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Mahabharat 20th December 2013 Episode 70 Update

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पहला भाग
कृष्ण ने अर्जुन से कहा कि वो रुक्मणी से जाकर कहे कि कृष्ण उसका पार्वती जी के मंदिर में उस इंतजार कर रहा है अर्जुन,वृहन्लला के रूप में कक्ष की तरफ जाता है जहाँ द्वारपाल उसे रोककर पूछता है वो कौन है उसे क्या काम है | अर्जुन कहता है उसके पास दर्वासा ऋषि का प्रशाद है जो उसे राजकुमारी रुक्मणी को देना है द्वारपाल मना कर देता है तब अर्जुन कहता है इस प्रशाद में बहुत शक्ति है, इसे जो भी खाता है, उनका विवाह हो जाता है अगर उसे अंदर नहीं जाने दिया तो वो स्वयम पी लेगी और उसका विवाह शिशुपाल से हो जायेगा | अर्जुन अंदर प्रवेश करता है |

कक्ष में रुक्मी,रुक्मणी को समझा रहा है कि कल उसका विवाह है और वो अब तक विवाह के लिए तैयार नहीं अगर वो कल विवाह नहीं करेगी तो क्या होगा ,क्या वह यह जानती है ? रुक्मणी जवाब देती है विवाह नहीं होगा तो शिशुपाल का दिल टूट जायेगा | उसके इस तरह के व्यवहार को देख रुक्मी कहता है उसके कारण पिता का सिर झुक जायेगा,जलासंद से बैर होगा मगध से कौन रक्षा करेगा | रुक्मणी कहती है कृष्ण रक्षा करेगा | रुक्मी गुस्सा होकर कहता है वो उस ग्वाले का नाम भी सुनना नहीं चाहता और रुकमनी अपने विचारों पर नियंत्रण रखे | रुक्मणी कहती है नदी की धारा पर तो बांध बन सकता है पर वर्षा की धारा पर कोई बाँध नहीं बनता कृष्ण तो उसके जीवन के हर कोने में बसे है वो जहाँ भी जाएगी वहां कृष्ण ही है | रुक्मी आदेष देता है कि रुक्मणी इस कक्ष के बाहर नहीं जाएगी वो केवल विवाह के मंडप में जाने के लिए ही बाहर निकलेगी |

अर्जुन यह सब देख रहा था रुक्मी के जाने के बाद वो रुक्मणी के हाथों में रखे मौर पंख को देख कर कहता है कि यह पंख वास्तव में इतना सुन्दर है उसे तो लगा था कि माधव के मस्तक पर ही यह सुन्दर लगता है | रुक्मणी उसकी तरफ देखकर उससे पूछती है कि वो कौन है ? अर्जुन कहता है इस प्रश्न का कोई मायना नहीं वो बस इतना जान ले कि कृष्ण मंदिर में उसका इंतजार कर रहे है | यह सुनकर रुक्मणी भावुक हो जाती है उसकी आँखों में प्रसन्नता के आंसू है | वो दोनों मंदिर जाने के लिए निकलते ही है कि रुक्मी आजाता है |
दूसरा भाग
रुक्मी पूछता है कि वो कहाँ जा रहे है अर्जुन कहता है दर्वासा ऋषि ने कहा था कि यह प्रशाद राजकुमारी को माता के मंदिर में ही देना उन्हें पता था कि राजकुमारी विवाह के लिए तैयार नहीं है इसलिए यह प्रसाद दिया इसे पीते ही राजकुमारी तैयार हो जाएँगी | रुक्मी कहता है वो भी साथ चलेगा | रुक्मनी कहती है उसे नहीं जाना ताकि रुक्मी को उस पर शक न हो | रुक्मी उसे बल पूर्वक चलने को कहता है | अब वह सभी मंदिर के लिए भवन से निकल रहे है तभी एक मक्खी अर्जुन को बहुत परेशान करती है |
तीसरा भाग
मक्खी के कारण अर्जुन को छींक आजाती है और उसके नकली बाल निकल जाते है जिससे उसे देख दासी जोर से चिल्लाती है | सबको पता चल जाता है कि यह वृहन्लला नारी नहीं नर है | रुक्मी उसे पकड़ने उसकी तरफ भागता है लेकिन अर्जुन उसे धक्का देकर रुक्मणी को लेकर भाग जाता है | रुक्मी सेना सहित उनके पीछे है | अर्जुन कहता है रुक्मणी मंदिर में जाये वो इन सबका निवारण करके आता है |
रुक्मणी माता के मंदिर में बड़ी आतुरता से कृष्ण को ढुढ रही है,उसके ना मिलने पर वो माता के सामने आकर हाथ जोड़कर खड़ी है ,तभी वहाँ कृष्ण का आगमन होता है|
याद रखने योग्य बाते : रुक्मणी का अपहरण करके कृष्ण ने उससे विवाह किया था और शिशुपाल से उनका बैर था |

Karnika

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कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
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