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लीएंडर पेस और सुमित नगल ने किया भारत का नाम रोशन

इस साल विम्बलडन मे भारत का बोल बाला रहा | एक तरफ सानिया-हिंगिस की जोड़ी महिला युगल मे विजेता बन विमेंस डबल्स का खिताब जीत चुके थे तो दूसरी तरफ सानिया की जोड़ीदार मार्टिना हिंगिस और भारतीय पुरुष टेनिस स्टार लिएंडर पेस की जोड़ी मे भी विम्बलडन मे मिश्रित युगल का खिताब जीता। यहाँ किशोर वर्ग मे वियतनाम के हुआंग लाई के साथ जोड़ी मे खेल रहे भारतीय किशोर सुमित नागल ने भी फ़ाइनल मुक़ाबला जीतकर किशोर वर्ग के पुरुष युगल का खिताब जीत लिया।

लीएंडर पेस ने जीता विंबलडन मिक्स्ड डबल

लिएंडर पेस कोर्ट पर अपना सोलहवां ग्रेन स्लैम जीतने का सपना साकार करने के लिए ही उतरे थे। लिएंडर पेस ने 42 साल की उम्र मे भी किसी नौजवान खिलाड़ी की तरह खेल दिखाया ओर अंततः फ़ाइनल मुक़ाबला जीत हे लिया। लिएंडर पेस का यह 16 वां ग्रेंड स्लैम तथा पांचवा विम्बलडन खिताब है। भारतीय – स्विस पेस ओर मार्टिना की जोड़ी ने मात्र 40 मिनट के एकतरफा खेल मे पेया ओर तिमिया बाबोस की जोड़ी को फ़ाइनल मुक़ाबले मे 6-1,6-1 के दो आसान सेटों मे हे पटकनी दे डाली। मार्टिना ओर पेस का यह दूसरा मिश्रित युगल का खिताब है। दोनों ने इसी वर्ष 2015 मे आस्ट्रेलियन ओपन का खिताब भी जीता है, जो जनवरी मे सम्पन्न हुआ था।

Leander paes martina hingis wins wimbledon

लीएंडर पेस – मार्टिना हिंगिस Vs पेया-तिमिया बाबोस विंबलडन points table

लीएंडर पेस – मार्टिना हिंगिस पेया-तिमिया बाबोस विंबलडन
               6                    1
               6                    1

 

हिंगिस ने 24 घंटों मे 2 खिताब जीते है सानिया के साथ महिला युगल जीतने के बाद भी उन्होने वार्म उप मैच खेले। पेस ने कहा की मार्टिना हिंगिस के लिए पिछले 24 घंटे काफी कठिन थे ये न केवल शारीरिक थकान देने वाले थे अपितु अगले मुक़ाबले का दवाब बढ़ाने वाले भी थे पेस ने मार्टिना के प्रोफेशनल एप्रोच की तारीफ करते हुये कहा की वे हिंगिस के साथ खुद को कोर्ट पर सुरक्षित महशुस करते है।पेस ने कहा की बढ़ती उम्र खेल के जुनून मे कोई खलल नहीं डालती उनकी बेटी को वो अपना शिक्षक बताते है। 1990 मे जूनियर खिताब को जीतने के बाद से ही लिएंडर पेस का नाम सुर्खियों मे रहा है। उन्होने अपना ये खिताब भारत को समर्पित करते हुये कहा की देश का प्रतिनिधित्व करते हुये वे बेहद गंभीर होते है।

सुमित नगल ने जीता पहला किशोर डबल्स विंबलडन ग्रांट स्लैम

भारतीय टेनिस प्रेमियों के लिए रविवार का दिन अत्यंत हर्शौल्लाश वाला था हिगिस ओर पेस की जोड़ी के अलावा एक और खिताब भारत के पाले मे था जो सुमित नागल ने किशोर वर्ग का युगल जीतकर भारतीय झोली मे डाला था। सुमित नागल ओर वियतनाम के हुयांग लाई की जोड़ी ने रीली ओपेल्का और साइटिलान की जोड़ी को फ़ाइनल मे 7-6 (7-4), 6-4 से हराकर बालक वर्ग का खिताब अपने नाम किया।      

sumit Nagal wins wimbledon 2015

10 साल की उम्र से भूपति की अकादमी मे ट्रेनिंग ले रहे सुमित नागल के पिता ने जीत का सारा श्रेय भूपति को दिया है। 17 वर्षीय सुमित नागल भारतीय टेनिस उभरता हुआ सितारा हैं। सुमित नागल ओर वियतनामी खिलाड़ी की जोड़ी को आठवीं वरीयता प्राप्त है।

पहले सेट मे कठिनाइयों का सामना करते हुये 1 ब्रेक पॉइंट लेकर जैसे तैसे पहला सेट टाई ब्रेकट तक पहुंचा उसके बाद नागल हुआंग की जोड़ी ने 7-4 की सेट विजय के साथ बढ़त ले ली, दूसरे सेट मे चौथी वरीय टीम ने कई बार सर्विस ब्रेक करने के असफल प्रयास किए ओर नागल हुआंग को ब्रेक पॉइंट दे बैठे। इस जूनियर ग्रेंड स्लैम के अलावा यूकी भावरी( आस्ट्रेलियन ओपन 2009), सानिया मिर्जा (विम्बलडन 2003) लिएंडर पेस(विम्बलडन 1990, आस्ट्रेलियन ओपन 1991) रमेश कृष्णन(फ्रेंच ओपन,विम्बलडन 1979) तथा रामानाथन कृष्णन(विम्बलडन 1954) भी भारत के लिए ये खिताब जीत चुके है।

सुमित नागल जूनियर ग्रेंडस्लैम जीतने वाले छटे भारतीय तथा यूकी भावरी के बाद दूसरे खिलाड़ी है। विम्बलडन मे भारत की जीत का सिलशिला भारतीय टेनिस खिलाड़ी सानिया मिर्ज़ा तथा स्विस खिलाड़ी मार्टिना हिंगिस की जीत से साथ शुरू हुआ। फ़ाइनल मे सानिया ओर स्विस खिलाड़ी की जोड़ी ने रूसी महिला डबल्ज जोड़ी (मकारोवा – वेस्निना) से 77 – 64 , 7-5 से हराया था। वहीं आज पेस ओर हिंगिस की जोड़ी ने 6-1,6-1 से तथा सुमित नागल के बालक युगल ने 7-6 (7-4), 6-4 से फ़ाइनल मे जीत दर्ज कर भारतीय टेनिस प्रेमियों को न केवल खुशिया दी है बल्कि जो इस क्षेत्र मे आगे आना चाहते हैं उनका मनोबल भी बड़ाया है।

अपने 16 वें ग्रेंड स्लैम की जीत से खुश लिएंडर पेस ने टेनिस सर्किट मे 124 खिलाड़ियों के साथ जोड़ी बनाई है जिनमे 100 पुरुष युगल एवं 24 मिश्रित युगल की जोड़ीदार शामिल हैं। तीन लगातार जीतों से भारतीय खिलाड़ियों मे प्रसन्नता का माहौल बना हुआ है। विम्बलडन मे मिले ये खिताब खिलाड़ियों का भी मनोबल बदाएंगे जिस से खिलाड़ियों मे आत्मविश्वास पैदा होगा ओर आगे जाकर कई ओर ग्रेंड स्लैम खिताब भारत की झोली मे होंगे ओर भविष्य मे भारत का भी विम्बलडन मे नाम होगा। विम्बलडन के महिला एकल मुक़ाबले मे सेरेना ओर पुरुष एकल मुक़ाबले मे नोवक जोकोविच ने अपना परचम फहराया है। हालिया प्रदर्शन को देखते हुये लगता है की आने वाले समय मे भी भारतीय खिलाड़ी एकल मुकाबलों मे भी अपना प्रदर्शन करना चाहेंगे।

Ankita

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अंकिता दीपावली की डिजाईन, डेवलपमेंट और आर्टिकल के सर्च इंजन की विशेषग्य है| ये इस साईट की एडमिन है| इनको वेबसाइट ऑप्टिमाइज़ और कभी कभी आर्टिकल लिखना पसंद है|
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