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Kash! Ek Tara Banjau Hindi Kavita on Girl Child

“काश! एक तारा बन जाऊँ” हिंदी कविता मेरे दिल से निकली एक लड़की की वो आवाज़ हैं जो दिन रात समाज में अपने अस्तित्व को बचाने के लिए लड़ती हैं | एक पल उस डरी सहमी लड़की की तकलीफ को तो समझे जिसे उसी के घर में अपनो का प्यार नहीं मिलता, दुलार भरा आशीर्वाद नहीं मिलता जो कि उसके भाई को बड़ी ही शान के साथ दिया जाता हैं |

जिन्दगी की इस सच्चाई को देखने के बाद उसकी साँसे नहीं रूकती उसे तो जीवन हर हाल में जीना हैं | तब उस वक्त वो लड़की बोझ भरी साँसे लेती हैं ज़िन्दगी को जीती नहीं बस झेलती हैं उसमे गुस्सा होता हैं वो सबसे लड़ना भी चाहती हैं पर किससे लड़े अपने परिवार से | ऐसी स्थिति में वो सबसे दूर हो जाना चाहती हैं उनमे इतनी तेज आग होती हैं कि वो किसी को जलाकर राख कर दे पर वो यह नहीं करना चाहती क्यूंकि वो सबसे प्यार करती हैं पर फिर भी वो दूर हो जाना चाहती हैं सबकी नजरों से दूर भागती हैं वो उन काले बादलों में एक तारा बन जाना चाहती हैं जो दिखाई तो सबको देता हैं पर कई प्रकाश वर्ष दूर और अकेला होता हैं |

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काश! एक तारा बन जाऊँ

तमन्ना हैं के,एक तारा बन जाऊँ
अग्नि का जलता चिराग बन जाऊँ
ना छू पाए कोई मुझे
ना सुन पाए कोई मुझे
ना मुझे हो किसी की आहट
ना हो किसी को मेरी चाहत
बस दूर कहीं अपनी ही दुनियाँ बसाऊ
बादलों की ओट में जाकर छिप जाऊँ
तमन्ना हैं कि बस एक तारा बन जाऊँ

कर्णिका पाठक

Kash! Ek Tara Banjau Hindi Kavita on Girl Child सभी हिंदी पाठको के लिए लिखी गई हैं | Poem In Hindi हमारा यह ब्लॉग आपको कैसा लगा ? जरुर लिखे |

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Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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