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भारत की लोकसभा का चुनाव | Lok sabha election in hindi

Lok sabha election in hindi लोकसभा भारत की संसद है, जो राज्यसभा से बड़ी होती है. लोकसभा का चुनाव डायरेक्ट जनता के द्वारा होता है. लोकसभा के क्षेत्र निर्धारित रहते है, जहाँ से एक प्रतिनिधि को चुना जाता है, जो लोकसभा का सांसद बनता है. सांसद को 5 साल के लिए चुना जाता है. 1947 से आजादी के बाद अब तक 16 बार लोकसभा गठित हो चुकी है. लोकसभा के सभी सदस्यों की मीटिंग दिल्ली के संसद भवन में होती है. लोकसभा का खुद का चैनल है, लोकसभा टीवी. इसमें संसद से सीधे पूरी लोकसभा का प्रसारण किया जाता है. संसद भवन के अंदर किसी अन्य मीडिया कर्मी को आने की अनुमति नहीं है. लोकसभा में  एक अलग गैर-निर्वाचित सचिवालय होता है.

भारत की लोकसभा का चुनाव 

Lok sabha election in hindi

Lok sabha election

लोकसभा का गठन और सदस्यों की संख्या (Lok  sabha ke sadasya ki sankhya)–

लोकसभा में 552 सीटें होती है, जिसमें से 530 मेंबर्स देश के विभिन्न प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करते है, बाकि बचे हुए 20 सदस्य केंद्र शासित प्रदेश या राष्ट्रपति के द्वारा चुने जाते है. आज के समय में लोकसभा में 545 सीटें है, जिसमें से 2 सीट एंग्लो भारतीय समुदाय के लिए आरक्षित रहती है. राज्य की जनसँख्या के आधार पर वहां इनकी सदस्यता निर्धारित की जाती है. लोकसभा की 131 सीट में से 84 SC व 47 ST के लिए आरक्षित होती है. जिस समय नयी सरकार बनती है, उस समय लोकसभा की पहली बैठक होती है, और वही आने वाले पांच सालों के लिए तारीख नियत कर दी जाती है. किसी आपातकाल की स्थिति में इसमें बदलाव भी हो जाता है. अभी 16वीं लोकसभा चल रही है, जो 2014 में नियोजित हुई है.

लोकसभा का इतिहास (Lok sabha History)–

भारतीय लोकसभा को 1857-1947 तक मुख्य रूप से ब्रिटिश सरकार ने चलाया. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम को 18 जुलाई 1947 में ब्रिटिश संसद द्वारा पारित किया गया, जिसमें 2 स्वतंत्र राष्ट्र भारत व पाकिस्तान के होने की बात कही गई थी. इस अधिनियम के अनुसार इन स्वतंत्र देशों को ब्रिटिश सियासत के नियम अनुसार तब तक चलना होगा, जब तक ये अपने देश का संविधान स्वयं लागु नहीं कर देते है. भारत का संविधान 26 नवम्बर 1949 को बनकर तैयार हुआ, व 26 जनवरी 1950 को लागु किया गया, जिसके बाद भारत एक सम्पूर्ण लोकतांत्रिक राष्ट्र बन गया. इसके बाद से भारत स्वतंत्र रूप से अपने नियमों के अनुसार काम करने लगा. भारत के संविधान के अनुसार भारत की संसद में यहाँ का राष्ट्रपति, 1 लोकसभा व 1 राज्यसभा का गठन होना अनिवार्य है. 25 अक्टूबर 1951 से 21 फ़रवरी 1952 के बीच देश में पहली बार आम चुनाव आयोजित किये गए थे, जिसके बाद पहली बार 17 अप्रैल 1952 को लोकसभा गठित की गई थी.

लोकसभा का सदस्य बनने के लिए योग्यता (Lok sabha candidate eligibility)–

  • भारत का नागरिक होना चाहिए.
  • 25 वर्ष या उससे अधिक उम्र होनी चाहिए.
  • कुछ भी, किसी भी तरह का क्रिमिनल रिकॉर्ड नहीं होना चाहिए.
  • देश के किसी भी हिस्से की, मतदाता सूचि में नाम होना चाहिए.

इन वजह से लोकसभा की सीट खाली हो सकती है –

  • किसी कारणवश सदस्य अपना इस्तीफा स्पीकर को दे सकते हैं.
  • सदस्य बिना किसी नोटिस के लगातार 60 दिन तक संसद से अनुपस्थित रहता है.
  • अगर सदस्य ‘दलबदल विरोधी कानून’ के तहत पार्टी बदल लेता है, तो सीट खाली कर दी जाती है.
  • आकस्मिक मृत्यु

लोकसभा सदस्य के चुनाव की पद्धिति (Lok sabha election candidates)–

लोकसभा के सदस्य का चुनाव सीधे भारत देश की जनता के द्वारा किया जाता है. डायरेक्ट चुनाव होने की वजह से प्रदेश को प्रादेशिक निर्वाचन में बांटा जाता है. भारत के संविधान में इस सम्बन्ध में निम्नलिखित 2 प्रावधान है –

  1. सभी प्रदेशों में लोकसभा सीटों का आवंटन इस तरह से होता है कि लोकसभा की सीट व जनता का अनुपात सभी राज्यों के लिए एक ही हो. अगर प्रदेश की जनसँख्या 60 लाख से कम है तो, इस प्रावधान को नजरंदाज कर दिया जाता है.
  2. प्रत्येक प्रदेश में निर्वाचन क्षेत्र की जनसँख्या व आवंटित सीटों का अनुपात पुरे राज्य में एक समान होता है.

स्पीकर का चुनाव (Speaker of lok sabha is elected)

लोकसभा सदस्य अपने बीच में से एक सदस्य का चुनाव करते है, जिसे लोकसभा का अधिकारी बनाया जाता है, जिन्हें स्पीकर कहते है. इसी तरह डिप्टी स्पीकर का चुनाव होता है| स्पीकर को डिप्टी स्पीकर द्वारा सहायता प्रदान की जाती है, जो लोकसभा द्वारा ही चयनित होते है. लोकसभा चलाने की जिम्मेदारी स्पीकर पर ही होती है, व उसे शांत करा कर सुचारू रूप से चलाना स्पीकर का काम है. अध्यक्ष की अनुपस्थिति में उपाध्यक्ष द्वारा सदन को चलाया जाता है. स्पीकर अपनी इच्छा अनुसार सदन को एक निश्चित समय के लिए, या अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर सकता है.

गणेश वासुदेव मावलंकर (15मई 1952 से 27 फ़रवरी 1956 ) पहले लोकसभा अध्यक्ष रहे. तत्कालीन लोकसभा में श्रीमती सुमित्रा महाजन लोकसभा अध्यक्ष है, जो 3 जून 2014 को चयनित हुई है. ये दूसरी महिला लोकसभा स्पीकर है.  ये इंदौर सीट से लोकसभा की सदस्य बनी थी. श्री एम् थामबिदुरई लोकसभा उपाध्यक्ष है.

सदन की प्रक्रिया (Sadan Process) –

लोकसभा में प्रक्रिया तथा कार्यसंचालन संबंधी नियम समय समय पर लोकसभा अध्यक्ष के द्वारा नियमित किये जाते है. व्यापार, काम संबंधी सुचना, जो स्पीकर को मंत्री व गैर सरकारी सदस्य के द्वारा मिलती है, सदन शुरू होने से पहले ही सभी सदस्यों के लिए छपाई जाती है, व सदन के दौरान उन्हें वितरित की जाती है. अध्यक्ष सभा की अध्यक्षता व प्रक्रिया को नियंत्रित करता है.

सत्र व बैठकों का समय (lok sabha satra and session timings)–

एक साल में लोकसभा के 3 सत्र आयोजित किये जाते है.

  • बजट सत्र – फ़रवरी से मार्च
  • मानसून सत्र – जुलाई से सितम्बर
  • शीत कालीन सत्र – नवम्बर से आधे दिसम्बर तक

सत्र का समय सुबह 11 से 1 फिर 2 से शाम 6 बजे तक होता है. कई बार किसी जरुरी मुद्दे पर बात चलने की वजह से लंच का ब्रेक नहीं होता है, व सभा लगातार चलती रहती है. इसकी अवधि शाम 6 बजे के बाद भी बढाई जा सकती है. शनिवार, रविवार व अन्य छुट्टियों वाले दिन लोकसभा भी बंद रहती है. कम से कम 55 सदस्य लोकसभा में मौजूद हो, तभी लोकसभा का कार्यकाल शुरू किया जा सकता है. स्पीकर के आने पर सभी सदस्यों को खड़े होकर उन्हें सम्मान देना होता है, जिसके बाद स्पीकर कार्यकाल शुरू करता है.

लोकसभा में 2 विशेष सत्र का भी प्रावधान है, जो राष्ट्रपति के द्वारा नियोजित किये जाते है.

  • संसद विशेष सत्र – यह किसी आपातकाल या विशेष कार्य की स्थति में आयोजित की जाती है, इसे राष्ट्रपति की अनुमति से ही नियोजीत किया जा सकता है. इस सत्र को कभी भी आयोजित किया जा सकता है. राष्ट्रपति बाकि सत्र की अवधि बढ़ाकर विशेष सत्र आयोजित कर सकते है, या कभी भी अलग से भी आयोजित कर सकते है. इस सत्र में उस जरुरी मुद्दे पर ही बातचीत होती है, जिसके लिए इसे आयोजित किया गया था. इस विशेष सत्र में रोज के कामों को नहीं किया जा सकता है.
  • लोकसभा विशेष सत्र – अगर देश में आपातकाल की स्थिति है, या किसी प्रदेश में ये स्थिति है, तो लोकसभा के सदस्य मिलकर राष्ट्रपति को विशेष सत्र बुलाने के लिए नोटिस दे सकते है.

प्रश्नकाल –

लोकसभा सत्र की बैठक का पहला घंटा प्रश्नकाल कहलाता है. संसद में कोई भी सदस्य किसी से भी सवाल जबाब रखने का अधिकार रखता है. वे सरकारी योजना, कामकाज के बारे में जानकारी हासिल कर कर सकते है. प्रश्नकाल 3 तरह का होता है, तारांकित, अतारांकित और अल्प सूचना। तारांकित में सवाल का जबाब सामने ही बोलकर दिया जा सकता है. अतारांकित में सवाल का जबाब लिखकर ही देना होता है. इन दोनों तरह के प्रश्नकाल की अवधि 10 दिन की होती है, इस बीच में ही सदस्य को जबाब देना होता है. अल्प सुचना प्रश्नकाल में तुरंत ही जबाब देना होता है. प्रश्नकाल के बाद जीरो समय आता है, इसी दौरान अल्प सुचना वाला सवाल पुछा जाता है. इसके लिए स्पीकर से पहले से हामी ली जाती है, व जिस सदस्य से प्रश्न करने है, उनको भी जानकारी देकर तैयार रहने को कहा जाता है.

बिजनेस काल –

प्रश्नकाल के बाद व अधिकतर लंच के बाद सभा के जरुरी, रोज के काम को शुरू किया जाता है. जिसके अंतर्गत स्थगन प्रस्ताव, संचार राज्यसभा का संदेश, विधेयक की जानकारी, विशेषाधिकार से जुड़े प्रश्न, मंत्रियों के बयान, याचिका की प्रस्तुति, चुनाव संबंधी प्रस्ताव, विधेयक शुरू व बंद होने की जानकारी आदि काम होते है. मुख्य बिजनेस काल में एक विधेयक, वित्तीय व्यवसाय या किसी प्रस्ताव पर चर्चा होती है.

लोकसभा में विभिन्न राज्यो से मौजूद सदस्यों की संख्या –

राज्य का नाम निर्वाचन क्षेत्रों की संख्या
अंडमान निकोबार 1
चंड़ीगढ़ 1
दादरा और नागर हवेली 1
दमन और द्वीप 1
दिल्ली 7
लक्ष्यद्वीप 1
पोंडिचेरी 1
आंध्रप्रदेश 25
असम 14
अरुणाचल प्रदेश 2
बिहार 40
छत्तीसगढ़ 11
गोवा 2
गुजरात 26
हरियाणा 10
हिमाचल प्रदेश 4
जम्मू और कश्मीर 6
झारखण्ड 14
केरल 20
कर्णाटक 28
महाराष्ट्र 48
मध्यप्रदेश 29
मेघालय 2
मणिपुर 2
मिजोरम 1
नागालैंड 1
उड़ीसा 21
राजस्थान 25
पंजाब 13
सिक्किम 1
तमिलनाडु 39
त्रिपुरा 2
उत्तराखंड 5
उत्तरप्रदेश 80
पश्चिम बंगाल 42
तेलन्गाना 17

लोकसभा द्वारा पारित प्रस्ताव –

लोकसभा में विपक्ष की भी बहुत महत्ता होती है. विपक्ष के पास अधिकार होता है, कि वह सरकार को गिरा देने का प्रस्ताव, उनके कार्य से सम्बंधित प्रस्ताव सामने रख सकती है.

  • अविश्वास प्रस्ताव – तत्कालीन कबिनेट मंत्रियो के कार्य के विरुध्य, ये प्रस्ताव विपक्ष द्वारा सदन में प्रस्तुत किया जाता है. अगर इस प्रस्ताव को 50 सदस्यों की अनुमति मिल जाती है, तो प्रस्ताव को पास समझा जाता है, और तत्कालीन सरकार गिर जाती है. जिसके बाद कबिनेट मंत्रियों को राष्ट्रपति के पास खुद अपना इस्तीफा देना होता है. सदन में ये प्रस्ताव आते ही, बाकि काम रोक दिए जाते है, और सिर्फ इस मुद्दे पर बात की जाती है. पुरे सत्र में सिर्फ एक बार ही ये प्रस्ताव सामने रखा जा सकता है.
  • निंदा प्रस्ताव – इसके अंतर्गत विपक्ष सरकार के काम का विरोध करती है, उससे सवाल जबाब किये जाते है. इसमें भी 50 लोगों का समर्थन जरुरी होता है. ये प्रस्ताव पारित होने पर सरकार की बहुत बदनामी होती है. एक निश्चित समय में कबिनेट के मंत्रियों को सदन में अपना विश्वास प्रस्ताव पारित कराना अनिवार्य होता है, नहीं तो विपक्ष अविश्वास प्रस्ताव रखकर सरकार गिरा भी सकती है.

लोकसभा का विघटन – ये राष्ट्रपति के द्वारा ही होता है, इसका मतलब होता है कि तत्कालीन लोकसभा समाप्त हो चुकी है, अब नए सिरे से आम चुनाव होंगें व फिर नयी लोकसभा संगठित होगी.

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