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कोलकाता के दार्शनिक स्थल | Kolkata Tourist Attraction Places to visit in hindi

Kolkata Tourist Attraction Places to visit in hindi भारत के महानगरों में कोलकाता का अपना विशेष महत्व है. कोलकाता का एक गौरवपूर्ण इतिहास रहा है. यहाँ पर कई ऐसी दलीलें दर्ज हैं, जो आज़ादी के पहले के कई पहलुओं को उजागर करती हैं. यहाँ पर विभिन्न भ्रमण स्थल हैं जिनमे विक्टोरिया मेमोरियल, हावड़ा ब्रिज, ईडन गार्डन, दक्षिणेश्वर मंदिर, कालीघाट, साइंससिटी, अलीपुर चिड़ियाखाना, बिड़ला प्लेनेटेरियम, फोर्ट विलियम, टीपू सुल्तान मस्जिद, जोड़ासांकू ठाकुरबाड़ी आदि प्रमुख स्थल है. कोलकाता का भ्रमण न सिर्फ भ्रमण का आनंद देता है, बल्कि कई एतिहासिक जानकारियों को पाने में भी बहुत मददगार साबित होता है. इन जगहों का विस्तृत वर्णन नीचे किया गया है.

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कोलकाता के दार्शनिक स्थल की सूची

Kolkata visiting places list in hindi

कोलकाता का इतिहास (Kolkata history)

ऐसा मानना है कि बंगाल की राजधानी पहले मुर्शिदाबाद हुआ करती थी. सन 1756 ई में सिराज-उद- दौला ने इसे जीतकर अपनी राजधानी बनायी. उसके ठीक एक साल बाद सन 1757 ई में रोबट क्लाइव ने अंग्रेजी सेनाओं का प्रतिनिधित्व करते हुए मुर्शिदाबाद को जीत लिया. सन 1772 ई में कलकत्ता ब्रिटिश भारत की राजधानी बना और सन 1912 ई के आस- पास वारेन हेस्तिगस ने सभी सरकारी कार्यालयों को कलकत्ता स्थानांतरित कर दिया. उसके बाद एक लम्बे समय तक ये जगह कलकत्ता के नाम से ब्रिटिश भारत की राजधानी बना रहा.

कोलकाता के भ्रमण स्थल और उनकी विशेषताएँ (Kolkata visiting places)

कोलकाता के भ्रमण स्थल और उनकी विशेषताएं इस प्रकार है-

हावड़ा ब्रिज : हावड़ा ब्रिज का नाम ‘रविन्द्र सेतु’ भी है. ये हावड़ा स्टेशन के पास है जो हावड़ा को कोलकाता से जोड़ता है. 1862 ई में बंगाल सरकार ने ईस्ट इंडिया रेलवे कंपनी के प्रमुख अभियंता जॉर्ज टर्नबुल को हूगली नदी पर एक पूल बनाने का आदेश दिया. किनारे में दलदली ज़मीन होने की वजह से इस सेतु की नींव के लिए बहुत अधिक धन की आवश्यकता पड़ी थी. 1871 ई. में हावड़ा ब्रिज एक्ट पारित हुआ और फिर धीरे-धीरे सेतु अस्तित्व में आया.

इस पुल की ख़ास बात ये है कि इस सेतु के निर्माण में एक भी नट- वाल्ट का प्रयोग नहीं हुआ है. इसकी जगह इसमें रिवेट की तकनीक का इस्तेमाल हुआ है. इसके निर्माण में कुल 26,500 टन स्टील की खपत हुई. ब्रिज मुख़र्जी कमीशन के अधीन बन रहा था, जिसके प्रमुख आर.एन. मुख़र्जी ने इसका एक निश्चित आकार तय किया. इसकी डिजाईन मिस्टर वाल्टन और मिस रेंडेल ने बनायी थी.

  • सन 1943 ई में हावड़ा ब्रिज विश्व का तीसरा सबसे लम्बा ब्रैकेट ब्रिज था. सन 2006 में इसकी ये जगह छठवें स्थान पर हो आ गई. ये एक तरह का मुअत्तली ब्रिज है.
  • इसकी एक खासियत ये भी है कि इतना बड़ा ब्रिज सिर्फ दो खम्भों पर टिका हुआ है. इस ब्रिज के मध्य में कोई भी सहारा नहीं है. ऐसी कलाकारी बहुत कम जगह पर देखने मिलती है. कई लोग सिर्फ इस कारीगरी को देखने दूर- दूर से आते है.

विक्टोरिया मेमोरियल : विक्टोरिया मेमोरियल सिर्फ मार्बल से बना हुआ एक बड़ा सा महलनुमा आकृति का है. इसका निर्माण 1906 ई से 1921 ई के मध्य हुआ है. औपचारिक रूप से इसकी स्थापना 1921 ई में हुई थी. यह भवन महारानी विक्टोरिया (1819 – 1901) की याद में बनवाया गया था. इसके निर्माण में खर्च के लिए लन्दन की ब्रिटिश सरकार का सहयोग प्राप्त था. इसका कुल बजट उस समय एक करोड़ पांच लाख रूपये था.

  • इसके निर्माण में भी ताज- महल में प्रयोग किये गये संगमरमर का प्रयोग किया गया. इसका डिज़ाइन ताजमल के डिजाईन से मिलता जुलता प्रतीत होता है. इस महल में अष्टभुजाकार छतरी, टेरेस और ऊंचा प्रवेशमार्ग है.
  • इसमें कुल 25 गैलरी हैं जिनमे रॉयल गैलरी, नेशनल लीडर गैलरी, पोर्ट्रेट गैलरी, सेंट्रल हॉल, स्क्लाप्चर गैलरी, आर्म्स एंड अर्मौरी गैलरी, कलकत्ता गैलरी आदि प्रमुख हैं.
  • रॉयल गैलरी में महारानी विक्टोरिया और प्रिंस अल्बर्ट की कई बड़ी- बड़ी तस्वीरें लगी हुई हैं. ये तस्वीरें लन्दन में स्थित महारानी की तस्वीरों का प्रतिरूप है. विक्टिन तस्वीरों में महारानी विक्टोरिया का चैपल रॉयल में प्रिंस अल्बर्ट के साथ विवाह, एडवर्ड चतुर्थ की शादी, वेस्टमिनिस्टर ऐबी में विक्टोरिया का पहला सिल्वर ज्युबली आदि दृश्य चित्रित हैं.

इडेन गार्डन : इडेन गार्डन कोलकाता में स्थित क्रिकेट स्टेडियम हैं. इसकी स्थापना सन 1864 में हुई. ये बंगाल क्रिकेट टीम का ‘होम ग्राउंड’ है. इसमें सभी तरह के क्रिकेट टूर्नामेंट खेले जा सकते हैं. इस मैदान का नाम ब्रिटिश भारत के गवर्नर जनरल लार्ड ऑकलैंड की बहन ईडन के नाम पर रखा गया है. ये शहर के बी.बी.डी. बाग़ एरिया में स्थित है.          

  • ये बहुत बड़ा स्टेडियम है जिसमे लगभग एक लाख लोग एक साथ बैठ कर किसी मैच का आनंद उठा सकते हैं. स्थापना के समय इसकी क्षमता लगभग 66 हजार लोगों की थी.
  • इसमें पहला टेस्ट मैच सन 1934 में और पहला एक- दिवसीय मैच 1987 ई में खेला गया था.
  • इस ग्राउंड में वी.वी.एस. लक्ष्मण ने सबसे अधिक टेस्ट मैच के रन बनाए. भारतीय टीम ने यहाँ पर सबसे अधिक एक दिवसीय मैच के रन बनाये. भारतीय टीम ने इस मैच में पांच विकेट पर 405 रन बनाए थे.
  • रोहित शर्मा ने श्रीलंका के विरुद्ध एकदिवसीय मैच में सबसे अधिक स्कोर 264 रन इसी मैदान में बनाए थे.

दक्षिणेश्वर : दक्षिणेश्वर हिन्दुओं की देवी माँ काली का मंदिर है. इसे रानी राष्मनी ने बनवाया था. ऐसा माना जाता है कि जब रानी राष्मनी बनारस की तीर्थ यात्रा करने वाली थीं उस समय उन्हें देवी माँ का सपना आया था, जिसमे माँ ने कहा कि उसे बनारस जाने की कोई आवश्यकता नहीं है. तुम मेरी मूर्ति गंगा किनारे एक बहुत सुन्दर सा मंदिर बनवाकर उसमे स्थापित करो और मेरी पूजा पाठ का इंतजाम करो. ऐसा करने पर मैं वहाँ पर होने वाली मेरी पूजा को ग्रहण करुँगी.

  • ये मंदिर बंगाल की विशेष वास्तु- कला नवरत्न पर आधारित है. दक्षिण की तरफ मुखद्वार के साथ ये मदिर तीन माले का है. इसमें कुल 9 शिखर हैं. ये मंदिर कुल 20 एकड़ ज़मीन में फैला हुई है.
  • इस मंदिर में स्थापित माँ काली की मुर्तिरूप का नाम माँ भवतारिणी है. 1855 ई में इस मंदिर में रामकृष्ण परमहंस का आगमन हुआ. ये अपने बड़े भाई पुजारी रामकुमार के सहायक थे, रामकुमार की मृत्यु के बाद ये यहाँ के पुजारी हुए.
  • इस मंदिर में माता काली की मूर्ति स्थापना का दिन ‘स्नान यात्रा’ के दिन तय हुआ. 31 मई 1855 ई में भारत के विभिन्न प्रान्तों से बहुत से पुजारियों और पंडितों को पूजा के लिए आमंत्रण दिया गया. इस आमंत्रण को स्वीकार करते हुए लगभग एक लाख पुजारियों ने मूर्ति स्थापना में हिस्सा लिया.
  • रानी राष्मनी इस मंदिर के उदघाटन के बाद सिर्फ पाच वर्ष और नौ महीने ही यहाँ रह पायी थीं, उसके बाद उनकी तबियत बिगड़ने लगी. 1861 ई के आस-पास ख़ुद को मृत्यु के पास पाकर उन्होंने अपनी ज़मीन, जो उन्होंने दिनाजपुर में खरीदी थी, उसे मंदिर के ट्रस्ट के हवाले कर दिया जिससे मंदिर की देख-भाल निरंतर हो सके.
  • इस मंदिर में भगवान् शिव के भी 12 मंदिर है. इन मंदिरों में काले और सफ़ेद पत्थरों का इस्तेमाल किया गया है. भगवान शिव के ये मंदिर कुठी बारी के पास स्थित हैं. सभी मंदिरों में शिव-लिंगों की स्थापना की गयी है. ये सभी मंदिरें पूर्व दिशा की तरफ बनायी गयी है.
  • दक्षिणेश्वर मंदिर की उत्तर- पूर्वी दिशा में भगवान विष्णु के मंदिर बने हुये हैं. इस मंदिर में साढ़े इक्कीस इंच की भगवान कृष्ण की मूर्ति और सोलह इंच की राधा की मूर्ति है. ऐसा माना जाता है कि श्री राम कृष्णा परमहंस स्वयं इस मंदिर में पूजा करते थे.
  • काली पूजा के समय ये स्थान आकर्षण का केंद्र बन जाता है. इस दौरान मंदिर को कई तरह के लाइट्स और अलग – अलग तरह के फूलों के प्रयोग से बहुत ही अच्छे से सजाया जाता है. भक्तगण पूजा के दिन सुबह से ही लाइन में लग कर मुख्य द्वार खुलने का इंतज़ार करने लगते हैं.
  • दक्षिणेश्वर मंदिर से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर बेलूर मठ स्थित है अतः यहाँ आने से बेलूर मठ का दर्शन भी बहुत आसानी से हो जाता है.

बेलूर मठ : बेलूर मठ स्वामी विवेकानंद द्वारा स्थापित मठ और मिशन का मुख्यालय है.  ये हुगली नदी के तट पर स्थित है. विवेकानंद स्वामी रामकृष्ण परमहंस के मुख्य शिष्य थे. ये मठ स्वामी रामकृष्ण द्वारा चलाये गये समाज सुधार कार्यो की सबसे मुख्य जगह थी. कालांतर में इसकी देश – विदेश में कई शाखाएं बनी, जिनमे 141 भारत में,  14 बांग्लादेश में,  13 अमेरिका में,  2 रूस में और 1-1 करके ब्राज़ील, अर्जेंटीना, कनाडा, फिजी, नेपाल, सिंगापुर, श्रीलंका, स्विटज़र लैंड आदि जगहों पर स्थापित है. कुल मिलाकर विश्व भर में इस मिशन और मठ की 187 शाखाएं हैं. इसके अतिरिक्त बहुत सी उप शाकाएं भी खुली. इसकी कई विशेषताएँ निम्नलिखित है.

  • इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि ये सभी धर्मो को जोड़ने का काम करता है. इसकी वास्तु- कला में इसाई, मुस्लिम, हिन्दू आदि सभी धर्मों का सम्वन्य देखने मिलता है. इस तरह ये राष्ट्रीय एकता का प्रतीक भी हो जाता है.
  • बेलूर मठ में स्थित इस मंदिर के मुख्य द्वार का निर्माण बौद्ध मंदिरों के मुख्य द्वार की तरह किया गया है, जो अन्दर जाकर और भी बड़ा हो जाता है और दक्षिण भारत में स्थित मंदिरों की तरह लगने लगता है.
  • मंदिर के अंदर खिड़कियाँ उत्तरी भारत का राजपुताना अंदाज़ में और कुछ मुग़ल बादशाहों के महलों के अंदाज़ में बनाया गया है. मंदिर का मध्य यूरोपिक पुनर्जागरण काल में उत्पन्न कलाओं से लिया गया है. इसका ज़मीनी नक्शा में क्रिस्टियन क्रॉस की तरह आकृति दी गयी है.

साइंस सिटी : साइंस सिटी कोलकाता में स्थित विज्ञान केन्द्रित म्यूजियम है. इसका मुख्य उद्देश्य आम लोगों में विज्ञान के प्रति रूचि बढ़ाना है. इसकी नींव 1 जुलाई 1997 ई में पड़ी थी. इसमें कई तरह की वैज्ञानिक चीजों और तथ्यों को बहुत ही रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है. ये बी. एस. हल्दाने अवेन्यु में स्थित है. इसमें एक जगह इल्युसन की चीज़ों का प्रदर्शन होता है इसके साथ यहाँ ‘पॉवर ऑफ़ टेन्स’, ‘फ्रेश वाटर एक्वेरियम’, ‘लाइव बटरफ्लाई एन्क्लेव’, ‘साइंस ऑन ए स्फीयर’ जैसी चीज़ें हैं.

  • इल्युसन एक स्थायी प्रदर्शनी है जिसमे संसार के इल्युसन को बहुत रोचक तरह से प्रदर्शित किया जाता है.
  • ‘पॉवर ऑफ़ टेन्स’ में 43 प्रदर्शनीय वस्तु है, जो ब्रम्हाण्ड के सबसे छोटे से सबसे बड़े स्तर को 10 के अनुपात में बढ़ता या घटाता हुआ दिखाता है.
  • इसमें स्थित ‘फ्रेश वाटर एक्वेरियम’ में कुल 26 टंकियां हैं, जिसमें तरह- तरह की मछलियों का प्रदर्शन होता है. इसमें मछलियों के जैव- विविधताओं का भी खूब वर्णन मिलता है.
  • ‘लाइव बटरफ्लाई एन्क्लेव’ में तितलियों की प्रदर्शनी है. इस हॉल में एक सिनेमा ’रंग भरी प्रजापति’ चलती रहती है, जिसमे तितली के जीवन चक्र को दिखाया जाता है.
  • इसमें ‘नेशनल ओशनिक एंड एटमोस्फियरिक एडमिनिस्ट्रेशन’(एन.ओ.ए.ए.) की ओर से एक गोलाकार प्रक्षेपण तंत्र का निर्माण किया गया है, यहाँ पर होने वाली प्रदर्शनी को एक साथ 70 लोग देख सकते हैं. ये प्रदर्शनी कुल 30 मिनट की होती है.
  • यहाँ पर एक विज्ञान अन्वेषण गृह है. सन 2016 में स्थापित ये अन्वेषण गृह 5400 वर्ग मीटर में फैला हुआ है. इसके चार मुख्य अनुभाग है. नाम के नुसार इसमें ‘इमर्जिंग टेक्नोलॉजी गैलरी’, ‘इवोल्यूशन ऑफ़ लाइफ – ए डार्क साइड’, ‘पैनोरमा ऑफ़ ह्युमन इवोल्यूशन’ तथा ‘साइंस एंड टेक्नोलॉजी हेरिटेज ऑफ़ इण्डिया’ है.
  • इसमें एक बहुत बड़ा थिएटर मौजूद है, जिसमे लगभग 2200 लोगों के एक साथ बैठने की क्षमता है. इसमें बने मंच पर एक साथ लगभग 100 प्रतिभागी अपनी कला प्रदर्शित कर सकते हैं.
  • इसमें स्थित ‘स्पेस ओडिसी’ 3-डी विज़न थिएटर भी मौजूद है, जिसमे स्टीरियो बेक प्रोजेक्शन की सहायता से वैज्ञानिक फिल्मे दिखाई जाती है. इसके साथ लगभग 35 ऐसे प्रदर्शनीय वस्तु हैं, जो प्रकाश के परावर्तन पर आधारित प्रदर्शनी दिखाता है.

कालीघाट : कोलकाता हमेशा से अध्यात्म का केंद्र रहा है, जिसकी एक वजह ये है कि यहाँ के लोग देवी- देवताओं में खूब आस्था रखते हैं. कालीघाट माँ काली का मंदिर है. भारत के 51 शक्तिपीठों में कालीघाट का भी एक स्थान है. ऐसा माना जाता है कि यहाँ पर सती के पैर का अंगूठा गिरा था. जनवरी 1570 ई में सबर्ना रॉयचौधरी परिवार की बहु पद्मावती देबी को काली कुंड से एक दिव्य प्रकाश आता हुआ दिखा. पास जाने पर देखा गया कि ये एक पैर के अंगूठे के आकार के छोटे से पत्थर से ये प्रकाश आ रहा था. इस चमत्कार के साथ बाद इसी वर्ष अक्टूबर के महीने मे लक्ष्मीकान्त रॉय चौधरी का जन्म हुआ.

अभी के समय में देखा जाने वाला काली माँ का मंदिर सिर्फ़ 200 वर्ष पुराना है. जबकि इसका इतिहास पंद्रहवी शताब्दी के आस- पास का है. मूल मंदिर प्राचीन समय में एक छोटी- सी झोपडी थी. अभी का मंदिर सुबर्ना रॉय चौधरी के वंश के संतोष रॉय चौधरी द्वारा बनवाया गया है.

  • मंदिर में एक जगह ‘सोस्थी ताला’ नाम का पौधा है. ये कैक्टस का पौधा है जिसकी जड़ों में पत्थर हैं. जिन्हें माँ शोष्टि, माँ शीतला और माँ मंगल चंडी कहा जाता है. इसकी स्थापना सन 1880 में गोविन्द दास नामक एक भक्त ने की थी. इसे ब्रम्हानंद गिरी की समाधि भी मानी जाती है. यहाँ के धार्मिक कर्म- काण्ड स्त्रियाँ देखती हैं.
  • इस मंदिर के साथ भगवान् शिव का एक मंदिर है, जिसे नकुलेश्वर मंदिर कहा जाता है. साथ ही इसमें राधा- कृष्ण का मंदिर भी है. राधा कृष्ण के मंदिर के विषय में कहा जाता है कि इसकी स्थापना 1723 ई में हुई थी.
  • शक्ति पीठ होने की वजह से यहाँ का महत्व बहुत बड़ा है. ऐसा माना जाता है कि यहाँ पर माँगी गयी मन्नत बहुत जल्द पूरी है और मन्नत पूरी होने पर माँ को बलि अर्पित की जाती है.
  • इसमें स्थित माँ काली की मूर्ति बंगाल के अन्य काली प्रतिमाओं से अलग है. अभी स्थित प्रतिमा दो साधुओं ने मिल कर बनाया, जिनके नाम आत्माराम ब्रम्ह्चारी और ब्रह्मानंद गिरी थे. ये प्रतिमा ‘माता भुवनेश्वरी’ के रूप पर आधारित है. माता भुवनेश्वरी सुबर्ना रॉय चौधरी के परिवार की कुल देवी हैं.

अलीपुर चिड़ियाघर : अलीपुर भारत में औपचारिक रूप से स्थापित चिड़ियाघरों में सबसे पुराना है. सर्वप्रथम पहला मई 1876 में ये एक चिड़ियाघर के रूप में खुला था. ये अलीपुर रोड, कोलकाता में स्थित है. ये चिड़ियाघर 46.5 एकड़ में फैला हुआ है. ये कोलकाता के प्रमुख भ्रमण स्थलों में एक है. इसमें कुल 1266 जानवर रखे गये हैं जिनमे कुल 108 प्रजातियाँ शामिल हैं. आर .बी. सान्याल इस चिड़ियाघर के पहले सुपरइन्टेनडेंट थे.

  • यह जगह क्रिस्मस, नए साल या जाड़ों के दिनों में घुमने के लिए बहुत अच्छी जगह है. इसमें रॉयल बंगाल टाइगर, मेगाफौना, अफ्रीकन शेर, एशियाई शेर, जैगुआर, हिप्पोपोटामस , हाथी आदि हैं, इस तरह यहाँ सदा आकर्षण का केंद्र बना रहता है.
  • सरीसृप वर्ग के प्राणियों में इसमें मगरमच्छ, किंग कोबरा, घड़ीयाल, भारतीय कोबरा, स्टार कछुआ, रैटल स्नेक आदि मौजूद है.
  • पक्षियों में एमु, गिद्ध, वाइट एबीस, स्पून बिल, शतुरमुर्ग, बुलबुल, कोयल, सुनहरे तीतर, चीनी सिल्वर तीतर, ओस्प्रय, काला सारस, ऑस्ट्रेलियाई तोते आदि देखने को मिलते है. इन सबके अतिरिक्त और भी कई तरह के जंतु- जानवर देखने मिलते हैं.

नेशनल लाइब्रेरी : नेशनल लाइब्रेरी के पीछे कलकत्ता पब्लिक लाइब्रेरी का इतिहास है. शुरू में ये एक ग़ैर- सरकारी संसथान था. ये पुस्तकालय कोलकाता के अलीपुर में स्थित है. आम दिनों में ये सुबह नौ बजे से रात आठ बजे तक खुला रहता है और शनिवार और रविवार को सुबह साढे नौ बजे से शाम छः बजे तक खुला रहता है.

  • इसमें लगभग बाईस लाख सत्तर हज़ार किताबें मौजूद हैं. इसके अलावे छियासी हज़ार मानचित्र लगभग तीन हज़ार पाण्डुलिपि आदि मौजूद है. इसके रीडिंग रूम जिसका अनाम भाषा भवन है, में एक साथ लगभग पांच सौ आदमी बैठ सकते हैं.
  • किसी भी तरह के अन्व्व्शन के लिए यहाँ से मटेरियल इकट्ठे किये जा सकते हैं. अलग- लालग शाखा की कई बेहतरीन किताबों से भरा ये पुस्तकालय ज्ञानार्जन का अद्भुत केंद्र है.
  • भाषा भवन में प्रवेश के लिए कुछ नियम पालन करने पड़ते है. सबसे पहले नेशनल लाइब्रेरी के ऑफिसियल वेबसाइट से एक आवेदन पत्र लेना होता है, जिसे किसी राजपत्रित अधिकारी से अभिप्रमाणित करवा कर नेशनल लाइब्रेरी में जमा करना होता है. इसके बाद किसी भी आम दिनों में तीन से चार बजे के बीच रीडर पास बनवाना होता है.
  • इस लाइब्रेरी में एक ‘हिडन चैम्बर’ जैसी जगह पायी गयी थी. सन 2010 ई संस्कृति मंत्रालय के ए.एस.आई विभाग ने इसे ढूँढा था. ये अनजाना कमरा लगभग एक हज़ार वर्ग फिट में फ़ैला हुआ था. ऎसी अवधारणा है कि ये कमरा वारेन हेस्तिगस और अन्य ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा लोगों को दंड देने के लिए इस्तेमाल किया जाता था. सन 2011 में घोषणा की गयी इस बुलिडिंग की नींव को मजबूत करने के लिए इस कमरे को मिट्टी और कीचड़ से भर दिया जा रहा है.

फोर्ट विलीयम : इंग्लैंड के राजा विलियम तृतीय के नाम पर ब्रिटिश भारत के दौर में इसका निर्माण एक किले के निर्माण के उद्देश्य से किया गया था. मूलतः दो फोर्ट विलियम हैं. पुराने फोर्ट विलियम का निर्माण सन 1696 ई में हुआ था. सन 1756 में बंगाल के नवाब सिराज उद दौला ने आक्रमण कर इस किले को जीत लिया और इसका नाम अलीनगर रखा. इस वजह से ब्रिटिश सरकार को एक नये किले की स्थापना करनी पड़ी.

  • ईंट और गारे से बना ये किला पांच किलोमीटर वर्ग किलोमीटर में फैला एक अनियमित अष्टभुजाकार है, जिसकी पाँच दीवारें मैदान की तरफ और बाक़ी तीन दीवारें गंगा नदी की तरफ़ है. यूँ ये एक स्टार फोर्ट की तरह है. ऐसे क़िलों में रहने वाले सिपाहियों को तोपों से कोई भय नहीं रहता. इसमें कुल छः द्वार हैं. इन द्वारों का नाम क्रमशः चौरंगी, प्लासी, कलकत्ता, वाटर गेट, सैंट जॉर्ज’स और ट्रीजर गेट है.
  • यह जगह अब एक ख़ूबसूरत भ्रमण स्थल के साथ साथ एक ऐतिहासिक जगह भी है. यहाँ आने पर कई ऐतिहासिक जानकारियाँ भी मिलती हैं. कलकत्ता के कई भ्रमण स्थलों में इसका भी एक महत्वपूर्ण स्थान है.

बिड़ला प्लेनेटेरियम : कोलकाता के मुख्य भ्रमण स्थलों में इसका भी एक महत्वपूर्ण स्थान है. ये कोलकाता के जवाहरलाल नेहरु रोड में स्थित है. इसे बिड़ला तारामंडल भी कहा जाता है. इसकी स्थापना 2 जुलाई सन 1963 में उस समय के भारत के तात्कालिक जवाहरलाल नेहरु के हाथों हुई थी. ये एशिया का सबसे बड़ा प्लेनेटेरियम और विश्व का दूसरा सबसे बड़ा प्लेनेटेरियम है.

  • इसमें एक इलेक्ट्रॉनिक प्रयोगशाला है जिसमे वैज्ञानिक वस्तुओं की संरचना और डिजाईन दी गयी है. इसमें एक एस्ट्रोनॉमी गैलरी है, जिसमे कई खगोलशास्त्रियों की और आकाश में घूम रहे तारामाडलों की बड़ी- बड़ी तस्वीरें हैं.
  • इस एस्ट्रोनॉमी गैलरी में कई तरह के ऐसे उपकरण रखे हुए हैं जिससे आकाश में घूम रहे तारों को देखा जा सकता है. उनके बारे में बहुत क़रीब से जाना जा सकता है. इन उपकरणों में सलेस्ट्रन सी- 14 एसटीसिक्स सीसीडी कैमरा और सोलर फ़िल्टर के साथ मौजूद है.
  • ये जगह आम आदमियों को और स्कूली विद्यार्थियों को एस्ट्रोफिजिक्स, एस्ट्रोनॉमी, स्पेस साइंस आदि के बारे में सौ से भी अधिक प्रोजेक्ट्स को पूरा करने का मौक़ा देती है. इसमें एक साथ लगभग साढ़े छः सौ लोग रह सकते है.

सुंदरबन : पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश के बॉर्डर में स्थित ये जगह देश के बड़े और प्रभावशाली जंगलों में एक है. सुन्दरबन दक्षिण वाइल्ड लाइफ सेंचुअरी 36,970 हेक्टेयर ज़मीन में फैला हुआ है.   ये पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना और बांग्लादेश के खुलना क्षेत्र में पड़ता है. ये अपनी प्राकृतिक सौंदर्य के कारण सदा आकर्षण का केंद्र रहा है. यहाँ पर सुंदरी नामक वृक्ष की अधिकता होने के कारण इस जगह का नाम सुंदरबन पड़ा. सुंदरी वृक्ष के अलावा यहाँ अविश्वसनीय, जाईलोकारपस ग्रांटम सरिओप्स देकान्द्र आदि वनस्पति पाए जाते हैं. इसके अतिरिक्त यहाँ पर कई तरह के जानवर और पक्षी देखने मिलते हैं जो कहीं और नहीं मिल सकते. इस जंगल की सबसे बड़ी विशेषता ये है कि यहाँ रॉयल बंगाल टाइगर पाया जाता है.

  • एक बड़े क्षेत्र में फैले हुए होने के कारण ये जंतु जानवरों के रहने के लिए कई जगह मुहैया करता है. इस वजह से यहाँ पर विभिन्न तरह के जंतु- जानवर पाए जाते है. यहाँ फाउना पाया, बंगाल टाइगर, फिशिंग कैट्स, मोंगूस, जंगली बिल्ली, फ्लाइंग फोक्सेज़ आदि देखने मिलते है.
  • सन 1991 के सर्वे के आधार पर यहाँ पर एक सौ पचास तरह की मछलियाँ, दो सौ सत्तर तरह के पक्षी, 42 तरह के स्तनधारी जंतु, 35 तरह के सरीसृप और आठ तरह के उभयचर प्राणी मौजूद हैं.
  • सुंदरबन यहाँ के रहने वाले जंतुओं को एक बहुत अच्छा वातावरण देता है. एक संतुलित खाद्य श्रंखला के निर्माण में ये बहुत महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है. फिर भी यहाँ घूमने वाले सलानियों को हमेशा सतर्क रहना होता है. औसतन यहाँ पर हर वर्ष लगभग 50 लोग यहाँ के जानवरों का शिकार हो जाते हैं.
  • ये पश्चिम बंगाल और साथ ही बांग्लादेश के आर्थिक तंत्र में एक बहुत बड़ी भूमिका निभाता है. यहाँ से कई कच्चे पदार्थ और लकड़ियाँ दोनों तरफ के लोगों को प्राप्त होती हैं. लकड़ी के उद्योग में यहाँ के लोगों को बहुत लाभ होता है.
  • सुंदरबन में एक ‘सुंदरबन नेशनल पार्क’ नाम का एक राष्ट्रीय उद्यान है, जहाँ पर बाघ संरक्षण के लिए जगह बनायी गयी है. इस पार्क में कई लुप्त होते जीव- जंतुओं को संरक्षित कर के रखा गया है और उनकी देखभाल की जाती है. इसके लिए भारत सरकार का वन विभाग सदैव कार्यरत रहता हैं.

इसके अलावा कई तरह के छोटे- बड़े भ्रमण स्थल हैं, जो समयानुसार आकर्षण का केंद्र हो जाते हैं. कोलकाता के भ्रमण स्थल न सिर्फ आनंद का अनुभव कराते हैं बल्कि तरह – तरह की जानकारियों के स्त्रोत का भी काम करते हैं.

कोलकाता पर्यटन के लिए सबसे अच्छा मौसम (Kolkata best time to visit)

भारत के पूर्वी तट पर स्थित कोलकाता में एक विशिष्ट उष्णकटिबंधीय जलवायु है. यहाँ साल के हर महीने के मौसम के बारे में बताया जा रहा है, ताकि आप अपनी यात्रा के अनुसार योजना बना सकें.

  • अक्तूर से मार्च : शरद ऋतु के शुरू होने से मौसम बहुत सुखद हो जाता है और यह कोलकाता आने का एक शानदार समय है. मौसम के अलावा, यह त्योहारों का भी समय है. दुर्गा पूजा के दौरान कोलकाता जीवित होता है, अर्थात सभी शहरों में सुंदर देवी दुर्गा की मूर्तियों और कई स्ट्रीट फ़ूड के स्टालों के साथ कई मंडल होते है. यहाँ लक्ष्मी पूजा और काली पूजा का भी बहुत महत्व है. यहाँ का तापमान इस समय 9 डिग्री सेल्सियस से 11 डिग्री सेल्सियस के बीच बदलता रहता है. दिसम्बर और जनवरी सबसे अच्छे महीने हैं और इस समय के लिए आपको हल्के गर्म कपड़े की जरुरत हो सकती है, खासकर रात में. कभी कभी बारिश होती है, जो मौसम को सुखद बनाती है. जिससे यह अवकाश की योजना का सबसे अच्छा समय बन सकता है. 
  • अप्रैल से मई : ये समय सबसे गर्म होता है और यहाँ तापमान 40 डिग्री से 30 डिग्री सेल्सियस तक रहता है. धूप का चश्मा और आराम से सूती कपड़े ले जाने के लिए यह मौसम ठीक है, लेकिन गर्मी में पर्यटन स्थलों का भ्रमण करना मुश्किल लगता है.
  • जून से सितम्बर : ये समय मानसून का समय रहता है. यहाँ इस समय भारी बारिश से अनुभव होता है. आर्द्रता के स्तर में वृद्धि होने पर तापमान नीचे आता है.अगस्त सबसे खराब महिना है और यह लम्बे समय से अधिक बारिश के कारण होता है. सितम्बर में कम बारिश होती है और शाम के समय हल्की ठंडी हवा चलती है, जिससे यहाँ इस समय पर्यटन करना सुखद हो सकता है.

कोलकाता पर्यटन के लिए पहुँचने का तरीका (How to reach Kolkata)

  • एयरलाइन द्वारा : नेताजी सुभाष चन्द्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा दमदम पर स्थित है, जोकि कोलकाता शहर के हृदय से लगभग 17 किमी दूर है. इस हवाई अड्डे की भारत और विदेशों के प्रमुख शहरों से अच्छी कनेक्टिविटी है. हवाई अड्डे से आप टेक्सी या बस ले कर अपने अंतिम गंतव्य तक पहुँच सकते हैं. कई मार्गों के लिए वॉल्वो बस भी चलती हैं, इसके बारे में आप हवाई अड्डे में ही पता कर सकते हैं. कोलकाता पहुँचने के लिए निम्न फ्लाइट हैं-
क्र.. एयरलाइन्स समय दिन दूरी में लगने वाला समय
1. इंडिगो (6E 456) 5:20 – 16:40 सातों दिन 11 घंटे 20 मिनिट और 2 स्पॉट
2. जेट एयरवेज (9W 410) 5:45 – 16:40 सातों दिन 10 घंटे 55 मिनिट और 2 स्पॉट
3. गोएयर (G8 322) 5:45 – 16:40 सातों दिन 10 घंटे 55 मिनिट और 2 स्पॉट
4. इंडिगो (6E 482) 6:10 – 16:40 सातों दिन 10 घंटे 30 मिनिट और 2 स्पॉट
5. एयर इंडिया (AI 640) 6:45 – 16:40 सातों दिन 9 घंटे 55 मिनिट और 2 स्पॉट
  • ट्रेन द्वारा : कोलकाता में रेलवे का एक कुशल नेटवर्क है और यह पूरे देश के शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है. राजधानी एक्सप्रेस और शताब्दी एक्सप्रेस जैसे सुपरफास्ट ट्रेनें कोलकाता से दिल्ली और आसपास के स्थानों के साथ कनेक्ट है. यहाँ दो प्रमुख रेलवे स्टेशन हैं – एक हावड़ा और दूसरा सियालदह में स्थित है.
क्र.म. ट्रेन नंबर ट्रेन नाम मूल समय आखिरी स्टेशन पहुँचने का समय दिन
1. 08004 एमवायएस हावड़ा एक्सप्रेस बंगलौर सिटी जंक्शन 3:30 हावड़ा जंक्शन 14:50 सोमवार
2. 12246 दुरोंटो एक्सप्रेस यस्वन्तपुर जंक्शन 11:15 हावड़ा जंक्शन 16:00 सोम, मंगल गुरु, शुक्र, रवि
3. 12253 अंगा एक्सप्रेस यस्वन्तपुर जंक्शन 13:30 हावड़ा जंक्शन 22:25 शनिवार
4. 12864 वायपीआर हावड़ा एक्सप्रेस यस्वन्तपुर जंक्शन 19:35 हावड़ा जंक्शन 6:10 सातों दिन
5. 08050 वायपीआर हावड़ा एक्सप्रेस यस्वन्तपुर जंक्शन 22:45 हावड़ा जंक्शन 18:15 रविवार
  • रोड द्वारा / खुद के साधन से : कोलकाता रोड द्वारा ज्यादातर भारत के शहरों से जुड़ा हुआ है. राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 2 और 6 भारत में अन्य शहरों और राज्यों के साथ शहर को जोड़ते है. कोलकाता में सरकारी और निजी बसों का व्यापक नेटवर्क है. कोलकाता राज्य परिवहन निगम (सीएसटीसी), कोलकाता ट्रामवेज कंपनी (सीटीसी) और पश्चिम बंगाल सर्फेस ट्रांसपोर्ट कारपोरेशन (डब्ल्यूबीएसटीसी) आदि यहाँ नियमित बस सेवा चलते हैं. कोलकाता के केंद्र में एस्पलेनैड टर्मिनस मुख्य टर्मिनस है.

कोलकाता में ठहरने के लिए सबसे अच्छे होटल (Kolkata best hotels)

क्र.. होटल का नाम स्टार रेटिंग कीमत
1. वैदिक विलेज रिसोर्ट 5 4.2 8140 रूपये
2. केनिल्वोर्थ होटल 4 4.4 5850 रूपये
3. दी पार्क कोलकाता 5 4.1 6266 रूपये
4. होटल रिलैक्स इन 3 3.9 3570 रूपये
5. दी सोंनेट 4 4.1 6688 रूपये

 

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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