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कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि भोग व्रत महत्व एवं बधाई कविता | Krishna Janmashtami Pooja Vidhi bhog vrat mahtva Kavita in hindi

Krishna Janmashtami, Dahi Handi (Gokulashtami) Pooja Vidhi Bhog Vrat Mahatva Kavita in hindi को विस्तार से बताने के लिए हमारे द्वारा यह आर्टिकल लिखा गया है. जन्माष्टमी भगवान श्री कृष्ण का जन्म दिवस के रूप मे पूरे भारत मे बहुत ही उत्साह के साथ मनाई जाती है|

जन्माष्टमी कब मनाई जाती हैं (Krishna Janmashtami or Dahi Handi Date): 

जन्माष्टमी हिन्दू कैलेंडर के अनुसार श्रावण मास की पुर्णिमा के बाद आठवे दिन मनाई जाती है, या यह भी कह सकते है कि रक्षाबंधन के बाद ठीक आठवे दिन कृष्ण जन्म अष्टमी मनाई जाती है ।

वर्ष 2016 मे कृष्ण जन्माष्टमी का दिन, तारीख तथा महुरत (Krishna Janmashtami or Gokulashtami 2016 Date Muhurat)

साल 2016 मे जन्माष्टमी 25 अगस्त 2016, गुरुवार  (25 August 2016, Thursday) के दिन है। इस दिन पूजन का महुरत (muhurat) 24:42 से 25:23 तक कुल 40 मिनिट का है। वही दही हांड़ी या गोकुल अष्टमी 26 अगस्त, 2016 के दिन है.

कृष्ण जन्माष्टमी  तारीख 25 अगस्त, 2016
पूजा का समय रात 12 बजे से 12:45 तक
(26 अगस्त सुबह 10:52 बजे अष्टमी समाप्त हो जाएगी)
दही हांड़ी या गोकुल अष्टमी  तारीख 26 अगस्त, 2016

श्री कृष्ण वसुदेव तथा देवकी की आठवी संतान थे, परंतु श्री कृष्ण के जन्म के तुरंत बाद वसुदेव जी उन्हे कंस से सुरक्षित रखने के लिए अपने मित्र नन्द बाबा के घर छोड़ आये थे| इसलिए श्री कृष्ण का लालन पोषण नन्द बाबा तथा यशोदा मैया ने किया| उनका सारा बचपन गोकुल मे बीता| उन्होने अपनी बचपन की लीलाए गोकुल मे ही रचाई तथा बड़े होकर अपने मामा कंस का वध भी किया।

कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि भोग एवम व्रत महत्व

Krishna Janmashtami Pooja Vidhi Bhog Vrat Mahtva in hindi

श्री कृष्ण जी को भगवान विष्णु का अवतार भी माने जाते है। भारत विभिनता  मे समानता का देश है, इसी का उदहारण है कि जन्माष्टमी को कई नामो से जाना जाता है| जैसे

  • अष्टमी रोहिणी
  • श्री जयंती
  • कृष्ण जयंती
  • रोहिणी अष्टमी
  • कृष्णाष्टमी
  • गोकुलाष्टमी (Gokulashtami)

कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि कैसे करे (Krishna Janmashtami Pooja Vidhi Mahtva):

श्री कृष्ण का जन्म वसुदेव तथा देवकी के घर रात्री 12 बजे हुआ था| इसलिए पूरे भारत मे कृष्ण जन्म को रात्री मे ही 12 बजे मनाया जाता है| हर साल भादव मास की अष्टमी के दिन रात्रि मे 12 बजे हर मंदिर तथा घरो मे प्रतीक के रूप मे लोग श्री कृष्ण का जन्म   करते है| जन्म के बाद उनका दूध, दही तथा शुध्द जल से अभिषेक करते है, तथा माखन मिश्री, पंजरी तथा खीरा ककड़ी का भोग लगाते है| तत्पश्चात कृष्ण जी की आरती करते है, कुछ लोग खुशी मे रात भर भजन कीर्तन करते तथा नाचते गाते है।

Janmashtami Badhai kavita

माखन मिश्री कृष्ण जी को बहुत प्रिय था| अपने बाल अवतार मे उन्होने इसी माखन के लिए कई गोपियो की मटकिया फोड़ी थी और कई घरो से माखन चुरा कर खाया था| इसलिए उन्हे माखन चोर भी कहा जाता है| और इसी लिए उन्हे माखन मिश्री का भोग मुख्य रूप से लगाया जाता है। कई जगह पर मटकी फोड़ प्रतियोगिता भी की जाती है, इसमे एक मटकी मे माखन मिश्री भरकर इसे उची रस्सी पर बांध दिया जाता है और विभिन्न जगह से मंडलीया आकर इसे तोड्ने का प्रयास करती है और कृष्ण जन्म उत्सव मनाती है।

कुछ लोग इस दिन पूरे दिन का व्रत/उपवास रखते है और कृष्ण जन्म के पश्चात भोजन गृहण करते है। इस दिन के व्रत/उपवास की विधि एकदम साधारण होती है कुछ लोग निराहार रहकर व्रत करते है, तो कुछ लोग फल खाकर व्रत करते है, तो कुछ लोग फरियाल खाकर व्रत/उपवास करते है क्योकि व्रत/उपवास के लिए कोई नियम नहीं है| श्रद्धालु अपनी इच्छा अनुसार व्रत/उपवास कर सकते है और श्री कृष्ण की भक्ति कर सकते है। यह बात हमेशा याद रखिए कि अगर आप व्रत/करने मे समर्थ नहीं है, तो व्रत/उपवास करना जरूरी नहीं है| आप अपने मन मे श्रद्धा रखकर भी पूजन करते है, तो माखन चोर कान्हा आप पर कृपा करते है| आपकी भक्ति स्वीकार करते है, और आपको अपना परम आशीर्वाद  देते है।

कृष्ण जन्माष्टमी भोग कैसे बनाये (Krishna Janmashtami Bhog Mahtva):

श्री कृष्ण जी भोग स्वरूप माखन मिश्री, खीरा ककड़ी, पंचामृत तथा पंजरी का भोग लगाया जाता है। ध्यान रखिए श्री कृष्ण को लगाया हुआ भोग बिना तुलसी पत्र के स्वीकार नहीं होता है| इसलिए जब भी आप कृष्ण जी को भोग लगाए, उसमे तुलसी पत्र डालना ना भूले। श्री कृष्ण जी के भोग मे बने पंचामृत मे दूध, दही, शक्कर, घी तथा शहद मिला रहता है, तथा भोग लगते वक़्त इसमे तुलसी पत्र मिलाये जाते है।

श्री कृष्ण जी को जो पंजरी भोग मे लगाई जाती है वह भी साधारण पंजरी से अलग होती है। वैसे तो पंजरी आटे की बनती है, परंतु जो पंजरी कृष्ण जी को अर्पित करते है, उसे धनिये से बनाया जाता है। पंजरी बनाने के लिए पिसे हुये धनिये को थोड़ा सा घी डालकर सेका जाता है| और  इसमे पिसी  शक्कर मिलाई जाती है| लोग इसमे अपनी इच्छा अनुसार सूखे मेवे मिलाते है, कुछ लोग इसमे सोठ भी डालते है और फिर श्री कृष्ण को भोग लगाते है।

जन्म अष्टमी का भारत मे उत्सव (Janmashtmi Celebrations):

वैसे तो पूरे भारत मे श्री कृष्ण जन्म उत्सव बहुत ही धूम धाम से मनाया जाता है, परंतु गोकुल, मथुरा, वृन्दावन श्री कृष्ण की लीलाओ के प्रमुख स्थान थे| इसलिए यहा पर इस दिन का उल्लास देखने लायक होता है| मंदिरो मे पूजा अर्चना, मंत्रो उच्चार, भजन कीर्तन किए जाते है। इस दिन मंदिरो की साज सज्जा भी देखने लायक होती है| श्री कृष्ण के भक्त भी यही चाहते है, इस दिन कान्हा के दर्शन इन जगहो पर हो जाये।

महाराष्ट्र के मुंबई तथा पुणे जन्माष्टमी पर अपने विशेष दही हांडी उत्सव को  लेकर मशहूर है| तथा यहा इस दिन होने वाली दही हांडी प्रतियोगिता मे दी गयी इनाम की राशी आकर्षण का केंद्र है। यह ईनाम की राशि ही है, जिसके कारण यहा पर दूर दूर से आई मंडलियों का उत्साह देखते ही बनता है। यहा पर बंधी दही की हांडी को फोड़ने के लिए मंडलीया कई दिनो से तैयारियो मे जुट जाती है, तथा कई लड़को का समूह इस दिन एक के उप्पर एक चढकर इसे फोड़ने का प्रयास करता है, तथा जो लड़का सबसे उप्पर होता है तथा दही की हांडी को फोड़ता है उसे गोविंदा कहकर पुकारा जाता है। जैसे ही गोविंदा दही हांडी फोड़ता है, उसमे भरा माखन सारी मंडली पर गिरता है और उस जगह एक अलग ही माहोल बन जाता है।

गुजरात मे द्वारिका जहा कहा जाता है कि श्री कृष्ण ने अपना राज्य स्थापित किया था| वहा जन्माष्टमी का उत्सव वहा के मशहूर मंदिर मे विशेष पूजा अर्चना करके तथा दर्शन करके मनाया जाता है । तो जम्मू मे इस दिन पतंग उड़ाने का रिवाज है।

उड़ीसा, पूरी तथा बंगाल मे इसदिन रात्री मे पूजा अर्चना की जाती है, तथा दूसरे दिन नन्द उत्सव मनाया जाता है| इस दिन लोग नाचते गाते तथा कीर्तन करते है। नन्द उत्सव के दिन यहा के लोग तरह तरह के पकवान बनाते है, तथा अपना वृत/उपवास तोड़ते है। वही दक्षिण मे इसे गोकुल अष्टमी नाम दिया गया है, तथा वहा भी इस दिन भगवान कृष्ण की पूजा अर्चना की जाती है। इसी प्रकार सभी स्थानो की अपनी अलग पूजा अर्चना की विधिया है| परंतु अगर मध्य भारत की बात की जाए, तो वहा पर मध्य मे होने के कारण हर तरफ की प्रथाओ का अनुसरण किया जाता है, तथा कृष्ण जन्म, भजन कीर्तन, मंदिरो मे विशेष पूजन साज सज्जा तथा दही हांडी सारी प्रथाये अच्छी तरह से निभाई जाती है।

कृष्ण जन्माष्टमी  सिर्फ भारत मे ही नहीं बल्कि भारत के बाहर रहने वाले हिन्दू भी अपनी जगहो पर इस उत्सव को अपने हिसाब से मनाते है तथा श्री कृष्ण की आराधना करते है ।

हर साल जन्माष्टमी अगस्त, सितंबर के महीने मे ही आती है| हर साल की ही तरह इस साल भी 25 अगस्त 2016 को जन्म अष्टमी का उत्सव मनाया जाएगा| भक्त अपने कान्हा का जन्मोत्सव इसी दिन करेंगे तथा भक्ति मे लीन हो जाएंगे। और  कान्हा अपने भक्तो पर अपनी कृपा बरसाएँगे।

अगर आपको कृष्ण जन्माष्टमी पूजा विधि भोग व्रत महत्व एवं बधाई कविता के अलावा किसी त्योहार या पूजा के बारे मे अन्य कोई जानकारी चाहिए, तो हमे जरूर लिखे| हम आपको उसके बारे मे बताने की पूरी कोशिश करेंगे।

जन्माष्टमी बधाई

  • धरती पर आये कृष्ण कन्हैया
    किया जगत का उद्धार
    ऐसी अलौकिक रची लीलाये
    भक्त करते नमन बारंबार
    ———————————————–

जन्माष्टमी पर कविता (Janmashtmi Kavita)

  • काली अँधेरी में था वो उजाला
    भादो पक्ष की अष्टमी का नजारा
    कारावास में किलकारी गूंजी
    लीलाधर को नयी लीला सूजी
    किया वसुदेव को आजाद
    बरसते पानी में करवाया यमुना पार
    खुद यमुना ने कर चरण स्पर्श
    अपने जीवन का किया उद्धार
    माता यशोदा के पुत्र बनकर
    बढ़ाया जिसने गौकुल का मान
    मटकी फोड़कर माखन चौर बन
    यशोदा माँ की खाई फटकार  
    गोपियों के संग थे रास रचैया
    बने राधा के कृष्ण कन्हैया
    मुरली की धुन पर चराते गैया
    बनकर ग्वाला कृष्ण कन्हैया
    तोड़ा घमंड इंद्र का जिसने
    उठाकर गोवर्धन ऊँगली पर भैया
    हुआ बाल लीलाओं का अंत
    जाना पड़ा कर्तव्य पथ संग
    पीछे छूटा प्रेम प्रसंग
    नन्द बाबा मैया का संग
    कंस को मार किया मथुरा उद्धार
    भाई के संग किया यादव कल्याण
    बनकर शिष्य लिया व्यवहारिक ज्ञान
    संदीपनी गुरु सानिध्य में मिला सुदामा का साथ
    निभाया सदा सखा संबंध
    भले बने द्वारिका महाराज
    महाभारत का बन सूत्र धार
    किया भारत वर्ष का उद्धार
    गीता का ज्ञान देकर
    कृष्ण ने मनुष्य जीवन साकार
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    यह कृष्ण जन्माष्टमी पर लिखी कविता में कृष्ण जीवन की झलकियों को काव्य के रूप में दिखाने की कोशिश की हैं, आपको यह प्रयास कैसा लगा ? कमेंट जरुर करें |
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Sneha

स्नेहा दीपावली वेबसाइट की लेखिका है| जिनकी रूचि हिंदी भाषा मे है| यह दीपावली के लिए कई विषयों मे लिखती है|
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3 comments

  1. Kon sa Prasad bana sakte h which one is compulsory aur kuch bhi important hota h Ho karna chaye

  2. Thanks for this information.
    I have read many website about janamashtmi but in your website I have found too many information about it.

    Thanks

  3. Maha kali bart pooja bidhi

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