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Mahabharat 19th December 2013 Episode 69 Update

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पहला भाग
कृष्ण अर्जुन को अपने साथ ले जाने के लिए तैयार हो जाते है पर यह भी कहते है कि यह काम अर्जुन के लिए बहुत कठिन अनुभव हो सकता है | अर्जुन कहता है अगर वासुदेव भी उसकी परीक्षा लेना चाहते है तो वह तैयार है | कृष्ण सुभद्रा से राजभवन जाने के लिए कहते है सुभद्रा राजभवन के लिए जा रही है पर वो पीछे मुड़कर अर्जुन को देखती है ,कृष्ण भी उसके चेहरे के भाव को पढने की कोशिश करते है और मुस्कुराते हुए अर्जुन के साथ निकल जाते है |

कृष्ण अपने रथ पर और अर्जुन अपने अश्व पर नगर से गुजरते हुए जा रहे है | कृष्ण नगर में सभी को देख रहे है गाय को चारा भी खिला रहे है और अपने ही बचपन की लीलाओं को याद कर रहे है किस तरह वो माखन चुराते थे,किस तरह गोपियों की मटकी फोड़ देते थे |
दूसरी तरफ अर्जुन एक बुजुर्ग किसान को खेत जोतते देख खुद जोतने लगता है ,थोड़ी देर बाद कृष्ण भी उसका साथ देते है खेत जोतने के बाद वो दोनों उस बुजुर्ग से आशीर्वाद लेते है | अर्जुन कृष्ण से कहता है माधव श्रम करने से शक्ति और भी अधिक बढ़ गई है तभी कृष्ण कहते है श्रम करने से नही, किसी की सहायता करने से शक्ति सदैव बडती है |

दोनों नगर के समीप पहुँच गए है तभी नगर को देखते हुए अर्जुन कहता है दूर से यह बहुत समृद्ध नगर लग रहा है और हाथ दिखाते हुए कहते है उस तरफ है नगर का द्वार | कृष्ण कहते है मुख्य द्वार से विधृव की नगरी में नहीं जा सकते, अर्जुन कहता है कि कृष्ण ने तो कहा था कि विवाह का निमंत्रण मिला है | कृष्ण कहते है विवाह का नहीं, विवाह करने का निमंत्रण मिला है | अर्जुन कहता है राजा विधव की पुत्री रुक्मणि का विवाह तो शिशुपाल से तय हुआ है| तभी कृष्ण उसे एक पत्र देते है कहते है कि यह एक प्रेम पत्र है जिसे रुक्मणि ने उसे भेजा है| अर्जुन पढ़ता है,जिसमे लिखा है रुक्मणि ने जगत के सबसे सुन्दर याने कृष्ण को अपने पति के रूप में स्वीकार किया है और गुप्त रूप से आकर उसे ले जाने को कहा है |

दूसरा भाग
अर्जुन कहता है कि किसी स्त्री का अपहरण करना क्या धर्म है ? कृष्ण कहते है किसी नारी का बिना उसके अनुमति अपहरण करना अधर्म है परन्तु किसी स्त्री का उसकी इच्छा के विरुध्द विवाह करना भी अधर्म है और यहाँ उसका भाई रुक्मी अधर्म कर रहा है | अर्जुन कहता है वो अपने शौर्य के बल पर रुक्मणि को ला सकता है | कृष्ण कहते है पत्र में लिखा है रुक्मणि को अपने प्रियजनों का रक्त नहीं बहाना है, इसलिए गुप्त रूप से नगर में प्रवेश करेंगे | कृष्ण अर्जुन को कहते है उसे रुक्मणि को जाकर कहना है कि कृष्ण उसका पार्वती के मंदिर में इंतजार कर रहा है |

कृष्ण ग्वाले का भेस रच कर द्वार पर आते है पहरेदार रोकता है तो कहते है प्रशाद लायें है शिशुपाल के लिए पर द्वारपाल मना कर देता है तो कृष्ण कहते है किसी कृष्ण ने ग्वालों का नाम ही खराब कर रखा है इसलिए सब डरते है ग्वालों को देख कर | द्वारपाल कहता है वो किसी से नहीं डरता और उसे अंदर जाने की आज्ञा देदेता है | तभी वहाँ अर्जुन आता है नारी के भेस में कृष्ण कहते है यह वृहन्लला है उसकी बहन उसे भी अंदर आने देते है |

तीसरा भाग
कृष्ण अर्जुन को कहते है वो रुकमनी से जाकर मंदिर में आने को कहे | अर्जुन कहता है उसे यह किस तरह का भेस दे दिया कृष्ण ने | कृष्ण कहते है अभ्यास कर लो हो सकता है भविष्य में यह रूप उसके काम आजाये |

कृष्ण अर्जुन को रुक्मणि का भाई दिखाते है कहते है यह रकमी है जो यहाँ का युवराज है | कृष्ण उससे ही पूछने जा रहे है कि रुकमनी कहाँ है तभी अर्जुन कहता है अगर रुक्मी ने पहचान लिया तो ? कृष्ण कहते है अभी तक तो अर्जुन को भी नहीं पता कि कृष्ण कौन है तो रुक्मी किस प्रकार जान पायेगा | अर्जुन कृष्ण की हर बात के बाद उसे आश्चर्यता से देखते है |

कृष्ण रुक्मी के पास जाकर उसके चरण स्पर्श करते है रुक्मी पूछता है वह कौन है कृष्ण कहता है वो गोपाल है जिसे महर्षि दर्वासा ने भेजा है वर और वधु के लिए प्रशाद लेकर | रुक्मी कहता है तो यह प्रशाद उसे देदे वो वर वधु को देदेगा | कृष्ण कहते है महर्षि ने कहा था वर वधु को ही देना | रुक्मी कहता है ठीक है थोड़ी देर बाद उपर के कक्ष में रुकमनी आएगी उसे देदेना तभी कृष्ण कहते है वो नहीं उसकी बहन वृहन्लला देदेगी |

अर्जुन कृष्ण से पूछता है कि क्या यह प्रशाद सच में महर्षि दुर्वासा ने भेजा है वो कहता है हाँ उनके आश्रम जाकर वो खुद ही वर वधु के लिए प्रशाद ले आया और स्वयम प्रशाद ग्रहण करते है और कहते है वर तो वो खुद ही है |

आज के episode में याद रखने योग्य है कि रुक्मणि का विवाह शिशुपाल से तय हुआ था, एवम रुक्मी, रुक्मणि का भाई था और विधर्व देश का युवराज |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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