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Mahabharat 1st January 2014 Episode 77 Update

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पहला भाग
विदुर का संदेशवाहक वारणावत पहुंचता है और पांडवो से मिलकर उन्हें धान की बोरी देता है बताता है कि महामंत्री विदुर ने भेजा है |यधिष्ठिर पूछता है क्या कोई संदेश भी भेजा है काकाश्री ने ? सैनिक ने कहा कि महामंत्री ने कहा है धान का एक कण बोने से 100 की प्राप्ति होती है | भीम मजाक करता है कि केवल धान भेजा शक्कर और घी भी देते तो वह खिर बनाकर खाते यह सुनकर सभी मुस्कुराते है तभी उन्हें बोरी में हलचल का आभास होता है | अर्जुन बोरी को काटता है उसे सफ़ेद चूहा मिलता है | नकुल उसे पकड़ लेता है तभी सहदेव कहता है अब तो चावल ख़राब होगये भीम खीर कैसे बनाएगा | नकुल कहता है जानवर के कारण कुछ भी दूषित नहीं होता यह काम तो मानव ही कर सकता है | अर्जुन परेशान स्वर में बोलता है चूहा क्यूँ भेजा होगा काकाश्री ने ? भीम कहता है गलती से चूहा आगया होगा | अर्जुन और युधिष्ठिर सोच में है पर फिर भीम की बात मान लेते है | अब सभी पांडव और कुन्ती महाराज पांडू की प्रतिमा को प्रणाम करते है और हवन के लिए जाते है |
हस्तिनापुर में , शकुनी और दुर्योधन चन्द्रमा की तरफ देखते हुए, शकुनी कहता है कुछ दिन पहले चन्द्रमा पूर्ण था,आज बहुत कम रौशनी नहीं और कुछ दिन बाद यह भी नही होगा और उस दिन अमावस होगी और वह पांडव के जीवन का आखरी दिन होगा | दुर्योधन कहता है राम ने भी रावण को हराकर अमावस के दिन अयोध्या आये थे और उस दिन दीपावली मनाई गई थी और अब उसकी जीत होगी और दीपावली मनाई जाएगी | शकुनी कहता है हाँ यही होगा बस दुर्योधन का मित्र कर्ण बाधा न डाले तो | दुर्योधन कहता है उसे कर्ण पर पूरा यकीन है | शकुनी कहता है अगर दुर्योधन को यकीन है तो उसे कोई चिंता नहीं | शकुनी कहता है कल पुरोचन अग्नी लगा देगा महल को |
अधीरथ भीष्म से मिलने उनके कक्ष में आता है वो बहुत चिंता में है | भीष्म कहता है आज अधीरथ किस चिंता में है कि वह प्रणाम करना भी भूल गया | अधीरथ कहता है उसे प्रणाम करने में भी लाज महसूस होती है और वो अब यहाँ से दूर जाना चाहता है और उसकी अनुमति लेने आया है | भीष्म कहते है संसार में बच्चे को शिक्षा से , विवाहित को ससुराल से और पिता को पुत्र से जो दुःख मिलता है उसका कोई समाधान नहीं होता इसलिए अधीरथ बताये कि क्या बात है | अधीरथ कहता है पांडू पुत्रो के साथ वारणावत में कुछ होने वाला है जिसे कर्ण भी अधर्म मानता है पर वो मित्रता के धर्म में बंधा हुआ है |
दूसरा भाग
भीष्म कहता है वो पांडू पुत्रों को कुछ नहीं होने देगा और वारणावत की तरफ प्रस्थान करता है |
वारणावत में, अर्जुन सभी से कृष्ण की लीला के बारे में बता रहा है पर युधिष्ठिर उसी सोंच में है कि महामंत्री ने चूहा क्यूँ भेजा होगा | भीम भाइयों से कहता है दर्पण के सामने खड़े रहने से कोई सुन्दर नहीं होजाता |नकुल चूहे को हाथ में लिए दर्पण के सामने खड़ा था और कहता है सभी के पास कुछ न कुछ देखने होता है| भीम कहता है वो तो अपनी भुजाये देखता है और अर्जुन को चिड़ाते हुए कहता है अर्जुन देखने योग्य होगा. जब उसे नारी का रूप दिया था | अर्जुन कहता है माता को कितना बुरा लगा होगा जब उनका बलवान पुत्र रसोई में खाना पकाता हो और दोनों लड़ने लगते है सभी हंस रहे है लेकिन कोई नहीं जानता की महल पिघल रहा है |
हस्तिनापुर में, भीष्म निकल चूका है और यही बात दुह्शासन दुर्योधन और शकुनी को बताता है | दुर्योधन परेशान होकर कहता है उन्हें कैसे पता वारणावत के षड्यंत्र के बारे में |
तीसरा भाग
शकुनी कहता है अगर भरे पुए पात्र में एक भी छेद होतो पात्र खाली हो जाता है और उनकी योजना में वह छेद कर्ण था| दुर्योधन कहता है पर उसे कर्ण पर यकीन है | शकुनी कहता है यकिन तो उसे भी है पर कर्ण के मन में दर्द उसके मुख पर दिख गया होगा वह मन से धर्म कर विरुद्ध नहीं है | शकुनी कहता है चिंता की बात नहीं भवन आज ही जला दिया जायेगा | दुशासन कहता है अगर सन्देश का ढोल बजा तो भीष्म को भी पता चल जायेगा | शकुनी कहता है उसे हस्तिनापुर के ढोल पीटकर संदेश भेजने की प्रथा कभी ठीक नहीं लगी और वो अपने संदेश वाहक को बुलाता है जिसका नाम शुक्र है और वो एक चील है उसके कहता है कि उसे जल्द ही वारणावत पहुंचना होगा | शुक्र भीष्म से पहले वारणावत पहुँचता है |
precap: पुरोचन को संदेश मिलता है वो अपनी पत्नी को कहता है कि उन्हें आज भी भवन को आग लगाना होगा | दूसरी तरफ अर्जुन को पता चल गया है और वो भाइयों को कहता है कि यह भवन ईट का नहीं लाख का बना है उन्हें यहाँ जिन्दा जला देने का षडयन्त्र रचा गया है |
याद रखने योग्य : अधीरथ भीष्म का सारथी है और कर्ण को पालने वाला पिता |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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