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Mahabharat 15th January 2014 Episode 87 Update

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पहला भाग
नकुल वन के बारे में पूछता है| अर्जुन कहता है यह एक मायावी वन है | युधिष्ठिर बताता है कि यह राक्षसों का बनाया हुआ वन है |कई वर्षों पहले भीष्म ने यहाँ राक्षसों को हराया तभी तय हुआ था कि यहाँ मानव जाति प्रवेश नहीं कर सकती और अगर करती है तो बाहर नही जा सकती | अर्जुन कहता है यह सब गुरु द्रोण ने उन्हें बताया और नकुल के लिए कहता है कि अगर उसने गुरुकुल में खुद के रूप को देखने के बजाय गुरु को सुना होता तो आज इतने सवाल नहीं करता और सभी हंसने लगते है |

द्रोपदी महल में है तभी शिखंडिनी उसे कहती है कि अन्नपूर्णा माता की पूजा करना है जिसे शिशु अपने जन्म के बाद करता है और द्रोपदी और दृष्ट्द्युम का जन्म अभी ही हुआ है इसलिए उन्हें पूजन के लिए जाना है | द्रोपदी मुस्कुरा रही है | शिखंडिनी ने मुस्कुराने का कारण पूछा | द्रोपदी ने कहा वो सोच रही है शिशु किस तरह पूजा में बैठता होगा | शिखंडिनी कहती है शिशु अपनी माता की गोद में बैठता है | द्रोपदी कहती है बड़ी बहन भी माता समान होती है इसलिए वह शिखंडिनी की गोद में बैठकर पूजन करेगी | शिखंडिनी कहती है सब हसेंगे | द्रोपदी कहती है फिर वह हाथ पकड़कर पूजन करेगी | शिखंडिनी उसे बताती है कि पिता ने द्रोण के राज्य पर आक्रमण की तैयारी करने का आदेष दिया है और वह सेनापति है उसे जाना होगा और द्रोपदी दासी के साथ चली जाए, उसे दुःख है वो पूजन में नहीं होगी पर उसे सेना के लिए जाना होगा |

वन में,कुन्ती की आँखों में आंसू है जिसे देख अर्जुन ने उसका कारण पूछा | कुन्ती ने कहा कि उसके आंसू ख़ुशी के है क्यूंकि विकट परिस्थिती में भी वह सब हंस रहे है | अर्जुन कहता है समय कठिन नहीं होता है कठिन जब होता है जब मानव हंसना भूल जाता है |अर्जुन कुन्ती को विश्राम करने का बोलता है | भीम कहता है वो विश्राम का सोंच भी कैसे सकता है उन्हें राक्षस को खोज कर उन्हें मारना चाहिये | युधिष्ठिर ने कहा राक्षस को वो नहीं देख सकते | अर्जुन कहता है वो खुद ही उन्हें ढूँढ़ लेंगे वो सभी भोजन है उनका | नकुल कहता है भीम डरे नहीं वो उसकी रक्षा करेगा | भीमा कहता है नकुल क्या बचाएगा अगर उसे राक्षस खायेगा तो वो उसके दांतों में ही फँस जायेगा | भीम कहता है वो ही मारेगा राक्षस को | उनकी सब बाते राक्षस और राक्षसी सुन रहे है और कह रहे है कि उनके 1 माह के मांस का इंतजाम होगया |

दूसरा भाग
शिखंडिनी बताती है वो पांचाल की सेनापति है उसके पिता ने उसे हमेशा बेटा माना है उसे गर्व है कि वो अपनी सेना का रक्षण करती है और पांचाल के शत्रुओं का वद करके उसे अहसास होता कि उसके पूर्वंजनम के पाप कट रहे है | द्रोपदी भी बहुत खुश होती है उसे गर्व है अपनी बहन पर वह अपने पिता ध्रुपद पर भी गर्व कर रही है जिसने नर और नारि में कोई भेद नहीं किया | शिखंडिनी सेना का आव्हान करती है सेना नारे लगा रही है और द्रोपदी पूजन के लिए जाती है मंदिर में पण्डित को प्रणाम कर आशीर्वाद लेती है और पूजन करती है पंडितजी उसे प्रशाद देते है तभी वहां दृष्ट्द्युम आता है | द्रोपदी उससे ख़ुशी से बात करती है पर वो ठीक से जवाब नहीं देता कहता है वो पिता की आज्ञा से पूजन करने आया है | द्रोपदी कहती है वह दोनों अग्नी से एक साथ उत्पन्न हुए है पर वो जितनी खुश है दृष्ट्द्युम उतना खुश नहीं लगता | दृष्ट्द्युम कहता है वो द्रोण को मारने के लिए जन्मा है इसलिए उसे कुछ भी अन्य सोचने का हक़ नहीं है | द्रोपदी कहती है अगर दृष्ट्द्युम के हांथो कोई मारा जाता है तो यह उसकी नियति है पर किसी को मरना ही जीवन का मकसद हो यह सही नहीं यह तो दुःख का कारण है | दृष्ट्द्युम गुस्से में कहता है द्रोपदी एक नारि है और नारि पुरुष को ज्ञान देती शोभा नहीं देती | द्रोपदी कहती है वह कैसे शब्द बोल रहा है स्वयम ध्रुपद ने भी नर और नारि में अंतर नहीं किया| उन्होंने शिखंडिनी को सेनापति बनाया | दृष्ट्द्युम ने कहा पिता ने उसे सेनापति नियुक्त किया है, सारी सेना के सामने | यह सुनकर द्रोपदी को क्रोध आता है और वो महल की तरफ जाती है |

तीसरा भाग
शिखंडिनी बहुत दुखी है और उसे याद आता है जब द्रुपद ने उसे हार का कारण कहा था उसे कोसा था और पुत्री को अभिशाप कहा था | शिखंडिनी अपनी तलवार में चन्दन से तिलक करती है |
precape: द्रुपद दृष्ट्द्युम का तिलक करने जा रहा है पर द्रोपदी उसे रोकती है और उसे कहती है कि वह शिखंडिनी के साथ अन्याय कर रहा है |
याद रखने योग्य : दृष्ट्द्युम का जन्म द्रोण को मारने के लिए हुआ था और द्रोपदी और दृष्ट्द्युम अग्नी से प्रकट हुए थे |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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