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क्या 30 जून को एक सेकंड के लिए घड़ी की सुई को रोकना होगा ?d3

Kya 30 June Ko Ghadi Ki Sui ek second rokani hogi???? क्या 30 जून को एक सेकंड के लिए घड़ी की सुई को रोकना होगा ? क्यूँ बात हो रही हैं इस विषय पर जानियें विस्तार से | अहम् बात कि इसका क्या असर होगा टाइम बेस्ड सिस्टम पर ?

सबसे पहले हम जाने क्या हैं सोलर टाइम पद्धति एवम UTS टाइम पद्धति ? हम सभी जानते हैं वक्त की गणना सूर्य एवम पृथ्वी के सापेक्ष की जाती हैं लेकिन इनमे भी कुछ कमियाँ पाई गई हैं जिन्हें जाने विस्तार से |

Kya 30 june Ko Ghadi Ki Sui ek second rokani hogi

सौर टाइम पद्धति :

हमारी टाइम की अवधारणा पृथ्वी के अपनी धुरी पर परिक्रमण एवम सूर्य की परिक्रमा पर आधारित हैं | सूर्य 24 घंटे अपनी ही जगह पर होता हैं लेकिन पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करती हैं जिसके कारण दिन एवम रात होते हैं | पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा 365 दिनों में पूरी करती हैं जिसे एक वर्ष कहा जाता हैं | और जब पृथ्वी अपनी धुरी पर एक परिक्रमा पूरी करती हैं तो उसमे उसे 24 घंटे लगते हैं जिसे हम दिन कहते हैं |और इस एक दिन में घंटे, मिनिट एवम सेकंड होते हैं | इस प्रकार सूर्य के सापेक्ष गिना जाने वाला टाइम सौर टाइम कहलाता हैं |

UTC पद्धति

यह टाइम कैलकुलेशन एस्ट्रोलॉजी से संबंधी हैं इसमें कुछ त्रुटी देखी गई जिस कारण UTC पद्धति को लाया गया जिसमे एक सेकंड की लम्बाई को सीज़ियम परमाणु के एक कंपन के बराबर माना जाता हैं जिसके अनुसार कई एटॉमिक घड़ियाँ चलती हैं | इसे UTC टाइम पद्धति कहते हैं |यह पूरा कैलकुलेशन एटॉमिक घड़ी के जरिये किया जाता हैं और इनका ट्रांसमिशन अन्तराष्ट्रिय मापन ब्यूरों में किया जाता हैं जहाँ से इस पद्धति को अधिक सही माना गया | अतः इस एटॉमिक पद्धति के अनुसार यह ज्ञात हुआ कि 50 मिलियन साल बाद यह घड़ी एक सेकंड के लिए बंद होती हैं |

कब इंट्रोड्यूस की गई UTC पद्धति :

अतः सोलर टाइम में कुछ कमी के कारण UTC को लाया गया एवम 1 जनवरी 1960 को UTC को इंट्रोड्यूस किया गया एवम उस एक सेकंड को सौर टाइम में ऐड किया गया हैं जिसके बाद 1 जनवरी 1972 को UTC ने यह तय किया कि जरुरत अनुसार इस एक सेकंड को जून अथवा दिसम्बर में बढ़ाया जायेगा |

और यह समय अभी आँका गया हैं इस तरह 30 जून के आखरी 60 वे सेकंड के बाद घड़ी एक सेकंड रुकेगी जिसे 61 वां सेकंड कहा जायेगा |

इस तरह लीप सेकंड को कई वर्षो बाद किसी भी दिन में एक सेकंड को बढाकर माना जाता हैं जिसके लिए सुविधानुसार जून एवम दिसम्बर तय किया गया हैं |

इस लीप सेकंड पर कैसे फर्क पड़ता हैं कंप्यूटर पर ?

प्रति चार वर्षों में लीप वर्ष आता हैं जिसमे एक दिन अधिक होता हैं इसका कारण हैं कि प्रथ्वी को सूर्य की एक परिक्रमा लगाने में 365 दिन, 5 घंटे, 48 मिनिट एवम 46 सेकेंड लगते हैं जिनका कैलकुलेशन कर प्रति चार वर्ष में फरवरी में एक दिन को बढाया जाता हैं | यह फिक्स कर दिया गया हैं अतः सभी कंप्यूटरस इसी पद्धती के अनुसार बनाये गये हैं लेकिन यह लीप सेकंड का निर्धारण फिक्स नहीं हैं इसका कारण तय नहीं हैं यह पृथ्वी की गति बदलने के कारण भी हो सकता हैं | गति कम  होने के कई कारण हो सकते हैं जैसे प्राकृतिक आपदा, जल, भूकंप आदि जिसके कारण पृथ्वी को सूर्य का चक्कर लगाने में अधिक समय लग रहा हैं |इस एक सेकंड के कारण कई टाइम बेस्ड सिस्टम पर इसका असर होगा |

और सबसे अहम् सवाल हैं कि क्या हम सभी को अपनी घड़ियों की सुई को एक सेकंड के लिए रोकना होगा ? कहने को यह महज़ एक सेकेंड हैं लेकिन टाइम बेस्ड सिस्टम के लिए यह फ्रैक्शन टाइम भी बहुत जरुरी हैं |

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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