ताज़ा खबर

Mahabharat 21 th January 2014 Episode 91 Update

Arjun-and-Draupadi-in-Mahabharat


first scene
कृष्ण की बातों को सुनकर ध्रुपद और द्रोण मौन है | ध्रुपद को सब याद आता है कि उसने किस तरह भरी सभा में द्रोण का अपमान किया था | ध्रुपद कहता है उसने अपना सारा जीवन व्यर्थ ही प्रतिशोध में बिता दिया द्रोण तो केवल गाय मांगने आया था लेकिन उसके अभिमान के कारण उसके राज्य का विभाजन हो गया तभी द्रोण कहता है वह ध्रुपद को उसका राज्य लौटा देगा | लेकिन, ध्रुपद मना करते हुए कहता है कि यह उसकी करनी का फल है उसके द्वारा किये गए अधर्म का दंड मिला है उसे | और उसे दुःख है कि उसके पुत्र दृष्ट्द्युम का जन्म द्रोण को मारने के लिए हुआ है लेकिन यह विधी का विधान है और मृत्यु तो सबकी एक दिन होनी है | द्रोण कहता है कि उसे इस बात की ख़ुशी है कि अब दृष्ट्द्युम उसे किसी क्रोध के लिए नही बल्कि किसी विशेष उद्देश्य हेतु उसे मारेगा | यह सुनकर कृष्ण मुस्कुरा रहे है और द्रोण को कहते है कि वह दृष्ट्द्युम को अपना शिष्य बनाये , दृष्ट्द्युम द्रोण को प्रणाम करता है और द्रोण कृष्ण की बात मान लेते है और कृष्ण से कहते है कि अब उसे समझ आया कि उसे कृष्ण ने क्यूँ बुलाया और अब तक उसने केवल कृष्ण के बारे में सुना था और आज उनकी महत्ता को देख भी लिया |ध्रुपद कहता है कि बस वही कृष्ण को पहचान नहीं पाया कृष्ण कहता है अगर ध्रुपद ने उसकी बेटी को जाना होता तो उसे कृष्ण को जानने में कोई परेशानी नहीं होती और उसने हमेशा ही अपनी पुत्रियों को अभिशाप समझा |
दूसरी तरफ द्रोपदी जा रही है उसे शिखंडिनी रोकती है और कहती है द्रोपदी को ध्रुपद से क्षमा मागनी चाहिए लेकिन द्रोपदी मना कर देती है कहती है उसे नगर से निकाला गया है उसे जाना होगा | शिखंडिनी कहती है कि सन्तान को पिता के नाम से जाना जाता है इसलिए वह भी अभिमान को आगे ना आने दे | द्रोपदी कहती है यह अभिमान नहीं स्वाभिमान है और वह अपने जीवन के मकसद को जानना चाहती है |
second scene
राज्य सभा में ध्रुपद ऐलान करता है कि वह द्रोपदी के लिए शोभा यात्रा निकलवायेगा और पूरी विधी के साथ द्रोपदी का राज्यसभा में स्वागत करवाएगा | शिखंडिनी आकर कहती है कि द्रोपदी नगर से जा रही है यह सुन ध्रुपद दुखी होकर कहता है उसकी पुत्री द्रोपदी ऐसा नहीं कर सकती वह नहीं जानती कि उसका मन बदल चूका है अब वह खुद जायेगा और उसे मना कर लायेगा तभी कृष्ण कहते है कि यह काम वह करेगा और कृष्ण द्रोपदी से मिलने जाते है | द्रोपदी ऊंचे पहाड़ पर खड़ी होकर कुछ सोच रही है तभी कृष्ण वहां आकर उसे पूछते है कि द्रोपदी ने कोनसा मंत्र पढा जिससे उसका वार निष्फल हो गया | द्रोपदी कहती है वह कोई मन्त्र नहीं जानती | कृष्ण फिर भी पूछते है पर द्रोपदी कहती है उसने बस अपने पिता की जान बचाई यह सुन कृष्ण कहते है इसका मतलब उसने प्रेम का मन्त्र पढ़ा अब उसे कोई भय नहीं है यह मन्त्र जानते सभी है पर उसका कोई उपयोग नहीं करता और अब अगर द्रोपदी पहाड़ से कूदना चाहे तो कूद सकती है तब द्रोपदी कहती है उसे कूदना नहीं है उसे तो कुछ सवालों के जवाब चाहिए |
Third Scene:
कृष्ण पूछते है कैसे सवाल ? द्रोपदी कहती है वह जानना चाहती है उसके पिता कब और कैसे उसे अपना पाएंगे उसे किस तरह सम्मान मिलेगा | कृष्ण कहते है इतने सवाल वो भी सभी व्यर्थ सवाल होना था कि द्रोपदी कौन है ? द्रोपदी पूछती है कि वह कौन है | कृष्ण कहते है संसार में सभी खुद के बारे में दुसरो से जानना चाहते है कृष्ण उसे कहते है कि उसका जन्म उद्देश से हुआ है देवताओं की वाणी है कि उसके कारण ही विश्व में धर्म की स्थपाना होगी |
याद रखने योग्य : दृष्ट्द्युम के हाथो ही द्रोण का वध होगा |

Karnika

Karnika

कर्णिका दीपावली की एडिटर हैं इनकी रूचि हिंदी भाषा में हैं| यह दीपावली के लिए बहुत से विषयों पर लिखती हैं |यह दीपावली की SEO एक्सपर्ट हैं,इनके प्रयासों के कारण दीपावली एक सफल हिंदी वेबसाइट बनी हैं
Karnika

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *