Mahabharat 16th January 2014 Episode 88 Update

mahabhart

पहला भाग
शिखंडिनी बहुत दुखी है इसलिए अपनी तलवार से ही अपना गला काटने जा रही है तभी द्रोपदी उसे आकर रोकती है और पूछती है वह यह क्या कर रही है | शिखंडिनी कहती है वह खुद को मार कर अपनी तलवार के क्रोध को शान्त कर रही है आज जो भी हुआ उससे उसके जीवन का होना ही बैमायने हो गया | द्रोपदी कहती है ऐसा कुछ नहीं हुआ है | शिखंडिनी कहती है द्रोपदी नहीं जानती उसका जन्म ही युध्द के लिए हुआ है पुष्प का जन्म होता है तो वह खुशबु , बीज और फल देता है पर कांटे का जन्म तो केवल दर्द देने के लिए ही होता है और वो खुद भी किसी कारण से जन्मी है | द्रोपदी उसे समझाती है पर शिखंडिनी कहती है जब भी उसके हाथ में शस्त्र नहीं होते उसे हताशा होती है वो प्रतिशोध लेने आई है यह प्रतिशोध उसके पूर्व जन्म का बंधन है | द्रोपदी कहती है वो धुपद से बात करेगी वह अन्याय नहीं कर सकता | शिखंडिनी कहती है पिता जी कभी द्रोपदी की बात नहीं मानेंगे | द्रोपदी कहती है अवश्य मानेंगे वह अग्नी से जन्मी है, वह देवताओं का प्रशाद है इसलिए पिताजी मानेंगे |

दृष्ट्द्युम राज्यसभा में प्रवेश करता है सभी उसका पुष्पों से स्वागत करते है | दृष्ट्द्युम ध्रुपद के चरण स्पर्श करता है द्रुपद उसे अजय हो ऐसा आशीर्वाद देता है और अपनी तलवार से अपना अंगूठा काट उसी रक्त से दृष्ट्द्युम का तिलक करने जा रहा है तभी द्रोपदी शिखंडिनी को लेकर वहाँ पहुँचती है और द्रुपद को रुकने का बोलती है कहती है इस तिलक पर जीजी (शिखंडिनी) का हक़ है | शिखंडिनी उसे चुप रहने का ईशारा करती है पर द्रोपदी ध्रुपद से पूछती है इस तिलक पर जीजी का हक़ है उनका अपमान क्यु कर रहे है | ध्रुपद कहता है उसमे इतना साहस के वह अपने पिता से सवाल कर रही है द्रोपदी कहती है संतान के सवालों का जवाब पिता ही देते है उसके लिए संतान को साहस की नहीं प्रश्न जरुरत होती है | ध्रुपद कहता है शिखंडिनी ने उसके विश्वास की हत्या की है वो भीष्म को मारने वाली थी और कुरु राज कुमारों से ही हार गई , उसने देवताओ की वाणी को असत्य बना दिया | द्रोपदी कहती है दृष्ट्द्युम भी देवताओ से मिला है अगर उस पर विश्वास है तो जीजी पर क्यूँ नहीं | ध्रुपद कहता है क्यूंकि वह एक स्त्री है और स्त्री पर आभूषण ही अच्छे लगते है | द्रोपदी कहती है माता दुर्गा भी स्त्री है और उनके पास 10 शस्त्र है | जिस प्रकार वो खुद देवताओं का प्रशाद है जीजी भी देवताओं का दान है | द्रुपद कहता है जरुरत नहीं है उसे ऐसे दान की और प्रशाद की | द्रोपदी कहती है जरुरत नहीं ! तो फिर क्यूँ माँगा देवताओं से उसे ? ध्रुपद कहता है उसने नहीं माँगा देवताओ ने उसे पराजित करके दिया द्रोपदी और शिखंडिनी उसकी पराजय कारण है उन्हें देख उसे पराजय याद आती है और वो पराजय स्वीकार नहीं करता |

दूसरा भाग
द्रोपदी कहती है अन्याय जीजी के साथ क्यु ? ध्रुपद कहता है अन्याय नहीं यह दंड है उसके कारण पराजय हुई और वह पराजय स्वीकार नहीं करता | द्रोपदी कहती है उस युध्द में अकेले जीजी की पराजय नही हुई उसमे द्रुपद की भी पराजय हुई तो दंड केवल जीजी को क्यु ? ध्रुपद गुस्से में कहता है अगर द्रोपदी को जीवित रहना है तो यहाँ से चली जाये वरना पिता के अपमान के दंड में उसे मृत्युदंड मिलेगा और वो उसे राज्य से जाने का बोलता है | शिखंडिनी क्षमा मांगती है | द्रुपद रक्षक को आज्ञा देता है कि द्रोपदी को काल्पिल्य नगर से बाहर कर दो |

तीसरा भाग
द्रोपदी कहती है अगर यही आदेष है तो वह चली जाएगी वह भी ध्रुपद की पुत्री है अगर यह सुनने के बाद भी यही रही है तो ध्रुपद का नाम ख़राब होगा और वो जाने लगती है शिखंडिनी से विदा लेती है | शिखंडिनी उसे रोकती है द्रुपद से कहती है द्रोपदी को जीवन का ज्ञान नहीं वो कैसे रहेगी | द्रोपदी नहीं रूकती और नगर से बाहर चली जाती है और नगर के द्वार बन्द कर दिए जाते है |
precap : द्रोपदी जलाशय के पास खड़ी है और पीछे से आवाज आती है कि जलाशय का पानी उस पर आएगा या वो उसमे जायेगी | यह सुन द्रोपदी पूछती है वह कोन है ? वह कहता है वह वसुदेव पुत्र कृष्ण है और द्रोपदी उसकी तरफ देखती है |
याद रखने योग्य : शिखंडिनी का जन्म भीष्म को मारने के लिए हुआ है और दृष्ट्द्युम का जन्म द्रोण को मारने के लिए |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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