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काईट फेस्टिवल/ पतंगों का त्यौहार

हमारा देश कई रंगो में रंगा हुआ है| इन्ही रंगो के कारण सभी की यादों में कई प्यारे लमहे कैद हो जाते है जो जीवन के हर दौर को खुशनुमा बनाते है |

आई रे, आई याद चली आई ,

वो खेलना कूदना, वो छुपम छुपाई|
वो छुट्टी के दिन, वो आलस भरी अंगड़ाई,
रंग बिरंगी पतंगे हमने खूब उड़ाई |
गिल्ली डंडे की आवाज भी लगाई,
कागज की कश्ती पानी में चलाई |
बारिश के गड्ढो में छलांग भी लगाई,
वो किताबों की दुनियां, वो परीक्षा की घड़ियाँ |
वो पढना पढाना, वो आंसू बहाना,
वो दोस्तों से लड़ना, वो रूठना मनाना|
मुझे याद आता है, वो बचपन सुहाना,
यादों से भरा ,मेरा बचपन सुहाना ||
By: कर्णिका पाठक

Octopus-Kites

भारत के धर्म निरपेक्ष देश है, यहाँ हर धर्म के लोग मिल कर festival मनाते है| हमारे देश में 2000 से ज्यादा festival हर साल मनाये जाते है| इन्ही festival में से एक है पतंग उड़ाने का festival| वैसे तो पतंगों का त्योहार पुरे भारत में बहुत हर्षौल्लास से मनाया जाता है लेकिन गुजरात में इसका अलग ही महत्व है| महीनों पहले से गुजरात के लोग इस festival की तैयारी में जुट जाते है| गुजरात में इस festival को ‘उत्तरायण’ नाम से जाना जाता है जबकि देश के दुसरे हिस्सों में इसे मकरसंक्रांति के नाम से जाना जाता है|
ऐसा माना जाता है कि इस festival के बाद से ठण्ड कम हो जाती है और गर्मी आने को होती है| किसानों के लिए ये कटाई का सन्देश लेकर आता है| भारत में इस दिन को कटाई के लिए सबसे अच्छा माना जाता है| गुजरात में पतंग उड़ाने का competition रखा जाता है जिसमे वहां के सभी लोग बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है| गुजरात में यह एक बहुत बड़ा festival है इस दौरान वहां 2 दिन का national holiday भी होता है| festival में तिली से बने हुए पकवान को विशेष रूप से बनाया जाता है और सबको खिलाया जाता है| गुजरात में पतंग उड़ाने का competition हर शहर कस्बों में होता है| 2012 में अहमदाबाद शहर में international पतंग उड़ाने का competition आयोजित हुआ था जिसने 42 देशों ने हिस्सा लिया था, इतने बड़े आयोजन के लिए गुजरात का नाम guinness world record में दर्ज हुआ है|
festival आने के हफ्ते भर पहले ही सभी बाज़ार पतंगों से सज जाते है| अहमदाबाद के तो एक market का नाम ही पतंग बाज़ार है| ये बाज़ार festival दौरान पुरे 24 घंटे खुला रहता है| अहमदाबाद के संस्कार केंद्र में पतंग का Museum भी है जो 1985 में बनाया गया था| यहाँ एक से बढकर एक पतंग देखने को मिलती है| हर साल 14 जनवरी को ये festival मनाते है जो 15 जनवरी तक चलता है|
History – कहा जाता है उत्तरायण festival के पहले भगवान् गहरी नींद में होते है, इस festival में पतंग उड़ा कर उन तक सन्देश भेजा जाता है और जगाया जाता है| भारत के इतिहास में कहते है पतंग उड़ाने की प्रथा मुगलों और राजाओं से चली आ रही है| वो इसे एक खेल की तरह खेलते थे, और उसमें अपनी प्रतिभा दिखाते थे| पहले सिर्फ इसे राजा ही मनाते थे लेकिन समय के साथ ये सबको अच्छा लगने लगा और सभी लोग मनाने लगे| पतंग उड़ाने की प्रथा गुजरात में कई सालों से बहुत famous है| 1989 में पहली बार अंतर्राष्ट्रीय पतंग उड़ाने की स्पर्धा आयोजित की गई थी जिसमे बहुत से देश के लोगों ने भाग लिया और अपनी प्रतिभा दिखाई थी| 2012 में गुजरात के मुख्यमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा इसे आयोजित किया गया था जिसमे वहां के गवर्नर डॉ कमला को chief guest के रूप में बुलाया गया था| गुजरात में 14 जनवरी के दिन सुबह 5 बजे से लोग पतंग उड़ाने लगते है और ये सिलसिला देर रात तक चलता रहता है| 8 से 10 lakh लोग अहमदाबाद में होने वाले international competition में बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेते है| इस competition में Japan, Italy, UK, Canada, Brazil, Indonesia, Australia, USA, Malaysia, Singapore, France, China और भी बहुत सी जगह से लोग आकर हिस्सा लेते है|
पहले कागज को चौकोर काटकर पतंगें बनाई जाती थीं, किंतु आज एक से बढ़कर एक डिजाइन, आकार, आकृति एवं रंगों वाली भिन्न प्रकार की मोटराइज्ड एवं फाइबर ग्लास पतंगें मौजूद हैं। जिन्हें उड़ाने का एहसास अपने आपमें अनोखा और सुखद होता है। इस पतंगों की कीमत 1 rs से लेकर 1000 तक होती है| रात के समय पतंग उड़ाने के लिए विशेष तरीके की पतंगें बनाई जाती है इसमें candle लगाई जाती जिससे रात के घनघोर अँधेरे में ये पतंगें रौशनी बिखेरती है और सितारे की तरह चमकती है|

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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