ताज़ा खबर

Mahabharat 2 December 2013 Episode 56 Update

Z5F_mahabharat1

पहला भाग,

Episode start होता है धृतराष्ट्र के उद्बोधन से, जिसमे वह महामंत्री विदुर को, अर्जुन के अपराध के लिए उसे उचित दंड देने का आदेष देता है | विदुर मौन खड़ा है,तभी दुर्योधन पुनह धृतराष्ट्र के सम्वाद दौहरता है और विदुर से दंड देने को कहता है | विदुर कहता है कि अर्जुन से अवश्य ही भूल हुई है, भूल के लिए अगर अंगराज कर्ण, अर्जुन को क्षमा करदे, तो दंड का कोई प्रश्न ही नहीं होगा | तभी शकुनी कहता है कि अपराध, अपराध होता है जिसका दंड मिलना चाहिए | तभी दुर्योधन कहता है अंगराज अवश्य ही अर्जुन को माफ़ करेंगे अगर अर्जुन, कर्ण के पैर धोकर उनसे माफ़ी मांगे | महामंत्री अर्जुन से कहते है कि वो माफ़ी मांगे अगर अंगराज कर्ण को इससे संतोष मिलता है तो | दुर्योधन, कर्ण को ईशारा करता है कि वो यह करवाए और ना चाहते हुए भी कर्ण हाँ कह देता है | इस तरह अर्जुन की तकलीफ देख कुन्ती, भीष्म,विदुर और पांडव बहुत दुखी है | शकुनी और कोरव बहुत प्रसन्न है | अर्जुन जल से अंगराज के पैर धोता है |

दूसरा भाग,

अर्जुन, कर्ण से हाथ जोडकर क्षमा मांगता है और कर्ण खड़ा हो कर चला जाता है | धृतराष्ट्र संजय से बिना भोजन किये कक्ष में वापस जाने का बोलता है पर जाने से पहले वो बोलता है कि काल प्रातः वह राज्यसभा में युवराज के नाम की घोषणा करेगा|

तीसरा भाग,

पांचो पांडव बहुत गुस्से में अपने कक्ष में आते है और नकुल कहता है कि जब कोरव अर्जुन को स्पर्धा में नहीं हरा पाए तो उसे इस तरह अपमानित कर रहे है और अवश्य ही कल की सभा में दुर्योधन का नाम युवराज के लिए घोषित होगा इसलिए आज पांडवो को अपमानित किया गया ताकि कल वो अपना पक्ष न रख सके | तभी युधिष्टिर पूछता है किस तरह का पक्ष रखना है सभा में | तभी नकुल कहता है युवराज पद के लिए युधिष्टिर का नाम होना चाहिए | युधिष्टिर अपने भाइयों को समझता है जिस तरह इन्द्र का आदेष पुरे ब्रह्माण को मानना पड़ता है ,उसी तरह धरती पर राजा जो कहे, वो स्वीकार करना पड़ता है | भीम कहता है कि किसी कारण से कुछ समय के लिए बने राजा को हमेशा निर्णय लेने की स्वतंत्रता नहीं होती | युधिष्टिर समझाता है धरती पर राजा कुछ समय के लिए ही होता है इन्द्र की तरह अमर नहीं होता इसलिए जब जो राजा है उसकी बात माननी ही होती है | भीम कहता है तो ठीक है पांडव भी अपना हक़ युद्ध करके जीत ही लेंगे | युधिष्टिर भीम से पूछता है कि वह किससे युद्ध करने की बात कर रहा है क्या वह अपनो से युद्ध करेगा |

कुन्ती, अर्जुन और कर्ण के बीच हुए इस विवाद से दुखी है |प्रियम्वदा उसे समझाती है, दुखी होने से कुछ नहीं होगा, वो दोनों नहीं जानते कि वो भाई है, वो तो एक दुसरे को शत्रु मानते है | और एक वक्त बाद अर्जुन अपने अपमान का बदला ले ही लेगा | कुन्ती कहती है कि यह सब वो कैसे देखेगी, अर्जुन और कर्ण दोनो उसकी सन्तान है | और कुन्ती सोचती है उसे अर्जुन को कर्ण से बदला लेने के विचार से पहले ही उसे समझाना होगा | तभी अर्जुन वहाँ आजाता है और कुन्ती से क्षमा मांगता है उसके कारण कुन्ती के आँखों से आंसू बहे | वो भूल गया था कि कुन्ती ने उसे हमेशा कहा है कि धेर्यता खोने से शक्ति कम हो जाती है और आज उसने वही किया जिससे कुन्ती दुखी है | कुन्ती हँसकर उसे समझाती है कि वो अब ठीक है और अर्जुन को दुखी होने की जरुरत नहीं है |

Karnika

Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
Karnika

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *