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Mahabharat 18th December 2013 Episode 68 Update

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पहला भाग
अर्जुन और सुभद्रा कृष्ण से मिलते है,सुभद्रा अपने भाई को देखकर बहुत प्रसन्न है और अर्जुन कृष्ण की लीला को देख आश्चर्यचकित है | सुभद्रा अपने भाई से पूछती है उनका स्वास्थ्य कैसा है ? कृष्ण हंसते हुए जवाब देते है कि उन्हें क्या हुआ है ? डूब तो सुभद्रा रही थी | कृष्ण अपनी बहना को पूछते है कैसा लगा हस्तिनापुर? वो तो वहाँ ऐसे बस गई थी कि उन्हें भय था कि कहीं सुभद्रा ने हस्तिनापुर को अपना ससुराल तो नहीं बना लिया|कृष्ण कहते है जिसका रक्षक स्वयम अर्जुन हो उसे किस बात का भय होगा | काल्यवान ने कृष्ण को ललकारा परन्तु कृष्ण अपनी बहन से अपनी बुआ कुन्ती के हाल समाचार लेने में व्यस्त है अर्जुन बार-बार कह रहा है कृष्ण यह वक्त युध्द करने का है और काल्यवान पर बाण चला रहा है पर उसे कुछ नहीं हो रहा तभी कृष्ण कहते है काल्यवान किसी बाण से नहीं मरेगा, वो तो किसी तपस्वी की योगाग्नि से ही मरेगा | अर्जुन कहता है फिर क्या करे | कृष्ण कहता है कुछ नहीं भागों यहाँ से | इस तरह कृष्ण, अर्जुन और सुभद्रा भाग रहे है और काल्यवान उनके पीछे पड़ा है | काल्यवान कृष्ण से कहता है अरे ओं चरवाहे रण छोड़कर कहाँ भाग रहा है, तुझे दुनिया रणछोड़ कहेगी| तभी कृष्ण मुस्कुराते हुए कहते है कि वो आभारी है काल्यवान का जिसके कारण उन्हें यह नाम मिला |
अर्जुन सुभद्रा से कहता है उसने तो सुना था उसका भाई शूरवीर है परन्तु वो युध्द के बजाय भाग रहे है | सुभद्रा कहती है उसके भ्राता किसी से डरते नहीं ,इसके पीछे भी कोई नीति होगी| अर्जुन कहता है उसे तो कोई नीति दिखाई नहीं पड़ती और ना काल्यवान हारते दिख रहा है | सुभद्रा कहती है वो अपने भाई के विरुध्द कुछ नहीं सुनेगी |
कृष्ण भागते भागते एक गुफा में पहुंचते है जहाँ उनके पीछे पीछे काल्यवान भी पहुंचा | वहाँ कोई पीले वस्त्र को ओढ़े सो रहा है जिसे देख काल्यवान कहता है उससे युध्द करने के बजाय कृष्ण यहाँ सो रहा है और उसे पैर मार मारकर उठा देता है |

दूसरा भाग
काल्यवान जिसे पैर मारकर उठाता है वह कोई तपस्वी है जिसकी योगाग्नि से काल्यवान भस्म हो जाता है | इसके बाद वहाँ कृष्ण आते है तब वह तपस्वी पूछता है यह कौन था जो व्यर्थ ही उसकी योगाग्नि से भस्म हो गया | कृष्ण कहते है संसार में व्यर्थ कुछ होता ही नहीं है,हो सकता है काल्यवान को मारने के लिए ही महर्षि मूँज एक राजा से तपस्वी बने |

गुफा से बाहर आकर कृष्ण अर्जुन और सुभद्रा को बताते है कि काल्यवान भस्म हो गया | अर्जुन पूछता है यह किस प्रकार हुआ तभी कृष्ण कहते है क्या अर्जुन ने कभी महाराज मूँज का नाम सुना है ? अर्जुन कहता है हाँ महाराज मूँज एक महान राजा थे जिसने पुरे विश्व को जीत लिया था और इस सबके बाद वो निंद्रा के लिए चले गये | कृष्ण कहते है संसार में बहुत कम लोग निंद्रा के लिए सोचते है राजा मूँज को अहसास हुआ जो है वो सब व्यर्थ है और उन्होंने सब कुछ त्याग दिया और वही इस गुफा में वर्षो से योग साधना में है जिससे उनकी सारी शक्ति उनके नेत्रों में एकत्र हो चुकी थी और वो जब भी खुलती उससे अग्नी उत्पन्न होती जिससे उस काल्यवान का वध हुआ |

अर्जुन कहता है यह सब कृष्ण ने किया | कृष्ण कहते है नहीं वह तो बस एक निमित्त/ जरिया थे , असल में तो काल्यवान को ऐसे ही मरना था | अर्जुन कहता है करते सब कृष्ण है पर स्वीकारते नहीं | सुभद्रा कहती है कृष्ण की कथनी और करनी समान नहीं होती | कृष्ण कहता है समय के और अवसर के अनुसार कथनी और करनी बदलती है जैसे जब मेघ बरसते है तो सारा विश्व हंसता है पर पपीहा रोता है कृष्ण सुभद्रा से कहते है अपने भाई के विषय में ऐसे कहते, उसे लाज नहीं आती,दुनिया कहेगी कि कृष्ण तो झूठा है |

तीसरा भाग
अर्जुन, कृष्ण और सुभद्रा द्वारिकापुरी पहुंचे | अर्जुन द्वारिकापुरी को देख कहता है इतनी सुन्दर नगरी को कृष्ण ने ही रचा है ना| कृष्ण कहते है नहीं यह तो यादवों की नगरी है उन्होंने ने ही रची है कृष्ण ने तो बस उन्हें दिशा दी है | कृष्ण कहते है संसार में जब कोई यह समझ जाये कि वो कुछ करता ही नहीं है तो वही व्यक्ति कुछ बड़ा करता है | कृष्ण सुभद्रा से कहते है अर्जुन को नगर में ले जाये उसे कुछ काम है वो आता है | अर्जुन कहता है अगर सम्भव है तो वो भी उनके साथ चले | कृष्ण कहते है हाँ चल सकता है अर्जुन से कृष्ण को सहायता ही मिलेगी | अर्जुन कहता है किस प्रकार की सहायता | कृष्ण कहता है पर यह काम बहुत कठिन भी है |

“आज के episode में याद रखने योग्य यह है कि भगवान् कृष्ण का एक नाम “रणछोड़” भी था, जो काल्यवान नामक राक्षस के कारण पड़ा और उस काल्यवान का वध महर्षि मूँज की योगाग्नि से हुआ, जो कि सम्राट मालसा के पुत्र और स्वयं एक महान राजा थे, जिसने पुरे विश्व को जितने के बाद सब कुछ त्याग कर योग साधना को अपनाया | ”

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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