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Mahabharat 11th December 2013 Episode 63 Update

mahabharat 5 dec

पहला भाग
पांडव ध्रुपद को बंधी बनाकर गुरु द्रोण के पास पांचाल के राज भवन में लेकर जाते है, द्रोण वहाँ घोड़े पर बैठ कर आते है और पुरानी बाते याद करते है |

Flash Back ( द्रोण अपनी पत्नी को कहता है कि उनकी परेशानी ध्रुपद ही दूर करेगा अब अश्वत्थामा को आटे का घोल नहीं पीना होगा )

द्रोण , ध्रुपद से कहता है याद करो वो पल जब द्रोण अपने मित्र से मिलने आया था और ध्रुपद ने उसका भरी सभा में अपमान किया था |

Flash Back ( पहरेदार आता है ध्रुपद को कहता है एक ब्राह्मण आया है और अपने आपको ध्रुपद का मित्र कह रहा है, तभी द्रोण दरबार में आजाता है और ध्रुपद को मित्र कहकर सम्बोधित करता है , सभी दरबारी द्रोण का मजाक उड़ाते है कि एक गरीब ब्राह्मण महाराज को अपना मित्र कह रहा है तब द्रोण कहता है वस्त्र से मित्रता का क्या सबंध, वो और ध्रुपद महर्षि भारद्वाज के आश्रम में साथ में अध्ययन करते थे ,ध्रुपद हमेशा द्रोण से युध्द की कला सीखता था, दोनों मित्र में बहुत प्रेम था,तभी ध्रुपद कहता है यह कौन है जो इस तरह परिहास कर रहा है वो किसी को नहीं जानता | द्रोण कहता है क्या इस तरह के प्रश्न की आवश्यकता है ? द्रोण ने भयानक बाग से ध्रुपद की जान भी बचाई थी | धुपद कहता है उसके हजारो सैनिक उसके प्राण बचाते है वो उसके मित्र नही हो जाते | खेत में गेंहू और रजत एक साथ उगते है पर उनका मूल्य समान नहीं होता | द्रुपद, द्रोण का अपमान करता है | द्रोण ने कहा कि उन्होंने जीवन भर की मित्रता का वचन दिया था और ध्रुपद कहा करता था कि उसकी सम्पति पर दोनों मित्रो का आधा आधा हक़ होगा पर द्रोण उससे आधा राज्य मांगने नहीं आया है , ध्रुपद कहता है कि वो 10 गायें दान में देदेगा | द्रोण कहता है कि हक़ से दे तो वो दौ गाये भी लेले पर दान नहीं | द्रुपद कहता है मौन रहो मित्र यह ध्रुपद का राज्य है किसी गुरुकुल में साथ में पढ़ लेने से मित्रता नहीं होती ,तब गुरु द्रोण प्रतिज्ञा करते है कि जिस सिंहासन का द्रुपद को घमंड है वो उसे छीन कर रहेगा और ध्रुपद ने उसकी शिक्षा का अपमान किया है इसलिए वो ऐसे शिष्य सुसज्जित करेगा जो ध्रुपद का सिर उसके चरणों में झुकायेंगे , द्रोण खुद उस युध्द में शस्त्र नहीं उठाएगा | )

दूसरा भाग
द्रोण कहता है आज जाकर प्रतिज्ञा पूरी हुई और वो पांडवो को ध्रुपद के बंधन खोलने का बोलता है एवम कहता है कि ध्रुपद खुद अश्वत्थामा का राज्य अभिषेक करेगा | ध्रुपद अभिषेक करता है और अश्वत्थामा को सिहासन पर बैठाया जाता है | द्रोण पांडवों से कहते है कि यह निर्विवाद सिध्द होगया कि पांडव, कौरवों से श्रेष्ठ है अब वो हस्तिनापुर लौट सकते है | द्रोण अभी अश्वत्थामा के साथ है उसे राजनीती में सहायता करने के लिए | द्रोण ध्रुपद को कहता है वो उसके साथ अन्याय नहीं करेगा, वो उसे आधा राज्य वापस लौटाता है जिस पर वह ख़ुशी से राज्य करे और ध्रुपद का कोई पुत्र नहीं है वो अश्वत्थामा को ही अपना पुत्र माने और उसे राज करने में सहायता करे |

तीसरा भाग
पांडव वापस लौट रहे है सभी आपस में बाते करते जा रहे है | अर्जुन अश्व पर सो रहा है भीम कहता है यह कैसे अश्व पर सो सकता है नकुल कहता है अर्जुन को निंद्रा पर विजय प्राप्त है वो कभी भी कही भी सो सकता है और कई माह तक जागा भी रह सकता है |इस तरह वो बाते करते जा रहे है | तभी अर्जुन जागता है और कहता है कि कौरव कहाँ रह गये | नकुल कहता है वो पांडवो से कैसे निगाह मिला सकते थे | तभी युधिष्ठिर कहता है अगर किसी का मन जल रहा हो तो कटु वाक्य नहीं कहे जाते,शीतल शब्दों का प्रयोग करना चाहिए,ताकि उसका मन शान्त हो सके | अर्जुन कहता है कि क्या युधिष्ठिर को लगता है कि कभी दुर्योधन का मन शान्त होगा और वो कभी भी युधिष्ठिर को युवराज मान पायेगा |तभी वहाँ सभी कौरव आ जाते है | अब पांडव और कौरव आमने सामने खड़े है |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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