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Mahabharat 13th January 2014 Episode 85 Update

Arjun-and-Draupadi-in-Mahabharat

पहला भाग
द्रोपदी, द्रुपद से आशीर्वाद लेने के लिए उसके चरण स्पर्श करती है पर वह उसे आशीर्वाद नहीं देता कहता है यह देवताओ का प्रसाद है इसलिए वह उसे चरणों में नहीं रख सकता और वह किसी को सिर पर नहीं बैठाता |द्रोपदी उसे जवाब देती है कि इसका मतलब वो द्रुपद के ह्रदय में वास करेगी | ध्रुपद कुछ नहीं कहता,वह अपने पुत्र दृष्ट्द्युम से कहता है कि उसे जिस कारण उसने प्राप्त किया है वो जल्द ही उसकी वह इच्छा पूरी करे और वह अपने पुत्र के साथ वहां से चला जाता है | ध्रुपद का इस तरह का व्यवहार देख कर द्रोपदी दुखी हो जाती है | उसे दुखी देख शिखंडिनी उसके पास आती है अपना परिचय देते हुए कहती है कि वो उसकी बहन है | द्रोपदी उससे कहती है कि उसके पिता उसे पाकर प्रसन्न नहीं है |शिखंडिनी कहती है कि घने बादलो के कारण कभी कभी सूर्य दिखाई नहीं देता पर एक वक्त के बाद वो सामने आ जाता है | शिखंडिनी द्रोपदी को महल में चलने का बोलती है| द्रोपदी महल में पहुंचती है जहाँ उसका पुष्पों से स्वागत किया जाता है | शिखंडिनी दासियों को कक्ष सजाने और द्रोपदी के स्नान के लिए प्रबंध करने का बोलती है | कक्ष में पहुंचकर द्रोपदी दर्पण देखती है जो उसने कभी नहीं देखा था, शिखंडिनी उसे बताती है कि दर्पण में उसकी छबि है और वह देवताओ का आशीर्वाद है जो कि सबसे सुन्दर है | द्रोपदी बहुत आश्चर्य से खुद को देखती है | वहां छोटी छोटी दासियों की बेटिया बहुत हंस रही है
दूसरा भाग
शिखंडिनी द्रोपदी को स्नान करने का बोलती है | द्रोपदी चली जाती है और सभी दासियाँ उसके साथ है | द्रोपदी का पूरा श्रंगार किया जाता है |
तीसरा भाग
दासी की पुत्री आकर द्रोपदी को डराती है द्रोपदी उनके साथ बहुत खुश है पर दासी उस बच्ची को डाटती है कि वह अपनी मर्यादा में रहे तब द्रोपदी कहती है कि मर्यादा स्वभाव में होती है और जिसे याद रखना पड़े वह अंकुश होता है | दासी पुत्री द्रोपदी को गुडिया दिखाती है द्रोपदी खुश है उसने गुडिया कभी नहीं देखी यह सुन दासी पुत्री को आश्चर्य होता है तभी दासी बताती है कि द्रोपदी अग्नी से प्रकट हुई है उसने बालपन नहीं देखा | द्रोपदी पूछती है बालपन कैसा होता है दासी कहती है बालपन बहुत ही अच्छा होता है दासी पुत्री कहती है बालपन अच्छा नहीं होता उसमे माता डाटती है | द्रोपदी कहती है कि दासी पुत्री उसकी मित्र बन जाए और उसे बालपन का अनुभव दे और द्रोपदी उसे अपना अनुभव बताएगी | दासी कहती है वह बच्ची दासी पुत्री है उससे कैसे मित्रता होगी | द्रोपदी कहती है उसे इन सब बातो का ज्ञान नहीं उसने तो मित्रता कर ली | दासी पुत्री कहती है वह उसकी गुडिया का विवाह राजा से करेगी जैसे द्रोपदी का विवाह होगा किसी सुन्दर राजकुमार से | दूसरी तरफ अर्जुन अभ्यास कर रहा है |
precap : पांडव वन में है और युधिष्ठिर कहता है उन्हें इस वन में द्रोण और अश्व्थामा पहचान सकते है | अश्व्थामा वन में है और ब्राह्मणों से पूछताछ कर रहा है |
याद रखने योग्य : द्रोपदी और दृष्ट्द्युम अग्नी से प्रकट हुए थे , और दृष्ट्द्युम का जन्म द्रोण को मारने के लिए ही हुआ था |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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