लड़की के इस व्रत के रहने से जल्दी शादी होती है, साथ ही अच्छा भरा पूरा परिवार मिलता है.

जयापार्वती व्रत पूजा विधि ( Jaya parvati vrat puja vidhi )

व्रत के पहले दिन ज्वार (गेहूं की बाली) को एक गहरे बर्तन में रखें. इसे आप घर पर या किसी मंदिर में स्थापित करा सकती है. रुई की एक माला बनायें जिसे नागला कहते है. अब रोज सुबह नाहा धोकर अगले पांच दिन ज्वार के बर्तन में पानी चढ़ाएं. रोली, फूल, अक्षत चढ़ाएं, उसके बाद रुई की माला चढ़ाएं.

जयापार्वती व्रत जागरण (Jaya parvati vrat jagran)

व्रत समाप्ति के एक रात पहले रात भर जागा जाता है, भजन, कीर्तन किया जाता है. इसे जयापार्वती जागरण कहते है. जागरण को भी महिला, लड़की व्रत रखती है, उसे व्रत समाप्ति के पहले इस रात को जागना जरुरी माना जाता है. इस समय नाच गाना भी किया जाता है.

जयापार्वती व्रत में क्या करें (Jaya parvati vrat what to do)

  • व्रत वाले दिन जल्दी उठकर नाहा धो लें, एक दिन पहले घर की सफाई करें.
  • मिट्टी, सोने या चांदी के बैल में शिव पार्वती की मूर्ती बनाकर रखें. इसे घर या मंदिर में विराजमान करें.
  • इसे दूध, दही, पानी, शहद से नहलाएं.
  • कुमकुम, हल्दी लगायें, नारियल, प्रसाद, फल, फूल चढ़ाएं.
  • पार्वती जी की उपासना करें.
  • रोज पांच दिन ऐसा करे, फिर भोजन ग्रहण करें.
  • आखिरी दिन जागरण के बाद नहा लें.
  • शिव पार्वती, व ज्वार के उस बर्तन की पूजा करें. फिर इसे किसी नदी में सिरा दें.
  • पूजा के बाद व्रत समाप्त हो जाता है, जिसके बाद आप सब कुछ खा सकते है.

जयापार्वती व्रत का खाना (Jaya parvati vrat food)

इस व्रत के दौरान नमक, आटे से बना कोई भी समान, सभी तरह की सब्जियां नहीं खानी चाइये. व्रत के दौरान आप फल, दही, दूध, जूस, दूध से बनी मिठाइयाँ खा सकते है. व्रत के आखिरी दिन मंदिर में पूजा के बाद नमक, आटे से बनी रोटी, पूरी व सब्जी खाकर व्रत तोड़ा जाता है.

गुजरात में इस व्रत को बहुत अधिक धूमधाम से मनाया जाता है. 5 दिन का यह व्रत एक तपस्या के समान होता है, जो कठिन जरुर होता है लेकिन बहुत फलदायी होता है. गुजरात में यह व्रत लड़कियां छोटी उम्र से ही रहने लगती है. इसी समय गुजरात में गौरी व्रत भी रखा जाता है, जो 3 दिन का होता है. जिसकी पूजा विधि इसी व्रत के समान होती है. सुखमय जीवन के लिए विवाहिता को यह व्रत रहना चाइये.

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विभूति दीपावली वेबसाइट की एक अच्छी लेखिका है| जिनकी विशेष रूचि मनोरंजन, सेहत और सुन्दरता के बारे मे लिखने मे है| परन्तु साईट के लिए वे सभी विषयों मे लिखती है|
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