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के आर नारायण जीवन परिचय | K.R. Narayanan biography in hindi

 K.R. Narayanan (Kocheril Raman Narayanan) biography in hindi के आर नारायण की जीवनी को बहुत प्रभावशाली माना जाता है, ये एक मेहनती व्यक्ति थे, जिन्होंने कड़ी मेहनत करके विपरीत परिस्थिति में सफलता हासिल की थी. के आर नारायण का जन्म बहुत गरीब दलित परिवार में हुआ था, उन्होंने पढाई व काम के लिए कड़ी मेहनत की थी. के आर नारायण देश के दसवें राष्ट्रपति थे.  जो पहले दलित व मलयाली राष्ट्रपति थे.

के. आर. नारायण का जीवन परिचय

K.R. Narayanan biography in hindi

Narayanan

कोचेरिल रमण नारायण जन्म, शिक्षा व परिवार –

क्रमांक जीवन परिचय बिंदु  के आर नारायण जीवन परिचय
1.       पूरा नाम कोचेरिल रमण नारायण
2.       जन्म 27 अक्टूबर 1920
3.       जन्म स्थान पेरुमथॉनम उझावूर गाँव, जिला त्रावणकोर, केरल
4.       माता – पिता पुन्नाथठुरावीथी पप्पियाम्मा,  कोचेरिल रमण विद्यार
5.       पत्नी उषा नारायण (1951)
6.       राजनैतिक पार्टी भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस
7.       मृत्यु 9 नवम्बर 2005 (नई दिल्ली)

कोचेरिल रमण नारायण स्वतंत्र भारत के पहले दलित एवं मलयाली राष्ट्रपति थे. इनका जन्म 27 अक्टूबर 1920 में केरल के एक छोटे से गांव पेरुमथॉनम उझावूर, त्रावणकोर में हुआ था. वैसे इनका जन्म 4 फ़रवरी 1920 को हुआ था, लेकिन जब इनके अंकल स्कूल में इनका दाखिला के लिए गए तो सही तारीख पता न होने की वजह से उन्होंने 27 अक्टूबर 1920 लिखवा दी, इसके बाद से इसे ही ऑफिसियल मान लिया गया. के आर नारायण बहुत गरीब परिवार के थे. वे परवान जाति के थे, जिसके अनुसार उन्हें नारियल तोड़ कर अपना भरण पोषण करना होता था. इनके पिता का नाम कोचेरिल रमण विद्यार एवं माता का नाम पुन्नाथठुरावीथी पप्पियाम्मा था.

के आर नारायण के पिता ने भारतीय पद्धति की चिकित्सा सिद्धा व आयुर्वेद का गहराई से अध्यन किया था, उन्हें इसकी अच्छी समझ थी, जिसकी वजह से सभी  उनका बहुत सम्मान करते थे. K.R. Narayanan सात भाई बहिन थे और वे चोथे  नंबर  के थे. इनकी एक बड़ी बहिन गौरी होमियोपैथी थी. गरीब होने के बावजूद इनके पिता ने शिक्षा को हमेशा प्राथमिकता दी.

के आर नारायण की प्रारंभिक शिक्षा 1927 में उझावूर के अवर प्राथमिक विद्यालय में हुई थी. उस समय आने जाने का उचित साधन नहीं होता था, जिस वजह से शिक्षा के लिए उन्हें  रोज 15 km  पैदल जाना पड़ता था. के आर नारायण  जी के पिता के  पास इतनी राशि भी नहीं होती थी कि वे अपने बच्चों को स्कूल में दाखिला के लिए शिक्षा शुल्क दे सके,  जिस वजह से बालक नारायण को हमेशा अपनी क्लास के बाहर खड़े हो कर ही  शिक्षा ग्रहण करनी पड़ती थी. के आर नारायण जी के पास किताबें खरदीने के लिए भी पैसे नहीं होते थे, वे अपने दोस्तों से किताबें ले कर नक़ल कर लेते थे. 1931 – 1935 तक, के आर नारायण  ने आवर लेडी ऑफ़ लौरदे स्कूल से शिक्षा प्राप्त की. सन 1937 में के आर नारायण  जी ने सेंट मेर्री हाई स्कूल से  मैट्रिक की परीक्षा उत्तीर्ण की.  स्कॉलरशिप की मदद से के आर नारायण जी ने इंटरमीडिएट की परीक्षा कोट्टायम के सी. एम. एस. स्कूल से 1940 में पूरी की. 1943 में उन्होंने B.A (hons) एवं M.A English literature  में त्रावणकोर विश्वविद्यालय से किया. वे पहले ऐसे दलित हे जिन्होंने फर्स्ट क्लास में अपनी डिग्री पूरी की.

के आर नारायण करियर ( K.R. Narayanan Career)

1944-45 में के आर नारायण जी ने दी हिन्दू एवं दी टाइम्स ऑफ़ इंडिया में पत्रकार के रूप में कार्य किया. इस दौरान 10 अप्रैल 1945 में उन्होंने महात्मा गांधी जी का इंटरव्यू भी लिया था. के आर नारायण जी को हमेशा से विदेश जा कर पढाई करने का मन था, किन्तु उनकी आर्थिक स्थिति उसकी इजाजत नहीं देती थी. स्कॉलरशिप  का भी उस समय प्राबधान नहीं था, सो के आर नारायण जी ने जे आर डी टाटा को एक चिठ्ठी लिख कर मदद मांगी. टाटा ने उनकी मदद की और वे राजनीति विज्ञान की शिक्षा के लिए लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स चले गए.

1948 में वे भारत लौट आए और उनके प्रोफेसर लास्की ने उन्हें जवाहर लाल नेहरूजी से मिलवाया. नेहरूजी ने उन्हें आईऍफ़एस  की नौकरी  दिलवाई, फिर के आर नारायण जी 1949  में  बर्मा  चले गए.  इस दौरान 1954 में दिल्ली स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स में उन्होंने बच्चों को शिक्षा भी दी. 1978 में IFS के रूप में जब उनका कार्यकाल समाप्त हुआ, उसके बाद वे 1979 से 80 तक जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में उपकुलपति  रहे. इसके बाद 1980 में तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी जी ने उन्हें 1980 से 84 तक अमेरिका का भारतीय एम्बेसडर के लिए बना दिया.

के आर नारायण राजनैतिक सफ़र –

इंदिराजी जी के कहने पर 1984 में वे राजनीति में आ गए एवं लगातार तीन लोकसभा  चुनावों में ओट्टापलल (केरल) में कांग्रेस की सीट से विजयी होकर लोकसभा पहुंचे. 1985 में के आर नारायण को राजीव गांधी सरकार के केन्द्रीय मंत्रिमण्डल में सम्मिलित किया गया. इन्होंने योजना, विज्ञान, विदेश से जुड़े मामले एवं तकनिकी से जुड़े कार्य को संभाला. 1989 में जब कांग्रेस सत्ता से बाहर हो गई थी, तब के आर नारायण जी एक विपक्षी सांसद के रूप में अपना कार्य देखते थे. किन्तु जब 1991 में कांग्रेस वापस सत्ता में आई, तब नारायण जी को कैबिनेट  में शामिल  नहीं किया गया.

राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा जी के कार्यकाल में, के आर नारायण जी को 1992 में उपराष्ट्रपति बनाया गया. 17 जुलाई 1997 में नारायण जी को राष्ट्रपति बना दिया गया. उन्होंने सर्वसम्मति से राष्ट्रपति पद हासिल किया. राष्ट्रपति कार्यकाल के दौरान उन्होंने दलित, अल्पसंख्य एवं गरीबों के लिए बहुत कार्य किया. 2002 में के आर नारायण जी का कार्यकाल समाप्त हो गया.

के आर नारायण मृत्यु (K.R. Narayanan death) –

9 नवम्बर, 2005 को आर्मी रिसर्च एण्ड रैफरल हॉस्पिटल, नई दिल्ली में उनका निधन निमोनिया बीमारी के कारण हो गया. दिल्ली में जवाहर लाल नेहरु के शांति वन के बाजु में इनका समाधी स्थल बनाया गया, जिसे एकता स्थल कहते है.

स्वतंत्र भारत के सभी राष्ट्रपति की लिस्ट एवम उनका विवरण जानने के लिए पढ़े.

Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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