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नेताजी व्यंगात्मक कविता शायरी

लोकतंत्र ही शक्ति हैं नेताजी व्यंगात्मक हिंदी कविता जिसमे एक नेता ने कहा कि जब जनता अपनी शक्ति नहीं जानती तो कोई भी उसे बेवकूफ ही बनाएगा | वोट देने से ही सब कुछ नहीं हो जाता सभी नागरिकों को चाहिए कि वे हर बात का जवाब मांगे | नेता का घर एक कटघरा माने और अपने आप को वकील समझे | नेता सिर पर बैठने नहीं काम करने आता हैं वो सरकार का राजा नहीं बल्कि जनता का रंक हैं | जब जनता टोकेगी नहीं तब क्यूँ नेता खुला चौर नहीं बनेगा | हर छोटी से बड़ी चीज में अपना योगदान दे अगर सफल देश की इच्छा हैं तो हर काम को अपना समझे | भारत देश लोकतान्त्रिक हैं इसे जनता की ताकत की जरुरत हैं | सफाई अभियान हो या जन धन योजना या कोई भी अन्य कार्य सबका हिस्सा बने और सवाल करें | जवाब ना मिले तो बिना डरे शिकायत भी करें | जाने अनजाने घूस देकर भ्रष्ट्राचार का हिस्सा बने|

Loktantra Hi Shakti Hain Hindi Kavita Poem

नेताजी व्यंगात्मक कविता शायरी 

लोकतंत्र ही शक्ति हैं 

नेता जी का तन सुस्ताया
आराम से बैठ रिमोट उठाया
जो भी चैनल उसने दबाया
हर तरफ से गाली खाया

कोई कहे बिजली,पानी नहीं
कोई कहे भ्रष्ट्राचार की बहती नदी
नेता जी का सर चकराया
संवादाता को फ़ोन घुमाया

काहे कोसे दुनियाँ सारी
क्या हमने ही सबकी नैया डूबाई

संवादाता को गुस्सा आया
उसने जोर से चिल्लाया

सत्ता में बैठे तुम हो
घूस चारा खाते तुम हो

सफेद धन काला तुमने बनाया
फिर काहे को सर चकराया

नेता ने करके बुलंद आवाज
सत्ता में हम बैठे आज

जनता ने हमको बैठाया
हमने तो बस दिमाग घुमाया

जब मक्खी देख भी खाती जनता
घूस भी खिलाती जनता

बस चादर तान सो जाती जनता
तो हमने कौनसा गलत कमाया  

अगर चाबी देकर तुम सो जाओ
फिर भी तिजौरी तुम भरी पाओ

अब नहीं रहा वो जमाना
अब तो खाये हर कोई खजाना

शक्ति जनता के पास बड़ी हैं
काहे वो निसहाय खड़ी हैं

अब जागों न खाओ मक्खी
नेता पर बढ़ाओ सख्ती

बस वोट देकर ना सो जाओ तुम
हर काम का हिस्सा बन जाओ तुम

सफाई हो या अन्य अभियान
करों अपना विशेष योगदान

जब जनता जाग जायेगी
तब ही बहार आएगी

जनशक्ति में ही बल हैं
यही देश का सम्बल हैं

ना कोसो नेता को तुम
नींव हैं लोकतंत्र जाग जाओ तुम

कर्णिका पाठक

नेताजी व्यंगात्मक कविता शायरी Neta Ji Hindi Kavita में व्यंग हैं जो नेता को नहीं नागरिको की तरफ जाता हैं नेता जो करता हैं वो खुलेआम इसलिए कर पाता हैं क्यूंकि हम जैसे नागरिक उस और देखते ही नहीं |देश के विकास में ही हम सबका विकास हैं इसलिए हमें ही सही गलत के लिए सामने आना होगा | अगर हम ऐसा नही करेंगे तो ये नेता बैमानी करते ही रहेंगे |

जैसे घर में लगी दीमक का इलाज करना जरुरी होता हैं अगर न किया जाये तो दीमक पुरे घर को खोखला कर सकती हैं उसी प्रकार यही हाल नेता का हैं | अगर हम नहीं जागेंगे तो यह मनमानी नहीं त्यागेंगे |

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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2 comments

  1. Bahut achchi kavita..

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